पुखराज का राशि क्या – Pukhraj Ka Rashi Kya Hai

पुखराज का राशि क्या – Pukhraj Ka Rashi Kya Hai

 

 पुखराज का राशि क्या है

पुखराज का राशि क्या है- आज हम वैदिक ज्योतिष विज्ञान की मदद से जानने का प्रयास करेंगे कि पुखराज का राशि क्या होता है, तथा और राशियों पर भी इसके क्या प्रभाव पड़ सकते हैं, इसके अतिरिक्त यह भी जानेंगे कि इसे धारण करने से क्या-क्या लाभ हमें प्राप्त होता है।

पुखराज एक गुरु ग्रह से संबंधित रत्न है, जिसका वर्ण पीला होता हैl यह रत्न गुरु ग्रह बृहस्पति जो तीनों लोगों के गुरु कहलाए जाते हैं, उन को निरूपित करता है, तथा उनकी असीम ऊर्जा इस रत्न में व्याप्त होती है lइसका भौतिक गुण इतना अप्रतिम होता है, कि जिस भी जातक के द्वारा यह रत्न धारण किया जाता है, उसके जीवन में गुरु कृपा तथा ईश्वरीय कृपा बरसने लगती है एवं उसका जीवन सफल हो जाता है।

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पुखराज रत्न एक ऐसा रत्न है, जो देखने में बहुत ही चमकदार चिकना पारदर्शी तथा कभी-कभी अर्थ पारदर्शी भी होता हैl इस रत्न का संयोजक सिलिकेट एलुमिनियम तथा फ्लोरिंग जैसे खनिज होते हैं, तथा इसके किनारे बहुत अधिक व्यवस्थित ढंग से होते हैं, जो इसे एक संगठित रूप प्रदान करते हैंl विश्व में सबसे अधिक म्यानमार तथा ब्राजील तथा श्रीलंका के पुखराज रत्न काफी प्रसिद्ध है, तथा लोगों में इसकी मांग बहुत अधिक होती है, किंतु यह रत्न उत्तम गुणवत्ता होने की वजह से इसका मूल्य बहुत अधिक होता है तथा आम लोग के बहुत से काफी दूर होता है, इस रत्न को प्राप्त करना इतना आसान नहीं हैl इसके लिए आपको बहुत बड़ी रकम चुकानी पड़ती है, भारत में भी पुखराज रत्न के खान मौजूद है, किंतु उसकी गुणवत्ता इतनी उत्कृष्ट नहीं होती है, जिसकी वजह से इसका उपयोग कम किया जाता है, यह देखने में और जगह से उपलब्ध पुखराज रत्न की तुलना में उतना आकर्षण पूर्ण नहीं दिखता है।

कुंडली के विभिन्न भावों में स्थित गुरु ग्रह की स्थिति को देखते हुए ज्योतिष के द्वारा यह रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है, जिससे हमें गुरु ग्रह की कृपा प्राप्त हो सके और हम अपने कार्यों को अच्छे ढंग से पूर्ण कर सके तथा अपने जीवन में सफलता को प्राप्त कर सके।

आइए जानते हैं, पुखराज रत्न को किस-किस दशा में धारण किया जा सकता है, या किन राशियों के द्वारा यह रत्न धारण किया जा सकता है-

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1. विभिन्न प्रकार के कलात्मक कौशलों से जुड़े लोगों के लिए यह सबसे उत्कृष्ट माना जाता है, क्योंकि उनमें विप्रभावप्रकार की कलात्मक दक्षता जैसे -राइटिंग, ड्रॉइंग ,पेंटिंग, सिंगिंग ,एक्टिंग जैसे कार्यों में निपुणता हासिल करते हैं एवं अपना जीविकोपार्जन या धन उपार्जन में अपना कलात्मक ज्ञान काविप्रभाव/&, &!  एमएलएलएम¡¡!लॉल्ल!!llllllllllnlmग कर सफलता प्राप्त करते हैं।

2. धनु लग्न तथा मीन लग्न वाले जातकों पर गुरु बृहस्पति की कृपा हमेशा बनी रहती हैl यह दोनों राशियां गुरु बृहस्पति के कृपा के पात्र होते हैं, तथा गुरु ग्रह हमेशा इनके लिए सकारात्मक एवं अनुकूल प्रभाव ही देते हैं, जिसकी वजह से इनका भाग्य भी खूब साथ देता है, ऐसे में यदि यह रत्न धारण किया जाए तो उनके कार्य और त्वरित गति से सिद्ध होंगे तथा उनके जीवन में किसी भी चीज की कमी नहीं रहेगीl।

