सफेद हीरा किस दिन पहने – Safed Hira Kis Din Pahne

सफेद हीरा किस दिन पहने – Safed Hira Kis Din Pahne

 

सफेद हीरा किस दिन पहने

सफेद हीरा किस दिन पहने- पूरी सृष्टि का जीवन चक्र एक दिव्य चीज पर आधारित है, जिसे हम ऊर्जा पुंज कहते हैं, बिना ऊर्जा पुंज के हर चीज गति हिन जाएगी। हमारा शरीर भी सूक्ष्म शरीर से बना हुआ है, तथा उसके और भी अन्य हिस्से होते हैं, और यह तभी तक कार्यरत होते हैं, जब तक इन्हें ऊर्जा प्राप्त होती रहती है, जिस दिन ऊर्जा का क्षरण पूरी तरह से हो जाता है, शरीर एवं आत्मा पूरी तरह से अलग हो जाती हैl ऊर्जा कभी भी किसी भी तरह से पूरी तरह समाप्त नहीं होता है, बल्कि एक रूप से अनेक रूप में बदल जाता है, यही कारण है, कि सृष्टि का चक्र चलते रहता है, इस गतिमान ऊर्जा पुंज को कभी भी रोका नहीं जा सकता है, सृष्टि के निर्माण कर्ता ने इसमें ऐसी ऐसी संसाधनों का निर्माण किया है, जो विशिष्ट ऊर्जाओ के अद्वितीय स्रोत होते हैं।

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उन्हें विशिष्ट संसाधनों में से एक होता है -रत्न जो कि उर्जाओ से भरपूर शक्तियों से भरपूर होता है। रत्न विभिन्न रंगों के होते हैं, तथा विभिन्न प्रकार के रत्न भिन्न-भिन्न ग्रहों को निरूपित करते हैं, जैसे- गुरु ग्रह जिन्हें पीले रंग की वस्तुएं काफी भाती है। यही कारण है, कि गुरु ग्रह से संबंधित रत्न एवं उपरत्न भी पीले रंग के होते हैं। गुरु ग्रह का स्वामी रत्न पुखराज होता है, जिसका वर्ण पीला होता है। ठीक उसी प्रकार शुक्र ग्रह को सफेद वस्तुएं काफी आती है, यही कारण है, कि इसके रत्न हो या उपरत्न सभी सफेद रंगों में पाए जाते हैं। शुक्र ग्रह की शक्तियों का प्रतिनिधित्व हीरा रत्न के द्वारा किया जाता है।

हीरा जो कि एक पारदर्शी रत्न होता है, तथा रासायनिक क्रियाओं का सबसे शुद्धतम रूप माना जाता है। इस रत्न का संयोजक कार्बन के परमाणु होते हैं, जो बहुत ही शक्तिशाली का संयोजी बंध के द्वारा जुड़े हुए होते हैं, इसलिए सबसे अधिक कठोरतम पदार्थों की सूची में हीरा को सबसे ऊपर रखा जाता है। हीरा की इस गुण का उपयोग की वजह से विभिन्न प्रकार के उद्योगों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के आभूषण आदि बनाने में भी इसका भरपूर उपयोग किया जाता हैl हीरा को उष्मा तथा विद्युत का कुचालक माना जाता है, क्योंकि इसमें एक भी स्वतंत्र इलेक्ट्रॉन नहीं पाए जाते हैं। यही कारण है, कि इसके द्वारा ऊष्मा तथा विद्युत का संचालन नहीं हो पाता है। कभी-कभी इसके संयोजक में अशुद्धियां मौजूद होती है, जिसकी वजह से इसका रंग भिन्न भिन्न होता है, जैसे -लाल, नीला, पीला, हरा ,काला ,नारंगी ऐसा माना जाता है, कि जब इसे पूरी तरह से गर्म किया जाता है lतब यह पूरी तरह से वास्प में बदल जाता है, इससे यह भी प्रमाणित होता है, कि हीरा कार्बन का सबसे शुद्धतम रूप होता है।

