मूंगा रत्न के नुकसान – Munga Ratna Ke Nuksan

मूंगा रत्न के नुकसान – Munga Ratna Ke Nuksan

 

मूंगा रत्न के नुकसान- Munga Ratna Ke

 Nuksan

कभी-कभी हमारी गलतियों की वजह से मूंगा रत्न हमें बहुत अधिक विध्वंसक परिणाम भी देने लगता है, क्योंकि सुनी सुनाई बातों में आकर यदि मूंगा रत्न (munga ratna ke nuksan in hindi) धारण किया गया तो जातक को अनेक प्रतिकूल परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है, अतः किसी भी रत्न को धारण करने से पूर्व उसकी उत्तम जांच की जानी चाहिए तथा लग्न कुंडली की विवेचना करने के पश्चात ही इसे धारण किया जाना चाहिएl कभी-कभी अच्छे तरीके एवं शुभ मुहूर्त पर नहीं धारण करने से भी इसके दुष्प्रभाव जातक को देखने को मिल सकते हैं, या कई बार ऐसी भी परिस्थितियां उत्पन्न होती है, जब जातक जहां से वह रत्न खरीदता हैl मूंगा रत्न पहले से ही उपयोग में लाया जा चुका होता है, किंतु जातक को दुकानदार के द्वारा नवीन मूंगा रत्न कह कर दिया जाता है।

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ऐसे में भी मूंगा रत्न (munga ratna ke nuksan kya hai) के दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं, क्योंकि रत्न जिस भी व्यक्ति के द्वारा धारण किया जाता है, तो व्यक्ति का शरीर रत्नों में मौजूद भौतिक ऊर्जा का अवशोषण करने लगता है, जबकि रत्न शरीर में विद्यमान नकारात्मक शक्तियों को अवशोषित करता है, एवं उसे पूरी तरह से नष्ट करने की पूरी कोशिश करता है, जिसकी वजह से रत्नों की शक्तियों का क्षरण होना शुरू हो जाता हैl एक वक्त ऐसा आता है, जब रत्न में समाहित प्राकृतिक ऊर्जा पूरी तरह से शून्य हो जाती है।

ऐसी परिस्थिति में मूंगा रत्न (munga ratna ke nuksan se kaise bache) उपयोग में लाने योग्य नहीं रहता है, तब लोग या तो दूसरा रत्न धारण करते हैं, या फिर उसका उपरत्न धारण कर लेते हैं, या फिर उसे अच्छे से अभिमंत्रित करा कर फिर से धारण करते हैं, किंतु कई बार स्थितियां इसके विपरीत चली जाती है lकई लोग दुकानदारों को कम पैसों में ही उपयोग में लाई हुई रत्न वाली अंगूठियों को बेच देते हैं, और दुकानदारों के द्वारा उसे साफ करने के पश्चात फिर से बेच दिया जाता है, ऐसी परिस्थिति में उपयोग में लाई हुई अंगूठी यदि जातक धारण करता है, तो उसे अनेक विडंबनाओ एवं कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

मूंगा रत्न के निम्नलिखित नुकसान हो सकते हैं-

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1.मूंगा रत्न (munga ratna ke bure prabhav kya hai) के बुरे प्रभाव से जातक का व्यक्तित्व पूरी तरह से विपरीत होने लगता है,उसकी वाणी बहुत अधिक कर्कश होने लगती है, जिसकी वजह से बहुत से वाद-विवाद वैचारिक मतभेद भी उत्पन्न होने लगता हैl स्थितियां इतनी अधिक बिगड़ जाती है, कि यह कभी-कभी बड़े अस्तर के झगड़े में भी परिवर्तित हो जाती हैl जातक के रूढ स्वभाव के कारण लोग उससे बहुत अधिक दूर रहना पसंद करते हैंl लोगो को जातक की कर्कश बोली बिल्कुल भी पसंद नहीं आती है, जिसकी वजह से जातक सामाजिक स्तर पर पूरी तरह से अलगाव जैसी स्थिति में पहुंच जाता है।

2. मूंगा रत्न के दुष्प्रभाव के कारण जातक बहुत अधिक क्रोधी प्रवृत्ति का बन जाता है, जिसकी वजह से कार्यस्थल हो या घर परिवार के लोग हर जगह उसके झगड़े झंझट बहुत अधिक बढ़ते हैं, इसके साथ-साथ उसके घर में हर वक्त कलह परेशानी का माहौल बना रहता है।

