सफेद पुखराज धारण विधि – Safed Pukhraj Dharan Vidhi

सफेद पुखराज धारण विधि – Safed Pukhraj Dharan Vidhi

 

सफेद पुखराज धारण विधि –

सफेद पुखराज धारण विधि को बहुत से लोग जानना चाहते हैंl उनमें यह जिज्ञासा होती है, कि इस रत्न को कब धारण करें जिससे हम इसका सर्वोत्तम लाभ प्राप्त कर सकें तथा इसके स्वामी ग्रह की पूर्ण कृपा हमें प्राप्त हो सके।

पुखराज रत्न एक विश्व प्रसिद्ध लोकप्रिय रत्न है, इसका जितना महत्व वैदिक ज्योतिष शास्त्र देता है, उतना ही महत्व पाश्चात्य ज्योतिष विज्ञान भी देता है, किंतु पुखराज रत्न के विभिन्न रंगों वाले रत्न विभिन्न प्रकार के ग्रहों को निरूपित करते हैं, तथा उन में विभिन्न प्रकार के ग्रहों की शक्तियां उनमें समाहित रहती हैं, इसलिए जब भी पुखराज रत्न की चर्चा होती है, तो लोग यह समझते हैं, कि पुखराज रत्न यानी गुरु ग्रह से संबंधित रत्न किंतु आपको यह बता दे कि केवल पीला पुखराज ही गुरु ग्रह से संबंधित होता है, जबकि सफेद पुखराज शुक्र ग्रह से संबंधित होता है, तथा शुक्र ग्रह के विभिन्न प्रभावों को यह रत्न प्रदान करता है।

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 इस रत्न को जिस भी जातक के द्वारा धारण किया जाता है, उसके जीवन में विभिन्न प्रकार के बदलाव आने लगते हैंl उसके जीवन में कभी भी धन संबंधित चीजों की कमी नहीं रहती है lवह एक धन-धान्य से संपन्न व्यक्ति के रूप में निरूपित होता है lइसे धारण करने से आप में एक आकर्षण शक्ति उदित होती है, तथा आपका चेहरा तथा व्यक्तित्व आकर्षण पूर्ण होता है, जिसकी और लोग स्वयं खींचे चले आते हैं, आपके मुख मंडल पर एक अजीब सी आभा होती है, जिसे देखकर लोग चकित होते हैं, तथा आपकी खूबसूरती की बिना प्रशंसा किए नहीं रह पाते हैंl शुक्र ग्रह के अच्छे परिणाम इस रत्न के माध्यम से जब मिलता है, तो लोगों के दांपत्य जीवन से जो खुशियां चली गई थी, जो प्रेम चला गया था, जो अपनापन चला गया था, यह रत्न उसे वापस पाने में बहुत मदद करता है, तथा इस रत्न को धारण करने से रिश्तो में प्रगाढ़ प्रेम उत्पन्न होता हैl

 पति -पत्नी के संबंध सुधरते हैंl उनके दांपत्य जीवन में खुशियां बरसने लगती है, जो भी आपसी मतभेद थे या गलतफहमियां थी वह धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है, तथा फिर से उनके रिश्तो में नयापन आने लगता है, तथा सभी बातों को भूल कर वह पूरे दिल से एक दूसरे को स्वीकार करते हैं, और दांपत्य जीवन की गाड़ी को आगे बढ़ाते हैंl इस रत्न को धारण करने से आपके जीवन में वैभव ,ऐश्वर्य में वृद्धि होती हैl यह रत्न धारण करने से लोगों में भौतिक सुखों की वृद्धि होती है, जिस किसी भी जातक के द्वारा सफेद पुखराज रत्न धारण किया जाता है lउसके जीवन में सांसारिक सुखों की वृद्धि होती है, तथा उसका जीवन बहुत ही अच्छा होता है, और किसी भी चीज की कमी नहीं रहती है।

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हमारे पूर्वजों के द्वारा यह मानना था कि कोई भी कार्य करने से पूर्व यह देखना आवश्यक है, कि कौन सा नक्षत्र चल रहा है, समय का कौन सा आयाम चल रहा है, क्योंकि उनका मानना था कि प्रकृति की चाल एक खास पद्धति पर चलती है, और इन समय के विभिन्न आयामों में हमें शुभ समय भी प्राप्त होता है, और अशुभ समय भी प्राप्त होता है, यदि हमारे द्वारा किया गया कोई भी कार्य शुभ समय पर होता है, तो उसकी सफलता की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है, जबकि अच्छा कार्य भी अशुभ समय पर किया जाता है, तो उसकी सफलता हमें प्राप्त नहीं होती है, अतः कोई भी कार्य एक सटीक एक उपयुक्त समय पर करने से हमें विशिष्ट लाभ प्राप्त होता है, तो आइए जानते हैं, कैसे हम सफेद पुखराज को धारण कर सकते हैं, तथा इसका अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं-

