पुखराज रत्न के गुण – Pukhraj Ratna Ke Gun

पुखराज रत्न के गुण – Pukhraj Ratna Ke Gun

 

पुखराज रत्न के गुण

पुखराज रत्न के गुण तथा उनमें विद्वान विशिष्ट गुणों का हमारे ऊपर क्या प्रभाव होगा आज हम जानने का प्रयास करेंगे-

पुखराज रत्न जो विशिष्ट गुणों का स्वामी होता है। यह रत्न गुरु बृहस्पति ग्रह से संबंधित होता है, जिसमें अनेक भौतिक गुणों का समावेशन होता है। यह रत्न देखने में पीला वर्ण का होता है, जो हमारे मन मस्तिष्क को पूरी तरह से शांति प्रदान करता है, तथा इससे उत्सर्जित पीली रोशनी हमारे मन को शीतलता प्रदान करती है lइस ग्रह में गुरु ग्रह से संबंधित अलौकिक ऊर्जाए विद्यमान होती है। यह रत्न गुरु ग्रह से संबंधित विभिन्न गुप्त ऊर्जाओ का स्रोत होता है। इसमें विभिन्न प्रकार की गुप्त ऊजाए गुरु ग्रह की अवशोषित करने की अद्भुत क्षमता होती है।

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यह एक विश्व प्रसिद्ध लोकप्रिय रत्न है, जिसका लोग विभिन्न प्रकार से इस्तेमाल करते हैं, या उपयोग में लाते हैं,vजैसे -विभिन्न प्रकार के आभूषण, अंगूठी, गले का हार, कान के कुंडल ,पेंडेंट आदि जैसे चीजों में इसका उपयोग किया जाता है। कभी-कभी शुभ अवसरों पर हमें किसी के द्वारा उपहार स्वरूप भी यह रत्न प्रदान किया जाता है, ऐसा माना जाता है, कि ऐसा करने के पीछे आशय यह है, कि आप पर हमेशा गुरु ग्रह की दृष्टि सकारात्मक हो ,अनुकूल हो तथा उनका आशीर्वाद आपको पूरी जिंदगी प्राप्त होता रहे, जिससे आप अपने भविष्य की स्वर्णिम परिकल्पना कर सकें एवं सफलता के स्वर्णिम स्तर को पा सके।

पुखराज रत्न देखने में वैसे तो पीला रंग का होता है, किंतु इसके और भी रंग मौजूद होते हैं, जैसे- गुलाबी ,सफेद ,नीला आदि किंतु इन सभी में से सबसे सर्वश्रेष्ठ तथा सबसे उपयुक्त रंग पीला रंग का पुखराज रत्न को माना जाता है, क्योंकि गुरु ग्रह से संबंधित सारी चीजें पीले वर्ण की होती है, इसलिए पीला पुखराज सबसे उपयुक्त माना जाता है, ऐसा ज्योतिष वर्ग का मानना है, कि यदि कुंडली में बृहस्पति अधिक मजबूत है, तो ऐसी परिस्थिति में अन्य पापी अथवा क्रूर ग्रहों का दुष्प्रभाव से मनुष्य बहुत अधिक स्तर तक बचने की संभावना बनी रहती है। पापी या क्रूर ग्रहों का प्रतिकूल प्रभाव यदि किसी जातक के ऊपर पड़ता भी है, तो वह बहुत ही निम्न अवस्था में होता है, जिसे नियंत्रण करना बहुत आसान होता है।

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अतः किसी की कुंडली में यह ग्रह किस अवस्था में अवस्थित हैl यह जानने का कौतूहल लोगों में बहुत बना रहता है। इसकी स्थिति यदि अच्छी नहीं है, तो विद्वान ज्योतिषी की सलाह पर यह रत्न धारण करके लोग अपने सौभाग्य को बढ़ा सकते हैं lअपने जीवन में ऐश्वर्य वैभव आदि की प्राप्ति कर सकते हैं। यह रत्न धारण करने से मान सम्मान बढ़ता हैl प्रसिद्धि बढ़ती है, तथा समाज में ख्याति बढ़ती है l यह हमारे ज्ञान का प्रचार करता है lइसे धारण करने से हमारे ज्ञान में बढ़ोतरी होती है, तथा विद्यार्थी वर्ग के लोगों के द्वारा तो यह रत्न धारण करने पर उन्हें पठन-पाठन में बहुत मदद मिलता है। इस रत्न को धारण करने से आप में अध्यात्मिक शक्तियों का उदित होना भी देखा गया है, जिससे आप धार्मिक चीजों में बढ़-चढ़कर हिस्सा भी लेते हैं।

