पन्ना रत्न धारण करने का समय – Panna Ratna Dharan Karne Ka Samay

पन्ना रत्न धारण करने का समय – Panna Ratna Dharan Karne Ka Samay

 

 पन्ना धारण करने का समय –

पन्ना धारण करने का समय यदि हमें सही से ज्ञात हो जाए तो इसके चमत्कारीक लाभ को हम प्राप्त कर सकते हैं, पन्ना रत्न जिसे संस्कृत भाषा में हरित मनी, अश्व गर्भ ,गोरून आदि से संबोधित किया जाता है, पन्ना रत्न बुद्ध ग्रह कों समर्पित होता है, पन्ना रत्न बुध ग्रह की शांति एवं संतुलन स्थापित करने के लिए धारण किया जाता है, इसमें बुद्ध ग्रह से संबंधित विभिन्न प्रकार की शक्तियां गुप्त रुप से विद्वमान रहती हैंl बहुत से विद्वान ज्योतिषीयो का मन होता है, कि यह रत्न बुध एवं चंद्र की स्थिति को बेहतर बनाता है, यह दोनों को समाहित कर एकाकी कर अच्छे परिणाम प्रदान करता हैl पन्ना रत्न जो हमारे बुद्धि, छमता, संचार ,त्वचा आदि को नीरुपित करता है, इसके अनगिनत लाभ हमें इसे धारण करने के पश्चात प्राप्त होता है।

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समय का खेल बड़ा निराला है, यह समय ही तो होता है, जो आपके हमारे भाग्य का लेखा जोखा प्रदान करता है, और किसी के द्वारा कब जन्म लिया जाएगा कब उसकी मृत्यु कब होगीl यह सब चीजों का समय निर्धारित रहता है, और समय के चक्र से कोई भी बच नहीं सकता है, तभी तो हमें हर चीज करने के पूर्व यह सोचना समझना पड़ता है, कि इस कार्य को किस समय करें जिससे उसकी पूर्ण होने की संभावना बढ़ जाए, इसलिए पन्ना धारण करने का भी सटीक एवं उपयुक्त समय क्या है, यह क्या होता है इसकी चर्चा हम आगे बताएंगे।

पन्ना रत्न जो हमें कोयला के खदानों से प्राप्त होता है, फिर भी आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इसे प्राप्त करना इतना आसान नहीं हैl कोयला का विभिन्न तरीके से जांच करने के पश्चात ही यह निर्धारित किया जाता है, कि यह पन्ना रत्न है, अथवा कोई और रत्न हैl यह रत्न देखने में हरा वर्ण का होता हैl यह एक प्रकार का खनिज है, जो बेरुच प्रकृति का पत्थर होता है, जिसमें एलुमिनियम ऑक्सीजन जैसे सयोजक पाए जाते हैं, जिसकी मौजूदगी की वजह से इसका रंग हरा होता है, इसके मनीभ प्राकृतिक रूप से अष्टभुजा कार के पाए जाते हैं, इसमें थोड़ी मात्रा में सोडियम पोटैशियम लिथियम जैसे तत्व पाए जाते हैं।

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पन्ना रत्न को ध्यान से देखने पर ऐसा प्रतीत होगा जैसे हरे रंग की रोशनी इससे प्रसारित हो रही हैl यह रत्न देखने में बहुत ही चमकदार सुंदर ,चिकना एवं स्वच्छ होता हैl इसके साथ ही इस का घनत्व भी अधिक होता है, इसे जब आप ऊष्मा ऊर्जा प्रदान करेंगे या इसे ताप पर गर्म करेंगे तो यह दड़केगा या चटकेगा नहींl यह विभिन्न रत्नों के समान बहुत कठोर होता है, किंतु यदि यही कृत्रिम रूप से निर्मित पन्ना रत्न होगा तो ताप में वह चटक जाएगा उसके टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे।

इसे धारण करने वाले जातकों के द्वारा निम्नलिखित लाभ प्राप्त होता है-

पन्ना रत्न मुख्यतः बुध ग्रह को संतुलित करने के उपलक्ष्य में धारण किया जाता है lइसे धारण करने वाले जातक के जीवन में बहुत से बदलाव देखने को मिलते हैं, उसकी मान प्रतिष्ठा में वृद्धि होने लगती हैl मन में शीतलता का भाव, शांति का भाव उत्पन्न होता हैl उसके संचार तंत्र सुचारू रूप से काम करने लगते हैंl उसकी वाणी शहद के समान मीठी होने लगती है, तथा किसी भी प्रकार की वाणी दोष उससे समाप्त होने लगता है, पूरी तरीके से उसके व्यक्तित्व का रूपांतरण होने लगता है, जो उसके लिए सकारात्मक होता हैl उसकी आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत होने लगती है, वाकपटुता जैसे कलाओं का वह स्वामी हो जाता है, मानसिक तथा बौधिक विकास भी तेजी के साथ होता है।

