स्फटिक क्या है – Sphatik Kya Hai

स्फटिक क्या है – Sphatik Kya Hai

 

स्फटिक क्या है

स्फटिक क्या है- स्फटिक एक प्रकार का उपरत्न है, जो देखने में बिल्कुल पारदर्शी होता है, बिल्कुल पानी के समान इसकी रंगत होती है, तथा इसकी आभा कुछ-कुछ बर्फ के बूंद के समान दिखाई पड़ती हैl बहुत अधिक बर्फ के ठंडे टुकड़े कई मौसमी प्रक्रिया से गुजरते हैंl वहीं टूकरें बाद में स्फटिक जैसे दिव्य रत्न में परिवर्तित हो जाते हैंl इस रत्न की प्रवृत्ति बहुत अधिक ठंडी होती हैl संरचनात्मक रचना काफी संगठित होता है, यही कारण है, कि इसकी सतह बहुत अधिक कठोर होती है। भले ही यह देखने में कांच के समान हो किंतु कांच के जैसा कमजोर नहीं होता हैl स्फटिक उपरत्न सिलिकॉन डाइऑक्साइड का संयोजक होता है, वैसे तो स्फटिक में मौजूद विभिन्न प्रकार के अशुद्धियों के कारण इसके कई रंग के उपरत्न पाए जाते हैं, किंतु सबसे उत्कृष्ट संरचना वाला एवं सबसे विशिष्ट गुणों को अपने अंदर समाहित करने वाला स्फटिक रत्न पूरी तरह से निश्चल, पवित्र एवं स्वच्छ होता हैl यह पूरी तरह से रंगहीन होता है। इसके अनेक गुणों के कारण इसके विभिन्न नाम प्रदान किए गए हैंl जैसे- बिल्लौर, सीटोंपल, शिवप्रिय ,कांचमणि फिटक आदि।

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स्फटिक एक ऐसा रत्न है, जिसके प्रयोग से विभिन्न प्रकार की चीजों का निर्माण किया जाता है, जैसे श्री यंत्र हो या भगवान शिव शंभू का शिवलिंग या उपचारात्मक लैंप आदि lइन सभी में स्फटिक पत्थर का प्रचुर मात्रा में उपयोग किया जाता हैl ऐसा माना जाता है, कि स्फटिक स्टोन से बने हुए श्री यंत्र अपने अंदर विशेष प्रकार की ऊर्जा को समाहित रखते हैं, तथा स्फटिक से बनने के कारण इसकी शक्तियां और अधिक जागृत अवस्था में रहती है, एवं किसी भी जगह की सभी प्रकार के अशुद्धियों को दूर करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है, ऐसा माना जाता है, कि इस में व्याप्त ऊर्जा हर नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने की क्षमता रखता हैl यही कारण है, कि स्फटिक स्टोन से बने हुए श्री यंत्र का उपयोग माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए भी किया जाता है, किसी विशिष्ट कार्य की पूर्ति के लिए भी इससे बने हुए श्री यंत्र का उपयोग किया जाता है।

ऐसा माना जाता है, कि जिस भी घर में यह श्रीयंत्र रहता हैl वहां पर कभी भी मां लक्ष्मी की कुदृष्टि नहीं पड़ती हैl माता लक्ष्मी का निवास स्थान हो जाता है, तथा उस अस्थल में वास करने वाले लोगों के ऊपर माता लक्ष्मी की हमेशा कृपा दृष्टि बनी रहती है। इसका प्रयोग कई बार विशिष्ट कौशलों में प्रवीणता लाने के लिए भी किया जाता हैl स्फटिक स्टोन से बने हुए शिव जी को प्राण प्रतिष्ठित करवा कर बहुत से लोगों के द्वारा पूजा अर्चना की जाती है, जिससे अनेक प्रकार के उनके जन्म पत्रिका में बनने वाले विश दोस को यह दूर करता है lयदि किसी भी प्रकार के खराब योग बन रहे हैं, जिसकी वजह से जातक अनेक परेशानियों से घिरा हुआ है, या कालसर्प जैसे दोस से पीड़ित है, तो ऐसी अवस्था में स्फटिक स्टोन से बने हुए भोलेनाथ जी की शिवलिंग का पूजन का महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है।

