नीलम रत्न के चमत्कारी फायदे – Neelam Ratna ke Chamtkari Fhayde

नीलम रत्न के चमत्कारी फायदे – Neelam Ratna ke Chamtkari Fhayde

 

शनि की राशि कुंभ और मकर राशि वालो को नीलम पहनना चाहिये

 

 

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नीलम रत्न के फायदे – Neelam Ratna ke

 Chamtkari Fhayde

 1.नीलम रत्न कौन पहन सकता है , (neelam ratna ke fayde in hindi) तथा किन परिस्थितियों में इसे धारण किया जा सकता है,जिससे हमें सकारात्मक परिणाम देखने को मिले आज हम इसकी चर्चा विस्तार से करेंगे-

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नीलम स्टोन (neelam ratna ke chamatkar kya hai) जिसे एलुमिनियम ऑक्साइड के नाम से जाना जाता है, यही इसका वैज्ञानिक नाम हैl मुख्यतः यह कोरेंडम परिवार से ताल्लुक रखता है,इस स्टोन में ऐसी ऊर्जाए विद्यमान रहती है, जो आपको सफलता के ऊंचाई ऊपर ले जाने की क्षमता रखते हैं l बशर्ते की वह नीलम प्राकृतिक रूप से सृष्टि के गर्भ गृह से प्राप्त हुआ हो अन्यथा उसके परिणाम हमें समझ नहीं आते हैं।

नीलम रत्न (neelam ratna ke chamatkar) के बहुत से उपरत्न पाए जाते है, क्योंकि हर किसी के बस की बात नहीं होती है, कि वह नीलम रत्न को खरीद सके क्योंकि नीलम रत्न बहुत महंगा मिलता है, जिसकी वजह से आम लोगों को इसे खरीदने में परेशानी होती हैl ऐसी स्थिति में उन्हें सलाह दी जाती है, कि नीलम रत्न के स्थान पर उपरत्न धारण कर सकते हैं, क्योंकि नीलम रत्न के उप रत्न भी बहुत कारगर होते हैंl बस रत्नो एवं उपरत्न में यही फर्क है, की रत्न की ऊर्जा जल्दी समाप्त नहीं होती है, तथा ऊपरत्न की शक्तियां कुछ विशेष समय तक की अपना प्रभाव दिखाती हैl अपना कार्य करती है,उस के पश्चात वह पूरी तरह से उर्जा हीन हो जाती हैl नीलम रत्न के उपरत्न है -नीली, फिरोजा, लिलीया ,लाजर्वत आदि इन सभी उत्परत्नों में सबसे अधिक विशिष्ट गुणों वाला उपरत्न फिरोजा है, जो हमें किसी भी परिस्थिति में शांत रहने की छमता प्रदान करता है, तथा इसका स्वभाव ठंडा होता है, यह ठंडे प्रवृत्ति का होता है।

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नीलम खरीदने से पूर्व हमें विभिन्न प्रकार के पैमानो की जांच अवश्य कर लेनी चाहिए क्योंकि बाजार में बहुत से कृतिम रुप से निर्मित नीलम रत्न उपलब्ध होते हैं जो हूबहू देखने में नीलम रत्न के जैसे दिखते हैं, तो आइए जानते हैं, नीलम को पहचानने के विविध पैमाने –
2. प्राकृतिक रुप से नीलम रत्न देखने में बहुत ही आकर्षक चमकदार होता हैl
3. उत्कृष्ट नीलम रत्न (neelam ratna pahanne ke fayde) देखने में मोर के गर्दन के रंग के समान, नीलकंठ के पंख के रंग के समा न तथा अपराजिता पुष्प के पंखुड़ियों के समान नजर आते हैं।
4. प्राकृतिक रुप से उपलब्ध नीलम रत्न में यह विशिष्ट गुण पाया जाता है, कि जब उस पर सूर्य की किरणें तथा चंद्र की शीतल किरने उस पर पड़ती है, तब एक समान नीला रोशनी उससे उतरीत होता हैl
5.शुद्ध दूध में यदि सर्वोत्तम नीलम रत्न को डाला जाए तो उसका रंग नीला परिवर्तित हो जाता हैl

 इसमें प्राकृतिक रुप से बहुत से निशान मौजूद रहते हैं, जो कि हमें कृतिम रुप से निर्मित नीलम रत्न में देखने को नहीं मिलते हैं, तथा कृतिम रुप से निर्मित नीलम रत्न पारदर्शी होता है, उसमें किसी प्रकार की जाले या निशान मौजूद नहीं रहते हैं।
7. सर्वोत्तम नीलम का घनत्व बहुत अधिक होता है lजबकि कृतिम रूप से निर्मित नीलम पत्थर का घनत्व बहुत कम होता हैl

