माणिक रत्न कैसा होता है – Manik Ratna Kaisa Hota Hai

माणिक रत्न कैसा होता है – Manik Ratna Kaisa Hota Hai

 

माणिक रत्न कैसा होता है – Manik Ratna

 Kaisa Hota Hai

माणिक रत्न (manik ratna kaisa hota hai in hindi) एक सुंदर एवं आकर्षक रत्न होता है, जिसकी आभा बहुत ही कांतिमय होती हैl उसका रंग गुलाबी होता है, जिस प्रकार कमल पुष्प की पंखुड़ियों का रंग गुलाबी होता है lउसी प्रकार मानिक रत्न का भी रंग गुलाबी होता है, जिस प्रकार गुलाब पुष्प के पंखुड़ियों का रंग गुलाबी होता है lउसी प्रकार माणिक रत्न के पुष्प का वर्ण गुलाबी होता हैl माणिक रत्न धरती पर प्रत्यक्ष रूप से मौजूद हमारे आदरणीय -सम्मानीय देवता सूर्य देव को समर्पित होता है, जितने भी चराचर होते हैं lसभी की आत्मा में निवास करने वाले सूर्य देव से संबंधित यह अद्वितीय रत्न है lसूर्य देव जिनकी उपासना ना जाने कितने ही लाखों करोड़ों वर्षों से हमारे पूर्वजों के द्वारा किया जाता रहा है।

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सृष्टि पर जीवन का सृजन का सबसे बड़ा स्रोत जिसे माना जाता है, वह सूर्य ग्रह ही है। सूर्य ग्रह के चारों ओर न केवल पृथ्वी बल्कि विभिन्न प्रकार के ग्रह उल्काए उन के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। सूर्य ग्रह एक आकाशीय पिंड है, जिसमें विभिन्न प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाओं के कारण ऊष्मा ऊर्जा एवं प्रकाश ऊर्जा निरंतर उत्सर्जित होते रहता है, जिस दिन यह प्रकाश समाप्त हो जाएगा जिस दिन सूर्य देव की उस्मा ऊर्जा समाप्त हो जाएगी। पृथ्वी पर से पूरी तरह से जीवन समाप्त हो जाएगा। सूर्य ग्रह के कारण ही पृथ्वी पर जीवन संभव हो पाया हैl सूर्य ग्रह को नवग्रहों में राजा की उपाधि दी गई है lइन्हें पूरे ब्रह्मांड का पिता माना जाता है, ऐसे अकल्पनीय शक्ति को निरूपित करने वाला रत्न होता है- माणिक।

ऋग्वेद में सूर्य देवता से संबंधित विभिन्न प्रकार की रचनाएं की गई है। पूरे विश्व में लोकप्रिय गायत्री मंत्र की रचना भी सूर्य देव को संबोधित करते हुए ही किया गया है lसंपूर्ण जगत का उत्पत्ति का एक मात्र कारण सूर्य देव को निरूपित किया गया हैl सूर्य उपासना का प्रचलन हमारे धर्म में ना जाने कब से शुरू हुआ ना इसका कोई आदि है, और ना इसका कोई अंत है।

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मानिक रत्न (manik ratna dharan karne ke fayde) को सूर्य देव का सबसे शक्तिशाली रत्न माना गया है। माणिक रत्न के संयोजक अल्मुनियम ऑक्साइड ,लौह तत्व तथा क्रोमियम होता है lविभिन्न प्रकार के सैलों के रूपांतरण से विभिन्न प्रकार के रत्नों का उद्गम होता है। कभी-कभी यह अद्भुत रत्न हमें कोयले की खदान हो या फिर ज्वालामुखी के दरारों से भी प्राप्त होता है। माणिक रत्न में सूर्य ग्रह से संबंधित विभिन्न प्रकार की भौतिक ऊर्जा का समावेशन होता है, जिससे जिस दिशा तक के द्वारा धारण किया जाता है, कि जीवन में अनेक अनुकूल परिणाम माणिक रत्न के माध्यम से प्राप्त होता हैl विश्व के कई देश है जहां कई देश है, जहां माणिक रत्न उत्तम गुणवत्ता वाला प्राप्त होता है, जैसे- म्यानमार, श्रीलंका ,भारत, अफगानिस्तान आदि जैसे देशों से हमें अच्छे गुणों वाले माणिक रत्न प्राप्त होते हैं।

