मूंगा रत्न क्या काम करता है – Munga Ratna Kya Kam Karta Hai

मूंगा रत्न क्या काम करता है – Munga Ratna Kya Kam Karta Hai

 

मूंगा रत्न क्या काम करता है

मूंगा रत्न क्या काम करता है- मूंगा जो देखने में रक्त के समान होता हैl मंगल से संबंधित एक रत्न है, तथा समुद्री जीवो के द्वारा इस रत्न की उत्पत्ति की जाती है, वस्तुतः मूंगा एक पादप हैl यह रत्न भारत ईरान जापान श्रीलंका आदि देशों से प्राप्त होता है, किंतु विश्व में सबसे अधिक श्रीलंका तथा इटालियन मूंगा बहुत लोकप्रिय है, एवं रत्नों की दुनिया में बहुत चर्चित भी है।

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मंगल ग्रह को ज्योतिष शास्त्र में ऊर्जा भाई भूमि शक्ति साहस पराक्रम शौर्य प्रशासन नेतृत्व अग्नि से संबंधित थी जो का प्रतिनिधि माना जाता हैl भौम पुत्र होने की वजह से इसका प्रभाव पृथ्वी के सूक्ष्म से सूक्ष्म जीव पर बहुत अधिक प्रभावशाली होता है, चाहे इसका प्रभाव सकारात्मक हो या फिर नकारात्मक हो, मंगल से संबंधित मूंगा रत्न या मंगल ग्रह से संबंधित उपरत्न को जन्मपत्रिका के माध्यम से जाना जा सकता है, कि इसे धारण करने से जातक को लाभ प्राप्त होगा अथवा उल्टा हानि ही होने लगेगी, इसे सेनापति होने का गौरव प्राप्त है lसूर्य की राज्य में सेनापति के मुख्य किराएदार का भार मंगल ग्रह के द्वारा निभाया जाता हैl सेनापति जिसकी अनुमति के बिना राजा तक पहुंच पाना असंभव होता है, या फिर किसी भी राज्य में पहुंचना असंभव होता है lठीक उसी प्रकार मंगल की कृपा प्राप्त किए बिना सूर्य की कृपा प्राप्त नहीं हो पाती हैl मंगल ग्रह से संबंधित नक्षत्र मृगशिरा, चित्रा एवं धनिष्ठा होता है। 27 नक्षत्रों में से यही तीन नक्षत्र मुख्य रूप से मंगल ग्रह से संबंधित होते हैं।

मंगल उग्र एवं आक्रामक होने के साथ-साथ क्रूर ग्रहों की श्रेणी में भी आता है, तथा इसके द्वारा विभिन्न प्रकार के दोष जातक के जीवन में और अधिक परेशानियां खड़ी कर देते हैं, जैसे- मांगलिक दोष- जिसमें सबसे अधिक दांपत्य जीवन प्रभावित होता हैl वैवाहिक जीवन से सुख शांति पूरी तरह से नष्ट हो जाती है।

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जीवन साथी के साथ वैचारिक मतभेद बहुत अधिक होता है, जिसकी वजह से हर वक्त घर में क्लेश दुख कलह का माहौल रहता हैl मंगल ग्रह के द्वारा मांगलिक योग के कारण उत्पन्न हुए अशुभ फल को दूर करने के लिए मूंगा रत्न धारण किया जाता है। खराब मंगल जातकों के गुप्त शत्रुओं के साथ-साथ प्रत्यक्ष शत्रुओं की संख्या में भी वृद्धि करता है, जिससे जातक के जीवन में स्थिरता का भाव की सदा अभाव रहता हैl शत्रु पक्ष के लोग उसके जीवन पर बहुत अधिक हावी रहते हैं, ऐसी स्थिति में धारण किया जाने वाला मूंगा रत्न उसे शत्रु बाधा से मुक्त करता है, तथा सारे शत्रु स्वयं ही ध्वस्त होने के कगार पर पहुंच जाते हैं, क्योंकि मंगल युद्ध का परिचालक करता है, तथा इसकी शुभदा युद्ध में विजय दिलाती है।

