माणिक रत्न का महत्व – Manik Ratna Ka Mahatva

माणिक रत्न का महत्व – Manik Ratna Ka Mahatva

 

 माणिक रत्न का महत्व

माणिक रत्न का महत्व- वैदिक काल से ही सूर्य देव की उपासना की जा रही है lइन्हें ऋग्वेद में देवताओं में एक प्रतिष्ठित उपाधि दी गई है lसूर्य देवता की पूजा अर्चना कई हजारों सालों से की जा रही हैl प्रसिद्ध गायत्री मंत्र सूर्य देवता को ही समर्पित होता हैl सूर्य देव पूरे पृथ्वी पर जीवन के आधार हैं lपूरे ब्रह्मांड में जीवन की उत्पत्ति में सूर्य देव का बहुत बड़ा योगदान है lइनकी किरणें रोज एक नए जीव को जन्म देती हैl उसे जीने की आशा देती हैl सूर्य देव के बिना पृथ्वी पर जीवन की संभावना नगण्य हो जाएगी सूर्य देव अग्नि तत्व को निरूपित करते हैं, तथा इनसे संबंधित रत्न होता है- माणिक जिसमे विभिन्न प्रकार के भौतिक गुणों का वास होता है, जो सूर्य ग्रह से संबंधित होता हैl इस रत्न में सूर्य ग्रह से संबंधित विभिन्न प्रकार की अलौकिक शक्तियां विद्यमान होती है, जिसका उपयोग हमारे पूर्वजों के द्वारा विभिन्न प्रकार से किया जाता रहा है lउन्हीं की रची गई विद्या ज्योतिष विद्या के माध्यम से हम इसके विभिन्न उपयोगों से अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिए इस रत्न को धारण करते हैं।

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माणिक रत्न देखने में बहुत ही सुंदर एवं आकर्षक होता है। यह गुलाबी रंग का होता है, तथा सूर्य ग्रह की कृपा प्राप्त करने के लिए इस रत्न को धारण किया जाता हैl यह रत्न कोरंडम खनिज परिवार से संबंधित होता हैl इसका संयोजक एलुमिनियम ऑक्साइड होता है, तथा इसके अंदर मौजूद करो क्रोमियम की मात्रा इसके रंग को निर्धारित करता है, जितना अधिक क्रोमियम की मात्रा मौजूद रहती है, इसकी रंग उतना अधिक गाढ़ा रहता हैl इसके अंदर मौजूद विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक रूप से अशुद्धियों की वजह से इसका रंग और रंगों का भी हो सकता है, किंतु सूर्य ग्रहण से संबंधित केवल गुलाबी वर्ण का ही माणिक रत्न उपयोग में लाया जाता है।

माणिक रत्न का महत्व बहुत अधिक होने से यह एक लोकप्रिय रत्न है, ना केवल भारतीय ज्योतिष विद्या बल्कि अंक शास्त्र हो या पाश्चात्य ज्योतिष विज्ञान सभी में सूर्य ग्रह से संबंधित इस रत्न को सर्वश्रेष्ठ होने की उपाधि प्राप्त हैl इस रत्न को धारण करने से जातक के जीवन में जो भी नौकरी, पेशा व्यापार संबंधित परेशानियां आती है lउन सभी को यह खत्म करने की अद्वितीय क्षमता अपने अंदर समाहित रखता है। बहुत से ऐसे जातक होते हैं, जिनके जीवन में आजीविका संबंधित चीजों में बहुत अस्थिरता रहती है।

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नौकरी, पेशा, व्यापार आदि जैसी चीजों में उन्हें लाख कोशिशों के बाद भी सफलता प्राप्त नहीं होती है, वे लोग मेहनत भी बहुत करते हैं, किंतु मेहनत के हिसाब से उन्हें सफलता नहीं प्राप्त होती हैl उनके जीवन में स्थिरता का भाव बिल्कुल नगण्य रूप में रहता है, ऐसे में उनकी जिंदगी पूरी उथल-पुथल हुई पड़ी रहती है, जिसकी वजह से काफी परेशानियों से वह गुजरते हैं, ऐसे में यदि यह रत्न धारण किया जाए तो उन्हें जीविकोपार्जन संबंधित , आजीविका संबंधित कोई भी परेशानी होl उन सभी को यह रत्न खत्म कर एक अच्छा एवं उज्जवल भविष्य प्रदान करता है।