1. सर्वप्रथम इस रत्न को खरीदने से पूर्व इसके विभिन्न मापदंडों को या विभिन्न पैमानों को जांचने के पश्चात ही यह रत्न खरीदें क्योंकि कभी-कभी आपके द्वारा खरीदा गया रत्न नकली भी हो सकता है, और आपको उत्तम लाभ न मिलने से आप यही सोचेंगे कि यह रत्न ही नहीं कार्य नहीं कर रहाl जबकि ऐसा कुछ नहीं होता हैl रत्न अपना प्रभाव अवश्य दिखाता है, चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक हो किंतु यदि वह कांच का टुकड़ा होगा तो आपको इन दोनों परिणामों में से कुछ भी देखने को नहीं मिलेगा।

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2. इस रत्न को आप चांदी या प्लैटिनम में धारण कर सकते हैं, क्योंकि शुक्र से संबंधित सारी चीजों का रंग सफेद होता है, इसलिए यह दोनों धातु सफेद पुखराज रत्न की शक्तियों को और अधिक चरमोत्कर्ष तक ले जाने में सक्षम होती है, तथा हमें बहुत अच्छा फल प्रदान करते हैं, क्योंकि यह दोनों धातुए हमारे मन मस्तिष्क पर पूरी तरह नियंत्रित स्थापित करते हैं lयह हमारे मन को विचलित करने नहीं देते हैं, इसलिए सफेद पुखराज रत्न को चांदी या प्लैटिनम में धारण करना सबसे उत्तम माना गया है।

3. शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को आपको इस रत्न को धारण कर सकते हैं।

4. सर्वप्रथम शुक्रवार के दिन प्रातः काल स्नानादि से निर्मित होकर इस रत्न को आप गंगा जल से पवित्र करें तथा पंचामृत स्नान कराएं।

5. शुक्र ग्रह के विभिन्न बीज मंत्रों से इस रत्न को अभिमंत्रित करें या किसी विद्वान पंडित के द्वारा अभिमंत्रित करवाएं।

6. उसके पश्चात मंदिर लेकर जाए तथा भगवान के चरणों में इसे कुछ देर के लिए छोड़ दें ताकि यह रत्न ईश्वरीय कृपा को प्राप्त कर सकेl उसके पश्चात भगवान जी का आशीर्वाद ले तथा पंडित जी का भी आशीर्वाद ले एवं उत्तम दान दक्षिणा उन्हें प्रदान कर इस रत्न को धारण करें lधारण करते वक्त आप अपने मन की जो भी इच्छा है, महत्वकांक्षी है। उसे अवश्य बोले तथा यह विनती करें कि आपकी जो भी मनोकामना है, वह जल्द से जल्द पूरी हो।

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7. यदि हो सके तो किसी गरीब को या भूखे को सफेद खाने की वस्तुओं का दान करें या उनकी किसी प्रकार से सहायता करें।

8. घर में जो भी औरतें होती है, या छोटी करने आए हैं, उन्हें कुछ न कुछ उपहार स्वरूप अवश्य दें या इतना नहीं कर सकते हैं, तो उनके लिए कुछ सफेद मिठाइयां ही लेकर आए एवं उनका आशीर्वाद अवश्य ग्रहण करें, इससे इस रत्न की सारी ऊर्जाए अपने चरमोत्कर्ष पर जल्द से जल्द कार्य करना शुरू करेंगी और आपको अच्छे एवं अनुकूल परिणाम आपके जीवन पर जल्द ही देखने को मिलेगा।

9.इस दिन भूलकर भी किसी भी महिला वर्ग या किसी भी वर्ग के लोगों का अपमान नहीं करना चाहिए तथा कटु वचन नहीं बोलना चाहिए।

10. जितना हो सके खुद को इस दिन सात्विक रखने का प्रयास करें तथा वर्जित चीजों से दूर रहें और मन ही मन जितना हो सके शुक्र के मंत्रों का जाप करते रहे इससे आप जल्द ही इसकी ऊर्जाओ को जागृत करने में सक्षम हो पाएंगे।

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