माणिक रत्न किसे कहते हैं – Manik Ratna Kise Kahte Hai

माणिक रत्न किसे कहते हैं – Manik Ratna Kise Kahte Hai

 

माणिक रत्न किसे कहते हैं

माणिक रत्न किसे कहते हैं, लोगों के मन में यह संशय तब सबसे अधिक उत्पन्न होने लगता है,
जब वे विभिन्न प्रकार के रत्नों के बारे में तो सुनते ही है, इसके साथ-साथ जब इस अविश्वसनीय रत्न माणिक्य के चमत्कारिक गुणों एवं दिव्य शक्तियों के बारे में किसी के मुख से सुनकर इनकी भी इच्छा यह जानने की होती है, कि आखिर माणिक रत्न किसे कहते हैं, तथा इससे जुड़ी हुई सूक्ष्म से सूक्ष्म विवरण को भी वे लोग जानने को बहुत आतुर होते हैं, जिससे इसका अनुकूल प्रभाव अपने जीवन पर भी प्राप्त कर सकें तथा यह जान सके कि इसके विभिन्न शक्तियों को हम कैसे पा सकते हैंl इसकी सकारात्मक ऊर्जा का पुंज हम खुद के अंदर कैसे स्थापित कर सकते हैं।

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माणिक एक गुलाबी वर्ण का रत्न होता है, इसका रंग रक्त के समान लाल भी हो सकता है, इसका रंग कमल फूल के रंगों के समान या इसका रंग गुलाब की पंखुड़ियों के समान भी हो सकता है, इसका संयोजक अल्मुनियम ऑक्साइड ,लौह तत्व के साथ-साथ क्रोमियम जैसे तत्व भी होते हैं, जिसकी वजह से इसका रंग निर्धारित किया जाता है। इसमें प्राकृतिक रूप से मौजूद अशुद्धियां इसके गहरे रंग होने या फिर हल्के रंग होने का कारण होती है lयह रत्न बाकी रत्नों के जैसे ही विभिन्न प्रकार के चट्टानों के रूपांतरण या विभिन्न प्रकार के चट्टान जब उच्च तापमान तथा उच्च ताप से गुजरते हैं, तब वे रत्न में परिवर्तित हो जाते हैं। कभी-कभी ऐसा भी होता है, कि ज्वालामुखी के दरारों से भी हमें रत्न प्राप्त होते हैं, या कोयले की खदानों से भी बेशकीमती बहुमूल्य रत्न प्राप्त होते हैंl यह रत्न देखने में बहुत आकर्षक एवं मनमोहक होता है, इसकी गुलाबी रंग की आभा मन मस्तिष्क पर गहरी प्रभाव तो छोड़ती ही है, इसके साथ-साथ मन- मस्तिष्क को शांति एवं शीतलता प्रदान करती है।

माणिक रत्न सृष्टि के पालनहार सृष्टि के सबसे बड़े ऊर्जा के स्रोत सूर्य देव को समर्पित है। सूर्य देव जिन्हें ग्रहों का राजा से अलंकृत किया जाता है, एवं इन्हें पूरे ब्रह्मांड का पिता तुल्य माना जाता हैl सृष्टि के जीवन का आधार सूर्य देव के प्रकाश पर ही निर्भर होता हैl सूर्य देव के ही कृपा से पृथ्वी पर जीवन की संभावना यथावत इतने ही हजार वर्षों से व्याप्त है, इनकी किरणें ही पृथ्वी पर जीवन की संरचना का आधार हैl विश्व के विभिन्न देशों में माणिक रत्न के खदान पाए जाते हैं। विभिन्न देशों में पाए जाने वाले माणिक्य रत्न के वर्ण में आपको थोड़ा फर्क लग सकता है, इसके साथ-साथ इसकी उपयोगिता भी प्रत्येक जगह पर अलग-अलग बताई गई है, जिसकी वजह से यह एक लोकप्रिय रत्न के रूप में जाना जाता है, हीरे के बाद सबसे कठोरतम तत्व में माणिक रत्न को ही माना जाता है।

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प्रतिस्पर्धा की दौड़ में हर कोई आगे बढ़ना चाहता है lहर कोई चाहता है, कि कम समय में अधिक मुनाफा कमाया जाए या फिर वह जल्द से जल्द किसी भी क्षेत्र में अपना नाम बना ले, सफलता की ऊंचाइयों को प्राप्त कर ले, ऐसी स्थिति में बहुत से लोगों के द्वारा यह रत्ना अपनी सफलता की संभावना को बढ़ाने के लिए धारण किया जाता है lइस रत्न का उपयोग सूर्य ग्रह से संबंधित विपरीत परिणामों को अनुकूल परिणामों में परिवर्तित करने के लिए धारण किया जाता है lबहुत से ऐसे जातक होते हैं, जिन्हें नौकरी पेशा में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में यह रत्न हमारे सौभाग्य को बढ़ाता है, तथा नौकरी पेशा संबंधित चीजों में सफलता दिलाता है, इसके साथ ही हमारे जीवन में हमारे संबंधों को ठीक करता है।