यह एक लोकप्रिय रत्न है, तथा इसे लोगों के द्वारा सूर्य ग्रह की कृपा प्राप्त करने के लिए धारण किया जाता है, कई बार ऐसा होता है, कि जातक के कुंडली के किसी ऐसे भाव में सूर्य ग्रह स्थित होते हैं, जिससे उसे बहुत पीड़ा देते हैंl इनकी कुदृष्टि होने की वजह से जातक को बहुत कष्ट होता है, जिसकी वजह से जातक को शारीरिक स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं आए दिन आते रहती है, एवं त्वचा संबंधित भी बहुत सी बीमारियां उसे घेरे रहती है, ऐसे में यदि माणिक रत्न (manik ratna dharan karne se kya hota hai) धारण किया गया तो उसके बहुत से शारीरिक कष्ट जैसे -कुष्ठ रोग ,त्वचा संबंधित एलर्जी इन सभी चीजों में माणिक रत्न बहुत कारगर होता है। इसके साथ-साथ हड्डियों से संबंधित बीमारियां भी माणिक रत्न को धारण करने से दूर होती हैl नेत्रों से संबंधित विकार का कारण भी सूर्य ग्रह को ही माना जाता है, ऐसे में माणिक रत्न नेत्रों से संबंधित विकार को भी दूर करने की क्षमता रखता है।

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सूर्य ग्रह को नौकरी का कारक माना जाता है, ऐसा माना जाता है, कि अजीविकोपार्जन तथा कैरियर संबंधित चीजों में सफलता प्राप्त करने के लिए सूर्य ग्रह का बलिष्ठ होना बहुत आवश्यक है, तभी जातक को बिना किसी विघ्न के उसे कैरियर संबंधित या नौकरी- पेशा, व्यापार संबंधित या विभिन्न प्रकार के धन उपार्जन संबंधित चीजों में सफलता प्राप्त होती है, बिना इनकी कृपा के जीवन में जातक को रोजी रोजगार संबंधित चीजें नहीं मिलती हैं। माणिक रत्न (manik ratna pahanne ke labh) को धारण करने से काया सुंदर एवं आकर्षक बनती है, तथा जातक मेहनती एवं कर्मठ होता है। उसके अंदर आलस्य का का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं रहता है।

माणिक रत्न (manik ratna pahanne ke fayde) को धारण करने से जातक निष्ठावान बनते हैं, तथा अपने कार्यों के प्रति बहुत समर्पित रहते हैं। अपने कार्यों को हमेशा निर्धारित समय पर पूर्ण करते हैं। इन्हें अपने कर्मों से विमुख होने की आदत नहीं होती है, तथा यह जो भी बोलते हैं, स्पष्ट रुप से बोलते हैं। इन्हें बातों को घुमाना फिराना नहीं आता है। इसलिए इन्हें स्पष्ट वक्ता का भी उपाधि दिया जाता है। माणिक रत्न जिस भी व्यक्ति के द्वारा धारण किया जाता है lउसमें निडरता, साहसी, निर्भीक स्वभाव शक्तिशाली स्वरूप जैसे गुण खुद-ब-खुद आने लगते हैं, जिसकी वजह से लोगों में वह बहुत विख्यात होता है lउसके विशिष्ट गुणों के कारण लोग उस पर बहुत भरोसा करते हैं। उसकी बातों पर आंख बंद कर यकीन करते हैं। यह रत्न जातक को नेतृत्व क्षमता प्रदान करता है।

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ऐसी नेतृत्व क्षमता जिसकी कामना हर किसी की होती हैl हर कोई चाहता है, कि वह राजा के समान नेतृत्व करेंl उसमें यह शक्तियां विद्यमान हो माणिक रत्न धारण करने से जातक के अंदर स्वाभाविक रूप से उसमें नेतृत्व क्षमता का वास होने लगता है। माणिक रत्न (manik ratna ke fayde) को धारण करने से जातक का अपने अभिभावक या अपने पिताजी के साथ संबंध बहुत मजबूत होता है, जिसकी वजह से उसके पिता का आशीर्वाद एवं सहयोग आजीवन उसे प्राप्त होता है। माणिक रत्न शक्ति एवं पिता का कारक माना जाता है। माणिक रत्न को धारण करने वाला जातक अपने स्वाभिमान के लिए अपनी जान तक दे सकता है, उसे अपना स्वाभिमान प्राणों से भी प्रिय होता है। माणिक रत्न धारण करने से जातक के मन मस्तिष्क का तेज बढ़ता है।

माणिक रत्न (manik ratna ki jankari) को सोने के साथ धारण करना सबसे शुभ माना जाता है, ऐसा माना जाता है, कि सोना भी सूर्य ग्रह से संबंधित एक धातु है, जिसकी वजह से जब सोना धातु की शक्तियों के साथ माणिक रत्न की शक्तियों का समावेशन होता है, तब इन दोनों की ऊर्जा मिलकर बहुत बड़े शक्तिपुंज का निर्माण करती है, जिससे जिस भी जातक के द्वारा यह धारण किया जाता है lउसे उसके जीवन में अप्रतिम रूप से लाभ प्राप्त होता है, तथा ऐसी घटनाएं घटती है, जिसकी परिकल्पना की पृष्ठभूमि शायद ही कभी उसके द्वारा स्वप्न में भी देखा गया हो। यह एक दिव्य रत्न है।

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