रत्न शास्त्र तथा ज्योतिष विज्ञान में नीलम रत्न का बहुत अधिक महत्व हैl इसमें बहुत ही चमत्कारिक शक्तियां विद्यमान होती है, किंतु यही एक ऐसा रत्न है,जिसको धारण करने के पूर्व लोगों को अच्छे से इसके बारे में सोच समझ कर विभिन्न प्रकार की बातों को परख कर तभी धारण किया जाता है, क्योंकि इसमें विध्वंसक शक्तियां भी विद्यमान होती है, जो यदि जातक के कुंडली के अनुकूल नहीं हुई तो उसके जीवन में उथल-पुथल मचा देती है, उसके जीवन में कोहराम मच जाता है ,आकस्मिक दुर्घटना घटने लगती है, जिससे उसका सुख चैन सुकून सब छिन जाता है, जातक की जिंदगी नरक बन जाती है, इसीलिए नीलम रत्न (neelam ratna dharan karne ke fayde) को धारण करने से पूर्व अपनी कुंडली की जांच किसी विद्वान पंडित से अवश्य करवा लें।

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नीलम रत्न कौन पहन सकता है, तथा किन परिस्थितियों में उसके द्वारा धारण किया जा सकता है? आइए विस्तार से चर्चा करते हैं-

8.नीलम रत्न को शनि ग्रह के द्वारा दिए जा रहे विभिन्न प्रकार के कष्टों को कम करने के लिए धारण किया जाता है, तथा जीवन के विभिन्न आयामों पर सफलता प्राप्त करने में भी नीलम रत्न बहुत मदद करता है किंतु नीलम रत्न (neelam ratna dharan karne se kya hota hai) को धारण करने से पूर्व कुंडली के विभिन्न योग को परखना भी आवश्यक होता हैl

9. यदि जन्म कुंडली के चतुर्थ, दशम और ग्यारहवें भाव में शनि देव स्थित है, तो ऐसी परिस्थिति में नीलम रत्न को पंचतत्व धातुओं में पिरो कर पहना जाता है, इससे जातक के जीवन के विभिन्न परेशानियों का खात्मा धीरे-धीरे होने लगता है, तथा उसकी आर्थिक स्थिति भी बहुत मजबूत बनती है।

10. यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती चल रही हो, जिसकी वजह से उसका जीवन कष्टों से भर गया है, तो ऐसी परिस्थिति में उसके द्वारा नीलम रत्न (neelam ratna ke labh) धारण किया जा सकता है, जिससे उसे अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

11.यदि किसी की कुंडली में शनि शुभ स्थान में बैठा हो तथा मजबूत ग्रहों के साथ उसकी स्थिति अच्छी हो तो, ऐसी परिस्थिति में नीलम रत्न धारण करने से उसे विशिष्ट प्रकार के लाभ उसके जीवन में देखने को मिलते हैं, तथा उसके तरक्की के सारे मार्ग खुल जाते हैं।

12. यदि जातक की कुंडली में शनि अपने भाव के आठवें स्थान पर स्थित हो, तो ऐसी परिस्थिति में नीलम रत्न (neelam ratna pehne ke fayde) धारण करने की सलाह दी जाती है,इससे जातक को मानसिक शांति प्राप्त होती है, तथा उसमें धैर्य की वृद्धि होती है, और जीवन के विभिन्न पहलुओं पर भी उसे सफलता प्राप्त होती है।

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13. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी जातक की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती ,शनि की ढैया, महादशा ,दशा या शनि ग्रह नीच भाव में स्थित हो या इसकी दशा वक्री हो तो ऐसी परिस्थिति में जातक की स्थिति बहुत दयनीय हो जाती है, तब उन्हें नीलम रत्न  (neelam ratna kaisa hota hai) धारण करने की सलाह दी जाती है, इससे उसके परिस्थिति में बदलाव आने लगता है, विभिन्न चीजों में उसे सकारात्मक परिणा प्राप्त होते हैं।

यह रत्न हमारे भाग्य को को उदित करने की क्षमता रखता है, तथा जीव के विभिन्न आयामों पर सफलता प्रदान करने की इसमें अलौकिक शक्तियां विद्यमान रहती है, किंतु इसे बिना किसी ज्योतिष या किसी विद्वान पंडित की सलाह पर धारण नहीं करना चाहिए।

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