नीलम रत्न की जानकारी – Neelam Ratna Ki Jankari

नीलम रत्न की जानकारी – Neelam Ratna Ki Jankari

 

 नीलम रत्न की जानकारी –

नीलम रत्न की जानकारी विभिन्न परिपेक्ष के आधार पर आज हम जाने का प्रयास करेंगे-

नीलम रत्न शनि ग्रह से संबंधित एक रत्न है, जो अपने अंदर अद्भुत एवं अलौकिक शक्तियां समाहित रखता है, यह एल्युमीनियम भस्म होता हैl यह हमें विविध रंगों में देखने को मिलता है, इसका पीला नीला गुलाबी नारंगी काला भूरा कुछ भी हो सकता है, किंतु यह सारे नीलम के रंग बहुत ही दुर्लभ होते हैं,जो विश्व के सुदूर इलाको में पाए जाते हैंl नीलम रत्न श्रीलंका वियतनाम मेडागास्कर पूर्वी अफ्रीका अफगानिस्तान आदि जैसे देशो में भी पाया जाता है, किंतु सबसे सर्वोत्तम नीलम रत्न की विशिष्ट गुणवत्ता भारत के पाडर पहाड़ियों के बीच स्थित है, किंतु इस जगह से नीलम का उत्पादन बहुत कम होता है, तथा सबसे अधिक नीलम रंग के नीलम यही पाए जाते हैं, बाकी जगह पाए जाने वाले नीलम पत्थर का रंग हल्का नीला होता है, शायद यही कारण है, कि नीलम जो पाडर पहाड़ियों से पाया जाता है, बहुत बहुमूल्य होता है।

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नीलम रत्न से प्रकार-
1. गुलाबी नीलम इस नीलम का प्रयोग मुख्यता विविध प्रकार के आभूषण बनाने में किया जाता है, इसका रंग जितना गहरा होता है, यह उतना अधिक मूल्यवान होता है।

2. तारांकित नीलम – इसकी संरचना ऐसी संगठित होती है, कि जब आप इसे ध्यान से देखेंगे तो विभिन्न प्रकार की रेखाएं मिलकर एक तारक स्वरुप बनाती है, तथा इससे जो प्रकाश निकलता है lएकदम तारे के समान अंकित होता है, इसका सयोजक टाइटेनियम ऑक्साइड होता है।

3. पदपरदशा नीलम- यह एक अति दुर्लभ नीलम है, जिसका रंग मुख्यत गुलाबी अथवा नारंगी हो सकता है, तथा इसकी कीमत नीलम पत्थर जो नीला होता है, उसे कहीं गुणा अधिक यह महंगा होता है, इसके खान बहुत कम जगह पर पाए जाते हैं, पूर्वी अफ्रीका ,श्रीलंका आदि में उसके खान मौजूद है।

4. सतरंगी नीलम -यह एक अत्यंत दुर्लभ नीलम पत्थर है, जो प्रायः थाईलैंड, तंजानिया , विभिन्न स्थानों पर पाया जाता है, तथा इसमें रिंग रंग बदलते की खूबी मौजूद होती है जो कि इसके योजक क्रोमियम एवं वैनेडियम की वजह से होता है।

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विभिन्न प्रकार के रंगों के नीलम पत्थर विभिन्न दुर्लभ क्षेत्रों के विभिन्न देशों में पाए जाते हैं।

कभी-कभी ऐसा भी होता है, कि इस पत्थर को खरीदने की छमता हर किसी के पास नहीं होती है, वैसी परिस्थिति में लोगों के द्वारा इसके उपरत्न धारण किए जाते हैं, इसके विभिन्न उपरत्न निम्न प्रकार से हैं- इशरत उनके बहुत सारे उपरत्न है, जैसे नीली या कटारा ,लाजवंती, लिलीया फिरोजा आदि को आंशिक रुप से नीलम रत्न के स्थान पर धारण किया जाता है। नीलम रत्न का सबसे अच्छा उप रत्न तजनाईट को माना जाता है, जिसे चांदी में पिरोकर पहला जाता है, क्योंकि यह आपके मन मस्तिष्क और शीतलता प्रदान करता है, चांदी मन को शांत रखता है, फिरोज जो हमारे मन मस्तिष्क को शांति प्रदान करता है, तथा यह उपरत्न विकट से विकट परिस्थिति में भी हमें अपना धैर्य खोने नहीं देता है, तथा इस धारन करने से हमें शांत रहने की शक्ति प्राप्त होती है।

नीलम रत्न या उसके उप रत्नों को हमें सोना चांदी या पंच धातुओं में पिरो कर पहनना चाहिए, इससे हमें विभिन्न प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं।