रोजी रोजगार संबंधित सभी परेशानियों को दूर जातक के जीवन में स्थायित्व का भाव स्थापित करता है, जिससे वह एकाग्र होकर अपने रोजगार में अपना पूरा ध्यान लगा सके एवं उसमें सफलता प्राप्त कर सकेंl बहुत से ऐसे लोग होते हैं, जिन्हें चाहत होती है, कि प्रशासनिक विभाग में जाए तथा उसमें उन्हें एक प्रतिष्ठित पद प्राप्त हो उन्हें भी औरों की जैसे मान सम्मान की प्राप्ति हो ऐसे में उनका यह सपना सच करने में यह रत्न बहुत कारगर होता है, तथा यदि उपयुक्त समय पर मानिक के रत्न धारण किया जाए तो व्यक्ति को प्रशासनिक विभाग में बहुत बड़े स्तर पर सफलता प्राप्त हो सकती है। कई बड़े नेता लोग के द्वारा इस रत्न को धारण किया जाता है, ताकि राजनीति में वह उच्चतम स्तर तक पहुंच सके एवं उसी चीज में वे आगे बढ़ते जाएं एवं उन्हें मान-सम्मान की प्राप्ति हो।

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लोग उनकी बातों को विचारों को मान सम्मान देंl यह रत्न जिस भी जातक के द्वारा धारण किया जाता हैl उसके पिता से यदि किसी प्रकार का वैचारिक मतभेद रहता है, जिसकी वजह से पिता से नहीं बनती है, या पिता के द्वारा उन्हें किसी प्रकार का सहयोग प्राप्त नहीं होता है, तो यह रत्न पिता से अच्छे संबंध स्थापित करने में बहुत मदद करता है, तथा आप में और आपके पिताजी के बीच में जितने भी मतभेद रहती हैं, गिले-शिकवे रहते हैं, सभी को खत्म कर आप के रिश्ते को मजबूत बनाता है। आपको आपके पिता के करीब ले जाता है, जिससे आजीवन आपको आपके पिताजी का आशीर्वाद एवं उनका साथ प्राप्त होता है।

सूर्य ग्रह से संबंधित विभिन्न प्रकार की दशाओं में भी इस रत्न को धारण किया जाता है, जिससे सूर्य ग्रह के प्रतिकूल प्रभाव को अनुकूल प्रभाव में परिवर्तित किया जा सकेl कभी कभी किसी किसी जातक की कुंडली में सूर्य ग्रह सुप्त अवस्था में उसकी कुंडली के किसी भाव में अवस्थित रहते हैं, या फिर निष्क्रिय अवस्था में स्थित होते हैं, ऐसी परिस्थिति में जातक के जीवन में उनकी कृपा दृष्टि की कमी रहती है, जिसकी वजह से उसके जीवन में बहुत से कार्य रुक जाते हैंl उसके जीवन में बहुत सी परेशानियां दिनों दिन बढ़ती चली जाती है, तथा वह परेशानियों एवं निराशा से चारों ओर से फस जाता है lउस विकट परिस्थिति से निकलने का उसे कोई उपाय नहीं सूझता है।

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ऐसे में यदि यह रत्न धारण किया जाए तो सूर्य गतिमान होकर अपना प्रभाव उसके जीवन पर दिखाने लगते हैं, तथा उसके जीवन में जो समस्याएं अब तक चली आ रही थी। जिसकी वजह से वह पूरी तरह से निराशा से भर चुका था एवं बहुत से कार्य जो लंबे समय से पूर्ण नहीं हुए थेl सूर्य देव की कृपा से सभी की पूर्ति होने लगती है, तथा उसकी स्थिति में बदलाव आने लगता है lउसकी परिस्थितियां अब धीरे-धीरे अनुकूल होने लगती है, जिससे जीवन चक्र फिर से सुगम तरीके से चलने लगता हैl इस रत्न को धारण करने से हमारी काया स्वस्थ होती है, तथा हमारी व्यक्तित्व का भी रूपांतरण होता हैl हमारे मस्तिष्क का एवं काया का तेज बढ़ता है। हमारी कांति बढ़ती हैl इस रत्न को धारण करने से नाम, यश, प्रसिद्धि आदि हमें प्राप्त होता है। जीवन के विभिन्न स्तरों पर यह रत्न हमें सफलता दिलाने में बहुत बड़ा महत्व रखता है।

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