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कई लोगों के द्वारा इस के आभूषण अपनी सुंदरता को बढ़ाने के लिए भी उपयोग में लाया जाता है, इसके भिन्न-भिन्न आभूषण जातकों के रूप सौंदर्य में और अधिक वृद्धि करते हैं, इसके साथ ही एक सुरक्षा कवच के रूप में भी कार्य करते हैं, किसी भी आयु वर्ग के लोगों के द्वारा यदि अस्पर्टिक स्टोन से बने हुए माला या फिर ब्रेसलेट जैसी चीज धारण की जाती है, तो ऐसा माना जाता है कि उसके ऊपर किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा या नकारात्मक लोगों के गंदे विचार उस पर कभी भी अपना प्रभाव नहीं दिखा पाते हैं lयह हर प्रकार की नकारात्मक विचार नकारात्मक दोस नकारात्मक गुण को पूरी तरह से नष्ट करता है, तथा इसके सुरक्षा कवच को ऊपरी शक्तियां भी नहीं भेद पाती हैl यही कारण है, कि यह रत्न भूत प्रेत नजर दोष संबंधित चीजों से भी जातक को पूरी तरह से सुरक्षित रखता है, उसके आभामंडल को बहुत अधिक मजबूती प्रदान करता है, जिससे उसके ऊपर इन सब चीजों का प्रभाव नहीं पड़ता है।

उपचारात्मक गुणों से युक्त इस रत्न का प्रयोग विभिन्न प्रकार के औषधीय में भी किया जाता हैl चिकित्सा के क्षेत्र में भी इसका अपना एक विशिष्ट स्थान है lइसके अद्वितीय गुण इसे और अधिक चमत्कारी बना देते हैंl यदि इसे संजीवन बूटी से अलंकृत करें तो इसमें कोई परेशानी नहीं होगी lयह है, ही अपने आप में दिव्यl कई प्रकार के शारीरिक विकारों को दूर करने के लिए स्फटिक स्टोन के भस्म का प्रयोग किया जाता है, कई प्रकार की सौंदर्य वर्धक चीजों में भी इसके भस्म का प्रयोग किया जाता है, तेज ज्वर को भी कम करने की क्षमता इसमें विद्यमान होती है, इसके साथ साथ नेत्र संबंधित विकार को भी दूर करने की क्षमता इसमें विद्यमान होती हैl विभिन्न प्रकार के संक्रमण वाले रोगों को भी दूर करने की क्षमता इसमें विद्यमान होती है, यह रत्न जातक की रक्षानात्मक प्रणाली को पूरी तरह से मजबूत बनाता है।

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ऐसे लोग जो बहुत अधिक तुनक मिजाजी वाले होते हैं, एवं अपने आप पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं, तथा बहुत अधिक उन्हें क्रोध आता है, ऐसे लोगों के लिए स्फटिक किसी वरदान से कम नहीं है, यह रत्न उनके क्रोध को पूरी तरह से नियंत्रित करता है, तथा ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न करता है, जिससे जातक का क्रोध पूरी तरह से शांत हो जाता है, एवं उसके अंदर शीतलता का भाव विद्यमान होता है lजातक अपने मन एवं भावनाओं पर पूरी तरह से नियंत्रण रखता है, तथा आवेश में आकर किसी भी तरह के क्रोध से खुद को दूर रखता है, एवं अनुचित वचन का प्रयोग करने से बचता हैl यह रत्न इतना अधिक प्रभावशाली होता है, कि किसी भी प्रकार के विकिरण से भी हमें सुरक्षा प्रदान करता है, चाहे वह विकिरण प्राकृतिक तौर पर हो या फिर कृत्रिम रूप से निर्मित विभिन्न प्रकार के विद्युत द्वारा संचालित उपकरण हो जैसे- टीवी ,कंप्यूटर ,मोबाइल आदि।

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