नीलम रत्न किस दिन धारण करना चाहिए – Neelam Ratna Kis Din Dharan Karna Chahiye

नीलम रत्न किस दिन धारण करना चाहिए – Neelam Ratna Kis Din Dharan Karna Chahiye

 

नीलम रत्न किस दिन धारण करना चाहिए

नीलम रत्न किस दिन धारण करना चाहिए?? जिससे हमें उसके बहुत से लाभ प्राप्त हो सके। यह रत्न पूरे लोगों के न्यायधीश एवं दंडाधिकारी शनि ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है, तथा इसमें अनंत रूप से बहुत सी शक्तियां विद्यमान होती है। अलौकिक एवं पारलौकिक शक्तियों का भंडार इस में विद्यमान रहता है, जिससे लोगों के यह दिन पलटने की क्षमता रखता हैl यह रत्न एक विध्वंसक रत्न के रूप में भी जाना जाता हैl यह एक अद्वितीय रत्न है, जो हमें प्रकृति के द्वारा प्रदत किया गया हैl इस रत्न को किसी विशिष्ट दिन धारण करने से इसके प्रभाव अप्रतिम रूप से देखने को मिलते हैं।

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दिन -विभिन्न प्रकार के दिन हमारे ऊपर अलग-अलग प्रभाव डालते हैं, तथा यह विभिन्न प्रकार के ग्रहों से संबंधित होते हैंl हम किस दिन जन्म लेते हैंl उस दिन का हमारे ऊपर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है, तथा हमारे हाव भाव हमारा स्वभाव हमारी सोचने समझने की शक्ति भी उसी ग्रह के स्वभाव के अनुरूप होता है, जैसे- सोमवार का दिन ऐसा माना जाता है, कि सोमवार का दिन चंद्र ग्रह से संबंधित होता है, तथा जितनी भी मानसिक परेशानियां हमें जीवन में मिलती हैl उन सभी का कारक चंद्र है, क्योंकि चंद्र को मन का कारक चंचलता का कारक माना जाता है।

मंगलवार जिसे मंगल ग्रह के प्रभाव के लिए जाना जाता है, ऐसा माना जाता है, कि मंगलवार के दिन मंगल ग्रह का प्रभाव बहुत अधिक रहता है। मंगल जिसे ऊर्जा तथा उत्साह का प्रतिनिधि माना जाता है। यदि आपके अंदर पर्याप्त ऊर्जा और उत्साह नहीं है, तो आप अपने लक्ष्य को कभी भी प्राप्त नहीं कर सकते हैं, और यह ग्रह हमें इन दोनों चीजों की पूर्ति करता हैl गुरुवार इस दिन गुरु बृहस्पति ग्रह जिनका प्रभाव सबसे अधिक होता है, तथा सबसे उपयुक्त समय होता हैl विद्यार्थियों के लिए इस समय इस दिन विद्यार्थियों के द्वारा इनकी पूजा आराधना कर ज्ञान की प्राप्ति के लिए वर मांगते हैं।

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यह समस्त ज्ञान विचारों के मालिक होते हैं। इनके बिना हमें ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती है, यही हमारे जीवन जीने के आधार को सृजित करते हैंl उसी प्रकार शनिवार का दिन शनि ग्रह से संबंधित होता है, तथा इस दिन इसका प्रभाव बहुत अधिक होता है, और जिस की कुंडली में यह नीच का होता है lउसके लिए सबसे भारी दिन सप्ताह में से शनिवार का दिन ही होता है। इस दिन ही उसे विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, तथा जीवन में आकस्मिक दुर्घटनाएं भी इसी दिन घटती है। शनि ग्रह जो हमारे कर्मों का फल देने वाले देवता के रूप में जाने जाते हैं।

यह हमारे कर्मों के अनुसार ही हमें फल प्रदान करते हैं। प्रायः इनके द्वारा यदि किसी पर कुदृष्टि पड़ी हुई है, तो जातक बहुत ही आलसी एवं कार्यों को टालने वाला होगाl कभी भी उसके कार्य समय पर समाप्त नहीं होंगेl यदि कोई नवीनतम कार्य करने की शुरुआत करना चाहेगा भी तो उसके राहों में इतने रोड़े आएंगे कि थक हार कर वह उस कार्य को छोड़ देगा या फिर वह कार्य कभी शुरू ही नहीं होगा lकभी-कभी परिस्थिति ऐसे भी बन जाती है, कि जातक के द्वारा अनगिनत प्रयास क्यों न कर लिया जाए किंतु वह किसी भी आयाम में सफलता को प्राप्त नहीं कर पाता है।

