पुखराज का क्या मतलब होता है – Pukhraj Ka Kya Matalab Hota Hai

पुखराज का क्या मतलब होता है – Pukhraj Ka Kya Matalab Hota Hai

 

पुखराज का क्या मतलब है – Pukhraj Ka

 Kya Matalab Hota Hai

पुखराज (pukhraj ratna ka kya matlab hai) का शाब्दिक अर्थ होता है “प्रजकत”-‘ जिसका अर्थ होता है, सृष्टि के पालनहार सृष्टि को एक विशिष्ट पद्धति के अनुसार चलाने वाला’l ” प्रजकता ” ‘जिसका अर्थ होता है, सुगंधित पुष्प’ अर्थात जो सृष्टि में ज्ञान रुपी सुगंध से सृष्टि को चलाता हो वही होता है -“पुखराज”

पुखराज एक रत्न होता है, जिसका ज्योति शास्त्र तथा रत्न शास्त्र में बहुत सी महत्वपूर्ण उपयोगिताएं बताई गई है, तथा पुखराज रत्न (pukhraj ratna ka kaisa matlab hai) जगतगुरु गुरु बृहस्पति को समर्पित एक रत्न है, जिसमें गुरु ग्रह बृहस्पति से संबंधित विभिन्न प्रकार की शक्तियां विद्यमान होती है lइसमें गुरु ग्रह से संबंधित अलौकिक शक्तियां विद्यमान होती हैl पुखराज रत्न की भौतिक संरचनात्मक पहलू बहुत ही संगठित होता है, इसका रंग पीला होता है, जिसमें पीले रंग में आप को विभिन्न प्रकार के ग्राफिक्स देखने को मिल सकते हैं। प्रकृति द्वारा निर्मित कोई भी रत्न हो एक जैसा कभी भी नहीं हो सकता है।

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उसमें एक परसेंट का भी अंतर अवश्य आपको मिलेगा क्योंकि कुदरत कभी भी किसी भी चीज को पूरी तरह से एक जैसा नहीं बनाती है, जैसा कि आपने देखा होगा कि इंसानों में जुड़वा बच्चे जो होते हैं, उनमें भी बहुत सी समानताएं होती है, तो कुछ असमानताएं भी होती है, इसी प्रकार जब कोई भी पत्थर प्राकृतिक रूप से हमें प्राप्त होता है, तो कभी भी उसका दूसरा स्वरूप एक जैसा नहीं होता हैl उसमें कुछ ना कुछ चीजें बदली हुई रहती है, केवल कृत्रिम रूप से बनाए गए चीजों का आप एक से अधिक मॉडल प्राप्त कर सकते हैंl भौतिक गुणों का भंडार रखने वाला यह पुखराज रत्न (pukhraj ka kya matlab hai in hindi) हम सभी के जीवन शैली को बदलने की छमता रखता है।

इसमें अनेक पारलौकिक गुण विद्मान रहते हैं, जिसकी वजह से पुखराज रत्न विश्व प्रसिद्ध है, तथा पुखराज रत्न (pukhraj kaisa hota hai) बहुत लोगों में लोकप्रिय हैंl इसकी महत्ता शब्दों में वर्णन करना नामुमकिन हैl इसकी पीली मनमोहक रोशनी हमारे मन मस्तिष्क को आनंद से भर देती हैl इस की रोशनी से हमारा मन आनंदित हो उठता है तथा आंखों को बहुत ठंडक महसूस होती हैl विभिन्न प्रकार की भाषाओं में इसे विभिन्न प्रकार के नाम दिए गए हैं, जैसे- संस्कृत में इसे पुष्प राग से संबोधित किया जाता है, तथा अंग्रेजी में इसे यलो सफायर के नाम से जाना जाता है, इसके विभिन्न प्रकार के गुणों के अनुसार इसे तरह-तरह के नाम प्रदान किए गए हैं।

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पुखराज रत्न (pukhraj kya hota hai) गुरुओं के गुरु गुरु बृहस्पति को समर्पित है, तीनों लोको के गुरु जिन्हें देवताओं के द्वारा स्वयं गुरु कह कर अलंकृत किया गया है, ऐसे गुरु बृहस्पति ग्रह का रत्न है -“पुखराज रत्न“। पुखराज रत्न जिसमें अनेक गुप्त शक्तियां निवास करती है, तथा इसमें गुरु ग्रह बृहस्पति से संबंधित विभिन्न प्रकार की ऊर्जा तथा उनकी शक्तियां अवशोषित करने की अद्वितीय क्षमता पुखराज रत्न में विद्यमान होता है, यह एक दिव्य रत्न है, जिसका उपयोग लोग गुरु ग्रह की कृपा प्राप्ति के लिए करते हैं।

