सफेद पुखराज धारण विधि – Safed Pukhraj Dharan Vidhi

सफेद पुखराज धारण विधि – Safed Pukhraj Dharan Vidhi

 

सफेद पुखराज धारण विधि-

1. सबसे पहले आपके द्वारा धारण किया जाने वाला सफेद पुखराज रत्न असली है, या नकली इस बात की जांच अवश्य कर ले जिसके लिए आप बहुत से पैमाना या मापदंड अपना सकते हैं, अन्यथा आप जिस मनोकामना को पूर्ण करने के लिए या जिस इच्छा को मन में लिए हुए यह रत्न धारण करना चाहते हैं lवह इच्छा कभी भी पूर्ण नहीं हो पाएगी lयदि वह रत्न पूरी तरह से प्रकृति द्वारा निर्मित ना होकर कृत्रिम रूप से किसी रसायनिक अभिक्रिया के द्वारा प्रयोगशाला में निर्मित केवल एक कांच का टुकड़ा हो ऐसी स्थिति में किसी भी रत्न को धारण करने से पूर्व उसकी अच्छी तरीके से जांच करना बहुत आवश्यक होता है।

इसे भी पढ़े:- अमेरिकन डायमंड क्या है?

जिससे उस में विद्यमान जो भी भौतिक ऊर्जा है, उसका संपूर्ण लाभ उसे धारण करने के पश्चात प्राप्त हो सके, जैसे –सफेद पुखराज को यदि गाय के कच्चे दूध में कुछ घंटों के लिए या 1 दिन से ज्यादा के लिए भी डाल कर रख दिया जाए, तब भी उसकी चमक में कोई परिवर्तन देखने को नहीं मिलता है, इसके विपरीत उसकी चमक और अधिक बढ़ जाती है lवह देखने में और अधिक आकर्षक लगने लगता है। यदि असली पुखराज रत्न को ताप पर रखा जाता है, तब भी उसकी आकार में कोई बदलाव देखने को नहीं मिलता है, इसके साथ-साथ उसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि उत्पन्न नहीं होती है, वह ताप पर रखने से दरकता नहीं है, उसमें किसी भी प्रकार की कोई अवगुण दिखाई नहीं पड़ता है।

प्रकृति द्वारा निर्मित पत्थरों की गुणवत्ता होती है, कि अपने आकार की अपेक्षा उनका वजन अधिक होता है lअतः सफेद पुखराज भी अपने आकार की तुलना में वजन में अधिक होगा, इसके पीछे का कारण इसका घनत्व होता है, जब इसे लकड़ी के टुकड़े किया गोबर से रगड़ा जाता है, तब भी इस की चमक में कोई खासा प्रभाव नहीं पड़ता है lवह देखने में और अधिक सुंदर एवं प्रभावशाली हो जाता है, जब इसकी सतह को साफ कपड़े से रगड़ा जाता है, अब भी इस की चमक में कोई फर्क नहीं देखने को मिलता हैl इस रत्न की तेजस्विता कितनी भी परिस्थिति में कम नहीं होती हैl ऐसा माना जाता है कि असली पुखराज कि यह खासियत होती है, कि जब उसे किसी विषैले जीव जंतु के द्वारा दर्शित स्थान पर रगरा जाता है, तब उसका प्रभाव कम ने लगता है, जातक को राहत प्राप्त होती है।

इसे भी पढ़े:- गोमेद रत्न क्या है 

2. सफेद पुखराज को धारण करने से पहले नक्षत्रों का भी ध्यान रखना बहुत आवश्यक है, शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को यह रत्न धारण करने का सबसे उपयुक्त दिन माना जाता है।

3. कम से कम चार से पांच रत्ती का सफेद पुखराज धारण किया जाना चाहिए, इसे चांदी या सोने में मड़वा गढ़ धारण किया जा सकता है।

4. शुक्रवार को प्रातः काल स्नान आदि से निवृत्त होकर, सबसे पहले इस रत्न से बनी हुई अंगूठी को किसी जल पात्र में गंगा जल में डालकर कुछ घंटों के लिए छोड़ दें, जिससे इस में विद्यमान विभिन्न प्रकार की नकारात्मक शक्तियां पूरी तरह से नष्ट हो जाए क्योंकि रत्नों की यह खासियत होती है कि आसपास की ऊर्जा को यह अवशोषित कर लेते हैं तथा उस स्थान में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह को बढ़ा देते हैंl यही कारण है कि उन्हें धारण करने से पहले उनका शुद्धि करना बहुत आवश्यक होता है, उसके पश्चात इसे पंचामृत से धुले, पंचामृत में प्रयोग होने वाला दूध पूरी तरह से कच्चा होना चाहिए एवं गाय का ही हो इस बात का भी ध्यान अवश्य रखें।