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शुक्र ग्रह से संबंधित यह रत्न रत्नों में सबसे श्रेष्ठ समझा जाता है। इसका उपयोग व्यापक तौर पर लोगों के द्वारा अपने वर्ग का प्रदर्शन करने के लिए मुख्यतः उपयोग में लाया जाता है। यही कारण है, की ज्योतिषीय उपाय के अलावा भी लोगों के द्वारा विभिन्न प्रकार के आभूषण इस रत्न के धारण किए जाते हैं। धन-धान्य से परिपूर्ण लोग शादी ब्याह हो या कोई और खास मंगल कार्यक्रम सभी में इससे बने हुए चीजों को अंगीकृत करते हैं, जिससे उनके व्यक्तित्व को यह रत्न और अधिक प्रभावशाली बनाता है, तथा उनकी आर्थिक स्थिति का भी प्रदर्शन किसके द्वारा की जाती है।

शुक्र ग्रह जब खराब होता है, या कमजोर होता है, तो ऐसी स्थिति में अपने अशुभ प्रभाव बहुत अधिक दिखाने लगता है, जिसकी वजह से आर्थिक परेशानियां बहुत अधिक बढ़ने लगती हैl सांसारिक एवं भौतिक वस्तुओं की भी कमी से व्यक्तियों का मन बहुत विचलित रहने लगता है। कमजोर शुक्र दरिद्रता को लेकर आता हैl दरिद्रता का आगमन जातक को और अधिक व्याधियों में डाल देता है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह से विक्षिप्त हो जाती हैl अनावश्यक खर्चे उसकी रुपए पैसे की स्थिति को और अधिक खराब कर देते हैं। धन का व्यय बहुत अधिक होने लगता है, जिससे जातक कर्ज की मुझसे भी तबले लगता है।

समय के कुचक्र एवं शुक्र ग्रह की मार से जातक की आकर्षण शक्ति भी पूरी तरह से छिन हो जाती है। उसका रुप योबन से भी निखार घटने लगता है। उसके चेहरे की खूबसूरती खत्म होने लगती है। उसकी दैनिक दिनचर्या भी बहुत व्यस्त रहती हैl वह साफ-सुथरे तरीके से नहीं रखता है। उसके बाद आवरण से गंदगी झलकती है, जिससे कोई उसके आसपास भी रहना नहीं चाहता है। स्त्री सुख में भी कमी आ जाती है, तथा वैवाहिक जीवन में भी अनेक अर्चने आनी शुरू हो जाती है। गृह क्लेश में भी वृद्धि होती है, हर वक्त घर में लड़ाई झगड़े का माहौल होने लगता है, तथा शुक्र ग्रह की अशुभता के कारण कभी-कभी दंपतियों के बीच तलाक भी हो जाता है।

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विभिन्न प्रकार के रोगों से भी जातक ग्रसित होने लगता है। नसों का संबंध शुक्र ग्रह से होता है lखराब एवं अशुभ शुक्र सबसे अधिक जातक के नसों को प्रभावित करता है, जिससे उन्हें नसों से संबंधित बीमारियां होने लगती है। अंगूठा आदि में भी दर्द होने लगता है, स्त्रियों के रोग के गुर्दे के रोग तथा पैरों में भी बहुत अधिक तकलीफ देखने को मिलती है। त्वचा से संबंधित विभिन्न प्रकार के रोग होने लगते हैं, जैसे -दाद, चिकन पॉक्स।

सफेद हीरा को धारण करने का सबसे उपयुक्त दिन शुक्रवार को माना जाता है। 27 नक्षत्रों में से सबसे मुख्य तीन नक्षत्र भरनी नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र यह तीनों शुक्र ग्रह के नक्षत्र माने जाते हैंl इन सभी विशिष्ट नक्षत्रों में इस रत्न को धारण किया जा सकता हैl धारण करने से पूर्व हीरा रत्न को शुक्र के बीज मंत्रों से अभिमंत्रित करना बहुत आवश्यक है, इसे दाएं हाथ की अनामिका उंगली में धारण किया जाता है।

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