नीलम रत्न धारण करने की विधि – Neelam Ratna Dharan Karne Ki Vidhi

नीलम रत्न धारण करने की विधि – Neelam Ratna Dharan Karne Ki Vidhi

 

 नीलम रत्न धारण करने की विधि बताएं –

Neelam Ratna Dharan Karne Ki Vidhi

नीलम रत्न (neelam stone dharan karne ki vidhi) धारण करने की विधि जानना बहुत आवश्यक है, क्योंकि जब तक हम किसी चीज का सही उपयोग नहीं जानेंगे तब तक वह चीज हमें अच्छे फल नहीं दे सकता हैl हम उसके पूर्ण लाभ को नहीं ले पाएंगेl अतः नीलम रत्न को धारण करने की सर्वोत्तम विधि जानना बहुत आवश्यक है, तथा इसके विभिन्न पहलुओं को भी हम जानने का प्रयास करेंगे:-

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नीलम रत्न (neelam stone Pahanne ki vidhi) में उपलब्ध सबसे बेशकीमती रत्न है, जो हमें सृष्टि के विभिन्न जगहों से प्राप्त होता हैl नीलम रत्न मुख्यतः एक खनिज पदार्थ है, इसे एलमुनियम भस्म भी कहा जाता है lइसका वर्ण नीला होता है। नीलम रत्न का उपयोग प्राचीन काल से ही राजा महाराजा हमारे पूर्वजों के द्वारा किया जाता रहा है, इसका उपयोग मुख्यत आभूषण ,अंगूठी या विभिन्न प्रकार के साथ सजा के चीजों को बनाने में किया जाता है, या पहले जमाने के राजा महाराजाओं के वस्त्र में इसे सुसज्जित किया जाता था, जिससे वह वस्त्र देखने में बहुत आकर्षित लगे।

आज भी बहुत से लोगों के द्वारा विभिन्न प्रकार की चीजों में नीलम रत्न (neelam Pahanne ki vidhi) का उपयोग किया जाता है, आभूषण से लेकर हाथ की घड़ी तक या वस्त्र के किसी खास हिस्से पर आकर्षण पाने हेतु लगाया जाता है, किंतु नीलम रत्न की रत्न शास्त्र में बहुत से लाभ एवं हानि बताए गए हैं, वैसे तो बाजार में विभिन्न प्रकार के नीलम उपलब्ध है, लोगों को इस रत्न को खरीदने के पूर्व उसकी जांच अच्छे से करनी चाहिए क्योंकि यदि नीलम रत्न कृत्रिम रूप से बना हुआ है, तो आपको जो लाभ मिलना चाहिए वह लाभ नहीं प्राप्त होगा। अतः नीलम रत्न खरीदने के वक्त निम्न कुछ जांच अवश्य कर लें –

1.जो प्राकृतिक रूप से उपलब्ध नीलम रत्न (neelam pathar dharan karne ki vidhi) होता है, उसमें गजब का चुंबकीय शक्ति मौजूद होती है, जिसकी वजह से वह अपने आसपास स्थित तिनके आदि को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है।

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2.जो प्राकृतिक रूप से उपलब्ध नीलम होता है, उसका घनत्व बहुत अधिक होता है, इसी वजह से कृत्रिम रूप से निर्मित नीलम रत्न (Neelam Ratna Dharan Karne Ki Vidhi) से उसका वजन कहीं अधिक होता है, भले ही वह देखने में छोटा लगे। 

3.नीलम रत्न (blue sapphire dharan karne ki vidhi) काफी गर्म प्रवृत्ति का होता है, जब आप इसे मुट्ठी में बंद करेंगे तो आपको गर्मी का आभास होगा तथा आपको हाथ में उस्मा उत्सर्जित होते हुए प्रतीत होगा किंतु यही यदि कृतिम रूप से निर्मित नीलम रत्न की बात करें तो उसमें आपको इन सब बातों का एहसास बिल्कुल भी नहीं होगा।

4.यदि नीलम रत्न सर्वोत्तम हुआ तो उसमें इतनी क्षमता होती है, कि दूध को भी वह नीला कर दे।

5.नीलम रत्न (neelam ratna pehne ki vidhi) देखने में बहुत ही आकर्षक होता है, तथा चांद की शीतल किरने हो या सूर्य की किरने सभी में यह एक समान नीला वर्ण की रोशनी उत्सर्जित करता है, इसके अंदर प्राकृतिक रूप से बहुत से निशान ,रेखाएं, बिंदु आदि मौजूद रहता हैl यह कभी भी पारदर्शी नहीं रहता है।

6. नीलम रत्न का जितना अधिक वर्ण नीला होता है, उतना उसका मूल्य ज्यादा होगाl इसका वर्ण मुख्यता मोर के गले के रंग के समान होता है, तथा अपराजिता पुष्प के समान रंग होता है।

