नीलम रत्न पहनने की विधि – Neelam Ratna Pahanne Ki Vidhi

नीलम रत्न पहनने की विधि – Neelam Ratna Pahanne Ki Vidhi

 

 नीलम रत्न पहनने की विधि –

नीलम रत्न पहनने की विधि- आज का हमारा विषय हैl नमस्कार मित्रों जय भवानी आज हम चर्चा करेंगे कि नीलम रत्न पहनने की सही विधि क्या है???

नीलम रत्न को शनि रत्न के नाम से भी जाना जाता है, तथा इसमें अद्वितीय गुणों का भंडार मौजूद है। नीलम रत्न शनि ग्रह के दुष्प्रभाव को खत्म करने में सक्षम है, इसमें प्राकृतिक तौर पर अद्भुत क्षमताओं का वास होता है, जो हमारे जीवन में शनि ग्रह के विपरीत परिस्थितियों को भी अनुकूल परिस्थितियों में परिवर्तित करने की क्षमता रखता हैl नीलम रत्न का संयोजक टाइटेनियम, क्रोमियम ,तांबा, मैग्नीशियम जैसे तत्व है, बहुत से लोगों का यह मानना है, कि नीलम रत्न का वर्ण नीला अपराजिता पुष्प के समान होता है, किंतु विभिन्न प्रकार के नीलम रत्न पूरे विश्व में पाए जाते हैं, इनके रंग गुलाबी, नारंगी, सतरंगी आदि भी हो सकते हैं।

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 कृतिम नीलम की तो बहुत से रंग आपको देखने को मिल जाएंगे। लाल ,पीला, नीला, हरा, बैंगनी जैसा रंग आपको पसंद है lवैसा आपको मिल जाएगा उससे आप विभिन्न प्रकार के आभूषण, साज-सज्जा की चीजें, कलाई घड़ी आदि को बनाने में उपयोग किया जाता हैl कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अंदर भी इसका प्रयोग किया जाता है नीलम रत्न दुनिया के विभिन्न देशों में पाया जाता है, उत्कृष्ट नीलम आपको कई देशों से प्राप्त हो सकते हैं, जैसे- तंजानिया, थाईलैंड ,वियतनाम, अफ़गानिस्तान, म्यानमान, नाईजीरिया, श्रीलंका, नेपाल, मेडागास्कर आदि किंतु जो बात कश्मीर के नीलम में होती है।

शायद ही वह किसी और जगह के नीलम में हो, जम्मू कश्मीर से प्राप्त नीलम रत्न बहुत ही सर्वोत्तम गुणों वाला होता है, तथा इसका मूल्य भी बहुत अधिक होता है, और नीलम के मुकाबले, वैसे आपको जानकर बहुत अधिक आश्चर्य होगा कि दुनिया के कुछ हिस्सों में रंग बदलने वाला नीलम भी प्रकृति के द्वारा हमें प्रदान किया गया है।

यह एक दुर्लभ रत्न है, जो थाईलैंड, तंजानिया सहित विभिन्न स्थानों पर पाया जाता है, इसकी रंग बदलने की क्षमता इसके अंदर मिली हुई अशुद्धियां क्रोमियम तथा वैनेडियम की वजह से होता हैl नीलम रत्न का ऐतिहासिक महत्व भी कुछ कम नहीं है, जैसे- बिस्मार्क नीलम हार -इस नीलम को म्यानमार के खदानों से खनन किया गया था यह नीलम पत्थर बहुत ही अद्भुत है, तथा अभी भी इसे संजोकर रखा गया है l

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लोगन नीलम- यह नीलम ऐसा माना जाता है, कि अंडे का आकार है, तथा यह काफी प्रसिद्ध नीलम है, जिसे प्राकृतिक इतिहास का राष्ट्रीय संग्रहालय वाशिंगटन में रखा गया हैl द डायस्टार ऑफ बांबे -इसकी उत्पत्ति श्रीलंका के खदानों से हुई थी तथा यह एक्सो बेरासी कैरेट का है lभारत का सितारा यह पत्थर 563 कैरेट का है,

सभी नीलम रत्नों का इतिहास में बहुत से अनसुलझे पहेलियों के साथ विद्वत है, अभी भी इन सभी को संजोकर कड़ी सुरक्षा के बीच विश्व के प्रसिद्ध संग्रहालयओं में इनको रखा गया है। पौराणिक काल से ही हमारे पूर्वजों द्वारा विभिन्न प्रकार के रत्नों का इस्तेमाल किया जाता रहा है।

विभिन्न प्रकार के रत्नों का उपयोग अलग-अलग ग्रहों तथा उपग्रहों के गोचर के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए किया जाता रहा है, हमारे जीवन पर सभी नौ ग्रहों का गोचर बारी-बारी से होता रहता है, तथा इनके परिणाम हमें कभी सकारात्मक तो कभी नकारात्मक मिलते हैं, किंतु शब्द से अधिक डर यदि किसी ग्रह का होता है, तो वह ग्रह है, शनि ग्रह, जिसे सौर्य मंडल का दूसरा सबसे ग्रह के रूप में जाना जाता है, जिसकी वलय सुक्ष्म पत्थरों तथा बर्फ के टुकड़ों से बनी हुई होती है।

