माणिक रत्न कैसे धारण करना चाहिए – Manik Ratna kaise Dharan Karna Chahiye

माणिक रत्न कैसे धारण करना चाहिए – Manik Ratna kaise Dharan Karna Chahiye

 

माणिक रत्न कैसे धारण करना चाहिए –

Manik Ratna kaise Dharan Karna

 Chahiye

रत्नों को धारण करने का अपना एक विशिष्ट पद्धति है, जिसे हम सभी को विधिवत तरीके से पूर्ण करने आना चाहिए या फिर किसी विद्वान व्यक्ति की मदद से हम विधिवत तरीके से इसे धारण कर सकते हैं। ब्रह्मांड के विभिन्न आकाशीय पिंड जैसे- ग्रह, उपग्रह, नक्षत्र समय-समय पर हमारे ऊपर अपना प्रभाव दिखाते रहते हैं, जिसकी वजह से हमारी जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैंl हमारे जिंदगी में सुख दुख आते रहते हैं। इन ग्रह, नक्षत्रों से संबंधित हमारे पूर्वजों के द्वारा एक विद्या प्रदान की गई है, जिसे हम ज्योतिष विद्या के नाम से जानते हैं।

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इस विद्या में हमें बताया गया है, कि हम किसी विशिष्ट ग्रह का कौन सा रत्न धारण करें, जिससे हमें उस ग्रह की कृपा प्राप्त हो सके और हम अपना जीवन संवार सकें इसके साथ-साथ यह भी बताया गया है, कि जो सप्ताह के दिन होते हैं, कैसे इन आकाशीय पिंडों से संबंधित होते हैं, या कैसे इन आकाशीय पिंडों का प्रभाव इन दिनों पर पड़ता है, जैसे- सोमवार का दिन ऐसा माना जाता है, कि सोमवार के दिन चंद्र देव का प्रभाव अधिक होता है, जिसकी वजह से यदि किसी जातक की कुंडली में चंद्र नीच अवस्था में स्थित होते हैं, तो उसे विभिन्न प्रकार की मानसिक परेशानियां इस दिन कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है, या किसी की कुंडली में चंद्र ग्रह बहुत अच्छे भाव में स्थित होते हैं, तो उसके जीवन का सबसे शुभ दिन सोमवार ही होता है, तथा उसके जीवन में जितनी भी शुभ घटनाएं घटती है।

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वह सोमवार को ही घटती है, उसी प्रकार मंगल वार जो मंगल ग्रह से संबंधित होता है, तथा इस दिन इस ग्रह का प्रभाव व्यापक स्तर पर जातक के ऊपर पड़ता है, ऐसे ही और भी दिनों के लिए विभिन्न ग्रह बताए गए हैं, एवं उनके विभिन्न उपाय, उनके विभिन्न रत्न ,उनके विभिन्न उपरत्न बताए गए है, आज हम सूर्य ग्रह से संबंधित चीजों के बारे में यह चर्चा करेंगे तथा जानेंगे कि कैसे उनके रत्न को धारण कर हम अपने जीवन में सुख को प्राप्त कर सकते हैं।

1.सबसे पहले रत्न धारण करने से पूर्व यह निर्धारित करें कि आपके द्वारा खरीदा जा रहा या यह खरीदा गया रत्न पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से निर्मित है, तब ही आप जिस कार्य की पूर्ति के लिए उस रत्न को धारण करने जा रहे हैं lउस इच्छा की पूर्ति की संभावना बहुत हद तक बढ़ जाएगी या हो सकता है, उसे धारण करने से आपकी महत्वकांक्षी त्वरित गति से पूर्ण हो जाए किंतु यदि आपके द्वारा रत्न गलती से भी कृतिम रूप से निर्मित विभिन्न रासायनिक अभिक्रिया से निर्मित प्रयोगशाला में एक रत्न हुआ तो आपके धन का व्यय तो होगा ही इसके साथ-साथ आपको उसका लाभ भी प्राप्त नहीं होगा क्योंकि कृत्रिम रूप से निर्मित रत्न में वह सारी खूबियां नहीं होती है, जो प्राकृतिक रूप से निर्मित एक रत्न में होती है, इसलिए रत्न की अच्छे से जांच परख करें उसके विभिन्न मापदंडों को जांचें।

2. ऐसा माना जाता है, कि रत्नों को यदि उपयुक्त धातु के साथ मरवाया जाए तो उसकी शक्तियां दुगुनी हो जाती है lसूर्य ग्रह से संबंधित धातु स्वर्ण होता है, तथा तांबा होता है lइन दोनों धातुओं में सूर्य से संबंधित प्राकृतिक रूप से विभिन्न प्रकार की भौतिक ऊर्जाए इसमें विद्वान होती है, इसलिए जातक को माणिक के रत्न को इन्हीं दो धातुओं में से किसी एक में माणिक को धारण करना चाहिए यदि आप सक्षम है, तो कोशिश करें कि माणिक रत्न (manik ko kis dhatu me dharan kar sakte hai in hindi) को स्वर्ण धातु में धारण करें और यदि आप नहीं सक्षम है, तो आप तांबा में भी इस रत्न को धारण कर सकते हैं।

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3. माणिक रत्न (manik ko kis dhatu me dharan kar sakte hai) को कम से कम पांच रत्ती का धारण करना चाहिए या हो सके तो सात रत्ती का धारण करेंl इससे आपको इसके अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगेl आपको इसे कितने रत्ती का धारण करना है। इसका सबसे सटीक उपाय है, कि आप अपना वजन करें और अपने वजन का एक बटे 6 हिस्सा के वजन का रत्न धारण कर सकते हैं।