7. नीलम रत्न (neelam ratna pahanne ka samay) केवल देखने में ही अतुलनीय नहीं है, अपितु इसके औषधीय गुण भी कुछ कम नहीं है, नीलम रत्न का उपयोग विभिन्न प्रकार की मानसिक बीमारियों मानसिक अवसाद, अनिद्रा ,उदर संबंधित रोग ,वायु रोग आदि चीजों में भी किया जाता है।

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आपको यह जानकर बहुत आश्चर्य होगा, कि नीलम रत्न (neelam ratna pahanne ka muhurt kya hai) केवल नीले रंग का ही नहीं अपितु इसके और भी बहुत से रंग उपलब्ध है, जो विश्व के दुर्लभ इलाकों में पाए जाते हैं, किंतु वहां तक पहुंचना एवं उसका खनन करना बहुत ही मुश्किल होता है, इसलिए यह सारे बहुमूल्य रत्न हर किसी के बस की बात नहीं होती कि वह इनको खरीद सके या उसकी कीमत चुका सकेl कुछ गिने-चुने लोगों के पास ही ऐसे बहुमूल्य रत्न उपलब्ध है।

नीलम रत्न (neelam ratna pahanne ka muhurt) को शनि से संबंधित प्रभाव को उसके महादशा ,दशा, शनि की ढैया ,शनि की साढ़ेसाती जैसी विकट परिस्थितियों में नीलम रत्न को ज्योतिषीय सलाह पर धारण किया जाता हैl रत्न शास्त्र के अनुसार नीलम रत्न अपने अंदर बहुत ही अलौकिक एवं गुप्त ऊर्जा को संयोजक बनाकर रखता है lइसमें इतने चमत्कारी गुण है, कि यह किसी को भी रंक से राजा बनाने की क्षमता रखता है, उसकी जीवन में जो उथल-पुथल मचा हुआ रहता है lउन सभी को व्यवस्थित कर लोगों के जीवन को सुगम एवं सफल बनाने का सबसे उत्तम फल इस रत्न के द्वारा दिया जाता हैl ऐसे चमत्कारिक रत्न को यदि सही विधि से धारण किया गया तो उसके हमें अलौकिक शक्तियों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, आइए जानते हैं, इसे धारण करने की सही विधि–

नीलम रत्न (blue sapphire pahanne ke upay) को सबसे पहले गंगा जल से धुलने के पश्चात उसे पंचतत्व दूध, दही, घी ,शहद ,गुड आदि से युक्त चीजों में उसे कुछ देर के लिए डुबोकर रखें lतत्पश्चात उसे शुद्ध जल से धुलेl छोटे से चौक और काले वस्त्र पर उस रत्न को रख दे सका शनि के विभिन्न मंत्रों का जाप कर उसे अभिमंत्रित कीजिए या आप किसी विद्वान पंडित के द्वारा भी इसे अभिमंत्रित करा सकते हैं, किससे शिव मंदिर या बालाजी के मंदिर में ले जाकर वहां से आशीर्वाद प्राप्त करने के पश्चात इसे मध्यरात्रि अथवा शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार या फिर सूर्योदय के पूर्व इसे धारण कर सकते हैं, इस दिन दान -पुन अवश्य करें तथा मांस- मदिरा आदि का सेवन करने से परहेज करें, किसी को भी कटु वचन ना बोलें, सभी का आदर मान- सम्मान करें।

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 नीलम रत्न (blue sapphire pahanne ki vidhi) आपकी जीवन में दिन दुगनी रात चौगुनी तरक्की प्रदान करेगा, आपका जीवन खुशियों से भरा रहेगा, नीलम रत्न आपको विषम से विषम परिस्थिति में भी विचलित होने नहीं देगा तथा सारे समस्याओं का समाधान करने की आपको समझ प्रदान करेगाl आपके व्यक्तित्व का चमत्कारिक रूप से रूपांतरण करेगा, जिससे लोग आपकी ओर खींचे चले जाएंगे एवं आपका काम बनता चला जाएगा।

आपका मन एकाग्र चित्त रहेगा, जिससे आप के द्वारा किए जा रहे कार्यों का अच्छी तरीके से समापन होगाl मन में असीम शांति का वास होगा तथा खराब विचारों से आपका मन दूर रहेगा, तरक्की के नए -नए रास्ते खुलेंगे, आर्थिक स्थिति भी आपकी मजबूत होगी, घर परिवार के लोगों से भी आपको सहयोग प्राप्त होगा, जिससे आप भावनात्मक स्तर पर खुद को बहुत मजबूत महसूस करेंगे।

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