जमुनिया रत्न किसे पहनना चाहिए – Jamuniya Ratna Kise Pahanna Chahiye

जमुनिया रत्न किसे पहनना चाहिए – Jamuniya Ratna Kise Pahanna Chahiye

 

जमुनिया रत्न किसे पहनना चाहिए –

Jamuniya Ratna Kise Pahanna

 Chahiye

जमुनिया रत्न किसे पहनना चाहिए- (jamuniya ratna kise dharan karna chahiye) शनि देव जिन्हें नौ ग्रहों में दास की उपाधि से अलंकृत किया गया है, किंतु यही दास की कुदृष्टि जब पड़ती है, तब राजा हो या रंक हो देवता हो या गन हो मनुष्य हो या दानव हो हर ओर हाहाकार मचाने की क्षमता रखते हैंl शनि देव जिन्हें न्यायधीश कहा जाता है, पूरे ब्रह्मांड के न्यायाधीश के रूप में निरूपित होने वाले शनि देव का न्याय का ढंग का इतना अधिक प्रभावशाली होता है, कि जन्म जन्मांतर तक इनके न्याय को हर एक प्राणी को भोगना पड़ता हैl सभी कर्मों के फल इनके द्वारा ही प्रदान किए जाते हैंl इनके प्रभाव से कोई भी जीव जंतु इस पूरे ब्रह्मांड में अछूता नहीं रहता है lइनका स्वभाव ऐसा होता है, कि यह किसी के साथ भी अन्याय नहीं करते हैं, और ना ही किसी के साथ अन्याय होने देते हैं, स्वभाव से बहुत ही क्रूर एवं उग्र एवं हठि होते हैं।

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शनि ग्रह का संबंध उनके पिता सूर्य देव से कभी भी अच्छे नहीं रहे और सूर्य देव के द्वारा शनि ग्रह की माता छाया का अपमान ने शनि ग्रह को और अधिक उग्र बनने पर मजबूर कर दिया माता की अपमान से आहत होकर शनि देव के द्वारा कठिन साधना की गई साधना की सफलता के पश्चात भगवान शिव शंभू के द्वारा उन्हें वरदान में यह प्राप्त हुआ कि वह तीनों लोगों के दंडाधिकारी होंगे तथा तीनों लोकों के न्यायाधीश भी होंगे उनके न्याय के डंडे से कोई भी प्राणी नहीं बच सकता है। हर प्राणी गण तथा देवता राक्षस को दंडित करने का उन्हें अधिकार प्राप्त है, यही कारण है, कि जब शनिदेव किसी को दंड देने पर आते हैं, तब जन्म जन्मांतर भी कम पड़ जाते हैं।

जीव को अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है, हर परिस्थिति में उसे अपने बुरे कर्मों का फल भोगना ही होता है। शनि किसी को भी क्षमा नहीं करते हैं, और यदि कोई अच्छे कर्मों वाला होता है, तो उसका नुकसान भी शनि ग्रह के द्वारा नहीं किया जाता है, अच्छे एवं उच्च विचार वाले लोगों के प्रति शनि ग्रह भी दया भाव रखते हैं, जब सनी किसी को देने पर आते हैं, तब छप्पर फाड़ कर देते हैं, किंतु जब लेने पर आते हैं, तब व्यक्ति के पास दुखों ,व्याधियों, परेशानियों के अलावा और कुछ भी नहीं छोड़ते हैं।

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प्रत्येक व्यक्ति की जन्म पत्रिका के विभिन्न भाव में शनि अवस्थित होते हैं, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति के लिए उनके द्वारा दिए जा रहे हैंl अच्छे या बुरे परिणाम समान नहीं हो सकते हैंl शनि के प्रभाव से मिलने वाले फल जन्म कुंडली के ग्रह दोष तथा शनि की दशा- महादशा ,शनि की अंतर्दशा ,शनि की ढैया ,शनि की साढ़ेसाती जैसी चीजों पर बहुत हद तक निर्भर करती हैl कभी-कभी लग्न कुंडली में शनि निर्मल अवस्था में स्थित होते हैं, या अपनी पाप स्थिति में होते हैं, जिसकी वजह से वह अपना पूर्ण फल देने में असमर्थ होते हैं।

