मोती रत्न धारण विधि – Moti Ratna Dharan Vidhi

मोती रत्न धारण विधि – Moti Ratna Dharan Vidhi

 

 मोती रत्न धारण विधि –

मोती रत्न धारण विधि जानने की इच्छा लोगों में तब प्रबल हो जाती है, जब लोग इसके चमत्कारिक विभिन्न प्रकार के लाभो से दूसरे लोगों के जीवन पर हो रहे इस रत्न के अनुकूल प्रभावो से परिचित होते हैं, तो आइए जानते हैं, इसकी सबसे उपयुक्त एवं सटीक विधि जिससे हम इस अद्वितीय रत्न का उपयोग कर चंद्र देव की कृपा प्राप्त कर सके एवं अपने भाग्य को उदित कर सकेl अपने भाग्य को चमका सके तथा अपने मनवांछित फलों को प्राप्त कर सके।

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प्राकृतिक रूप से निर्मित रत्न विभिन्न प्रकार की शक्तियों को अपने अंदर समाहित किए हुए रहती है, इसलिए आपको कुछ मापदंडों या पैमानों को जिस भी रत्न को धारण करने जा रहे हैं। उन कुछ विशिष्ट पैमानों की जांच अवश्य करना चाहिए, जिससे आप किसी भी तरह की ठगी का शिकार ना हो, इसके साथ ही आपको एक अच्छा एवं शुद्ध रत्न प्राप्त हो सके। मोती रत्न की शुद्धता की जांच निम्नलिखित मापदंडों या पैमाने के आधार पर किया जा सकता है –

1. मोती रत्न हमें विभिन्न प्रकार के जलीय जीवो के द्वारा प्राप्त होता है, इसलिए प्राकृतिक रूप से निर्मित मोती रत्न कभी भी एक दूसरे के बिल्कुल समान नहीं होंगे। उनमें कुछ ना कुछ ऐसी चीज होगी, जिससे वह एक विशिष्ट रत्न का स्वरूप लेगी हर रत्न का अपना अपना एक स्वरूप होगा।

2. असली मोती की खासियत होती है, कि इससे जब आप स्पर्श करेंगे तो आपको ठंडक महसूस होगी, यह रत्न छूने से आपको शीतलता का आभास होगा, जबकि कृतिम रूप से निर्मित मोती रत्न में यह गुण मौजूद नहीं रहता है।

3. असली मोती रत्न का घनत्व अधिक होता है, जिसकी वजह से वह देखने में भले ही छोटा दिखे किंतु हुआ वजन में अधिक होगा जब आप उसकी तुलना कृत्रिम रूप से निर्मित मोती रत्न से करते हैं।

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4. प्राकृतिक रूप से निर्मित मोती रत्न काफी चमकदार होता है, उसकी ऊपरी सतह बहुत ही चमकदार होती है, जिसकी वजह से जब किरने उसे टकराती है, तो उस पर आपको अपना प्रतिबिंब नजर आता है या आसपास की चीजों का प्रतिबिंब भी आप देख सकते हैं।

5. शुद्ध रूप से निर्मित मोती रत्न की संरचना काफी संगठित होती है, जबकि नकली मोती की सतह गड्ढा वाले दानेदार जैसी होती है।

इसके और भी विभिन्न पैमाने हैं, जिसे आपको किसी अच्छे जोहरी या किसी जानकार व्यक्ति के माध्यम से विस्तृत तौर पर उसके मापदंडों की जांच करवाएं तभी धारण करें, अन्यथा उसके आपको वह सारे लाभ प्राप्त नहीं होंगे, जिसकी इच्छा मन में लिए हुए वह रत्न धारण करना चाहते हैं।

मोती रत्न धारण करने की विधि निम्नलिखित है-

6.इसे धारण करने की प्रक्रिया शुरू करने से पूर्व पहले अच्छे से ग्रह नक्षत्रों की जानकारी ले ले, जैसे -शुक्ल पक्ष में रोहिणी ,हस्त तथा श्रवण नक्षत्र में सोमवार के दिन यह रत्न धारण किया जाता है lइन नक्षत्रों में चंद्र की सर्व शक्तियां अपने चरमोत्कर्ष पर रहती है, इसलिए इन सभी नक्षत्रों को ध्यान में रखकर सोमवार का दिन चयन करें तथा उसी दिन इस रत्न को धारण करने की पूरी पद्धति क्रमागत तरीके से पूर्ण करें।

