मोती रत्न धारण करने की विधि – Moti Ratna Dharan Karne Ki Vidhi

मोती रत्न धारण करने की विधि – Moti Ratna Dharan Karne Ki Vidhi

 

मोती रत्न धारण करने की विधि

मोती रत्न धारण करने की विधि यदि हम उत्तम तरीके से जान जाते हैं, तो हम इसके लाभों को और भी अधिक व्यापक स्तर तक पा सकते हैं। मोती रत्न सृष्टि के अनमोल जीवो के द्वारा प्रदान किया गया एक वरदान है, जो हमें चंद्र देव की कृपा पाने में सक्षम बनाता है, तथा बहुत सी परेशानियां हमें हमारे जीवन में जो कमजोर चंद्र की वजह से देखने को मिलती है lउन सभी परेशानियों में यह रत्न बहुत कारगर होता है। अपने श्वेत वर्ण से हर और शांति एवं शीतलता का भाव प्रकट करता है, यह एक अनमोल अद्वितीय रत्न है।

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कोई भी रत्न या पत्थर या उपरत्न अपना कार्य तभी करती है, जब हम एक विशेष पद्धति अपनाकर उस रत्न को को धारण करते हैंl इसके लिए हमें विशिष्ट मंत्रों से लेकर विभिन्न प्रकार से उसकी सुप्त ऊर्जा को जागृत करने के लिए कुछ कुछ चीजें करनी पड़ती है, जिससे जिस ग्रह से संबंधित हम रत्न धारण कर रहे हैं lहमें उस ग्रह का आशीर्वाद प्राप्त हो तथा वह हमारी कुंडली में सक्रिय होकर हमें उत्तम लाभ प्रदान करें, यदि हमारे द्वारा बिना अभिमंत्रित या प्रतिष्ठित किए हुए रत्न किए जा रहे हैं, तो हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि उससे हमें कोई भी लाभ प्राप्त नहीं होगा क्योंकि वह केवल एक पत्थर है, उसमें ऊर्जा तभी अंकुरित होती है, जब हम उसे जगाने का प्रयास करते हैं।

मोती रत्न धारण करने की विधि निम्नलिखित प्रकार से
1. सर्वप्रथम खुद के लिए शुद्ध मोती रत्न की एक अंगूठी बनवाए जिसका वजन 5 रत्ती से कम नहीं होना चाहिए।

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2. ज्योतिष शास्त्र में नक्षत्रों का भी बड़ा महत्व होता हैl हमारे जीवन के ऊपर इनका प्रभाव भी ग्रहों के जैसे ही विस्तृत एवं व्यापक होता हैl अतः इसे धारण करने से पूर्व यह जानना बहुत आवश्यक है, कि कौन सा नक्षत्र इसे धारण करने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। मोती रत्न को धारण करने का सबसे उपयुक्त समय शुक्ल पक्ष में रोहिणी नक्षत्र ,हस्त नक्षत्र अथवा श्रवण नक्षत्र में सोमवार को धारण करना इसे सबसे उपयुक्त माना जाता है।

3. सोमवार के दिन प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर इस रत्न को गंगाजल तथा पंचामृत से धुले एवं कपूर तथा गूगल से इसकी धूपबत्ती करें।

4. उसके बाद अपने घर के पूजा स्थल के पास एक श्वेत कपड़े को बिछाकर उस पर इस पवित्रीकरण की गई अंगूठी को रखें और चंद्र ग्रह के विभिन्न मंत्रों को उच्चारण कर इस रत्न को अभिमंत्रित करें, यदि आप किसी प्रकार से असमर्थ हैं, चंद्र ग्रह के मंत्रों का उच्चारण करने में या मंत्रों को शुद्ध उच्चारण आप नहीं कर पा रहे हैं, तो ऐसे में आप किसी विद्वान पंडित की भी मदद ले सकते हैं, और इस रत्न को अभिमंत्रित करवा सकते हैं।

5. इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि मंत्रों का उच्चारण ज्यादा से ज्यादा संख्या में हो जितनी अधिक संख्या में आप मंत्रों को जब करेंगे उतनी जल्दी इस रत्न की शक्तियां जागृत होंगी इतनी जल्दी यह रत्न क्रियावान बनेगा।