शनि देव को सूर्यपुत्र भी कहा जाता हैl शनि ग्रह एक छाया ग्रह है, जिसे दुख, कष्ट, पीड़ा आदि के लिए जाना जाता है, यदि किसी जातक की कुंडली में शनि की ढैया ,महादशा, अथवा बली शनि अथवा वक्र दृष्टि हो जाए तो उसका जीवन समझिए नर्क से कम नहीं रह जाता है।

उसके जीवन में एक परेशानियां खत्म होंगी तो 10 परेशानियां सामने आ जाएंगेl उसके दुखों का जल्दी अंत नहीं होता lउसे किसी भी प्रकार से सामाजिक स्तर पर या घर परिवार के लोगों के द्वारा सहयोग प्राप्त नहीं होता है, ऐसा व्यक्ति भावनात्मक स्तर पर बहुत खुद को अकेला पाता हैl खुद के ही दिमागी उलझनों में उलझा रहता है तथा जीवन जीना भूल जाता हैl उसका जीवन उसे निरस लगने लगता है, तथा जीवन का मूल स्वरूप क्या है, उससे वह बहुत दूर चला जाता हैl उसमें निराशा इतनी अधिक बढ़ जाती है, कि वह मानसिक अवसाद का शिकार तक हो जाता हैl विभिन्न प्रकार की शारीरिक बीमारियां उसे घेरने लगती है, जैसे- किडनी संबंधित बीमारियां ,लीवर संबंधित बीमारियां को संबंधित बीमारियां घर परिवार में भी कल का माहौल बना रहता है।

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गृहस्थी की गाड़ी भी डामाडोल स्थिति में रहती है, उसका जीवन बहुत ही दयनीय हो जाता है, किंतु इसका मतलब यह नहीं है, कि यह सारी चीजें केवल शनि ग्रह के द्वारा दी जा रही परेशानियां हैं, बल्कि शनि ग्रह तो केवल हमारे कर्मों का लेख रखते हैं, तथा उसी के अनुसार हमें पुरस्कार अथवा दंड देते हैं, यदि हमारे कर्म अच्छे हुए तो हमें अच्छे परिणाम मिलेंगे यदि हमारे कर्म बुरे हुए तो हमें बुरे परिणाम मिलेंगे।

शनि ग्रह के बारे में ऐसा भी माना जाता है, कि यदि जातक के भाग्य में कुछ ऐसा नहीं लिखा हुआ है, जिसकी वह कामना कर रहा है, किंतु यदि वह दृढ़ संकल्पित होकर अपनी कर्मठता उस कार्य को करने में दिखाएं तथा खुद को पूरी तरह से समर्पित कर उस कार्य को सफल बनाने का प्रयास करें तो ऐसे में वह व्यक्ति शनि देव का कृपा का पात्र बन जाता है, और शनि के कृपा पात्र से ही बहुत सी महत्वाकांक्षाओं को पूर्ण करने में सफल हो पाता है, इसलिए शनि ग्रह केवल हमें हमारा कर्म सही से करना सिखाना चाहते हैं।

 वह चाहते हैं, कि हर व्यक्ति संसार का अपना कर्म इमानदारी से करें तथा जो लोग गरीब तबके से हैं, निर्बल है, उन्हें किसी भी तरह से तंग ना किया जाए, ना उनका फायदा उठाया जाए ,ना उन्हें ठगा जाएl शनि ग्रह तो केवल पूरे विश्व में संतुलित स्थापित करने के लिए जाने जाते हैंl यह एक न्याय प्रिय देवता है, जो जब न्याय करते हैं, तो अच्छे अच्छे लोगों की स्थिति दयनीय बनाकर छोड़ते हैं।

अतः हमें अपने कर्मों पर अधिक ध्यान देना चाहिए तथा अपने कर्म हमेशा अच्छे रखनी चाहिए विचार अच्छे रखना चाहिए, आलस्य को त्याग कर मेहनत कर कुछ हासिल करने की जिज्ञासा हमेशा अपने मन में बनाए रखना चाहिए, तभी जाकर हम शनि ग्रह के कृपा के पात्र बन पाएंगे एवं नीलम रत्न धारण कर अपने जीवन को सुगम एवं सफल बनाने में सक्षम हो।

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नीलम रत्न को धारण करने की भी एक सटीक विधि है, जिसके द्वारा हम इस रत्न के अत्यधिक लाभ को प्राप्त कर सकते हैं- नीलम रत्न को पंचधातु या फिर सोने या चांदी या प्लैटिनम में जड़वा कर धारण किया जा सकता है। नीलम रत्न को बाएं हाथ की मध्यमा उंगली अथवा दाएं हाथ की मध्यमा उंगली में भी धारण कर सकते हैं,बहुत से लोगों के द्वारा इसे पेंडेंट की तरह गले में भी पहना जाता है, किंतु इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि नीलम रत्न से बनी हुई अंगूठी को या पेंडेंट हो अभिमंत्रित करने के पश्चात ही धारण करना चाहिए, पहले इसे गंगाजल से धुलने के बाद शनि ग्रह के मंत्रों से अभिमंत्रित कर अर्ध रात्रि में धारण करना चाहिए, इससे आपको इस रत्न का अप्रतिम कृपा प्राप्त होगा तथा इस में विद्यमान अद्वितीय शक्तियां आपको प्राप्त होंगी।

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