4. नक्षत्रों का भी हमारे जीवन पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता हैl अतः सूर्य से संबंधित नक्षत्र में इस रत्न को धारण करना बहुत फलदाई होता हैl सूर्य ग्रह से संबंधित नक्षत्र होते हैंl सूर्य ग्रह से संबंधित नक्षत्र है, कृतिका नक्षत्र उत्तराषाढ़ा नक्षत्र एवं उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्रl सूर्य से संबंधित रत्न माणिक (Manik Ratna kaise Dharan Karna Chahiye) को रविवार के दिन पुष्य योग में धारण करने से सबसे अधिक लाभ प्राप्त होता हैl

5. माणिक रत्न को अनामिका उंगली में रविवार के दिन शुभ अवसर पर धारण किया जाता है।

6. सर्वप्रथम स्नानादि से निवृत्त होकर माणिक रत्न (manik ko kis dhatu me pahne) को गंगा जल एवं पंचामृत से स्नान करवाएं या कुछ देर के लिए उस में डालकर छोड़े जिससे यह पूरी तरह से उनकी ऊर्जा को अवशोषित कर सके एवं साफ जल से धूल कर उसे एक स्वच्छ कपड़े के ऊपर अपने घर के मंदिर में रखें।

7. गूगल एवं कपूर से इसकी आरती उतारे आप चाहे तो कपूर के कुछ टुकड़े माणिक के बगल में भी रख सकते हैं, जिससे यदि इसमें कोई भी नकारात्मक उर्जा थोड़ी बहुत भी होगी तो कपूर के सुगंध से वह पूरी तरह से शुद्ध हो जाएगी एवं उस स्थल पर पूरी तरह से सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ने लगेगा, जिससे आप को और अधिक अच्छे से माणिक रत्न (manik ratna pahanne ke labh in hindi) को जागृत करने में सहायता प्राप्त होगी, इसके साथ-साथ आपका मन भी लगेगा तथा एकाग्र होकर पूरे विधि विधान से आप अपनी सहभागिता दे पाएंगेl

8. सूर्य से संबंधित मंत्र या सूर्य ग्रह का बीज मंत्र का उच्चारण कर अब माणिक रत्न (manik ratna pahanne ke fayde) को अभिमंत्रित करना चाहिए किंतु इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि आपके द्वारा उच्चारित की जा रही मंत्र की शब्दावली पूरी तरह से शुद्ध हो, अन्यथा आपको वह लाभ प्राप्त नहीं होगा, जिसकी कामना लिए आप उस रत्न को धारण करना चाहते हैं, और जितना हो सके उतना अधिक मंत्र का जाप करें इससे उस रत्न की ऊर्जा और अधिक बढ़ेगी यदि आप किसी भी प्रकार से मंत्र का जप करने में असक्षम है, तो आप किसी विद्वान पंडित जी का भी सहयोग ले सकते हैं, तथा उनके माध्यम से भी माणिक रत्न को अभिमंत्रित करवा सकते हैं।

9. अब इस अभिमंत्रित किए हुए रत्न को आप किसी मंदिर में ले जाकर कुछ देर के लिए रख दें क्योंकि हमारे जो मंदिर होते हैं, वहां पर चक्र जागृत होते हैं, जिसकी वजह से वहां का सकारात्मक ऊर्जा का अस्तर घर के पूजा स्थल से बहुत अधिक होता है, यदि यह मंदिर मां भवानी का हुआ तो सबसे उत्तम होगा आप कुछ देर के बाद मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त कर एवं पंडित जी का भी आशीर्वाद प्राप्त कर उन्हें उत्तम दक्षिणा प्रदान करने के पश्चात इस अभिमंत्रित एवं देवी कृपा प्राप्त अंगूठी को अनामिका उंगली में अपना मनवांछित कार्य मन में बोलते हुए इसे धारण करें।

10. माणिक रत्न (manik kis dhatu me pahne chahie) को जितना जल्दी सुबह आप धारण कर सकते हैं, जरूर करें lयदि सुबह की प्रातः बेला जब सूर्य की किरणें आकाश में लालिमा फैला रही हो और उस वक्त माणिक रत्न को धारण किया जाए तो इसकी शक्तियां इस समय और अधिक बलवान होती है और अधिक जागृत होती है, इसलिए सबसे उपयुक्त इस रत्न को धारण करने का समय सुबह की प्रातः बेला को माना गया है।

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11. इस दिन यदि संभव हो तो नमक से बनी हुई चीजों का सेवन ना करेंl वर्जित चीजों का सेवन से बचें एवं जरूरतमंद को भोजन अवश्य कराएं यदि संभव हो तो उनकी यथाशक्ति मदद भी करें।

12. घर आकर अपने पिताजी का आशीर्वाद प्राप्त करें आप अपने घर के बड़े बुजुर्ग लोगों का आशीर्वाद प्राप्त करें एवं उन्हें कुछ मीठा अवश्य खिलाएं, ऐसा करने से माणिक रत्न (manik ratna pahanne ke labh) का प्रभाव आपके जीवन पर त्वरित गति से होगा। यह आपको अनुकूल प्रभाव दिखाने में देरी नहीं करेगा तथा आपकी सारी मनोकामनाओं को माणिक रत्न पूर्ण करने की क्षमता रखता है, इसके साथ-साथ सूर्य देव की कृपा भी इस रत्न को धारण करने से आपको प्राप्त होगी।

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