मंगल की खराब स्थिति जातक के जीवन में अनेक रोग लेकर आती है, तथा जातक इन रोगो से आए दिन ग्रसित ही रहता है। मंगल यदि दूषित होकर अपने अशुभ प्रभाव देता है, तो जातक को निम्नलिखित अंगों पर बहुत अधिक व्याधि देता है, तथा उससे संबंधित अनेक बीमारियो से भी ग्रसित होने लगता हैl रक्त ,गर्दन, गुप्तांग ,स्त्री अंग ,कभी-कभी दिल के रोग, विषाक्तता, चोट लगना ,आग से जलना ,कोड, खुजली होना, रक्त से संबंधित परेशानी ,कैंसर, ट्यूमर, बवासीर जैसी बीमारी चेचक आदि का कारक खराब एवं अशुभ फल मंगल के द्वारा दिया जाता है, तब यह सारी बीमारियो से जातक ग्रसित होता हैl कंठ नेत्र से संबंधित विकास मंगल के द्वारा ही दिया जाता है।

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मूंगा रत्न धारण करने से जातक को इन सभी परेशानियों में बहुत लाभ होता है, तथा यदि कोई जातक उपर्युक्त वर्णित बीमारियों से ग्रसित भी होता है, तो यह रत्ना उसे स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने की क्षमता रखता है, तथा मंगल ग्रह की स्थिति को मजबूत बनाकर जातक की बीमारी को धीरे-धीरे ठीक करता हैl मंगल का अशुभ होना जातक के लिए तब बहुत बड़ी परेशानी खड़ा कर देता है, जब उसके अपने ही लोग उसके अधिक क्रोध के शिकार हो जाते हैं, क्योंकि खराब मंगल जातकों को और अधिक उग्र एवं आक्रामक बना देता है, जिससे जातक बिना सोचे समझे अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करता है, और विभिन्न प्रकार के उलझनों में स्वयं ही फस जाता है।

वाणी पर नियंत्रण नहीं होने की वजह से एवं वाणी कर्कश होने की वजह से उसके संबंध पास पड़ोस के लोग या दोस्त रिश्तेदार हो या कार्यस्थल के लोग हो या स्वयं के भाई-बहन सभी से उसका मनमुटाव बहुत अधिक रहता है, तथा समय-समय पर झगड़े की स्थिति उत्पन्न होती रहती है, जिससे वह और भी मानसिक तौर पर अशांत रहता हैl मूंगा रत्न ऐसे में बहुत कारगर सिद्ध होता है, तथा मंगल ग्रह की स्थिति को उत्कृष्ट बनाता है, जिससे जातक के जीवन में अनुकूल प्रभाव होना शुरू हो जाता है, एवं उसके सगे संबंधियों भाई बहनों तथा आस-पड़ोस के लोगों की या कार्यस्थल में अवस्थित उसके संगी साथी से संबंधों में सुधार होना शुरू हो जाता है, लोगों से उसके संबंध सुधारने लगते हैं, तथा उसकी भावनाओं को उसकी मनोदशा को सभी अच्छे से समझते हैं, जिसके कारण उसका उग्र एवं स्वभाव ही परिवर्तित होने लगता है, और वह सौम्य एवं शांत प्रवृत्ति का होने लगता है।

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मंगल के कृपा से वंचित लोगों को भाग्य का साथ शायद ही प्राप्त होता है, इसलिए उनके द्वारा किया गया मेहनत भी कभी-कभी पूरी तरह से निष्फल हो जाता हैl प्रशासनिक, विभाग हो या सेना, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आर्टिलरी, चिकित्सा, पुलिस या अभियांत्रिकी आदि का प्रतिनिधित्व मंगल ग्रह के द्वारा किया जाता है, ऐसे में खराब मंगल वाले लोग इन सभी कार्य क्षेत्र में कभी भी अच्छी उपलब्धि हासिल नहीं कर पाते हैं, तथा स्थिति कभी-कभी ऐसी भी उत्पन्न होती है, कि यदि सौभाग्य से इन सभी क्षेत्रों में संलग्न भी हो जाते हैं, तो उन्हें बीच में ही उसे मजबूरी में छोड़ना पड़ता है, या फिर कोई ऐसी परेशानी हो जाती है, जिसके कारण उक्त नौकरी पेशा से हाथ धोना पड़ता हैl ऐसी स्थितियों से बचने के लिए मंगल का यह मूंगा रत्न बहुत सार्थक सिद्ध होता है, तथा इन कार्य क्षेत्रों में जातक को अच्छे परिणाम प्राप्त करने में मदद करता हैl उनकी पद प्रतिष्ठा में भी यह रत्न वृद्धि करता है।

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