लहसूनिया पहनने की विधि – Lahsuniya Pahanne ki Vidhi

लहसूनिया पहनने की विधि – Lahsuniya Pahanne ki Vidhi

 

लहसुनिया पहनने की विधि – Lahsuniya

 Pahanne ki Vidhi

लहसुनिया पहनने की सही विधि का उपयोग कर हम अपने जीवन में ऐसे ऐसे लाभ पा सकते हैं, जो शायद सपने में हमने सोचा नहीं होl

लहसुनिया रत्न केतु से संबंधित एक रत्न होता है, केतु ग्रह लहसुनिया रत्न (Lahsuniya ratna pahanne ki vidhi)  का स्वामी ग्रह होता है, तथा इस रत्न को विभिन्न धर्मों के लोगों के द्वारा इसके गुणों के कारण बहुत ही अधिक महत्व दिया जाता है, तथा इसके गुणों के ऊपर ही इसके विभिन्न प्रकार के नाम भी रखे गए हैं, जैसे – बाल सूर्य विदुर रत्न कैट्स आई आदिl विक्षिप्त होने के बाद भी केतु को एक ग्रह होने का दर्जा प्राप्त है, क्योंकि इसकी अनुकूल तथा प्रतिकूल प्रभाव जातक के जीवन में सफलता की नई कहानी लिख सकते हैं, या फिर जिंदगी में इतने उत्तल पुथल मची है, कि समझ हुई पाना बहुत मुश्किल होता है, कि आखिर हो क्या रहा है, किस तरफ जिंदगी जा रही है, कुछ समझ ही नहीं आएगा हमारी जिंदगी को दिशाहीन बनाने की क्षमता रखता है, यही कारण है कि इसके व्यापक प्रभाव को देखते हुए इसे एक ग्रह की उपाधि से अलंकृत किया गया है।

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लहसुनिया रत्न को पहनने की विधि निम्नलिखित है-

1. सर्वप्रथम आपके द्वारा धारण किया जा रहा लहसुनिया रत्न (lahsuniya ratna dharan ki vidhi bataiye) की जांच परख अच्छे से कर ले कि वह पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से निर्मित हो lकिसी भी स्थिति में वह रसायनिक अभिक्रिया से निर्मित एक कृतिम रत्न जो प्रयोगशाला में बनाया गया होl ऐसा ना हो अन्यथा आप जिस भी परेशानी को हल करने के लिए या जिस भी महत्वकांक्षी को मन में लिए हुए उसे धारण करना चाहते हैं lवह पूर्ण होने की संभावना नगण्य हो जाएगी इसलिए आपके द्वारा धारण किए जाने वाला लहसुनिया रत्न पूरी तरह से शुद्ध रूप से निर्मित होना आवश्यक है, आप चाहे तो इस का लॉकेट या पेंडेंट या अंगूठी या ब्रेसलेट भी धारण कर सकते हैंl

2. इसे धारण करने से पूर्व नक्षत्रों का भी ध्यान रखना बहुत आवश्यक है, जैसे- केतु ग्रह अश्विनी, मघा एवं मूल नक्षत्र का स्वामी हैl इन सभी नक्षत्रों में केतु से संबंधित रत्न का उपरत्न धारण करने से हमें अप्रतिम लाभ प्राप्त होता हैl

3. आपके द्वारा धारण किया जाने वाला पेंडल लॉकेट या ब्रेसलेट या अंगूठी जो भी चीज आपके द्वारा धारण किया जाना है, तो लहसुनिया रत्न (lahsuniya dharan karne ki vidhi) को पंचधातु में पीरों कर धारण करना सबसे उत्तम माना जाता है।

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4. शनि ग्रह से केतु ग्रह का तथा राहु ग्रह का गहरा संबंध है, जिसकी वजह से केतु से संबंधित रत्न का उपरत्न भी शनिवार के दिन धारण किया जाता है, कई ज्योतिष विद्वानों का मन होता है, कि केतु गुरु ग्रह सेवक होता है, जिसकी वजह से यदि इससे संबंधित रत्न का उपरत्न को गुरुवार के दिन धारण करने से जातक को अप्रतिम रूप से लाभ प्राप्त होता हैl अतः दोनों में से कोई भी आप चुन सकते हैं, जो जो भी आपकी योग्य एवं आपके लिए सर्वोत्तम रहेगाl

5. सर्वप्रथम स्नान आदि से निवृत्त होकर केतु से संबंधित रत्न लहसुनिया (lahsuniya dharan karne ke fayde) को गंगाजल तथा पंचामृत से शुद्ध करेंl कुछ देर के लिए इन दोनों चीजों में उसे डूबा कर छोड़ दें lउसके पश्चात निकाल कर उसे अच्छे से फिर से गंगाजल से धुलेl जिससे इसमें यदि किसी भी प्रकार की नकारात्मकता होगी तो वह समाप्त हो जाएगीl

