जमुनिया रत्न पहनने की विधि – Jamuniya Ratna Pahanne Ki Vidhi

जमुनिया रत्न पहनने की विधि – Jamuniya Ratna Pahanne Ki Vidhi

 

 जमुनिया रत्न पहनने की विधि

जमुनिया रत्न पहनने की विधि- सूर्य पुत्र शनि सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह के रूप में जाने जाते हैंl शनि ग्रह के न्याय प्रणाली के कारण ही मानव समाज में लोगों के बीच भय का वातावरण व्याप्त है, अन्यथा लोग अपनी मनमानी उसे इतने उदंड हो जाएंगे, जिससे समाज की संरचना ही पूरी तरह से उधर जाएगी मानव की लालची प्रवृत्ति के कारण पूरी दुनिया ही विनाश की ओर अग्रसर हो जाएगीl ऐसे में मनुष्य के ऊपर नियंत्रण स्थापित करने के लिए ही शनि जैसे महान्यायवादी ग्रह की रचना की गई, जिससे पूरे ब्रह्मांड में एक समान न्याय प्रणाली कार्यरत हो सके, जिसका प्रभाव स्वयं शनि महाराज के द्वारा देखा जाता है, एवं उनके द्वारा ही दंडित भी किया जाता है। शनि जब अपने प्रभाव दिखाने शुरू करते हैं, तब जातक का संतुलन बिगड़ना शुरू हो जाता है।

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उसे उसके विचारों में भटकाव महसूस होने लगता है, तथा बीते समय के साथ यह सारी चीजें मानसिक तथा शारीरिक रोग का कारक बनने लगती हैl व्यक्ति के मस्तिष्क पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है, जिससे वह विभिन्न प्रकार की मानसिक बीमारियों से भी ग्रसित होने लगता हैl इसके साथ-साथ उसका स्वभाव भी बहुत अधिक उग्र होने लगता है, क्रोधी होने लगता है, किंतु शनि की दशा हो या महादशा हर किसी को इनके रास्ते होकर ही गुजरना पड़ता हैl अतः इनके कृपा को प्राप्त करने के लिए कर्म को ठीक करना बहुत आवश्यक है, इसके साथ-साथ विभिन्न प्रकार के उपाय भी अपनाए जा सकते हैं, एवं इनसे संबंधित रत्नों -उप रत्नों को धारण करके भी इनके दृष्टिकोण को बदला जा सकता है।

1. सर्वप्रथम जमुनिया रत्न धारण करने से पूर्व यह सुनिश्चित कर लें कि आपके द्वारा धारण किया जाने वाला शनि का यह उपरत्न पूरी तरह से शुद्ध हो, उसमें किसी भी प्रकार की मिलावट ना हुई हो या फिर वह एक कांच का टुकड़ा ना हो अन्यथा आप जिस भी चीज की प्राप्ति के लिए या जिस भी परेशानी के निवारण के लिए उसे धारण करना चाहते हैं lआप उसके लाभ से वंचित रह जाएंगे। जमुनिया को जांचने के लिए कुछ मापदंड एवं पैमाने हैं, जिनका उपयोग कर आप यह जांच कर सकते हैं, कि आपके द्वारा खरीदा जाने वाला या खरीदा गया उपरत्न पूरी तरह से शुद्ध है, जैसे- जमुनिया एक पारदर्शी उपरत्न होता है, जिसे जब हम प्रकाश में देखते हैं, तब हमें इसके अंदर दाग, धब्बे या रेशा जैसे निशान दिखाई पड़ते हैं, जो कि इसके संरचना का अभिन्न अंग है, जो कि इसके पूरी तरह से प्राकृतिक तौर पर निर्माण होने के साक्ष्य होते हैं।

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2. स्नानादि से निवृत्त होकर इस रत्न को गंगा जल तथा पंचामृत में कुछ घंटों के लिए डालकर छोड़ देंl जिससे इस में व्याप्त अशुद्धियां धीरे-धीरे स्वयं ही नष्ट होने लगेंगे तथा नकारात्मक ऊर्जा पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा।

3. उसके बाद इसे फिर से गंगाजल से धूल कर साफ काले कपड़े के ऊपर अपने घर के मंदिर में इसे रखें उसके पश्चात इससे कपूर, लोंग ,गूगल से इसकी आरती उतारे और कुछ टुकड़े कपूर के इस रत्न के पास भी रख दें, जिससे इसमें व्याप्त नकारात्मक शक्तियां यदि थोड़ी बहुत रह गई हो तो पूरी तरह से वह नष्ट हो जाए एवं इस रत्न के आसपास की ऊर्जा भी पूरी तरह से शुद्ध हो जाए।

