लहसुनिया के नुकसान – Lahsuniya Ke Nuksan

लहसुनिया के नुकसान – Lahsuniya Ke Nuksan

 

लहसुनिया के नुकसान –

लहसुनिया रत्न के नुकसान बहुत घातक हो सकते हैं, एवं बहुत विध्वंसक हो सकते हैं, बिना सोचे समझे या बिना अपनी लग्न कुंडली की विशिष्ट विवरण के आधार पर बहुत से लोगों के द्वारा केवल सुनी सुनाई बातों में आकर लोग इस रत्न को धारण कर लेते हैं, जबकि किसी भी रत्न को धारण करने से पूर्व यह जानना बहुत आवश्यक है, कि आप के लिए कौन सा विशिष्ट एवं सबसे उपयुक्त रत्न है, या किस ग्रह की कृपा आपके कुंडली के अनुसार आपके ऊपर बहुत अधिक है, और कौन सा ग्रह आपके लग्न कुंडली में सुप्त अवस्था या निष्क्रिय अवस्था में स्थित है।

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केतु का महत्व अध्यात्म में बहुत अधिक माना जाता हैl यह हमारे मन में भौतिक चीजों के प्रति वैराग्य जैसी भावना उत्पन्न करता है, तथा वास्तविक जिंदगी से हमें पूरी तरह से एकांतवास की ओर अग्रषित करता है, वैसे केतु को शनि ग्रह की तरह ही क्रूर होने की उपाधि प्राप्त है, तथा यह भी उन्हीं के समान एक छाया ग्रह है, किंतु पूरी सृष्टि पर तथा मानव जाति पर इसके व्यापक एवं विस्तृत प्रभाव को देखते हुए इसे ग्रह की उपाधि से अलंकृत किया गया है, इनकी सवारी चील होती है, किसी भी व्यक्ति में गुप्त एवं गुण ज्ञान का निर्धारण केतु के द्वारा ही किया जाता है।

केतु ग्रह यदि किसी व्यक्ति पर प्रसन्न हो जाए तो उसे धन संबंधित चीजों या किसी भी प्रकार की भौतिक सुख की कमी नहीं होने देता है, किंतु यदि अपना दुष्प्रभाव दिखाएं तो जातक ऐसी परिस्थितियों से गुजर में लगता है जिसका वर्णन शब्दों में करना नामुमकिन है, उसे विचित्र चीजें दिखाई देने लगती है, विचित्र अनुभव होने लगता है, जिस पर शायद आधुनिक विज्ञान भरोसा ना करें एवं लोगों की नजर में वह केवल एक पागल के समान ही रहता है, उसके क्रियाकलाप को देखकर लोग उसे पागल कह कर ही संबोधित करते हैं, जिससे व्यक्ति दिन प्रतिदिन और अधिक एकांतवास में चला जाता है, अपने हो या पर आए सभी से बस खुद को हर स्तर पर चाहे वह भावनात्मक स्तर हो या सामाजिक स्तर हो या आर्थिक स्तर हो हर ओर से वह खुद को बहुत अकेला महसूस करता है, इसकी कुदृष्टि की वजह से उसे ऐसे ऐसे अनुभव होते हैं, जिस पर लोगों का यकीन करना बहुत मुश्किल होता है।

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पारलौकिक शक्तियों का आभास उस इंसान को होना बहुत आम बात हो जाता है, तथा उसे हर वक्त ऐसा लगता है, जैसे उसके इर्द-गिर्द कोई है, या कोई उसे संपर्क करना चाहता है या कोई हर वक्त उस पर अपनी नजर बनाए हुए हैं, यह सारे कर्मकांड केतु की तथा उसके साथी राहु के कुदृष्टि से ही होता हैl हमारे शरीर का अग्नि तत्व की प्रधानता का निरूपण भी केतु के द्वारा ही निर्धारित किया जाता हैl अंतर्दृष्टि कल्पना शक्ति विक्षोभ या अन्य मानसिक गुणों का कारक केतु ग्रह को माना जाता है।