इस रत्न को धारण करने से आर्थिक स्थिति काफी मजबूत रहती है, तथा मन में यह रत्न बहुत शांति प्रदान करता है। इस रत्न को धारण करने से दांपत्य जीवन भी खुशियों से भरा रहता है, शादी विवाह संबंधित विभिन्न प्रकार की शुभ कार्यों का संपन्न होना भी इस रत्न की कृपा दृष्टि से हो पाता हैl संतान की प्राप्ति का योग भी इसी ग्रह से संबंधित होता है। अतः यह रत्न संतान प्राप्ति में बहुत मदद करता है। इस रत्न के अनेक चमत्कारिक लाभ हमें देखने को मिलते हैं। यह एक अतुलनीय रत्न है lयह सृष्टि पर उपलब्ध सबसे अनमोल संसाधन है।

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पुखराज रत्न के निम्नलिखित गुण होते हैं, जिसके माध्यम से आप जान सकते हैं, कि वह एक असली पुखराज रत्न है, या केवल कांच का टुकड़ा है या कृत्रिम रूप से निर्मित रत्न है-

1. असली पुखराज रत्न को जब किसी लकड़ी के टुकड़े के विपरीत रगड़ा जाता है, तब भी उसके चमक या आकर्षण पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता है। उसके विपरीत उसकी चमक और अधिक बढ़ जाती है। वह देखने में और भी आकर्षक लगने लगता है, जबकि कृत्रिम रूप से निर्मित पुखराज रत्न को यदि लकड़ी के टुकड़े से घर्षण किया जाए तो ऐसी परिस्थिति में उसमें आपको दरार या किसी तरह की त्रुटि नजर आने लगेगी तथा उसकी चमक भी फीकी पड़ जाएगी।

2. प्राकृतिक रूप से निर्मित पुखराज रत्न को यदि कच्चे दूध में कुछ घंटों के लिए डुबोकर रखा जाए, उसके पश्चात जब आप उसे निकालेंगे तो देखेंगे lउसकी चमक या उसके आकर्षण पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ा हैl उससे बहुत ही सुनहरी पीले रंग की रोशनी प्रदीप्त हो रही है lउसका रंग पहले के समान ही है, उसमें किसी तरह का भी बदलाव देखने को नहीं मिलता है, जबकि इसके विपरीत यदि कृत्रिम रूप से निर्मित पुखराज रत्न को दूध में कुछ घंटों के लिए डालकर छोड़ दिया जाए और उसके पश्चात उसे निकाला जाए तो आप उसे देखेंगे कि उसका रंग पहले के मुकाबले काफी ज्यादा हल्का हो गया है, तथा पहले जैसी चमक या आकर्षण उसमें अब मौजूद नहीं है, उसमें से पहले जैसी पीली रोशनी प्रदीप्त नहीं हो रही है।

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3. उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले पुखराज रत्न को जब ताप पर रखा जाता है, तो इसका रंग और अधिक निखर जाता है, यह और अधिक देखने में मनभावन और आकर्षण पूर्ण देखने में लगने लगता है, जबकि कृत्रिम रूप से निर्मित पुखराज रत्न को जब आप ताप पर रखेंगे तो कुछ देर के पश्चात आप देखेंगे कि उसके आकार में बदलाव आ रहा है, और यदि आपके द्वारा किसी भी वस्तु से उसके ऊपर रखा जाएगा तो उसमें उस वस्तु का निशान छप जाएगा तथा उसकी विकृत स्वरूप आपको देखने को मिलेगाl ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि कृत्रिम रूप से निर्मित पुखराज रत्न में जो तत्व मौजूद होते हैंl उनका गलनांक बहुत कम होता है, जबकि प्राकृतिक रूप से उपलब्ध पुखराज रत्न का गलनांक बहुत अधिक होता है, जिसकी वजह से इस यहां पर भी दरकता नहीं है, या तड़पता नहीं है, इसमें किसी भी प्रकार की दरार आदि आपको देखने को नहीं मिलती है।

4.प्राकृतिक रूप से निर्मित या असली पुखराज रत्न का घनत्व बहुत अधिक होता है, जिसकी वजह से भले ही यह देखने में छोटा लगे किंतु वजन में भारी होता है, जबकि कृत्रिम रूप से निर्मित पुखराज रत्न भले ही देखने में बड़ा लगे किंतु वजन में असली पुखराज रत्न के तुलना में काफी कम होता है। दोनों के वजनों में काफी अंतर आपको देखने को मिलता है।

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