नीलम रत्न किस राशि को पहनना चाहिए – Neelam Ratna Kis Rashi Ko Pahanna Chahiye

नीलम रत्न किस राशि को पहनना चाहिए – Neelam Ratna Kis Rashi Ko Pahanna Chahiye

 

 नीलम रत्न किस राशि को पहनना चाहिए

नीलम रत्न किस राशि को पहनना चाहिए -आज का हमारा विषय हैl

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नीलम रत्न किस राशि को पहनना चाहिए किस राशि को यह रत्न सबसे उत्तम धारेगा कुंडली के किस भाव में शनि ग्रह स्थित होते हैं, जिसकी वजह से यह रत्न धारण करना चाहिए आदि विभिन्न विचार हमारे मन में छाए रहते हैं, आज इस लेख के माध्यम से हम सारे सवालों के जवाब जानने का प्रयास करेंगे।

हमारे जीवन में विभिन्न प्रकार के ग्रहों का गोचर होते रहता है, तथा उनके प्रभाव भी हमारे वास्तविक जीवन पर पड़ता रहता है। यह प्रभाव सकारात्मक भी हो सकता और नकारात्मक भी किंतु सभी ग्रहो की गोचर से लोग उतना नहीं डरते रहते हैं, जितना शनि ग्रह के गोचर से डरते हैंl शनि ग्रह जिसे त्रिलोक न्यायधीश की उपाधि दी गई है, जिन्हें स्वयं महादेव का आशीर्वाद प्राप्त है, कि तीनों लोगों के वे दंडाधिकारी तथा प्रमुख न्यायधीश होंगे lउनके द्वारा दिए जाने वाले न्याय के डंडे से गंधर्व, राक्षस ,देवगन ,मनुष्य कोई भी नहीं बच सकता है। समय समय पर इनके द्वारा बहुत सारी दशाए हमारे कुंडली में दिया जाता है।

1.इनका गति भी गोचर करने का बहुत धीमा होता है, जिसकी वजह से जिस भी जातक की कुंडली में इनका गोचर होता है, उसे विविध परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह ऐसा समय होता है, जब इन के द्वारा जातक के विभिन्न कर्मकांड का हिसाब किया जाता है, तथा हिसाब के अनुरुप ही उसे दंड अथवा पुरस्कार इनके द्वारा प्रदान किया जाता हैl लगभग प्रत्येक मनुष्य शनि की साढ़ेसाती तथा शनि की ढैया आदि से कभी न कभी पीड़ित होता है, ही है, तथा उस वक्त उसे बहुत ही कष्टों का सामना करना पड़ता है।

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2. शनि ग्रह शिथिल गति से अपनी गोचर पूरा करते हैं। शनि की ढैया में उन्हें लगभग पूरा करने में ढाई साल का समय लग जाता है। यह ऐसा समय होता है, जब जातक को विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, मानसिक स्थिति बहुत ही दयनीय हो जाती है, तथा शारीरिक कष्टों का भी सामना करना पड़ता है, तरह -तरह के रोगों से जातक बहुत परेशान हो जाता है lयह किसी के भी जीवन में आने वाला सबसे विकट समय होता है, और शनि ग्रह की धीमी चाल की वजह से यह स्थिति और भी दयनीय हो जाती है, जिसकी वजह से जातक को काफी समय तक कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

3. शनि की साढ़ेसाती- शनि की साढ़ेसाती की अवधि पूरे साडे 7 वर्ष की होती है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार यह समय जातक के लिए बहुत ही विकट परिस्थितियों वाला होता है, इस समय उसे विभिन्न प्रकार के विषय समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

4. शनि की महादशा- किसी भी जातक के जीवन की यह सबसे महत्वपूर्ण घटना होती हैl जिसमें उसे शनि ग्रह के द्वारा अनुकूल तथा प्रतिकूल दोनों प्रकार के प्रभाव उसके जीवन पर देखने को मिलते हैं। पहले उसे बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है तथा उसके अनगिनत परीक्षाएं शनि ग्रह के द्वारा ली जाती है lतत्पश्चात उसे सफलता का स्वाद क्या होता है ??उसे शनि ग्रह के द्वारा प्रदत किया जाता है। यह ऐसा समय होता है, जब शनि ग्रह बिल्कुल एक शिक्षक के समान हमें दंड तथा पुरस्कार दोनों प्रदान करते हैंl हमारे द्वारा किए गए विभिन्न कर्मकांडओं का लेखा-जोखा करने के पश्चात हमें दंड देते हैं, किंतु कुछ कर्म हमारे अच्छे भी होते हैं, जिनके परिणाम हमें बहुत ही अनुकूल प्राप्त होता है तथा जीवन में जो भी समस्याएं चलती रहती है, उनका समाधान धीरे-धीरे होने लगता है, और जिंदगी की गाड़ी फिर से पटरी पर दौड़ने लगती है, जिन समस्याओं का हल हमें असंभव लगता था, उन समस्याओं का भी हल धीमी गति से ही सही किंतु उत्तर प्राप्त होने लगता है।

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विभिन्न परिस्थितियों तथा सटीक गननाओ के आधार पर विद्वान पंडितों के द्वारा हमें नीलम रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है, किंतु यह रत्न किस राशि को पहनना चाहिए इसका क्या प्रभाव पड़ेगा उन सभी चीजों का हम विस्तार से उल्लेख करते हैं-
5. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार मेष वृष तुला वृश्चिक राशि के लोगों के लिए नीलम धारण करना काफी शुभ साबित हो सकता है।

6. इस इस रत्न को धारण करने से पूर्व कुंडली के चौथे ,पांचवें, दसवें और ग्यारहवें भाव में शनि की क्या परिस्थिति है?? उसको देखने के पश्चात यह रत्न में विभिन्न राशियों को पहनने की सलाह दी जाती है।

7. मकर एवं कुंभ लग्न के व्यक्तियों को नीलम रत्न पहनने की सलाह दी जाती है।

8. बहुत से जातकों की कुंडली में शनि ग्रह कमजोर होते हैं, तथा वक्री होते हैं lतो ऐसी परिस्थिति में उनके द्वारा नीलम रत्न धारण किया जा सकता है।

9. किसी जातक को शनि की महादशा, अंतर्दशा ,साढ़ेसाती या फिर शनि की ढैया से संबंधित कोई भी दशा चल रही हो तो उस परिस्थिति में नीलम रत्न धारण करना लाभकारी सिद्ध होता है।

10. कुंभ तथा मकर राशि वालों के लिए लोगों के लिए यह रत्न किसी वरदान से कम नहीं है, उन्हें यह रत्न बहुत अच्छे परिणाम देता है।

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11. यदि शनि ग्रह अपने भाव से छठे या आठवें स्थान पर बैठे है, तो इस अवस्था में नीलम रत्न अवश्य धारण करना चाहिए, इससे लोगों को सर्वोत्तम परिणाम देखने को मिलते हैं।

12. यदि शनि ग्रह जन्मांग में शनि गुरु का नाम पंचम योग है, तथा शनि ग्रह अन्य किसी ग्रह के प्रतियोग है, तब ऐसी स्थिति में लोगों के द्वारा नीलम रत्न धारण किया जा सकता है।

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