मोती रत्न किस दिन पहनना चाहिए – Moti Ratna Kis Din Pahanna Chahiye

मोती रत्न किस दिन पहनना चाहिए – Moti Ratna Kis Din Pahanna Chahiye

 

मोती रत्न किस दिन पहनना चाहिए

मोती एक ऐसा रत्न है, जो किसी किसी पत्थर के रूपांतरण या किसी प्रकार के शैल के रूपांतरण से नहीं बल्कि एक जीते जागते जीव के अंदर इसका उद्गम होता है lवह जीव इसका सृजन करता है, जिसकी वजह से मोती रत्न को जैविक रत्न के नाम से भी जाना जाता हैl इस रत्न को सामान्यतः मोलाश्क नामक जीव के द्वारा अपने अंदर सृजित किया जाता हैl यह समुद्री जीवो के द्वारा हमें प्राप्त होता है। मोती एक ऐसा रत्न है, जो चंद्र ग्रह से संबंधित होता है, तथा चंद्र ग्रह की गुप्त शक्तियां इस रत्न में विद्यमान होती है, क्योंकि इसका उद्गम किसी जीव के अंदर होता है, जिसकी वजह से यह हमारे मन मस्तिष्क तथा आंतरिक सूक्ष्म शरीर से काफी जुड़ा हुआ होता है, जब हम इसे धारण करते हैं।

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मोती का वैसे तो सफेद वर्ण बहुत लोकप्रिय एवं बहुत अधिक प्रचलित है, किंतु मोती के और भी रंग पाए जाते हैं, जो काला, गुलाबी ,सफेद आदि कुछ भी हो सकता हैl विश्व के विभिन्न देशों में यह रत्न विभिन्न रंगों में पाया जाता है। यह सारे रंग जो मोती रत्न के होते हैंl वह बहुत दुर्लभ होते हैं, तथा इन्हें प्राप्त करना कोई आसान कार्य नहीं है। शायद यही कारण है, कि इनका मूल्य भी इतना अधिक होता है, कि हर किसी के बस की बात नहीं होती उस मूल्य को चुकाना।

जिस प्रकार ज्योतिष विज्ञान एवं रत्न शास्त्र में विभिन्न रत्नों को अलंकृत किया गया हैl उसी प्रकार मोती रत्न को भी बहुत ऊंची पदवी नौ रत्नों में प्रदान की गई है। मोती रत्न को भारतीय ज्योतिष विज्ञान हो या पाश्चात्य ज्योतिष विज्ञान हर ओर इसकी लोकप्रियता एवं इसके महत्व को विस्तृत रूप से बताया गया है। मोती रत्न चंद्र उपग्रह का विभिन्न शक्तियों का समावेशन अपने अंदर समाहित किए हुए रहता है। इस रत्न में चंद्र से संबंधित विभिन्न प्रकार की ऊर्जा का पूंज विद्यमान रहता हैl चंद्र जो हमारे मन का कारक होता हैl हमारी मानसिक स्थिति कैसी होगी या चंद्र ग्रह के द्वारा निर्धारित किया जाता है, तथा वास्तविक जीवन में चंद्र ग्रह की उपाधि घर की बड़ी महिलाओं तथा माता को निरूपित किया गया है।ऐसा माना जाता है, कि आपकी माता जी चंद्र ग्रह को निरूपित करती है, तथा जैसे संबंध आपकी माता जी के साथ आपके होंगे lउसी प्रकार का प्रभाव आपके जीवन पर चंद्र ग्रह के द्वारा प्रदान किया जाएगा।