3. मूंगा रत्न (munga ratna ki jankari) के बुरे प्रभाव से जातक में घमंड बहुत अधिक बढ़ जाता है, जिससे वह दूसरों को बहुत कम आंकने लगता है, जिसकी वजह से अपने परिवार के सदस्यों से भी वह दूर दूर रहने लगता है तथा कार्यस्थल या सामाजिक तौर पर भी लोगों से कम ही जुड़ाव स्थापित कर पाता हैl लोग उसे समझ नहीं पाते हैंl उसकी प्रवृत्ति से लोगों को चिंढ सी होने लगती है, जिसकी वजह से जातक व्यवहारिक जीवन से बिल्कुल दूर हो जाता है।

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4. जातक की कर्वी बोली की वजह से उसके वैवाहिक जीवन में भी कभी-कभी दरार उत्पन्न हो जाता हैl परिस्थितियां कभी-कभी तलाक की ओर भी रुख कर लेती है, जिससे उसका जीवन बहुत अधिक प्रभावित होता है, खुशियां उसके जीवन से कोसों दूर चली जाती हैं।

5. मूंगा रत्न के दुष्प्रभाव से जातक गहरी आकस्मिक दुर्घटना का भी शिकार हो सकता है, चोट या जलने संबंधित चीजों की दुर्घटनाएं उसके जीवन में बहुत अधिक घटित होने लगती है।

6. कभी-कभी तो मूंगा रत्न (munga ratna kaisa hota hai) के दुष्प्रभाव से जातक के जीवन को बहुत खतरा होने लगता है, या कई बार जातक ऐसी परिस्थितियों से गुजरने लगता हैl जहां उसका शरीर बिल्कुल शिथिल पर जाता है lउसकी कार्य करने की क्षमता शून्य हो जाती है, जिसकी वजह से उसके घर परिवार में आफतों का पहाड़ टूट पड़ता है, उसके जीवन के हर और उसे शून्यता का भाव ही नजर आता है lअंदर- अंदर वह पूरी तरह से टूट जाता है, एवं चिरचिराहट ,पागलपन, अवसाद जैसी चीजों से वह और अधिक परेशान रहने लगता है।

7. मूंगा रत्न (munga ratna ke dushprabhav kay hota hai) के दुष्प्रभाव के कारण स्वास्थ्य संबंधित चिंताएं भी जातक को बहुत अधिक सताने लगती है, आए दिन कोई न कोई बीमारी से ग्रसित होने लगता है, जिससे उसका स्वास्थ्य दिनों दिन गिरता चला जाता है, दवाइयां भी बेअसर होने लगती है।

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8. मूंगा रत्न (munga ratna ke bare mein bataiye) के दुष्प्रभाव से जातक के कुटुंब से भी उसके रिश्ते बहुत अधिक बिगड़ने लगते हैंl वैचारिक मतभेद की स्थिति इतनी अधिक बढ़ जाती है, कि जातक यदि कोई बहुत बड़ी परेशानी में भी होता हैl तब भी उसे किसी भी प्रकार का सहयोग अपने रिश्तेदार अपने कुटुंब घर परिवार के लोग या अड़ोस पड़ोस के लोग किसी से भी प्राप्त नहीं होता है, वाणी दोष होने की वजह से उसकी स्थिति और अधिक खराब होने लगती है।

9. मूंगा रत्न के दुष्प्रभाव से जातक को रक्तचाप की भी बीमारी हो सकती है।

10. जातक के जीवन साथी के ऊपर भी बहुत सारे खतरे मंडराते रहते हैं, उससे भी अनेक प्रकार की बीमारियां घेरे रहती है lउसका स्वास्थ्य भी दिनोंदिन गिरने लगता है, जिससे उनके रिश्ते में और अधिक परेशानियां बढ़ने लगती है, धन खर्च की अधिकता उनकी स्थिति को और बिगाड़ देती है।

11. काम धंधा नौकरी पेशा व्यापार आदि भी पूरी तरह से चौपट होने लगता हैl आर्थिक तंगी धीरे-धीरे उसके पूरे परिवार पर हावी होने लगती हैl रूपए पैसे की कमी से पूरा परिवार और अधिक तितर-बितर हो जाता है, फिजूलखर्ची भी बहुत अधिक बढ़ जाती है।

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