नीलम रत्न की जानकारी – Neelam Ratna Ki Jankari

नीलम रत्न की जानकारी – Neelam Ratna Ki Jankari

 

 नीलम रत्न की जानकारी –

नीलम रत्न की जानकारी आज हम आपको विस्तृत स्तर पर देने जा रहे हैंl इसमें हम नीलम रत्न से संबंधित विभिन्न पहलुओं की चर्चा करेंगे तथा जानेंगे जी क्या खास है, इस रत्न में-

नीलम एक रत्न है, जो हमें पृथ्वी के गर्भ से प्राप्त होता है, यह रत्न कोरेंडम परिवार से संबंधित होता है, इस रखना निर्माण सब होता है, जब लव टाइटेनियम को और एडम के भीतर मौजूद होता है, तथा अग्निय चट्टान में पाया जाता है, जबान चट्टानें धीरे-धीरे ठंडा पड़ती जाती है, तो खनिजों के बड़े-बड़े क्रिस्टल उनसे बनते हैं, जो मेग्मा के भीतर मौजूद होते हैं, इस प्रकार अग्निय चट्टानों के निर्माण से उत्कृष्ट नीलम रत्न का निर्माण होता है, इसे नीलमनी भी कहा जाता है, ऐसा माना जाता है, कि नीलम रत्न में अलौकिक शक्तियां विद्वान रहती है, यह रत्न अपने अंदर बहुत सारी ऊर्जाओ को समाहित करके रखता है।

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यह एक अति मूल्यवान संसाधन है, जो विश्व के कुछ ही दुर्लभ स्थानो में पाया जाता हैl भारत में सबसे उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले नीलम रत्न जम्मू कश्मीर से प्राप्त होता हैl लद्दाख तथा कश्मीर के बीच स्थित पाडर पहाड़ियों में इस पत्थर के दुर्लभ खदान है किंतु यहां की खदानों से नीलम रत्न प्राप्त करना इतना आसान काम नहीं हैl यह जगह 9 महीने तक बर्फ में दबी रहती है, तथा यहां पहुंचने के रास्ते भी सुगम नहीं हैl दुर्गम रास्तों से होकर यहां की यात्रा 3 दिन तक चलती हैl उसमें भी ग्लेशियर ,तूफानी नदी ,बर्फ के थपेरे इस यात्रा को और भी थकाने ,दुर्लभ एवं रोमांच एवं डर से भर देता हैl यहां से प्राप्त होने वाला नीलम का रंग बिल्कुल मोर के रंग के समान होता है, तथा सबसे अधिक गहरा रंग यहीं पर पाए जाने वाले नीलम रत्न का होता है।

इसी वजह से यहां के नीलम रत्न की मांग बहुत अधिक है, जबकि और जगह के नीलम पत्थर इसके जितना अधिक आकर्षण पूर्ण नहीं रहता हैl इस जगह का नीलम विश्व में बहुत प्रसिद्ध है,तथा अपने मूल्यवान होने के लिए जाना जाता है, यहां का नीलम बहुत ही दुर्लभ एवं बहुमूल्य होता हैl श्रीलंका, पाकिस्तान ,अफगानिस्तान आदि देशो से मिलने वाले नीलम की तुलना में यहां का नीलम श्रेष्ठ गुणवत्ता वाला होता है, वैसे तो भारत के विभिन्न प्रदेशों में भी इस पत्थर के मिलने के बहुत आशार नजर आते हैं, जैसे -देव भूमि हिमाचल के चंबा जिला के पागी घाटी में भी नीलम रत्न के प्रमाण मिले हैं, किंतु अभि तक यह निर्धारित नहीं किया गया है, कि यह कितनी मात्रा में उपलब्ध है तथा उसकी गुणवत्ता क्या है?? इन सभी चीजो पर जांच अभी चल रही है।

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झारखंड के रत्न गर्भ भूमि पर नीलम पत्थर के खदान मिलने के प्रबल संकेत जमशेदपुर में खेउरडारी के घने जंगल में नीलम का पूरा पहाड़ होने की प्रबल संभावना जताई गई हैl पहाड़ों के उपर चट्टानों की प्रारंभिक जांच से इस बात की पुष्टि की गई है, कि यहां नीलम रत्न के पहाड़ मिलने के पूरे असार है, इसकी वैज्ञानिक जांचें और विस्तृत खोज अभी बाकी हैl ओडिशा के गंजाम जिले की गोदावरी और महानदी उसके बीच ही घाटी में भी नीलम पत्थर पाया जाता है, किंतु आवश्यकता से अधिक मांग होने की वजह से नीलम पत्थर को मुख्यत आयात किया जाता है।