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इनकी वक्री दृष्टि किसी के जीवन को तबाह करने के लिए काफी है, जिस किसी की कुंडली में यदि यह गोचर करने लगते हैं, तो उसको दिन में तारे दिखा देते हैंl इनकी दृष्टि ज्योतिष गणना के अनुसार भी शुभ नहीं माना जाता है, ऐसा माना जाता है कि यह एक मारक ग्रह है, तथा दुख पीड़ा बीमारी कष्ट आदि का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन्हें गरीब वर्ग के लोगों मजदूर वर्ग के लोगों असहाय लोग पीड़ित लोग का भी प्रतिनिधि माना जाता है। ऐसा माना जाता है, कि यदि आप किसी असहाय गरीब को कभी भी प्रताड़ित करते हैं, तो ऐसे में आप अपने शनि ग्रह को बहुत अधिक स्तर पर ऊर्जावान बना रहे हैं, जिससे आपकी जीवन में बहुत सी कठिनाइयां आने लगेंगे, तरह -तरह के रोग बीमारी घेरने लगेंगेl लोगों से मनमुटाव भी होने लगेंगे।

आपको कार्य क्षेत्र से लेकर के घर परिवार में भी कलह का ही माहौल देखने को मिलेगा तथा गुप्त शत्रुओं की संख्या अचानक बढ़ जाएगीl उसे बहुत सी लाइलाज बीमारियां घेरने लगती हैl शारीरिक तौर पर भी वह कमजोर होने लगता है। चिरचिरा हट ,अनिद्रा ,पागलपन मानसिक अवसाद जैसे लक्षण भी उस में देखने को मिलने लगते हैं, बिना वजह के आर्थिक क्षति भी होने लगती है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब हो जाती है, किंतु यदि किसी के द्वारा अच्छे कर्म किए जा रहे हैं, तो शनि ग्रह के विभिन्न दोष का निपटारा स्वयं होने लगता हैl यहां तक शनि ग्रह उसे बहुत चीजों में सफलता दिलाने लगते हैं। वह एक धैर्यवान व्यक्ति के रूप में जाने जाने लगता है, तथा उसमें अलौकिक रूप से उसका रूपांतरण होने लगता है।

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उसमें विभिन्न कौशलों का निर्माण होने लगता है, जिससे अपना जीवन को वह सुगम एवं सफल बनाने में सक्षम बन पाता है lउसके हर कार्य अपने आप बनने लगते हैं, लोगों के सहयोग पाकर वह फूला नहीं समाता है। घर परिवार के लोगों का साथ पाकर उसका मन हमेशा आनंदित रहता है। भावनात्मक रूप से भी वह काफी मजबूत होता है, जिसकी वजह से वह सारे रिश्तो का निर्वहन भी बहुत सुंदर तरीके से करता है lघर परिवार में भी लोग उसे बहुत मान सम्मान इज्जत देते हैं lरचनात्मक एवं बौद्धिक विकास भी निरंतर उसके अंदर होते रहते हैं, जिससे नवीनतम विचार उसे आते हैं, और वह उन विचारों को धरातल पर उतार कर अपनी कामयाबी की एक स्वर्णिम पटकथा लिखने में सफल रहता है।

नीलम रत्न के और भी विशिष्ट शक्तियों एवं उर्जाओं को प्राप्त करने के लिए उसे शनिवार के दिन धारण किया जाता है। ऐसा माना जाता है, कि शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार को धारण करने से हमें इसके बहुत से लाभ प्राप्त होते हैं, जिनकी गणना संभव नहीं है। शनिवार को ही शनि ग्रह का दिन माना जाता है, तथा नीलम रत्न को धारण करने के लिए शनिवार का दिन सबसे उत्तम होता है, किंतु बिना ज्योतिषीय सलाह के इस रत्न को बिल्कुल भी धारण ना करें।

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