टाइगर स्टोन किस दिन पहने – Tigar Stone Kis Din Pahne

टाइगर स्टोन किस दिन पहने – Tigar Stone Kis Din Pahne

 

टाइगर स्टोन किस दिन पहने

टाइगर स्टोन किस दिन पहने – टाइगर स्टोन एक ऐसा स्टोन है, जिसे विभिन्न प्रकार के ग्रहों को जागृत करने के लिए उपयोग में लाया जाता है lबहुत से ऐसे जातक होते हैं, जिनके लग्न कुंडली में विभिन्न प्रकार के ग्रह शुक्र अवस्था में रहते हैं, या फिर वह पूरी तरह से निष्क्रिय रहते हो या ऐसे भी संभावना उत्पन्न होती है, कि जातक विशिष्ट ग्रह से संबंधित कार्य से पूरी तरह वंचित रहता है, जिसकी वजह से उसे अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता हैl उस विशिष्ट ग्रह से संबंधित विभिन्न प्रकार के कार्य उसके जीवन में अटके हुए रहते हैं, टाइगर आई सभी रत्नों में त्वरित गति से प्रभाव दिखाने वाला रत्न माना जाता है।

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यह एक बहुमुखी एवं चमत्कारिक रत्न है, जो मुख्यतः रूबी का उपरत्न माना जाता हैl इस रत्न की या विशेषता है, कि इसका कोई भी दुष्प्रभाव जातक के ऊपर नहीं पड़ता है, जिसकी वजह से इसे धारण करने के लिए कुंडली का अवलोकन या विश्लेषण कराने की जरूरत नहीं पड़ती है lयह देखने में बिल्कुल बाघ के छाल के समान काला एवं पीला होता है। बाघ के नेत्र के समान इसकी आभा बहुत ही खूबसूरत होती हैl इसे अलग अलग तरीके से विधिवत पूर्वक अलग-अलग दिनों पर धारण किया जा सकता हैl इसके साथ ही इस से अभिमंत्रित करने के लिए या इसे सिद्ध करने के लिए भी विभिन्न प्रकार के मंत्रों का उपयोग किया जा सकता है।

सूर्य ग्रह- सूर्य की स्थिति यदि जातक की कुंडली में अच्छी ना हो तो उसे कभी भी प्रशासनिक विभाग हो या राजनीतिक संबंधित कार्य किसी में भी सफलता प्राप्त नहीं होती है, इसके साथ-साथ उसके जीवन में पद प्रतिष्ठा अनुशासन जैसी चीजों का अभाव सदा रहता है।

सूर्य -यदि किसी जातक की कुंडली में सूर्य ग्रह से संबंधित कार्य रुके हुए हैं, और वह किसी भी कारण से रूबी रत्न धारण करने में असमर्थ है, तो ऐसी परिस्थिति में यह रत्न धारण किया जा सकता है, शुक्ल पक्ष के किसी भी रविवार को सूर्य उदय के साथ इस रत्न को विभिन्न प्रकार के सूर्य मंत्रों सूर्य के बीज मंत्र के द्वारा अभिमंत्रित कर धारण किया जा सकता हैl इसे धारण करने के लिए सबसे उपयुक्त धातु चांदी मानी गई है, तथा अनामिका उंगली में इसे धारण किया जा सकता है।

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1. चंद्र उपग्रह चंद्र उपग्रह जो हमारे मन का कारक होता है तथा विभिन्न प्रकार की मानसिक विडंबना है या मानसिक चिंता है या पागलपन या मानसिक अवसाद जैसी स्थिति का कारक भी खराब चंद्र के दुष्प्रभाव के कारण होता हैl ऐसी स्थिति में यह रत्न धारण किया जा सकता हैl विभिन्न प्रकार के चंद्र ग्रह से संबंधित मंत्र या चंद्र के बीज मंत्र के द्वारा इसे अभिमंत्रित कर अनामिका उंगली में चांदी में मड़वा कर सोमवार के दिन धारण किया जा सकता हैl

2. बुध ग्रह- बुध जो हमारे संचार तंत्र को प्रभावित करता है, इसके साथ-साथ हमारे बुद्धि विवेक का निर्धारण भी इसी के द्वारा किया जाता है lलाख किसी के पास धन हो किंतु बुद्धि नहीं है, तो सभी चीजें बेकार है चतुराई ,गणित ,तर्क वितर्क ,आदि का कारक भी बुध ग्रह को माना जाता है।
बुध के मंत्रों के द्वारा अभिमंत्रित कर इसे शुक्ल पक्ष के बुधवार के दिन चांदी में इसे धारण किया जा सकता है, इसे कनिष्ठा उंगली में धारण करना सबसे उत्तम माना जाता है।

