लहसुनिया रत्न किसे पहनना चाहिए – Lahsuniya Ratna Kise Pahanna Chahiye

लहसुनिया रत्न किसे पहनना चाहिए – Lahsuniya Ratna Kise Pahanna Chahiye

 

लहसुनिया रत्न किसे पहनना चाहिए

केतु से संबंधित लहसुनिया रत्न किसे पहनना चाहिए बहुत से लोगों के मन में प्रश्न को लेकर जिज्ञासा बनी हुई रहती है, क्योंकि जब हम केतु से संबंधित लहसुनिया रत्न के विभिन्न चमत्कारिक शक्तियों के बारे में जानते हैं, या किसी अन्य माध्यम से हमें इसके ऊर्जा के बारे में पता चलता है, तब हमारे मन में भी यह जिज्ञासा उठती है, कि क्या हम इसे धारण कर सकते हैं, या किस परिस्थिति में किन लोगों के द्वारा लहसुनिया रत्न धारण किया जा सकता है, या लहसुनिया रत्न को पहना जा सकता है।

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निम्नलिखित परिस्थितियों में दिव्य रत्न को धारण किया जा सकता है-

1. किसी जातक की लग्न कुंडली में यदि केतु सूर्य के साथ अवस्थित हो तो ऐसी परिस्थिति में जातक को यह रत्न अवश्य धारण करना चाहिए जिससे उसे सर्वोत्तम लाभ प्राप्त हो सके।

2. बहुत से ऐसे जातक होते हैं, जो केतु के दुष्प्रभाव के कारण या केतु की महादशा या अंतर्दशा की वजह से उनकी स्थिति दयनीय हुई पड़ी रहती हैl ऐसी स्थिति में लहसुनिया रत्न धारण करने से जातकों के ऊपर जो केतु ग्रह का दुष्प्रभाव पड़ रहा होगा lउसमें परिवर्तन आता है, इसके साथ-साथ उनकी परिस्थिति में भी सुधार आता है।

3. किसी जातक की लग्न कुंडली में यदि केतु ग्रह दूसरे, तीसरे, चौथे या पांचवें, नव्वे या दशम भाव में स्थित होता है, तो लहसुनिया रत्न धारण करने से उसे विभिन्न प्रकार से लाभ प्राप्त होते हैं।

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4. जातक की कुंडली में यदि मंगल बृहस्पति या शुक्र के साथ केतु स्थित होता है, तो ऐसी परिस्थिति में लहसुनिया रत्न को धारण किया जा सकता है, तथा इसके लाभों को उठाया जा सकता है।

5. जातक की कुंडली में सूर्य के साथ केतु की युक्ति बनती है, या फिर सूर्य की दृष्टि केतु पर पड़ती है तो ऐसी परिस्थिति में लहसुनिया रत्न धारण करना जातक के लिए बहुत फलदाई होता है।

6. किसी जातक की कुंडली में यदि केतु ग्रह निष्क्रिय अवस्था में है, या फिर सुख अवस्था में है, तो ऐसी परिस्थिति में इसे जागृत करने के लिए या इसके उर्जा को जागृत करने के लिए लहसुनिया रत्न धारण किया जा सकता है, जिससे जातक के जीवन में जो भी कार्य केतु ग्रह से संबंधित होते हैं lवह सभी पूर्ण होl उन सभी कार्यों को पूर्ण करने की उसे पूरी ऊर्जा प्राप्त हो lइसके साथ-साथ केतु ग्रह की कृपा भी उस जातक को प्राप्त हो सके।

लहसुनिया रत्न केतु से संबंधित एक रत्न होता है, जिसमें बिल्लियों के आंखों के समान आकृतियां प्राकृतिक रूप से लहसुनिया रत्न में विद्यमान रहती हैl रत्न का रंग देखने में पत्तों के समान हरा या मटमैला होता है lकभी-कभी इस रत्न के पीले रंग के लहसुनिया रत्न भी प्राप्त होते हैंl इसके संयोजक पर इसका रंग निर्भर करता है। प्राकृतिक रूप से निर्मित अशुद्धियां भी इसके रंगों को निर्धारित करती है। लहसुनिया रत्न पूरे नवरत्नों में से सबसे कठोर तीसरा रत्न माना जाता हैl हीरा तथा माणिक्य के बाद सबसे कठोर रत्न की उपाधि से लहसुनिया रत्न को अलंकृत किया गया है, लहसुनिया रत्न की प्रवृत्ति गर्म होती है, जिसकी वजह से जिस भी जातक के द्वारा यह रत्न धारण किया जाता है।