नीलम रत्न धारण करने के लाभ-
 5.यह रत्न शनि ग्रह से संबंधित विभिन्न प्रकार के दोषों को दूर करता है।
6. विभिन्न प्रकार के औषधीय गुणों से युक्त नीलम रत्न का उपयोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों में भी उपयोगी होता है, जैसे- अनिद्रा, बेचैनी ,पागलपन ,मानसिक अवसाद, किडनी संबंधित बीमारी वायु संबंधित बीमारी आदि।

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7. यह रत्न शनि के अद्भुत शक्तियों से युक्त होता है, तथा इसे धारण करने वाला व्यक्ति में स्वतह ही अनुशासन ,नैतिकता जैसे गुण आ जाते हैं।

8. इस रत्न को धारण करने वाले व्यक्ति को रुपयों पैसे संबंधित परेशानियों का खात्मा होने लगता है, तथा उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है एवं वह धन संचय करने में कामयाब रहता है।

9. रत्न को धारण करने वाला व्यक्ति दृढ़ संकल्पित होता है, तथा अपनी कर्मठता से असंभव को भी संभव करने की क्षमता रखता है।

10. इस रत्न को धारण करने से लोगों को असीम शांति की प्राप्ति होती है तथा उनमें वाकपटुता जैसे गुण आने लगते हैं lउनके व्यक्तित्व का रूपांतरण होने लगता हैl उनमें अजीब सी चुंबकीय तत्व मौजूद होता है, जिससे लोग उनकी बातों को सुनते हैं lउनके विचारों को समझते हैं तथा उन्हें उनके कार्यों की सराहना भी करते हैं lकुल मिलाकर ऐसे लोगों को बहुत ही अधिक मान सम्मान समाज में प्राप्त होता है, इनकी समाज में एक अपनी उचित पद प्रतिष्ठा रहती है।

11. इन लोगों का दांपत्य जीवन भी खुशियों से भरा हुआ रहता हैl कार्यस्थल तथा घर परिवार में सही सामंजस्य बैठाने की वजह से इन्हें किसी भी जगह दिक्कत नहीं होता है तथा घर परिवार का सहयोग भी हर परिस्थिति में प्राप्त होता है।

नीलम रत्न धारण करने के नुकसान-
1. यदि यह रत्न किसी को नहीं धारता है, तो ऐसी परिस्थिति में उसे बहुत से दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ता है।

2. यदि आपकी कुंडली में शनि का केतु के साथ किसी भाव में संबंध बना रहा है, और आपके द्वारा नीलम रत्न धारण किया गया है, तो ऐसे में आपको बहुत सी बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है, विभिन्न प्रकार की बीमारियां आए दिन लगी रहेंगे।

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3. यार अब धारण करने के पश्चात आपको अच्छे विचार नहीं आ रहे हैं, तथा आपके मन में नकारात्मक ता बढ़ गई है, तो ऐसी परिस्थिति में तुरंत ही इस रत्न को उतार देना चाहिए अन्यथा इसके परिणाम आगे चलकर बहुत भयंकर हो सकते हैं।

4. यदि यह रत्न आपकी कुंडली के अनुकूल नहीं हुआ तो आपके जीवन में उथल-पुथल मचा कर रख देगा क्योंकि नीलम रत्न एक ऐसा रत्न है, जो बहुत ही त्वरित गति के साथ काम करता है, तथा अपने प्रभाव सकारात्मक हो या नकारात्मक दोनों ही प्रभाव को तुरंत देने लगता है, ऐसी परिस्थिति में बिना सोचे समझे इस रत्न को धारण ना करें पहले अपनी कुंडली की सटीक गणना करवाएं उसके पश्चात ही इस रत्न को धारण करें।

इस रत्न को धारण करने की विधि- नीलम रत्न को शुक्ल पक्ष के पहले शनिवार को धारण किया जा सकता है, इसको धारण करने का सबसे उपयुक्त समय मध्यरात्रि अथवा सूर्य उदय से पूर्व बताया गया हैl इसे सर्वप्रथम शनि मंत्रों से उच्चारण कर अभिमंत्रित करने के पश्चात ही धारण किया जा सकता है, किंतु इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि आपको इसे धारण करने के पश्चात किसी को भी कटु वचन नहीं बोलना है, तथा किसी का अपमान नहीं करना है, तथा मांस मदिरा का सेवन आदि करना भी वर्जित है, दान पुण्य अवश्य करें तथा किसी भूखे को भोजन अवश्य करवाएं।

आशा है, आप सभी को इस लेख के माध्यम से नीलम रत्न से संबंधित विभिन्न प्रकार की जानकारियां प्राप्त हो गई होंगी, आप सभी लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद।आप हमारे वेबसाइट के माध्यम से विशिष्ट प्रकार की जानकारियां हासिल कर सकते हैं।

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