6. उसके पश्चात आप इसे कोई अच्छे कपड़े के ऊपर रखकर इससे लोंग एवं कपूर तथा गूगल से इसकी आरती उतारे हो सके तो कपूर का कुछ टुकड़ा इसके पास रख रख दे इससे इसकी शक्तियां धीरे-धीरे जागृत होनी शुरू हो जाएगी एवं इसके आसपास का वातावरण भी स्वच्छ होगा।

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7. उसके बाद केतु से संबंधित बीज मंत्र का उच्चारण करें lआप से जितना हो सके उतना अधिक इससे संबंधित बीज मंत्र का उच्चारण करेंl यदि आप किसी भी प्रकार से इस कार्य को करने में असक्षम है, तो ऐसे में आप किसी विद्वान पंडित की भी मदद ले सकते हैं, जिससे लहसुनिया रत्न (lahsuniya ratna ke fayde) को आप अभिमंत्रित एवं प्रतिष्ठित करवा सकते हैंl बस केवल इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि आपके द्वारा उच्चारण किया जा रहा मंत्र पूरी तरह से शुद्ध हो उसकी वर्तनी में किसी भी प्रकार की गलती ना करें क्योंकि जब भी हम किसी भी मंत्र को उच्चरित करते हैं, तो उसका अर्थ है, कि हम उससे संबंधित शक्ति को आदि का आग्रह कर रहे हैं, और यह ब्रह्मांड बहुत ही शक्तियों से भरा पड़ा है, ऐसे में जरा सी गलती की वजह से कोई भी दूसरी शक्ति आ सकती हैl इसकी वजह से मंत्रों के उच्चारण के वक्त बहुत अधिक ध्यान देना आवश्यक हैl

8. उसके बाद आप इसे किसी भगवान गणेश के मंदिर में ले जाकर उनके चरणों में रख दें क्योंकि केतु से संबंधित देवता गणेश भगवान को माना गया है, विघ्नहर्ता को माना गया है, ऐसे में आप इससे संबंधित रत्न (lahsuniya ratna ke labh) को यदि संभव हो तो गणेश जी के मंदिर में उनके चरणों में कुछ देर के लिए अवश्य रखें उसके पश्चात गणेश भगवान तथा मंदिर के पुजारी का आशीर्वाद प्राप्त करें एवं उन्हें उत्तम दान दक्षिणा अवश्य प्रदान करें।

9. केतु से संबंधित रत्न (lahsuniya ratna ki jankari) को धारण करने का सबसे उपयुक्त समय मध्य रात्रि का सूर्य उदय से पूर्व माना गया हैl अपने मन में अपनी कामना बोलते हुए lइस रत्न को धारण करें तथा प्रार्थना करें कि ईश्वर जल्द से जल्द आपकी सभी मनोकामना को पूर्ण करें या जिस भी विघ्नों को आप अपने जीवन से खत्म करना चाहते हैं, वह जल्द से जल्द नष्ट हो।

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10. लहसुनिया रत्न (lahsuniya ratna dharan karne ki jankari) को धारण करने के पश्चात वर्जित चीजों का सेवन बिल्कुल भी ना करेंl यदि संभव हो तो किसी जरूरतमंद को भोजन अवश्य कराएं या किसी भी प्रकार से सहायता अवश्य करें यदि कोई दिव्यांग है, और उसे आपकी मदद की आवश्यकता है, तो आप उनकी मदद अवश्य करें, इससे केतु ग्रह आपके ऊपर प्रसन्न होंगे तथा लहसुनिया रत्न की सारी शक्तियां और अधिक त्वरित गति से अपना प्रभाव आपके जीवन पर दिखाएंगी घर में छोटे बच्चों के लिए कुछ मिठाईयां या कुछ उपहार अवश्य लेकर आएं भूलकर भी इस दिन किसी से भी कटु वचन ना बोले और ना किसी से झगड़ा झंझट करें।

केतु ग्रह बाकी ग्रहों की तरह ही है, जो अपना प्रभाव सकारात्मक भी दिखा सकता है, और नकारात्मक भी दिखा सकता है, यह आपके पद प्रतिष्ठा में उन्नति से ले कर के आपको संतान पक्ष से सुख सुविधा देने तक में बहुत बड़ी योग्यता रखता है,इसी की कृपा से व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में अपना प्रभाव, अपने प्रगति के मार्ग को दीर्घकालीन समय तक बनाने में सक्षम हो पाता हैl

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