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बहुत से ऐसे लोग भी होते हैं, जिनका अपनी माताजी से संबंध ठीक नहीं होता है, तथा अपनी मां को वह बात-बात पर अपशब्द कहते हैं, या बहुत सी स्त्रियां ऐसी होती है, जिनका अपनी सास के साथ बिल्कुल भी नहीं बनती है, कारण जो भी हो , हो सकता है, कि बहू की कोई गलती ना हो या यह भी हो सकता है, कि सास की कोई गलती ना हो किंतु फिर भी दोनों में अनबन बना रहता है, जिससे घर का माहौल पूरी तरह से क्लेश युक्त होता है, हो सकता है, कि किसी परिवार के सदस्य के द्वारा ही दोनों के बीच में आग लगाई जा रही हो किंतु बात जो भी हो फिर भी यदि बहू के द्वारा सास को अपशब्द कहे गए तो ऐसे में उसके चंद्र ग्रह खराब होने की प्रबल संभावना बनी रहेगी तथा वह चाह कर भी चंद्रमा को खुश करने की अनगिनत उपाय कर ले, फिर भी उस पर वह कृपा दृष्टि नहीं करते हैं, जब तक कि उसका संबंध अपनी सास या अपनी माता जी के साथ सही नहीं हो जाता हैl बहुत सारे पुरुष वर्ग के लोग भी होते हैं, जो अपने सास के साथ खराब व्यवहार करते हैं lउन्हें अपशब्द कहते हैं, ऐसे में वे अपने चंद्र को स्वयं ही दूषित करते हैं, एवं उसे क्रोधित करते हैं, चंद्र के दुष्परिणामों को खुद ही निमंत्रण देते हैं।

हमें इन सब चीजों से जितना हो सके उतना दूरी बना कर रखना चाहिए भूलकर भी परिवार के किसी भी सदस्य केवल महिला वर्ग ही नहीं अपितु किसी भी सदस्य को कठोर शब्द या कटु शब्द या अपशब्द जैसे शब्दों का प्रयोग बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए क्योंकि हमारे घर का प्रत्येक सदस्य किसी न किसी ग्रह को निरूपित करता है, तथा उसमें शक्तियां विद्यमान होती है, कि वह उस ग्रह के दुष्प्रभाव को दूर कर सके अतः हम रत्न को धारण करते ही हैंl ग्रह दोषों को दूर करने के लिए साथ में यह भी आवश्यक है, कि अपने घर परिवार में मेलजोल बढ़ा कर रखें तथा परिवार को एक मजबूत डोर में बांधकर रखें, जिससे वह बिखरे नहीं एवं सभी हंसी खुशी रहे और इस जीवन का आनंद खुशी-खुशी उठाएं।

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आपको जानकर आश्चर्य होगा कि मोती भी विभिन्न प्रकार के होते हैं, जैसे गजमुक्ता मोती, बॉस मोती सर्प मोती, वारा मुक्ता, आकाश मुक्ताl इन सब का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में किया गया है, हालांकि यह सभी बहुत ही दुर्लभ अवस्था में किसी भी व्यक्ति को प्राप्त होते हैं, और जिस भी व्यक्ति को प्राप्त होते हैंl उसका सौभाग्य उसका पूर्ण तरीके से उसका साथ देता हैl उसके भाग्य उदित करने में यह रत्न अपनी पूरी शक्ति लगा देता है, तथा इन सभी उपर्युक्त मोती रत्न की यह खासियत होती है, कि आपको जीवन के विभिन्न प्रकार के ऐश्वर्य, सुख -संपदा ,वैभव प्राप्त करने की अद्भुत क्षमता या अद्भुत शक्ति प्रदान करते हैं।

इसमें वराह मुक्ता की खासियत होती है, कि इसे जो भी जातक धारण करता है, उसके जीवन में नकारात्मक उर्जा कभी भी किसी भी तरह से उस से हानि नहीं पहुंचा सकती है। इसके साथ-साथ उस पर कभी भी तंत्र मंत्र या टोने टोटके या नजर जैसे चीजों का असर नहीं होता है। सर्प मुक्ता को धारण करने से भगवान शिव का आशीर्वाद सदैव आपके जीवन पर बढ़ता रहता है, तथा आपके जीवन में आप बहुत सी चीजों को प्राप्त करते हैं, एवं आप जीवन के सर्वोत्तम स्तर तक पहुंचते हैं lआपके जीवन में भौतिक सुखों की कमी नहीं रहती है।

इस दिव्य रत्न को धारण करने का सबसे उपयुक्त दिन शुक्ल पक्ष के सोमवार के दिन माना गया हैl उस दिन पूरे विधि विधान से अभिमंत्रित कर इस रत्न को धारण करने से आपकी सारी मनवांछित इच्छाएं पूर्ण होती हैl चंद्र देव की कृपा दृष्टि आप पर हमेशा बनी रहती है तथा आपके भाग्य में यह वृद्धि करते हैं, एवं आपकी सफलता के मार्ग को प्रशस्त करते हैं।

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