पुखराज पत्थर कैसा होता है – Pukhraj Pathar Kaisa Hota Hai

पुखराज पत्थर कैसा होता है – Pukhraj Pathar Kaisa Hota Hai

 

पुखराज पत्थर कैसा होता है

पुखराज पत्थर कैसा होता है, इसका वर्ण गुलाबी ,पीला, नीला, सफेद आदि कैसा होता है, आज हम इन सब विषयों पर चर्चा करेंगे

पुखराज पत्थर मुख्यता गुरु ग्रह से संबंधित एक महत्वपूर्ण रत्न होता हैl गुरु ग्रह बृहस्पति पूरे ब्रह्मांड के सबसे बड़े ग्रह के रूप में निरूपित है। देवताओं के द्वारा इन्हें गुरु की उपाधि प्राप्त है, तथा इनमें बहुत सी अलौकिक शक्तियां विद्यमान है। यह सब लोगों के लिए सम्मानीय होते हैं। चाहे देवता हो या गण हो मनुष्य हो या दानव हो। सभी इन्हें आदर भाव के सम्मान के साथ देखते हैं। यह सबके लिए बहुत आदरणीय है, यह सभी के लिए बहुत सम्माननीय होते हैं, तथा सभी इनका कृपा प्राप्त करना चाहते हैं।

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यह पारलौकिक गुणों के स्वामी होते हैं। इनकी ऊर्जा का कोई जवाब नहीं है, पुखराज रत्न भी इसी ग्रह से संबंधित होता है, तथा इसमें जी गुरु ग्रह से संबंधित विभिन्न प्रकार की शक्तियां विद्यमान होती है। इसमें बहुत से भौतिक गुण मौजूद रहते हैं, जो हमारे परेशानियों को या विभिन्न प्रकार की परिस्थितियों से हमें निकालने में सक्षम होते हैं। इस पुखराज पत्थर में गुरु ग्रह के शक्तियों को अवशोषित करने की अद्वैत क्षमता विद्यमान रहती है। यह रत्न प्राकृतिक गुणों से भरपूर रहता है, इस रत्न में पारलौकिक तथा सांसारिक गुणों का समावेशन हमें एक साथ देखने को मिलता है।

पुखराज पत्थर का रंग देखने में पीला होता है, बिल्कुल स्वर्ण के समान पीला इसका रंग देखने में बिल्कुल पीला होता है, बिल्कुल सरसों के फूलों के समान इसका रंग देखने में पीला होता है, बिल्कुल सूर्य की किरणों के समान इसका रंग देखने में बिल्कुल पीला होता है, बिल्कुल पलाश के फूलों के समान यह रत्न देखने में पीला वर्ण का होता है, इसकी मनमोहक रंग से हमारे मन को मस्तिष्क को शीतलता प्राप्त होती है। यह हमारे शरीर के एक-एक अंग को प्रफुल्लित कर देता है। इसका रंग ही इतना आनंददायक है, कि इसे देखने के पश्चात हमारी आंखों को काफी ठंडक महसूस होती है।

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पुखराज रत्न मुख्यतः और भी रंगों में पाए जाते हैं, किंतु पुखराज नाम का पत्थर मुख्यतः संबंधित होता है। गुरु ग्रह से ही इसके कुछ अन्य रंग है, गुलाबी पीला नीला सफेद आदि किंतु और सभी रंग के पुखराज पत्थर दूसरे किसी ग्रहों को निरूपित करते हैं, तथा उसमें दूसरे ग्रहों संबंधित विभिन्न प्रकार की शक्तियों का वास होता है। यह रत्न गुरु ग्रह के प्रभाव को हमारे कुंडली में हमारे जीवन पर बहुत अधिक बढ़ा देता है।

पूरे विश्व में सबसे अधिक उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले पुखराज रत्न ब्राजील तथा म्यानमार में पाया जाता है, वैसे विश्व के और भी देशों में इस रत्न के खदान अवस्थित हैं, जैसे -जापान, श्रीलंका ,ब्राज़ील, भारत आदि किंतु भारत में पाए जाने वाले पुखराज पत्थर की गुणवत्ता इतनी उत्कृष्ट नहीं होती हैl उसमें कुछ भौतिक गुणों में त्रुटि होती है, जिसकी वजह से वह उतना लोकप्रिय नहीं है जितना होना चाहिए।

