लहसुनिया कितने रत्ती का पहने – Lahsuniya Kitne Ratti Ka Pahne

लहसुनिया कितने रत्ती का पहने – Lahsuniya Kitne Ratti Ka Pahne

 

लहसुनिया कितने रत्ती का पहने –

लहसुनिया कितने रत्ती का पहने- ग्रहो, उपग्रह तथा नक्षत्रों का चाल हमारे जीवन पर बहुत व्यापक असर डालता हैl कभी-कभी यह अनुकूल प्रभाव दिखाता है, तो कभी-कभी यह नकारात्मक प्रभाव दिखाता हैl ग्रहो ,उपग्रहो तथा नक्षत्रों के सकारात्मक परिणाम के लिए रत्नों को धारण किया जाता है lविभिन्न प्रकार के रत्न विशिष्ट ग्रह नीरुपित करते हैं, जिसे धारण कर जातक उस ग्रह से संबंधित विशिष्ट शक्तियों का उपयोग कर अपने जीवन को सवार ने एवं सफलता की सीढ़ी तैयार करने में उपयोग किया जाता है। विभिन्न ग्रहो के लिए अनेक मापदंड बनाए गए हैं, जिसके आधार पर उससे संबंधित रत्न को खास वजन का धारन किया जाता है।

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विभिन्न ग्रहो में केतु को भी एक ग्रह की उपाधि दी गई है, जबकि इसका कोई राशि नहीं होता है, फिर भी इसके प्रभाव को देखते हुए इसे ग्रह की उपाधि दी गई हैl केतु ग्रह एक छाया ग्रह है, जो शनि देव का अनुयाई है, तथा इसे भी पाप ग्रह या क्रूर ग्रह की श्रेणी में रखा जाता हैl इसके कुछ गुण मंगल ग्रह से भी मिलता-जुलता है, जिसकी वजह से मंगल से संबंधित कई क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व केतु ग्रह के द्वारा भी किया जाता हैl ऐसा माना जाता है, कि केतु ग्रह भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार से भी संबंधित होता है, भगवान श्री गणेश श्री विघ्नहर्ता इस ग्रह के इष्ट देवता होते हैं, तथा केतु ग्रह से संबंधित तीन नक्षत्र बताए गए हैं, जो निम्न है- अश्विनी मघा एवं मूल नक्षत्र।

राहु और केतु ग्रह दोनों ही शनि देव के अनुयाई होते हैं, तथा यह दोनों मिलकर किसी जातक की लग्न कुंडली में कालसर्प दोष का निर्माण करते हैं, जिससे जातक आजीवन भटकता रहता है, किंतु कभी भी अपने मंजिल तक नहीं पहुंच पाता हैl वह भौतिक एवम सांसारिक मोह माया तथा अध्यात्मिक चरणों में खुद को भटकता हुआ पाता है, किंतु कहीं भी उसे सफलता प्राप्त नहीं होती हैl केतु एक भ्रम है, जिसकी वजह से जिस भी जातक के ऊपर यह कुदृष्टि डालता हैl वह जातक केवल भ्रामक बातें में उलझा हुआ रहता है, जिससे जब उसका सामना वास्तविकता से होता है, तब उसकी मनोस्थिति पूरी तरह से क्षत-विक्षत हो जाती है lवह मानसिक आघात का शिकार हो जाता है।

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यह आघात कभी-कभी इतना गहरा होता है, कि इंसान पागल भी हो सकता है, या जब अवसाद का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो आत्महत्या जैसे कठोर निर्णय भी ले लेता हैl पीड़ित केतु व्यक्ति को ऐसे ऐसे चीजों की कल्पनाओं में ले जाता है, जिसका वास्तविकता का प्रमाण देना बहुत ही मुश्किल होता है lइस से पीड़ित व्यक्ति को बहुत ही विचित्र चीजों की अनुभूति होती हैl ऐसी -ऐसी पारलौकिक शक्तियां उस उस पर अपना प्रभाव दिखाने लगती है, जिस पर आम इंसान भरोसा नहीं करता है, किंतु उस केतु से ग्रसित व्यक्ति सच में इन सब चीजों से गुजरता है, तथा उस जातक के ऊपर काला जादू, तंत्र- मंत्र ,टोना- टोटका, नजर दोष आदि चीजें बहुत गहरा प्रभाव डालती है।