शनि की कृपा प्राप्त करने के लिए इनसे संबंधित लोगों के द्वारा भिन्न- भिन्न प्रकार के उपाय अपनाए जाते हैं, या शनि ग्रह की पूजा आराधना की जाती है, ताकि उनकी कृपा को प्राप्त किया जा सके। प्रकृति हम लोगों के ऊपर बहुत अपनी दया दृष्टि रखती हैl यही कारण है, कि शनि ग्रह से संबंधित विभिन्न प्रकार के रत्न एवं उपरत्न उसने प्रदान कर हम सभी पर बहुत बड़ा उपकार किया है। विभिन्न प्रकार के उपायों के अलावा भी शनि की स्थिति को मजबूत बनाया जा सकता है, उससे संबंधित रत्न या उपरत्न को धारण करके, विधिवत तरीके से इन रत्नों को धारण करने से भी शनि की स्थिति सुधरती है, तथा शनि का प्रतिकूल प्रभाव समाप्त होने लगता है।

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जमुनिया रत्न किसे पहनना चाहिए- Jamuniya Ratna Kise Pahanna Chahiye

1. मेष राशि वाले जातकों को नीलम रत्न (jamuniya ratna dharan karne se kya hota hai) धारण करने से बिल्कुल बचना चाहिए क्योंकि मेष राशि के स्वामी मंगल ग्रह का शनि ग्रह के साथ बिल्कुल विपरीत संबंध रखते हैं, ऐसे में जमुनिया रत्न को धारण करना और अधिक स्थिति को खराब बना सकता है।

2. वृषभ राशि के जातकों के द्वारा नीलम रत्न (jamuniya ratna dharan karne ke fayde) धारण किया जा सकता है, क्योंकि शुक्र और शनि आपस में अच्छे भाव रखते हैं, ऐसे में उन्हें जमुनिया रत्न का प्रयोग में लाने से अच्छे लाभ प्राप्त हो सकते हैं।

3. मिथुन राशि वाले जातकों के द्वारा भी जमुनिया रत्न (jamuniya ratna ke baare me bataye) को धारण करना अच्छा एवं शुभ फलदाई होता है। बुध ग्रह मिथुन राशि वालों के स्वामी होते हैं, और बुध और शनि में अच्छे संबंध होते हैं, यही कारण है कि शनि का रत्न पन्ना रत्न के साथ भी धारण किया जा सकता है।

4. कन्या राशि के स्वामी भी बुध ग्रह होते हैं, तथा बुध ग्रह के ऊपर शनि की हमेशा अच्छी दृष्टि रहती है, ऐसी स्थिति में जमुनिया रत्न को धारण किया जा सकता है, तथा शनि के दुष्प्रभाव को दूर किया जा सकता है, किंतु फिर भी जमुनिया रत्न (jamuniya ratna ke labh) को धारण करने से पूर्व अपने जन्मपत्रिका का अवलोकन अवश्य करा लें।

5. तुला राशि के स्वामी शुक्र ग्रह होते हैं, तथा शुक्र का शनि के साथ मित्रता का भाव रहता है, ऐसे में जमुनिया रत्न को धारण करने से तुला राशि वाले जातकों को अनेक अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं, तथा यह उनके भाग्य को भी अधिक मजबूत बनाता है।

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6. मकर राशि के स्वामी स्वयं शनि महाराज होते हैं, ऐसे में जमुनिया रत्न मकर राशि वालों के सफलता के सारे मार्ग को खोल देता है, इसे धारण करने से उन्हें अप्रत्याशित लाभ की प्राप्ति होती है।

7. कुंभ राशि के स्वामी ग्रह की शनि ग्रह होते हैं, ऐसे में जमुनिया रत्न (jamuniya ratna pahanne ke fayde) धारण करना कुंभ राशि के जातकों के लिए बहुत अधिक अच्छे परिणाम लेकर आता है, या उनके विभिन्न प्रकार के समस्या को भी दूर करने की क्षमता रखता है।

Note:- किसी भी रत्न को धारण करने से पूर्व अपने जन्मपत्रिका का अच्छे से विश्लेषण करवाएं तभी किसी भी रत्न या उपरत्न को धारण करें या हस्तरेखा के माध्यम से भी आप जान सकते हैं, कि आपके लिए सबसे उपयुक्त रत्न या उपरत्न कौन सा है, तभी इनका उपयोग करें।

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