भारत के पडोसी देशो जैसे -अफगानिस्तान, श्रीलंका आदि, विश्व में श्रीलंका के भी नीलम रस काफी प्रसिद्ध हैl उनकी गुणवत्ता भी बहुत अच्छी होती है, वैसे आपको इस बात से हैरानी होगी कि नीलम के और भी बहुत से रंग पाए जाते हैं, गुलाबी रंग ,पीला रंग ,काला रंग, भूरा रंग रंग दलने वाला नीलम, तारांकित नीला आदिl प्राय इनका रंग इनमें मिली हुई अशुद्धियों की वजह से निर्धारित होता है, अभी हाल में ही प्रकाशित खबर से पता चला है, कि श्रीलंका की एक खान से दुनिया का सबसे बड़ा नीलम रत्न प्राप्त हुआ है, जिसका वजन 1404.49 कैरेट है।

प्राकृतिक नीलम के चमत्कारी गुण-
प्राकृतिक रूप से उपलब्ध नीलम की घनत्व काफी ज्यादा होती हैl यह रत्न जब सूर्य की रोशनी अथवा चंद्र की रोशनी में रहता है, तब एक समान नीले रंग की रेखाएं उत्सर्जित करता है lयह गर्म प्रवृत्ति का होता है, इसके अंदर प्राकृतिक रूप से मौजूद बहुत से रेखाएं जाल आदि मौजूद रहता है lशुद्ध दूध को यह नीला रंग में परिवर्तित कर सकता है, जबकि कृत्रिम रूप से निर्मित नीलम रत्न में उपर्युक्त में से कोई भी गुण नहीं होता है।

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यह रत्न त्रिलोक के दंडाधिकारी एवं मुख्य न्यायाधीश शनि ग्रह को समर्पित है।
1. जिस जातक के द्वारा नीलम रत्न धारण किया जाता है lउसमें धैर्य की वृद्धि होती है, जिससे वह एक धनवान व्यक्ति के रूप में समायोजित होता है, जहां लोग विकट परिस्थिति को देख कर भाग खड़े होते हैं, ऐसी परिस्थिति में भी यह लोग अडिग होकर अपना कार्य करते रहते हैं।

2. यह रत्न हमारे निर्णय क्षमता को बढ़ाता है, जिससे हम विकट से विकट परिस्थिति में भी सही निर्णय ले पाते हैं, और जीवन के विभिन्न आयामों में सफलता प्राप्त करते हैं।
3. यह रत्न हमारे रचनात्मक शक्ति को काफी बढ़ाता है, जिससे हमें नए-नए विचार आते हैं, और उन विचारों को हम धरातल पर उतारकर अपने सपनों को पूरा करते हैं।

4. यह रत्न हमें एकाग्रता प्रदान करता है जिससे हम अपना कार्य अच्छे से कर पाते हैं lविभिन्न प्रकार की उलझन ओ से खुद को मुक्त पाते हैं।

5. इस रत्न को धारण करने से शत्रु पर हमें विजय प्राप्त होता है, कोट कचहरी आदि संबंधित चीजों में भी हमें विजय प्राप्त होता है।

6. इस रत्न का औषधीय गुण भी कम नहीं है, अनिद्रा मानसिक अवसाद आदि जैसे चीजों में यह रामबाण के जैसा कार्य करता है।

शनि ग्रह से संबंधित विभिन्न दोषों शनि की ढैया ,शनि की साढ़ेसाती, महादशा आदि में इस रत्न को धारण किया जाता हैl एक तरफ यह रत्न चमत्कारी गुणों से परिपूर्ण होता है, तो दूसरी तरफ इसमें विध्वंसक शक्तियां भी विद्यमान रहती है, इसलिए इस रत्न को धारण करने से पूर्व किसी विद्वान पंडित के द्वारा अपनी कुंडली की गणनाओ की अच्छे से जांच पड़ताल के पश्चात ही इस रत्न को धारण करें क्योंकि इसके प्रभाव सकारात्मक भी हो सकते हैं, और नकारात्मक भी हो सकते हैं।

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