लोगों के द्वारा पुखराज रत्न (pukhraj pathar kaisa hota hai) अपने जीवन को संवारने के लिए तथा गुरु ग्रह की कृपा प्राप्त करने के लिए धारण किया जाता है, तथा विश्व में पुखराज रत्न के बहुत से देशों में खदान मौजूद हैं,जैसे- जापान, इंडोनेशिया ,ब्राजील, म्यानमार, श्रीलंका, भारत आदि किंतु विश्व में सबसे अधिक ब्राजील तथा म्यानमार के पुखराज रत्न विश्व प्रसिद्ध है, क्योंकि इनकी गुणवत्ता सर्वोत्तम मानी गई है, जिसकी वजह से इसकी कीमत बहुत ऊंची आंकी जाती है, तथा यहां का पुखराज रत्न खरीदना हर किसी के बस की बात नहीं होती हैl श्रीलंका के पुखराज रत्न भी विश्व प्रसिद्ध होते हैं, तथा इनकी भी गुणवत्ता उत्कृष्ट मानी जाती है और पुखराज रत्न की गुणवत्ता ही उसकी कीमत को निर्धारित करती है।

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भारत में भी पुखराज रत्न के खान पाए जाते हैं, किंतु उसकी गुणवत्ता उतनी अधिक अच्छी नहीं होती जितना होना चाहिए उसके भौतिक गुणों में कुछ त्रुटि रहती है, जिसकी वजह से उसके मूल्य भी कम रहता है, तथा उसमें वह गुण मौजूद नहीं रहता जिस प्रकार के पुखराज पत्थर जो ब्राजील तथा म्यानमार जैसे देशों से पाए जाते हैं, पुखराज रत्न (pukhraj kis liye dharan kiya jata hai) देखने में चिकना चमकदार पारदर्शी कभी-कभी अर्थ पारदर्शी भी होता है, तथा इसके संयोजक काफी व्यवस्थित होते हैं।

यह मुख्यतः अल्मुनियम, फ्लोरीन ,सहित सिलीकेट जैसे खनिजों की मात्रा इसमें भरपूर तौर पर पाई जाती हैl यह ग्रेनाइट चट्टानों के नीचे पाया जाता है, तथा ज्वालामुखी के दरारों में भी यह बेशकीमती रत्न पाया जाता है, इसका निर्माण विभिन्न प्रकार के जटिल प्रक्रियाओं से गुजरकर होता है, जिसमें तापमान दबाव आदि भौतिक चीजों का पूरा योगदान रहता है,जिससे इसका रूपांतरण संभव हो पाता है, और हमें एक सुंदर एवं आकर्षक रत्न प्राप्त होता है।

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गुरु ग्रह से संबंधित विभिन्न प्रकार के लाभों को प्राप्त करने के लिए पुखराज रत्न (pukhraj ratna ki jankari) धारण किया जाता है, जब भी किसी विद्वान ज्योतिषी के द्वारा किसी की कुंडली का अध्ययन किया जाता है, तो उसमें सबसे पहले गुरु ग्रह की स्थिति क्या होती है, वह देखा जाता है, क्योंकि गुरु बृहस्पति एक ऐसा ग्रह है, जिनकी स्थिति आपकी कुंडली में किस भाव में है lयह निर्धारित करता है, कि आपके जीवन में आगे आप को सामाजिक तौर पर आर्थिक तौर पर या आपके भविष्य में क्या आपको मिलने वाला है, तथा आपका वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा तथा आपके जीवन में किस प्रकार के मांगलिक कार्य संपन्न होंगे इन सभी चीजों की गणना इसी के आधार पर की जाती है, तथा यदि गुरु ग्रह किसी उच्च भाव में किसी की कुंडली में स्थित होते हैं, तो पापी ग्रह या दूसरे ग्रह के द्वारा दिए जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रतिकूल परिणाम या नकारात्मक परिणाम जो भी इनके द्वारा दिया जाता है,

उन सभी को यह नष्ट करने की क्षमता रखते हैं, या जातक में इतनी क्षमता उत्पन्न कर देते हैं, कि वह आप ही ग्रहों के द्वारा दिए जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रतिकूल एवं विषम परिस्थितियों को भी नियंत्रित करने की क्षमता रखते हैं, बहुत से लोगों के कुंडली में गुरु ग्रह अल्प गति से विचरण करते हैं, ऐसे में लोगों के द्वारा पुखराज रत्न (pukhraj dharan karne ke fayde) का सहारा लिया जाता है, जिससे गुरु ग्रह की स्थिति में परिवर्तन लाया जा सके एवं उनके कृपा को प्राप्त किया जा सके उनके आशीर्वाद से अपना जीवन सफल एवं सार्थक बनाया जा सके।

पुखराज रत्न (pukhraj dharan karne se kya hota hai) धारण करने से जीवन में विभिन्न प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे -शादी विवाह, संतान रत्न की प्राप्ति, प्रशासनिक विभाग में ऊंचे पद पर प्रतिष्ठित होना ,एक सफल प्रवचन वक्ता होना ,एक सफल नेता होना जिसका समाज में एक ऊंचा पद हो तथा वह एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व के रूप में जाने जाना वाला व्यक्ति हो ,ज्ञान के सर्वोत्तम स्तर को पाने के लिए भी पुखराज रत्न धारण किया जाता है। पुखराज रत्न आपको फर्श से अर्श पर पहुंचाने की क्षमता रखता है, यह एक अद्वितीय अद्भुत रत्न है।

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