3. मंगल ग्रह- मंगल ग्रह हमारे साहस पराक्रम शौर्य आदि का प्रतीक है lयह हमारी ऊर्जा का प्रतीक होता है, तथा किसी भी प्रकार के उच्च पद पर प्रतिष्ठित होने के लिए इस का शुभ होना बहुत आवश्यक है, इसके साथ साथ सुखी एवं खुशहाल वैवाहिक जीवन जीने के लिए भी मंगल का शुभ हो ना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
शुक्ल पक्ष के मंगलवार के दिन इस रत्न को चांदी के धातु में पिरो कर धारण करना चाहिए, इसे धारण करने से पूर्व मंगल ग्रह के बीज मंत्रों से अभिमंत्रित अथवा प्रतिष्ठित अवश्य करना चाहिए, ताकि इसका सर्वोत्तम लाभ जातक को प्राप्त हो सकेl इसे तर्जनी उंगली में धारण किया जाता है।

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4. गुरु ग्रह- गुरु जिसकी कृपा से मूर्ख भी विद्वान बन जाए वही है, गुरु गुरु हमारे ज्ञान का कारक है, तथा हमारे अंदर विभिन्न प्रकार के अच्छे गुणों का कारक भी गुरु को ही माना जाता है।

गुरु ग्रह की कृपा प्राप्ति के लिए टाइगर आईको गुरुवार के दिन शुक्ल पक्ष में विभिन्न प्रकार के गुरु मंत्रों के द्वारा अभिमंत्रित कर इसे तर्जनी उंगली में चांदी में धारण किया जाना चाहिए।

5. शुक्र ग्रह- सांसारिक सुखों का कारक एवं विलासिता का कारक तथा भौतिक सुखों का कारण भी शुक्र ग्रह को माना जाता है। हमारे जिंदगी में जो भी ऐसो आराम में प्राप्त होते हैं, उसका कारक शुक्र ग्रह होता है।

शुक्र ग्रह की कृपा प्राप्त करने के लिए एवं उसे जागृत करने के लिए इस रत्न को शुक्रवार के दिन विधिपूर्वक सूर्य के मंत्रों से अभिमंत्रित कर इस रत्न को गले में पेंडेंट के रूप में धारण किया जाना चाहिए, पेंडेंट को आप चाहे तो चांदी में मड़वा कर धारण कर सकते हैं।

6. शनि ग्रह- शनि ग्रह जो एक कर्म प्रधान देवता होते हैं, तथा किसी के भी भाग्य का कारक भी इन्हें ही माना जाता है lयदि इनकी कृपा प्राप्त हो जाए तो जातक का भाग्य प्रबल हो जाता है, एवं उसके जीवन में किसी भी चीज की कमी नहीं रहती है।

शनि ग्रह की कृपा प्राप्त करने के लिए जातक को यह रत्न शनि ग्रह के बीज मंत्रों से अभिमंत्रित कर मध्यरात्रि अथवा सूर्य उदय से पूर्व धारण करना चाहिए। इसे धारण करने का सबसे उपयुक्त दिन शनिवार को माना जाता है इसे मध्यमा उंगली में धारण किया जाना चाहिए।

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7. राहु ग्रह – राहु जिसे एक छलावा भी कहते हैंl यह वाकपटुता जैसी सिद्धि दिलाने में महारत रखता है, तथा जो बुध को भी चुप करा दे वही है, राहु हमारे विस्तृत ज्ञान को निरूपित करने वाला होता है।

राहु की कृपा प्राप्त करने के लिए इस रत्न को मध्यमा उंगली में सूर्य अस्त होने के पश्चात धारण किया जाना चाहिए lइसे धारण करने का दिन बुधवार को माना जाता है, तथा इसे धारण करने से पूर्व राहु के मंत्रों से अभिमंत्रित किया जाना चाहिए।

8. केतु -हमारे जीवन में किसी भी तरह का आकस्मिक लाभ हो या आकस्मिक घटना हो यह सभी का कारक केतु ग्रह को माना जाता है, केतु जो आत्मबोध का कारक होता है, तथा आध्यात्मिक चीजों में जातक को अप्रतिम रूप से सफलता दिलाता है।
इस की कृपा प्राप्त करने के लिए जातक को इसे भी बुधवार के दिन सूर्य उदय से पूर्व धारण किया जाना चाहिए। इसे धारण करने के लिए मध्यमा उंगली बाएं हाथ की सबसे उपयुक्त मानी जाती है, धारण करने से पूर्व इस रत्न को राहु के बीज मंत्रों से अभिमंत्रित करना बहुत आवश्यक होता है।

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