पुखराज रत्न को रत्नों का राजा कहकर अलंकृत किया जाता है। यह पत्थर इतना गुणि होता ही है, कि इसलिए यह एक लोकप्रिय रत्न है, इसे विश्व प्रसिद्ध भी हासिल है चाहे पाश्चात्य ज्योतिष विज्ञान हो या भारतीय वैदिक ज्योतिष विज्ञान हर जगह इस पत्थर को बहुत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है किंतु आजकल के जमाने में शुद्ध पुखराज रत्न मिलना थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि पहला कारण यह है कि यह रत्न बहुत महंगा मिलता है, जिसकी पहुंच हर किसी के बस की बात नहीं होती है दूसरी बात यह भी है कि आजकल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की उन्नति ने बहुत बड़े स्तर तक पूरी दुनिया में बदलाव ला दिया है।

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आज जब मानव के क्लोन बन सकते हैं, तो स्टोन के जैसे दूसरे स्टोन बनाने में कितना वक्त लगता है, इसलिए आजकल कृत्रिम रूप से निर्मित पुखराज रत्न की भरमार बाजारों में हो गई है, जिसकी वजह से यदि किसी के द्वारा यह रत्न धारण भी किया जाता है, तो संशय बना रहता है, कि वह कार्य करेगा कि नहीं करेगा अच्छे खासे रकम देने के बाद भी आपको वह लाभ प्राप्त नहीं होता हैl जो लाभ आपको प्राप्त होना चाहिए इसलिए निम्नलिखित कुछ मापदंडों को अपनाकर आप यह जान सकते हैं, कि यदि आपके द्वारा कभी भी पुखराज रत्न खरीदा गया है, या जाने वाला है, या होगा तो आप एक प्राकृतिक रूप से निर्मित पुखराज रत्न लेने में सक्षम हो पाएंगे अन्यथा आप भी कृतिम रूप से निर्मित पुखराज रत्न लाएंगे तथा दोष रत्न को ही देंगे कि आपके जीवन में कुछ भी अच्छा या बुरा प्रभाव इस रत्न को धारण करने से नहीं पड़ा है, तो आइए जानते हैं किन प्रमाणों से हम जान सकते हैं कि पुखराज रत्न असली है, या नकली है-

1. प्राकृतिक रूप से निर्मित पुखराज रत्न भले ही देखने में छोटा लगे किंतु उसका वजन अधिक होता है, जबकि इसके विपरीत कृत्रिम रूप से निर्मित पुखराज रत्न देखने में बड़ा लगेगा किंतु उसका वजन बहुत कम होगा जब आप एक साथ इन दोनों को वजन करेंगे तो देखेंगे कि दोनों के वजन में काफी अंतर है।

2. जब आप प्राकृतिक रूप से निर्मित पुखराज पत्थर को मिट्टी से या गोबर से लेप लगाकर उसको हल्के हाथों से लगाएंगे तो देखेंगे कि उसकी चमक और अधिक बढ़ गई है lउसमें कोई अंतर नहीं आया है, जबकि कृत्रिम रूप से निर्मित पुखराज पत्थर को जब आप मिट्टी या गोबर से लेप लगाकर देखेंगे तो पाएंगे कि उसका रंग हल्का हो गया है, एवं वह पद रंग सा हो गया है, तथा उसमें विभिन्न प्रकार की दरारे आधी पड़ने लग गई हैं।

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3. प्राकृतिक रूप से निर्मित पन्ना रत्न को जब आप ताप पर रखेंगे तो देखेंगे कि उस की चमक और आकर्षक लगने लगी है। उसमें किसी तरह का कोई भी त्रुटि नहीं हुआ या फिर उसे किसी भी प्रकार से क्षति नहीं पहुंचा है, जबकि इसके विपरीत यदि किसी कृतिम रत्न को ताप पर रखेंगे तो देखेंगे की उसमें दरारें आ गई हैं, या वह चटक सा जाएगा या आप किसी चीज से उसमें कोई चिन्ह बनाने में सक्षम हो पाएंगे।

4. कच्ची हल्दी का लेप जब आप इस पर लगाएंगे तो आप देखेंगे कि इसका रंग पीला से लाल हो गया है, किंतु यदि यह एक कृत्रिम रूप से निर्मित रत्न हुआ तो उसका रंग कभी बिलाल नहीं होगा।

अगर आप भी अभिमंत्रित किया हुआ पुखराज पत्थर प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारे पंडित जी द्वारा अभिमंत्रित किया हुआ पुखराज पत्थर मात्र – 300₹ और 600₹ रत्ती मिल जायेगा जिसका आपको लैब सार्टिफिकेट और गारंटी के साथ में दिया जायेगा (Delevery Charges free) Call and WhatsApp on- 7567233021

 

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