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बुद्धि तीव्र गति के साथ कार्य करती हैl रचनात्मक विकास उसे एक स्वर्णिम स्तर तक ले जाता है, तथा आपसी घर परिवार के लोगों के साथ अथवा बाहर के लोगों के साथ जो भी उसके रिश्ते बिगड़ चुके थे उन सभी में यह रत्न बहुत कार्य करता है, तथा उनके रिश्तो में मधुरता लाता है, तथा प्रगाढ़ प्रेम स्थापित करता है, जब भी जातक को आवश्यकता होती हैl उनके रिश्तेदारों से उसे सहयोग प्राप्त होता है, इसे धारण करने वाले जातक के मन में असीम शांति का वास होता हैl विभिन्न प्रकार की क्रियाकलापों में वह भाग लेता है, तथा उसमें प्रवीणता के साथ अपना कौशल दिखाता हैl उसे वैभव ,सुख समृद्धि आदि की प्राप्ति होती है, उसका यश दिन दुगनी रात चौगुनी बढ़ता है।

विभिन्न प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति उसे होती है, उसके जीवन में किसी तरह की भी कमी नहीं रहती है, उसके व्यक्तित्व में ऐसा जादू होता है, जिसकी ओर लोग स्वयं ही खींचे चले आते हैंl उसे समाज में बहुत मान सम्मान की प्राप्ति होती हैl जातक में स्मरण शक्ति में गजब की वृद्धि होती है, उसका शरीर आकर्षक बनता है, स्वास्थ्य संबंधित विभिन्न परेशानियां समाप्त होती है तथा पन्ना रत्न उसे बलवर्धक, आरोग्य दायक एवं सुख देने वाला होता हैl एकाग्रता को बढ़ाता है, तथा मन मन के विभिन्न विचारों को भी यह नियंत्रित करता है, तथा उसे केंद्रित करता है, जिसकी वजह से जातक अपने बड़े से बड़े लक्ष्य को भी आसानी से प्राप्त करने में सक्षम होता हैl यह रत्न प्रकृति द्वारा प्रदान किया गया यह एक चमत्कारिक, अनमोल ,अतुलनीय वरदान है, जिसकी परिकल्पना हम या आप नहीं कर सकते हैंl इसकी असीम क्षमताओं का लाभ इसे धारण करने के पश्चात ही हमें प्राप्त हो सकता है, बशर्ते कि हमारे द्वारा प्राप्त किया गया पन्ना रत्न प्राकृतिक रूप से निर्मित हो कृत्रिम रूप से नहीं।

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पन्ना रत्न धारण करने का सबसे उपयुक्त समय बुधवार के दिन अश्लेषा, जेष्ठा, रेवती नक्षत्र को माना जाता है lयह सभी नक्षत्र अति उत्तम होते हैं lपन्ना रत्न धारण करने के लिए ऐसा माना जाता है, कि इस वक्त धारण करने से इस रत्न की शक्तियां और भी अधिक बढ़ जाती है, इसका ऊर्जा अपने उच्चतम स्तर पर होता हैl इसे किसी भी बुधवार के दिन अभिमंत्रित करने के पश्चात सुबह 10:00 बजे से पहले धारण किया जाता है, इसे कानी उंगली या कनिष्ठा उंगली दाएं या बाएं हाथ की में पहना जाता है, इस रत्न को आप चांदी या सोने की धातु में धारण कर सकते हैं, इसे धारण करने के पश्चात आपको मांस मदिरा का सेवन करना नहीं चाहिए।

वर्जित चीजों से जितना हो सके उतनी दूरी बनाकर रखेंl घर में मां ,बहनों ,बुआ आदि से आशीर्वाद प्राप्त करेंl इससे इसका प्रभाव दोगुनी गति से काम करेगा इसकी ऊर्जा और अधिक बढ़ जाएंगी, किसी भूखे को भोजन अवश्य कराएं lमंदिर में जाकर भगवान का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें तथा पंडित जी को अपने क्षमता अनुसार दान दक्षिणा अवश्य दें, और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करेंl यह रत्न आपके भाग्य को जगाने की क्षमता रखता है, जो आपको इसे धारण करने के कुछ ही दिनों में पता चल जाएगा यह एक अद्भुत रत्न है।

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