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6. उसके पश्चात इसे इसी कपड़े में लपेटकर किसी भी मंदिर में ले जाकर भगवान के चरणों में रख दें यदि यह रत्न भगवान शिव के मंदिर में लेकर जाया जाए तो सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है, कि चंद्रग्रहण के द्वारा दी जा रही परेशानियों को शिवजी की पूजा के माध्यम से निष्क्रिय किया जा सकता है, अतः आप इसे किसी शिवलिंग के पास कुछ देर के लिए रख दें उसके पश्चात भगवान का आशीर्वाद लें तथा मंदिर के पंडित जी का आशीर्वाद ले एवं उन्हें उत्तम दान दक्षिणा अवश्य प्रदान करें।

7. उसके पश्चात आप यदि चाहे तो इस मोती रत्न को मंदिर में ही अपनी मनवांछित इच्छा बोलते हुए इस रत्न को उसी समय धारण कर सकते हैं, किंतु चंद्र ग्रह से संबंधित यदि मोती रत्न को संध्या की बेला जब चंद्र अपनी प्रकाश को बिखेर रहा हो और पूरी पृथ्वी उसके प्रकाश से प्रकाशमई हो गई हो तब इस रत्न को आपको चंद्र की रोशनी में कुछ देर के लिए रखना चाहिए, जिससे चंद्र की भी रोशनी इस अद्वितीय रत्न पर पड़कर इसकी शक्तियों को और अधिक बढ़ा सकें, उसके पश्चात चंद्रदेव को नमन कर आप इस जागृत अंगूठी को अपने दाएं हाथ की कनिष्ठा उंगली में धारण करें तथा अपने मनवांछित कार्य की पूर्ति भी मन मन बोले।

8. इसे धारण करने के पश्चात आपको अपने घर की महिलाओं के लिए कुछ न कुछ उपहार यदि संभव हो तो जरूर ले और यदि ऐसा नहीं कर सकते हैं तो कम से कम दूध से बनी सफेद मिठाई अवश्य ले और उनका आशीर्वाद भी साथ में प्राप्त करेंl उनके आशीर्वाद से आप के तरक्की के सारे मार्ग प्रशस्त होंगे तथा आपके जीवन में कभी कोई भी संकट नहीं आएगा और यदि आएगा भी तो आप पर ईश्वरीय कृपा बरसेगी ही साथ में इन पड़ी बुजुर्ग महिलाओं का आशीर्वाद आपको इन सभी परेशानियों के ऊपर नियंत्रण स्थापित करने की गजब क्षमता प्रदान करेगा।

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9. भूलकर भी इस दिन किसी से भी कटु वचन ना कहेंl अपनी माता को दिल बिल्कुल भी ना दुखाए। अपनी सास से भी झगड़ा लड़ाई या कटु वचन ना बोले उनका भी मन ना दुखाएl यदि संभव हो तो किसी भोजन अवश्य कराएं और साथ ही दूध से बनी हुई कोई भी सफेद मिठाई उसे अवश्य दें या फिर उसकी मदद किसी भी प्रकार से अवश्य करें।

याद रखें रत्न भी तभी कार्य करते हैं, जब हम उन्हें पूरी तरह से जागृत कर लेते हैंl हमारे शास्त्रों में वर्णित है, कि रत्न के समान ही बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद भी हमारे लिए कार्य करता है, इसलिए किसी भी रत्न को धारण करना या कोई भी शुभ कार्य जब आप करने जा रहे हो तो सर्वप्रथम पूजनीय आपके अपने घर के बड़े सदस्य होते हैं lउन्हें जितना हो सके उतना अधिक मान- सम्मान, प्यार दे lउनका आशीर्वाद ही आपका तथा आपके बच्चों के जीवन के विकट परिस्थितियों को काटने का कार्य करते हैं, तथा आपके प्रगति के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करते हैं, एवं आप अपना जीवन सफल एवं सार्थक बनाने में सक्षम बन पाते हैंl बड़े बुजुर्गों की छत्रछाया में हमेशा आप लोग ऐसे ही हंसी खुशी रहे और आपके लिए यह रत्न बहुत सौभाग्यशाली सिद्ध हो।

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