ओपल रत्न की पहचान कैसे करें – Opal Ratn Ki Pehchan Kaise Kare

ओपल रत्न की पहचान कैसे करें – Opal Ratn Ki Pehchan Kaise Kare

 

ओपल रत्न की पहचान कैसे करें, opal ratn ki

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ओपल रत्न की पहचान कैसे करें, opal ratn ki pehchan kese kare:- ओपल रत्न की पहचान कैसे करें जिससे इसके सही पैमानों को हम जानकर ,इसके विविध प्रचंड लाभ को प्राप्त कर सके एवं उपयुक्त विधि विधान के माध्यम से इसे धारण कर अपने जीवन को सही दिशा में प्रवेश करने के लिए प्रेरित कर सके तथा जीवन में अपने लक्ष्यों को सार्थक रूप से पूर्ण करने के लिए एवं अपने प्रभुत्व के सर्वोत्तम शिखर तक पहुंचने के लिए इसका उपयोग कैसे करें ?आज हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे-

ओपल रत्न की पहचान कैसे करें, opal ratn ki pehchan

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शुक्र देव से संबंधित यह रत्न देखने में बहुत ही सुंदर होता है, किंतु इसके समतुल्य कृत्रिम रूप से भी ओपल रत्न बनाए जा सकते हैं ।ऐसे में यदि कोई व्यक्ति कृत्रिम रूप से निर्मित ओपल रत्न (opal ratn)  करता है, तो वह सूर्य की कृपा से वंचित रह जाता है, क्योंकि जो चमत्कार प्राकृतिक चीजें दिखा सकती है, वैसी क्षमता मनुष्य के द्वारा निर्मित किसी भी चीज में नहीं है।

प्रकृति की तुलना में मनुष्य एक तुच्छ प्राणी है ।कभी भी भक्त भगवान को नहीं बना सकता है, बल्कि भगवान भक्तों को बना सकते हैं ।ऐसे में सृष्टि भगवान है तथा पृथ्वी के पटल पर व्याप्त करने वाले जितने जीव जंतु हो, जितने भी संसाधन है ।सभी उनके भक्त हैं, और कभी भी उसके विपरीत जाने से उन्हें कठिनाइयां ही प्राप्त होंगी lअच्छी चीजें प्राप्त नहीं हो सकती है। मनुष्य कितनी भी अपनी तुलना सृष्टि के द्वारा निर्मित समतुल्य चीजों से कर ले, किंतु फिर भी वह हर वर्ग पर स्वयं को पिछड़ा ही पाएगा।

ओपल रत्न की पहचान कैसे करें, opal ratn ki pehchan kaise kare

भौतिक उन्माद के लोभ में पड़कर मनुष्य रत्नों एवं उप रत्नों के कृतिम अवशेष भी बनाने लगा हैl ऐसी स्थिति में जो भी व्यक्ति जिसकी गहन श्रद्धा ज्योतिष शास्त्र में है।यदि अपनी स्थिति में उत्थान चाहता है ।तो वह विभिन्न प्रकार के रत्नों का प्रयोग या विभिन्न ग्रहों के उपरत्नों का प्रयोग करने की सोचता है।किंतु गलती से भी यदि उसके द्वारा कृतिम या नकली या प्लास्टिक से निर्मित या कांच से निर्मित उपरत्न या धारण का लिए जाते हैं ।

तो ऐसी अवस्था में वह विभिन्न प्रकार से उस प्रमुख ग्रह से संबंधित रत्न की असीम प्रभाव से वंचित हो जाता है ।उसे सकारात्मक पारगमन की प्राप्ति नहीं हो पाती है। ऐसे में वह जिस विशिष्ट कार्य की पूर्ति के लिए रत्न का उपरत्न धारण करता है।उसके प्रति सदा ही मन में संशय बना रहता है, इसलिए किसी भी रत्न एवं उपरत्न को धारण करने से पूर्व किसी विशेष विद्वान पंडित जी की सलाह अवश्य लें तथा अपने कुंडली की स्पष्ट जानकारी के आधार पर रत्न को या उपरत्न को धारण करें।

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इसके साथ-साथ विभिन्न प्रकार के मापदंड जो उक्त रत्न धारण करने जा रहे हैं।उनसे संबंधित विभिन्न पैमानों की जांच भी अवश्य कर ले। तभी आपके कार्य सभी सार्थक रूप से पूर्ण होंगे एवं आपको रमणीक सुगंधीयों की प्राप्ति होगीl माधुर्य जीवन की प्राप्ति होगी।

ओपल को जांचने के लिए निम्नलिखित पैमाने अपनाए जा सकते हैं।

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महत्व माना जाता है lइनकी भूमिका व्यक्ति के जीवन के स्तर में कैसे सुख संसाधन होंगे ।इसमें बहुत अधिक रहती है इनके प्रभाव के कारण ही व्यक्ति विविध प्रकार के सुख संसाधनों का आनंद ले पाता हैl किंतु इनकी अवस्था जब दृष्ट होती है।