5. उसके बाद अंगूठी को किसी साफ कपड़े से पोछ कर अपने घर के मंदिर के समक्ष रख दे उसके बाद उस पर श्वेत पुष्प आदि अर्पित करें, उसके बाद गूगल लॉन्ग एवं कपूर से उसकी आरती उतारे कुछ टुकड़े आप कपूर के अंगूठी के पास भी रख सकते हैंl जिससे उसके आसपास का वातावरण पूरी तरह से शुद्ध हो जाए।

इसे भी पढ़े:- हकीक माला के फायदे 

6. उसके बाद शुक्र ग्रह से संबंधित बीज मंत्रों का जितना हो सके उतना अधिक उच्चारण करें आप जितना अधिक उच्चारण करेंगे उतना अधिक इस रत्न की शक्तियां बढ़ेगी तथा यह और अधिक शक्तिशाली होगाl मंत्र उच्चारण करते वक्त वर्तनी का अवश्य ध्यान रखें, अन्यथा मंत्र की अशुद्ध उच्चारण आपको वह परिणाम नहीं दे पाएगी lजिसके लिए आप इतना मेहनत कर रहे हैं। यदि आप किसी भी प्रकार से स्वयं मंत्र उच्चारण करने में असमर्थ है, तो ऐसी स्थिति में किसी विद्वान पंडित का भी सहायता ले सकते हैं।

7. जब अंगूठी पूरी तरह से अभिमंत्रित हो जाए तो आप इसे किसी लक्ष्मी मां के मंदिर जाकर उनके चरणों में रख दे, यदि मां लक्ष्मी की मंदिर नहीं है, या वहां जाने में आप सक्षम है, तो आप देवी दुर्गा या देवी काली के मंदिर में भी इस रत्न को ले जाकर मां के चरणों में कुछ देर के लिए छोड़ दें, तथा मां से प्रार्थना करें कि आपके जीवन में यह रत्न खुशहाली लाएं एवं सारे संकटों को दूर करें।

8. उसके पश्चात देवी का आशीर्वाद प्राप्त करें तथा मंदिर के पुजारी का भी आशीर्वाद अवश्य लें एवं उन्हें उचित दान दक्षिणा अवश्य प्रदान करें।

9. आप चाहे तो उसी समय इस रत्न को धारण कर सकते हैं। अपनी मन में इच्छा बोलते हुए इस रत्न को धारण कर ले या आप चाहें तो इसे संध्या की बेला में जब चांद तारे दिखने लगते हैं, तब भी आप शुक्र ग्रह की स्थिति को देखते हुए इसे धारण कर सकते हैं, एवं उनसे कामना करते हुए कि जल्द से जल्द अपनी कृपा दृष्टि आप के ऊपर बरसाए ऐसी कामना करते हुए इस रत्न को पूरे खुशी मन से अपने दाएं हाथ की अनामिका उंगली में धारण करें आप चाहें तो इसे बाया हाथ की अनामिका उंगली में भी धारण कर सकते हैं।

इसे भी पढ़े:- लहसुनिया रत्न पहनने के फायदे 

10. रत्न को धारण करने के पश्चात भूलकर भी किसी से भी वाद-विवाद ना करें तथा स्त्री वर्ग से तो भूल कर भी किसी भी परिस्थिति में ना उलझे एवं अपनी पत्नी से तो बिल्कुल भी नहींl घर की स्त्रियों के लिए यदि संभव हो तो कुछ सफेद मिठाई या फिर वस्त्र या फिर इच्छा अनुसार कुछ भी जरूर उपहार स्वरूप दे एवं उनका आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें, इससे इस रत्न की शक्तियां और अधिक तीव्रता के साथ अपना प्रभाव बिखेरना आपके जीवन में शुरू करेंगी।

11. इस दिन किसी को फल या भोजन अवश्य दान करेंl अपनी स्थिति को देखते हुए आपकी जो इच्छा हो वह चीज आप बात कर सकते हैं, किंतु यदि सफेद मिठाइयों का दान किया जाए तो यह और भी उत्तम माना जाता है, या आप दूध के पैकेट भी दान कर सकते हैं।

यदि आप भी अभिमंत्रित किया हुआ सफेद पुखराज प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारे नवदुर्गा ज्योतिष केंद्र से पंडित जी द्वारा अभिमंत्रित किया हुआ सफेद पुखराज मात्र – 150₹ रत्ती मिल जायेगा जिसका आपको लैब सर्टिफिकेट और गारंटी के साथ में दिया जायेगा (Delevery Charges free) Call and WhatsApp on- 7567233021

 

Leave a Reply