4. उसके बाद इसके ऊपर अपराजिता पुष्पा या नीले रंग का कोई भी पुष्प अर्पण करेंl

5. उसके पश्चात शनि से संबंधित विभिन्न मंत्र का जितना हो सके इस रत्न के समक्ष बैठकर उतना अधिक मंत्रों को जपे किंतु इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि आपके द्वारा जपने वाले मंत्र का एक-एक शब्द पूरी तरह से शुद्ध हो मंत्र की वर्तनी में थोड़ी सी भी त्रुटि नहीं होनी चाहिए मंत्र शुद्ध रूप से उच्चारित होना चाहिए, जिससे इस रत्न की शक्तियां और अधिक प्रबल रूप से कार्य करें और जल्द से जल्द जागृत हो जाएl यदि आप मंत्र जपने में असमर्थ है तो आप किसी भी व्यक्ति विशेष का या विद्वान पंडित जी की भी सहायता ले सकते हैं।

6. उसके पश्चात अभिमंत्रित अंगूठी को लेकर भगवान शिव शंभू के मंदिर जाए या फिर आप बजरंगबली के मंदिर भी जाकर उनके चरणों में इसे कुछ देर के लिए छोड़ दें, आप चाहे तो उसी क्षण भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर एवं पंडित जी का भी आशीर्वाद प्राप्त करl उन्हें उत्तम दक्षिणा प्रदान करने के बाद इस रत्न को उसी क्षण धारण कर सकते हैं।

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7.इस रत्न को धारण करने का सबसे उपयुक्त समय मध्य रात्रि तथा सूर्य उदय से पूर्व माना जाता है। अतः शुक्ल पक्ष के शनिवार को इस रत्न को धारण किया जा सकता है।

8. इस रत्न को धारण करने वाले दिन भूलकर भी किसी से भी वाद विवाद ना करें और मजदूर वर्ग से तो बिल्कुल भी जितना हो सके उतनी मधुर वाणी उतनी सहज स्वभाव उनके साथ बनाए रखेंl भूलकर भी उन्हें कटु वचन या अपशब्द ना कहें अन्यथा शनि ग्रह की कृपा दृष्टि की जगह उनके कुदृष्टि आप के विनाश का कारण बनेगी।

9. किसी मजदूर वर्गी या गरीब को
नमक युक्त भोजन अवश्य कराएं एवं उनका आशीर्वाद भी प्राप्त करेंl

10. बिना घर परिवार के लोगों के साथ के कोई भी कार्य फलित नहीं होता हैl अतः घर के सदस्यों के लिए यदि हो सके तो कुछ उपहार लेकर जाए या उन्हें कोई नमकीन वस्तु अवश्य खिलाएं एवं उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

11. इस रत्न को धारण करने के लिए सबसे उपयुक्त उंगली मध्यमा उंगली मानी जाती है, तथा दाएं हाथ की मध्यमा उंगली में इसे धारण करना चाहिए।

12. जमुनिया रत्न को पंच धातु या अष्ट धातु में धारण किया जा सकता है, इसलिए अंगूठी हो या लॉकेट या पेंडेंट किसी को भी पंच धातु या अष्ट धातु में ही मढ़ाकर कर धारण करें।

13. इस रत्न को धारण करने वाले दिन जितना हो सके वर्जित चीजों से दूरी बनाकर रखें तथा वाद विवाद जैसी स्थिति किसी भी व्यक्ति से उत्पन्न होने ना दें, झगड़े जैसी स्थिति में भूलकर भी ना फंसे दिव्यांग लोगों के साथ अपने संबंध कभी भी खराब ना करें तथा असहाय लोगों की जितना हो सके मदद करें।

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14. इस रत्न को धारण करने के पश्चात जरूरतमंद व्यक्तियों को सरसों का तेल ,काला तिल, तिल के लड्डू ,गर्म वस्त्र या जूते- चप्पल, छाता जैसी चीजों का दान अवश्य करें, इससे शनि देव बहुत प्रसन्न होते हैं, इसके साथ-साथ आपके तथा आपके परिवार के ऊपर अपनी कृपा दृष्टि हमेशा बनाए रखते हैं, तथा शनि जनित कोई भी पीड़ा पूरी तरह से समाप्त हो जाती है।

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