3. किसी की राशि यदि मकर है, और उत्तम भाव में गुरु ग्रह अवस्थित है, तो ऐसे में उनके द्वारा यह रत्न धारण करना सोने पर सुहागा के समान परिलक्षित हो सकता है। इस रत्न को धारण करने से वह अपने जीवन के विभिन्न आयामों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

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4. बहुत से ऐसे लोग भी होते हैं, जिनकी कुंडली में गुरु ग्रह अल्प गति से गोचर करते हैं, या उनका प्रभाव बहुत कम होता है, या होता भी है, तो शुभ अवस्था में होता है, ऐसी परिस्थिति में गुरु ग्रह को त्वरित गति प्रदान करने के लिए या उन्हें पूरी तरह से ऊर्जावान बनाने के लिए तथा उनका कृपा प्राप्त करने के लिए यह रत्न धारण किया जाता है, जिससे आपके जीवन में जो रुके हुए कार्य है वह जल्द से जल्द पूर्ण हो सके।

5. यदि बृहस्पति ग्रह अपने भाव से छठे या आठवें भाव में स्थित हो तो यह रत्न धारण करने से आपके जीवन में चमत्कारिक रूप से बदलाव लाने में सक्षम होता है, तथा आपके जीवन में शायद ही कोई ऐसी चीज की कमी रह जाए जो पूर्ण ना हो पाएl

इस रत्न को धारण करने से मन शांत होता है, तथा आपका मन अध्यात्मिक चीजों की ओर अग्रसर होता है, इससे आपके बहुत से बुरी आदतों से छुटकारा मिलता है तथा आप अध्यात्म को अपने जीवन में सार्थक करने के प्रयास में जुट जाते हैं lआप विभिन्न प्रकार के धार्मिक अनुष्ठानों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं, जिसकी वजह से ईश्वरीय कृपा तो आपको प्राप्त होती ही है, साथ में गुरु ग्रह भी आपसे प्रसन्न रहते हैं।

6. शिक्षा से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत लोगों के लिए तो यह रत्न किसी वरदान से कम नहीं है। यह उन्हें उस क्षेत्र में सफलता के सर्वोत्तम स्तर तक ले जाते हैंl इस रत्न से आपका ज्ञान बढ़ता है। आपके ज्ञान में वृद्धि होता हैl लोग आपके गूढ़ ज्ञान को देखकर चकित रहते हैं, तथा कोई कितना भी प्रभावशाली कितना भी ताकतवर इंसान क्यों ना हो किंतु आपके ज्ञान के समक्ष वह नतमस्तक होता है, आपकी वह बहुत अधिक कदर करता है, तथा आप उसके लिए बहुत सम्मानीय व्यक्ति होते हैं।

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7. किसी जातक की कुंडली में यदि बृहस्पति ग्रह से संबंधित किसी प्रकार की दशा या महादशा चल रही हो तो ऐसी परिस्थिति में यह रत्न आपके जीवन में आ रही नकारात्मक परिणामों को सकारात्मक परिणाम में बदलने की क्षमता रखता है, तथा आपको आपके जीवन के विभिन्न आयामों पर अनुकूल एवं उत्तम परिणाम देखने को मिलते हैं।

8. बहुत से जातकों को गुरु ग्रह की स्थिति ठीक ना होने की वजह से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में यह रत्न धारण करने से उनकी आर्थिक स्थिति सुधरती है, तथा वे लोग धन संचित करने में सफल होते हैं।

9. यह रत्न शादी विवाह से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या के लिए धारण किया जाता है, बहुत से जातक कैसे होते हैं, जिनका लग्न नहीं जगने की वजह से उनके शादी विवाह में विभिन्न प्रकार की परेशानियां खड़ी हो जाती है, ऐसे में यह रत्न उनके विवाह में आने वाली विघ्न को दूर करता है, तथा उनके विवाह जैसे मांगलिक कार्यों का समापन करता है, तथा जिन दंपतियों में वैवाहिक जीवन में खटास रहता है, ऐसे में यह रत्न दांपत्य जीवन को सुखी बनाता है, तथा आपसी प्रेम को प्रगाढ़ बनाता हैl इस रत्न की कृपा से पति-पत्नी के बीच विभिन्न प्रकार के मतभेदों का खात्मा होता है, तथा उनका रिश्ता सुखी एवं संपन्न होता है, तथा खुशियों से भरा रहता है। 

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