रत्न शास्त्र बहुत ही प्राचीन विज्ञान है, जिसका प्रयोग हमारे पूर्वजों द्वारा न जाने कितने हजारों वर्षों से किया जाता रहा है इसके माध्यम से राजा हो या कोई भी आम जनता सभी के परेशानियों का निवारण किया जाता था lआज भी हमारे पूर्वजों के द्वारा दी गई इस पद्धति को हमारे देश में बहुत ही व्यापक स्तर में प्रयोग में लाया जाता है, तथा जिसका उपयोग कर लोग अपने जीवन को संवारने में भरोसा रखते हैंl कभी-कभी जातक को इसके विध्वंसक परिणाम भी देखने को मिलते हैं, जब वह विपरीत ग्रहों के रत्नों को धारण कर लेता है।

बिना जानकारी के एवं अपनी लग्न कुंडली में स्थित ग्रहों के भाव को जाने इस रत्न को धारण करने से निम्नलिखित नुकसान हो सकते हैं-

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1. जातक को अचानक ही नेत्र संबंधित विकार उत्पन्न होने लगेंगे, इसके साथ-साथ उसे श्वसन प्रणाली में भी दिक्कत होने लगेगीl दिल से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाएंगे अचानक से उसके धड़कन अधिक तेज चलने लगेंगी जिससे आए दिन उसे कुछ न कुछ बीमारियां होती रहेंगी।

2. जातक विभिन्न प्रकार के उलझनों में उलझा रहेगा एवं मानसिक उलझन में खोकर अपना ही नुकसान कर बैठेगा, बिना मतलब के भ्रम में उसका जीवन व्यतीत होने लगेगा तथा वास्तविकता से वह धीरे धीरे कोसों दूर चला जाएगा।

3. अचानक से उसके जीवन में बहुत बड़ी आकस्मिक घटनाएं घटने लगेगी, जिससे उसको संभलने का मौका नहीं मिलेगा, चाहे वह किसी भी क्षेत्र से संबंधित हो या तो पारिवारिक चीजों में आकस्मिक घटनाएं घटेगी, जिससे जातक पूरी तरह से टूट जाएगा या फिर ऐसा हो सकता है, कि उसे कार्य संबंधित कोई इतनी बड़ी क्षति हो जाए जिसकी कल्पना शायद उसने सपने में भी ना की हो, जिसकी वजह से वह गहरी अवसाद जैसी अवस्था में जा सकता है।

4. आकस्मिक दुर्घटनाओं का शिकार हुआ हो सकता है, जिसमें उसे शारीरिक तथा मानसिक रूप से गहरी चोट लग सकती हैl उसका कोई अंग हो सकता है, विकृत हो जाए ऐसी परिस्थिति में।

5. इस रत्न के दुष्प्रभाव से जातक को ऐसी बीमारियां भी हो सकती है, जिसका पता उसे बहुत देर से लगे उसमें से एक है, कैंसर एवं हो सकता है, वह किसी प्रकार के गुप्त रोग का भी शिकार हो जाए।

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6. जातक के स्वभाव में अचानक से बहुत अधिक बदलाव आने लगता हैl वह छोटी-छोटी बातों को लेकर बहुत घबरा जाता है, तथा अनायास ही भविष्य की चिंता में अपने वर्तमान को चिता की तरफ जलाता रहता हैl ऐसी ऐसी कल्पनाओं में खोया रहता है, जिसका वास्तविकता से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं रहता है, तथा कल्पनाओं को वास्तविकता मानकर लोगों से मनमुटाव झगड़े या उसके संबंध धीरे धीरे कर अपने हो या पराए सभी से टूटने लगते हैं।

7. इस रत्न के दुष्प्रभाव से उसे हर चीज निरस लगने लगती है, जिसकी वजह से वह अपने कर्मों से विमुख हो जाता है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति भी चरमरा जाती है lइसके साथ-साथ उसकी सामाजिक स्थिति भी धीरे-धीरे कर नष्ट होने लगती है, उसका पद प्रतिष्ठा आदि भी धीरे-धीरे कर समाप्त होने लगता है।

8. केतु के दुष्प्रभाव को और अधिक यह रत्न गहरा कर देता है, जिसकी वजह से जातक टोने टोटके नजर दोष संबंधित चीजों से गुजरने लगता है lउस पर इन सभी चीजों का बहुत गहरा प्रभाव पड़ने लगता है, जिससे वह पूरी तरह से क्षत-विक्षत हो जाता हैl उसके जीवन से परेशानियां जाने के बजाय दिन प्रतिदिन और अधिक बढ़ने लगती है।

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