वह एक नकारात्मक शक्तियों को आकर्षित करने का श्रोत बन जाता है, जिसकी वजह से ना चाहते हुए भी उसकी और नकारात्मक शक्तियां आकर्षित होने लगती है, एवं उसकी पूरी जिंदगी नकारात्मकता के वजह से बर्बाद हो जाती है, तथा उसके जीवन में कभी भी कोई कार्य संपन्न नहीं हो पाता है, जिसकी कल्पना वह करता हैl अपने ही परिवार के लोगों के द्वारा उससे बहिष्कार देखना पड़ता है, अपने ही लोग उसे बहिष्कृत कर देते हैंl चाहे वह सामाजिक तौर पर हो या मानसिक तौर पर हो या भावनात्मक स्तर पर हो हर ओर वह खुद को अकेला पाता हैl लोग उसकी बातों पर यकीन नहीं करते हैं, चाहे वह कितना भी प्रमाण क्यों ना प्रस्तुत कर दे किंतु लोगों को केवल यह लगता है, कि वह व्यक्ति भ्रामक चीजों को फैला रहा है, एवं उसी में उलझा हुआ है, वह पूरी तरह से मिथ्या को निरूपित कर रहा है।

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केतु ग्रह का संबंध कुत्तों से एवं चूहों से माना जाता है, कुत्ता जो कोई परेशानी आने पर हमें आगाह करता है lहमारी रखवाली करता है, यदि हम कुत्ते का अच्छे से ख्याल रखते हैं, तो वह अपनी जान तक हमारे लिए देने के लिए तत्पर रहता है, जबकि यदि हमारा व्यवहार उसके प्रति खराब रहेगा तो वह हमें काट खाएगा, ऐसे ही प्रभाव केतु ग्रह भी दिखाता है, इसी प्रकार चूहे को भी केतु को निरूपित करते हुए देखा जाता है, क्योंकि चूहे के रूप में केतु ग्रह का कार्य इसके माध्यम से पूर्ण किया जाता है, चूहा का कार्य होता है, घर के चीजों को बर्बाद करना घर में आई हुई समृद्धि को कुत्तर डालना।

हमारे घरों में कई हमारे निंदक भी होते हैं, जो हमारे घर के ही सदस्य होते हैं, या परिवार के अन्य रिश्तेदार लोग भी हो सकते हैंl उनका काम केवल यही होता है कि घर को कैसे तोड़ा जाएl घर की सुख शांति को कैसे बर्बाद किया जाए lघर की समृद्धि को कैसे बर्बाद किया जाए, घर की लक्ष्मी को कैसे भगा दिया जाए, जिससे जातक की पूरी जिंदगी ही बर्बाद हो जाए, ऐसा करने में उन्हें बहुत मजा आता है, अतः चूहा के समान ही रिश्तेदार भी घरों को बर्बाद करने का कार्य करते हैंl इसका कारक भी केतु ग्रह को माना जाता हैl घर में कलह संतान उत्पत्ति में रुकावट आकस्मिक दुर्घटना ऊपरी हवा तथा रिश्ते हो या कार्यस्थल हर जगह धोखा मिलना इसका कारक भी केतु ग्रह ही होता है।

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केतु यदि किसी जातक के ऊपर अपना सकारात्मक प्रभाव दिखाता है, तो जातक को अध्यात्म के विविध चरणों में अप्रतिम सफलता दिलाता है, इसके साथ-साथ विभिन्न प्रकार की साधना एवं मंत्र सिद्धि में भी सफलता का कारक केतु ग्रह को ही माना जाता हैl मोक्ष का कारक भी केतु ग्रह को ही माना जाता हैl यह जब भी किसी को फल देता है, तो वह दीर्घकालीन होता है, जिसकी वजह से जातक के अच्छे दिनों की संख्या बुरे दिनों से बहुत अधिक होती है lदरिद्रता को दूर करता हैl इसके और अधिक व्यापक एवं अनुकूल प्रभाव को प्राप्त करने के लिए लहसुनिया रत्न धारण किया जाता है, जो देखने में बिल्ली के आंखों के समान होता है, तथा उसमें भी प्राकृतिक रूप से एक या दो या उससे अधिक धारियां मौजूद रहती हैं।

लहसुनिया को धारण करने के लिए सबसे उपयुक्त वजन कम से कम पांच रत्ती का माना गया है, तथा इसे पांच धातु या अष्टधातु में धारण करना सबसे उत्तम माना जाता है।

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