यह रत्न समाज में ख्याति प्रसिद्धि पाने में बहुत सहयोग करता है। निरोगी काया प्राप्त करने के साथ-साथ यह रत्न हमें विभिन्न प्रकार के बीमारियों जैसे नेत्र विकार हड्डी से संबंधित बीमारियां में बहुत लाभ पहुंचाता है, तथा हमें रोग मुक्त कर एक स्वस्थ काया प्रदान करता हैl यह रत्न आपके नेतृत्व क्षमता को बढ़ाता है, इसके साथ- साथ यह आपको मानसिक तौर पर भी बहुत मजबूत बनाता है, तथा आपके पिता के साथ संबंध अच्छे स्थापित करने में भी यह रत्न मदद करता हैl यह रत्न आपको मेहनती बनाता है, यह रत्न आपको कर्मठ होना सिखाता है, तथा अपने कार्यों का निर्वहन कैसे किया जाए एवं अपने कार्यों में कैसे सफलता प्राप्त किया जाए।

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यह सभी प्रकार की अविश्वसनीय कौशलों का निर्माण आपके अंदर यह रत्न उत्पन्न करता है। कैरियर संबंधित चीजों में सूर्य ग्रह का बहुत बड़ा योगदान रहता है। यदि सूर्य ग्रह किसी की लग्न कुंडली में मजबूत ना हो तो ऐसे जातक को कैरियर संबंधित नौकरी -पेशा संबंधित आजीविका संबंधित बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता हैl उसे बार-बार असफलता का मुंह देखना पड़ता है, ऐसी परिस्थिति में सूर्य ग्रह को मजबूत करने तथा उसकी कृपा प्राप्त करने के लिए यह रत्न धारण किया जाता है, जिससे जातक के जीवन में कैरियर संबंधित चीजों में उसे सफलता प्राप्त हो एवं नौकरी पेशा संबंधित चीजों में उसे जल्द से जल्द सफलता प्राप्त हो सके, जिससे उसका जीवन सफल एवं सार्थक हो जाए।

माणिक रत्न का उपर्युक्त गुणों का लाभ तभी हमें प्राप्त हो सकता है, जब हमारे द्वारा धारण किया जा रहा रत्न शुद्ध हो पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से निर्मित हो। कई लोगों के मन में यह संशय होता है कि उनके द्वारा धारण किया जा रहा माणिक रत्न नकली तो नहीं है, ऐसी परिस्थिति में वे लोग उपरत्न धारण करते हैं, जिससे उनके विशिष्ट कार्यों की पूर्ति हो सकेl उपरत्न भी अपना प्रभाव अच्छा दिखाते हैं, इनमें भी सकारात्मक ऊर्जा का निवास होता है, किंतु उपरत्न केवल कुछ ही समय तक कार्य करते हैं, क्योंकि उनकी ऊर्जा का क्षरण बहुत जल्द हो जाता है, जबकि रत्न की ऊर्जा या उसकी शक्ति धीरे-धीरे समाप्त होती है, जिसकी वजह से रत्नों का उपयोग हम कई वर्षों तक कर सकते हैं, तथा जब भी हम कोई रत्न का उपरत्न धारण करते हैं।

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यदि उसमें किसी भी प्रकार से कोई त्रुटि आ जाती है, तो वह हमारे जीवन में आने वाले संकटों को अपने ऊपर ले लेता है, तथा हमें उस बड़े संकट में फसने से बचा लेता है lअतः जब भी आप कोई रत्न धारण करें तो उस पर ध्यान अवश्य दें कि कहीं उसका रंग अचानक से हल्का तो नहीं हो गया है, या किसी प्रकार से वह टूट तो नहीं गया है, या और भी किसी प्रकार उसमें त्रुटि तो उत्पन्न नहीं हो गई है lयह सब छोटी- छोटी बातों को ध्यान में रखकर आप इन रत्नों का दिव्य चमत्कार अपने जीवन पर देख सकते हैं, एवं इसके शक्तियों का लाभ उठाकर जीवन को सुगम एवं सार्थक बना सकते हैंl सृष्टि में मौजूद यह अद्वितीय संसाधन हमारी सारी महत्वाकांक्षाओं को पूर्ण करने में सक्षम होते हैं।

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