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उसमें आलस्य जैसी बीमारियां एवं कार्यों को टालने संबंधित आचरण जैसी सारी परेशानियां खत्म होती है। एवं वह शख्स खुद को बहुत ऊर्जावान महसूस करता है, तथा सभी कार्यों की पूर्ति व उपयुक्त समय पर या सभी कार्यों की पूर्ति व निर्धारित समय पर पूर्ण करने में सक्षम होता है lइसकी गुणवत्ता विविध प्रकार से हमारे रत्न शास्त्र में वर्णित है, तथा इसकी उपयोगिता को देखते हुए हमारे पूर्वजों के द्वारा इसे व्यापक रूप से उपयोग में लाया जाता रहा है lआज भी इस पद्धति को बहुत से लोगों के द्वारा निभाया जाता है, केतु भी एक ग्रह है, किंतु इसे छाया ग्रह तथा पापी ग्रह की श्रेणी में रखा जाता हैl हालांकि लोगों के मन में बैठी भ्रांतियां इसके दुष्प्रभाव को और अधिक विकराल रूप में प्रस्तुत करते हैं, किंतु बाकी सभी ग्रहों की तरह ही केतु भी अच्छे एवं बुरे परिणाम दोनों ही जातकों को देता है lअब यह बात जातक की लग्न कुंडली पर निर्भर करता है, कि उसे केतु ग्रह की कृपा प्राप्त होगी या फिर उस की कुदृष्टि से उसका जीवन बर्बाद होगा।

केतु ग्रह का कार्य है, आपके जीवन में आकस्मिक रूप से परिवर्तन जिन चीजों की कल्पना आपने शायद स्वप्न में भी ना की हो lउन सभी चीजों से आपको यह रत्न प्रत्यक्षीकरण करवाता हैl शायद यही कारण है, कि इस रत्न को जोखिम उठाने वाले लोगों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, ऐसा माना जाता है, कि जो लोग थोड़े बेपरवाह किस्म के होते हैं, एवं उनमें किसी चीज को करने के लिए जुनून होता है, तथा वह किसी भी प्रकार का जोखिम जीवन में उठाने के लिए हर वक्त तैयार रहते हैं, ऐसे में लहसुनिया रत्न उनके इस प्रवृत्ति में और अधिक वृद्धि करता हैl इसके साथ-साथ उनके सफल होने की संभावना को भी बहुत अधिक बढ़ा देता है।

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लहसुनिया रत्न धारण करने से जातक के जीवन में केतु का प्रभाव सकारात्मक रूप से व्यापक स्तर पर पड़ने लगता है, जिसकी वजह से जब जातक को सफलता प्राप्त होती है, तो वह दीर्घकालीन होती हैl उसका प्रसिद्धि उसकी लोकप्रियता का प्रभाव बहुत दिनों तक सामाजिक तौर पर व्याप्त रहता है, जिसकी वजह से जातक की कीर्ति दिनों दिन बढ़ती चली जाती हैl इसके साथ-साथ जातक की आर्थिक स्थिति भी बहुत मजबूत होती है lउसके जीवन मे आकस्मिक घटनाओं का आभास उसे पूर्व ही हो जाता है, जिससे भविष्य में होने वाली बड़ी हानियों को भी वह नियंत्रण में लाने की क्षमता रखता हैl यह रत्न धारण करने से जातक को पारलौकिक शक्तियों से भी रक्षा होती है, तथा जादू टोना ,नजर दोष संबंधित चीजों से भी जातक पूरी तरफ से सुरक्षित रहता है।

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