जमुनिया रत्न के लाभ – Jamuniya Ratna Ke Labh

जमुनिया रत्न के लाभ – Jamuniya Ratna Ke Labh

 

 जमुनिया रत्न के लाभ-

जमुनिया रत्न के लाभ- शनिदेव जिन्हें न्याय का देवता कहा जाता हैl पूरे ब्रह्मांड में दंडाधिकार का अधिकार केवल शनि देव को ही प्राप्त है, शनि देव को नौ ग्रहों में दास की उपाधि प्राप्त हैl यही कारण है, कि जितने भी गरीब वर्ग के लोग होते हैं ,मजदूर वर्ग के लोग होते हैं, समिति, समाज, असहाय वर्ग के लोग सभी का प्रतिनिधित्व शनि ग्रह के द्वारा किया जाता हैl शनि की न्याय प्रणाली कर्म प्रधानता पर चलती है, यही कारण है, कि इनके अधिकार क्षेत्र में किसी भी तरह का कोई भी क्षमा की गुंजाइश नहीं होती हैl हर किसी को हर जीव प्राणी को देवी देवता को राक्षस हो या गन हो हर किसी को अपने द्वारा किए गए अच्छे कर्म तथा अपने द्वारा किए गए बुरे कर्मों का परिणाम स्वयं ही भुगतना पड़ता है, और उसके लिए यदि एक जन्म कम पड़ जाए तो शनि ग्रह न जाने कितने ही जन्मो तक जातक को उसके कर्मों का फल प्रदान करते हैं।

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शनि ग्रह यही कारण है, कि पूरी जगत में अपने वक्री दृष्टि एवं उग्र स्वभाव की वजह से जाने जाते हैं, इनका दर बहुत अधिक विख्यात है lइनकी दृष्टि किसी को भी बर्बाद करने की क्षमता रखती हैl कुंडली की अशुभ स्थिति दशा अंतर्दशा महादशा जैसे चीजों में तो जातक की स्थिति बहुत ही भयावह हो उठती है lशनि ग्रह की की साढ़ेसाती एवं शनि की ढैया जातक को बहुत ही विध्वंसक स्थितियां दिखाने लगती हैl कई बार तो इतने अधिक परेशानियों में जातक फस जाता है, कि जीवन की इस लीला को भी वह समाप्त कर लेता है।

शनि ग्रह की स्थिति को सुधारने के लिए कई बार लोगों के द्वारा अनेक प्रकार के दान- पुण्य, पूजा-पाठ आदि किए जाते हैंl शनि ग्रह की स्थिति को मजबूत बनाने के लिए तथा इनसे संबंधित अनेक प्रकार के प्रतिकूल प्रभाव को नष्ट करने के लिए या उन्हें बहुत हद तक कम करने के लिए इनसे संबंधित रत्न एवं उपरत्न धारण किए जाते हैं, उन्ही रत्नों एवं उप रत्नों में से एक रत्न होता है –जमुनियाl

जमुनिया रत्न धारण करने से किसी भी जातक को निम्नलिखित लाभ प्राप्त हो सकते हैं-

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1.जमुनिया रत्न की यह विशेषता होती है, कि कमजोर शनि की शुभ भाव में स्थिति को यह रत्न उसके बल को कई गुना बढ़ाने का सामर्थ्य रखता है, जिससे जातक के जीवन में जितने भी शनि ग्रह से संबंधित कार्य रुके हुए होते हैंl सभी संपन्न होने शुरू हो जाते हैं, एवं जातक को शनि ग्रह की कृपा प्राप्त होनी शुरू हो जाती हैl

2.जमुनिया रत्न धारण करने से जातक की दूरदर्शिता बढ़ती है, जिसकी वजह से वह किसी भी खराब परिस्थिति में पड़ने से बच जाता है, किसी भी प्रकार के अप्रिय घटना को भी रोकने की क्षमता इस रत्न के द्वारा उसे प्रदान किया जाता है, उसकी दूरदर्शिता उसे अनेक प्रकार से लाभ पहुंचाती हैl