तब यह व्यक्ति को निर्धनता के निम्न स्तर तक पहुंचा देते हैं। ऐसे में इनका रत्न ओपल  ( mahalaxmi)  धारण किया जाता है ।शुक्र का रत्न हीरा के स्थान पर ओपल धारण करना अच्छे लाभों को प्रदान करने के समान हैै। शुक्र ग्रह के खराब प्रभाव को दूर करने में यह रत्न बहुत बड़ी भूमिका निभाता हैै।

ओपल रत्न  ( mahalaxmi)  को जब किसी प्रकाश उत्सर्जित करने वाली वस्तु पर रखा जाता है।तब आपको इसके अंदर शहद के समान मकड़जाल दिखाई देंगे तथा किसी किसी में रेशे बिंदु बुलबुले जैसी चीजें भी दिखाई देती है, जिस प्रकार शुक्र ग्रह की प्रतिरूप दिखाई पड़ती है।उसी तरह की कांति इसके अंदर झलकती हुई प्रतीत होती है, जबकि कृत्रिम रूप से निर्मित रत्न में इस प्रकार की खूबी आपको देखने को नहीं मिलेगी तथा यह प्रकाश को अवशोषित करता है ना कि परिवर्तित करता है।

2. ओपल रत्न ( mahalaxmi) दिखने में बहुत ही सुंदर दिखाई पड़ता है, तथा इसका वर्ण श्वेत होता है, किंतु यह बहुत ही कमजोर होता है।इसकी सतह पर हल्की सी ठोकर लगने से इसमें दरारे उत्पन्न हो सकती है, जबकि कृत्रिम रूप से निर्मित रत्न में यह गुण देखने को नहीं मिलेंगे।

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3. जब ओपल ( mahalaxmi) को उलट पलट कर देखा जाता है, तब इसमें अग्नि के समान प्रतिबिंब उत्सर्जित होते हुए प्रतीत होते हैं, तथा आप जिस तरह से इसे घूम आएंगे यह अग्नि का प्रतिबिंब भी घूमता हुआ नजर आएगा।जबकि कृत्रिम रूप से निर्मित ओपल   ( mahalaxmi)में एक स्थिर अवस्था तक ही सीमित रहेगा। एक निर्धारित क्षेत्र तक ही वह बना रहेगा ।वह संपूर्ण ओपन को घुमाने पर भी अपने स्थान परिवर्तित नहीं कर पाता हैl असली ओपल रत्न ( mahalaxmi)  में गतिमान प्रभाव देखने को मिलता है, जबकि कृत्रिम रूप से निर्मित ओपन में अचल प्रभाव की अधिकता बनी रहती है।

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4. जब आप असली ओपल रत्न ( mahalaxmi)    को हर एक कोने से देखने का प्रयास तब आप देखेंगे, कि उसमें प्रत्येक कोन से आपको या प्रत्येक किनारे से आपको ज्वालामुखी के समान अग्नि का अंश उसमें समाहित होते हुए दिखाई पड़ेगा, जबकि कृत्रिम रूप से निर्मित रत्न में इस प्रकार की चीज यदि दिखाई भी पड़ती हैl

तो कुछ विशिष्ट कोनों पर जाकर वह इस प्रकार की अग्नि पूर्ण रूप से बाधित हो जाती है। वह स्पष्ट रूप से आपके त्वचा के अंश को दिखाने लगती है, लेकिन असली ओपल में आप इस प्रकार की चीजें नहीं देखते हैंl उसमें एक समान अग्नि की झलक आपको दिखाई पड़ती हैl प्रत्येक कोण चाहे वह जितनी बार आप उलट-पुलट ले उसके तली को भी पलट कर देख सकते हैं।उसमें भी आप को अग्नि तत्व के समान कुछ चीजें दिखाई पड़ेगी।

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शुक्र देव इस रत्न को धारण करने से अपने प्रभाव में अनुकूल विषयांतर करते हैं, जिससे व्यक्ति का जीवन अनेक भौतिक सुख सुविधाओं से पूर्ण होने लगता है।उसके कांति में अद्भुत आकर्षण विदित होने लगता है।स्त्री वर्ग से उसे अच्छे भाव प्राप्त होने लगते हैं, तथा वैवाहिक जीवन हो या प्रेम संबंध सभी में वह सफलता प्राप्त करने लगता है ।

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शुक्र ग्रह जो सौंदर्य की देवी हैl जिनकी कृपा वर्तमान के मनुष्य के ऊपर हो जाएl तो वह जीवन के सभी सुखों को प्राप्त कर लेता है। विभिन्न प्रकार के साधनों से धन से परिपूर्ण रहता है।शुक्र ग्रह की कृपा से उसका जीवन धन-धान्य समृद्धि से भरा रहता है।शुक्र ग्रह का यह रत्न ओपल व्यक्ति के विभिन्न इच्छाओं की पूर्ति में बहुत ही प्रभावी रूप से सहायक होता है।

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