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7. सर्वप्रथम शुद्ध मोती रत्न से निर्मित अंगूठी को गंगाजल तथा पंचामृत आदि से स्नान कराएं।

8. अंगूठी को फिर गूगल तथा कपूर से आरती उतारे एवं श्वेत पुष्प अर्पण करें।

9. उसके पश्चात अपने घर के मंदिर में किसी सफेद कपड़े के ऊपर इसे रखकर चंद्र के विभिन्न मंत्रों का उच्चारण कर इसे अभिमंत्रित करें यदि आपको चंद्र के मंत्रों का उच्चारण नहीं कर सकते हैं, या किसी तरह की आपको तकलीफ है, तो ऐसी परिस्थिति में आप किसी विद्वान पंडित की भी मदद ले सकते हैं, तथा उन के माध्यम से चंद्र से संबंधित मंत्रों का उच्चारण से इसे अभिमंत्रित करवाएं।

10. उसके पश्चात आप इस रत्न को किसी भी मंदिर में ले जाकर भगवान की चरणों में अर्पित कर दें। यदि भगवान शिव का मंदिर हुआ तो सबसे उत्तम होगा क्योंकि भगवान शिव की पूजा से ऐसा माना जाता है, कि हमारे कुंडली के जिस भाव में भी चंद्र ग्रह स्थित होते हैं, वे अपना प्रतिकूल प्रभाव न दिखाकर हम लोगों पर अनुकूल प्रभाव दिखाते हैं, तथा शिवजी की पूजा से चंद्रदेव बहुत प्रसन्न होते हैं, एवं हमें शांति एवं शीतलता प्रदान करते हैं, इसलिए भगवान शिव की ज्योतिर्लिंग के पास इसे रखकर प्रभु से आशीर्वाद ले और पंडित जी का भी आशीर्वाद प्राप्त करें एवं उन्हें उत्तम दान दक्षिणा प्रदान कर अपना मनवांछित इच्छा बोलते हुए मोती रत्न को अपनी दाएं हाथ की कनिष्ठा उंगली में धारण करें l

यदि आप इसे मंदिर से लाकर कुछ देर के लिए चंद्र की रोशनी में रखकर संध्या की बेला में इसे धारण करेंगे तो यह अपना प्रभाव और अधिक दिखाएगा तथा संध्या की बेला जब चंद्र देव पूरी तरह से आकाश में अपनी रोशनी बिखेरते हुए मौजूद रहते हैं, उस वक्त इस रत्न को धारण करने का सबसे उपयुक्त सर्वोत्तम समय माना गया है, इसके पूरे जागृत प्रभाव को पाने के लिए अपना मनवांछित कार्य पूरा करने के लिए इसे चंद्र की रोशनी में खड़े होकर अपने कनिष्ठा उंगली में धारण करें तथा चंद्र देव को प्रणाम करें तथा उनसे उनकी कृपा प्राप्ति के लिए याचना करें।

11. जिस भी दिन इस रत्न को आपने धारण किया है। उस दिन भूलकर भी वर्जित चीजों का प्रयोग ना करें, मांस मदिरा जैसे चीजों से खुद को दूर रखें।

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12. घर की बड़ी महिला या अपनी माताजी या अपनी पत्नी या अपनी सास के लिए यथासंभव कुछ ना कुछ उपहार अवश्य ले या यदि कुछ भी लेने में सक्षम ना हो, तो ऐसी परिस्थिति में उन्हें कोई सफेद मिठाई अवश्य खिलाएं तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करें, ऐसा माना जाता है, कि घर कि जो बड़ी महिलाएं होती है, खास करके हमारी माताजी, सास आदि वे लोग हमारे भाग्य की चाबी खोलने में सक्षम होती है, उनका आशीर्वाद हमारे सौभाग्य को बढ़ाता है।

हमारे भाग्य को उदित करता है। अतः उनका आशीर्वाद अवश्य लें यदि संभव हो, तो किसी को उस दिन कुछ मीठा भोजन अवश्य कराएं किसी को भी कटु वचन ना कहेंl आप देखेंगे कि यह रत्न आपके जीवन के विभिन्न आयामों पर अपना चमत्कारिक रूप से असर दिखा रहा है, तथा आपको धन, ऐश्वर्य ,सुख ,समृद्धि, वैभव आपके जीवन में इन सभी चीजों में से किसी की भी कमी नहीं रहेगी, आपका जीवन परिपूर्ण बनता चला जाएगा।

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