3. यदि किसी जातक की जन्मपत्रिका में शनि किसी मुख्य भाव का कारक है, तो ऐसी स्थिति में शनि के उस भाव को मजबूत बनाने के लिए इस रत्न का प्रयोग किया जाता है, जिससे शनि ग्रह की कृपा दृष्टि जातक को तीव्रता से प्राप्त होती है, एवं उसके व्यक्तित्व में परिवर्तन होना शुरू हो जाता है lउसके व्यवहार में अच्छे एवं सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं, जिससे उसकी जीवन शैली और अधिक उत्कृष्ट बनने लगती है, उसके व्यवहार में बहुत अच्छे परिवर्तन देखने को मिलते हैं, जिससे लोगों का जुड़ाव उससे बढ़ने लगता है।

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4. यह रत्न जातक की लग्न शीलता को बढ़ाता है, जिससे जातक जिस भी कार्य क्षेत्र में संलग्न होता है कार्य क्षेत्र में अपना पूरा योगदान देता हैl पूरी निष्ठा के साथ उस कार्य को करता है, जिसकी वजह से उसे उस क्षेत्र में काफी सफलता की प्राप्ति होती है, एवं उसके पद -पदवी में भी वृद्धि होती है, इसके साथ-साथ उसके मान सम्मान में भी यह रत्न वृद्धि कराता हैl

5. यह रत्न मानसिक स्तर पर भी जातक को बहुत मजबूत बनाता है lइसके साथ साथ उसे तेज दिमाग भी प्रदान करता है, जिसकी वजह से जातक खोजी स्वभाव का होता हैl यह रत्न जातक की निर्णायक क्षमता को भी बढ़ाता हैl जिससे सही समय पर उसके द्वारा लिया गया निर्णय उसके सर्वोत्तम स्तर तक पहुंचने की संभावना को बढ़ा देता हैl शांत चित्त उसे उसके सफलता को स्वर्ण अक्षरों में लिखने में बहुत मदद करता है, इसके साथ-साथ यह रत्न उसके विभिन्न प्रकार के दिमागी उलझनो को भी समझाने में बहुत मदद करता है, इसके साथ-साथ यह जातक की बुद्धि को बहुत कुशाग्र बनाता है।

6. इस रत्न के अच्छे प्रभाव से जातक के जीवन में नौकरी पेशा से संबंधित जितनी भी परेशानियां होती हैl उन सभी का समाधान जल्द होने लगता हैl जीविकोपार्जन संबंधित किसी भी समस्या को यह रत्न पूरी तरह से दूर कर देता है, तथा जातक के जीवन में स्थायित्व का भाव लेकर आता है।

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7. रत्न का औषधीय गुण भी बहुत अधिक होता हैl यही कारण है, कि इसका उपयोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों को दूर करने के लिए भी किया जाता है lनेत्र संबंधित विकार हो या मिर्गी संबंधित बीमारी, पागलपन, अवसाद जैसी स्थिति को भी दूर करने में यह रत्न बहुत मदद करता है, इसके साथ-साथ किडनी संबंधित रोग हो या पथरी संबंधित रोग रीड की हड्डी संबंधित रोग सभी चीजों में जातक को अप्रतिम रूप से स्वस्थ लाभ प्रदान करता हैl

8. किसी भी तरह के आर्थिक क्षति को यह रत्न रोकता है, कर्ज जैसी उत्पन्न स्थिति को भी दूर करने की क्षमता रखता हैl इस रत्न को धारण करने से दरिद्रता का वास होता है तथा आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती हैl

9. शत्रु निवारण के लिए भी यह रत्न बहुत उपयोगी होता हैl प्रत्यक्ष शत्रु हो या अप्रत्यक्ष शत्रु सभी पर यह रत्न जीत दिलाने में मदद करता है, यह रत्न किसी भी प्रकार से शत्रु बाधा को जातक के ऊपर हावी होने नहीं देता हैl

10. यह रत्न की अनुकूलता जातक को अनेक प्रकार से लाभ प्रदान करता है lशारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य प्रदान करती है, जिससे उसका चित्त हमेशा प्रसन्न रहता है, इसके साथ-साथ जातक बहुत मेधावी भी बनता है, तथा विभिन्न कार्य क्षेत्र में उसके रचनात्मक गुण हो या कलात्मक गुण का उपयोग कर अपने सफलता की कुंजी को प्राप्त करता हैl यह रत्न जातक को भिन्न भिन्न प्रकार से मान-सम्मान की प्राप्ति के भी अनेक शुभ अवसर प्रदान करता है।

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