मूंगा रत्न किस धातु में पहने – Munga Ratna kis Dhatu Me Pahne

मूंगा रत्न किस धातु में पहने – Munga Ratna kis Dhatu Me Pahne

 

मूंगा रत्न किस धातु में पहने-

मंगल जिसे साहस पराक्रम का ग्रह माना जाता हैl इसकी की प्रवृत्ति काफी गर्म होती हैl मंगल ग्रह को भूमि पुत्र कहकर भी संबोधित किया जाता है, किंतु कभी-कभी उग्र एवं क्रूर ग्रह की कुदृष्टि जब किसी जातक के ऊपर पड़ती है, तब उसकी जिंदगी में बहुत से उतार चढ़ाव आने लगते हैं, अनेक परेशानियां उसके जीवन में दस्तक देने लगती हैं, ऐसे में इस ग्रह का राशि रत्न धारण करने की सलाह ज्योतिष विद्वानों के द्वारा दी जाती हैl मूंगा रत्न मंगल ग्रह की शक्तियों को समाहित करने वाला एक रत्न है, तथा इसका उपयोग विविध प्रकार से किया जाता है।

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मूंगा रत्न वास्तव में एक पादप है, जो विशेष प्रकार के जलीय जीव के द्वारा निर्माण किया जाता हैl यही कारण है, कि मूंगा को जैविक रत्न के नाम से भी संबोधित किया जाता है lइसका संयोजक कैल्शियम कार्बोनेट होता है, तथा इस की रंगत देखने में लाल होती है, तथा नारंगी रंग भी हो सकता हैl दुनिया के विभिन्न देशों में अलग-अलग वातावरण से गुजरने के कारण इसका और भी रंग पाया जाता है, काला, सफेद आदिl मूंगा रत्न का उपयोग केवल मंगल से संबंधित दोष में ही नहीं बल्कि इसे और भी कई चीजों में प्रयोग में लाया जाता हैl मूंगे की विभिन्न प्रकार के आभूषण तो बनाए ही जाते हैंl

जैसे -अंगूठी ,ब्रेसलेट, माला आदि, इस रत्न के माला का उपयोग विभिन्न प्रकार के मंत्र को सिद्ध करने के लिए किया जाता हैl मूंगे की माला सिद्ध कर बहुत से लोगों के द्वारा इसे विविध तरीके से उपयोग में लाया जाता हैl प्रतिस्पर्धा से संबंधित परीक्षा वाले जातकों के द्वारा यह रत्न की माला धारण की जाती हैl जिन्हें एकाग्रता संबंधित परेशानी होती है, या भूलने की बीमारी होती है, उनके लिए मूंगे की माला बहुत अधिक प्रभावशाली सिद्ध होती है।

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मंगल यदि किसी जातक को अशुभ फल प्रदान करता है, तो उसके जीवन में बहुत सी परेशानियां आनी शुरू हो जाती है, उसके द्वारा किए गए कठिन कार्य या उसके द्वारा किया गया मेहनत कभी भी फलित नहीं होता है, क्योंकि मेहनत वह लाकर लेकिन भाग्य का साथ इस ग्रह के दुष्प्रभाव से उसे कभी भी नहीं मिल पाता हैl मंगल से पीड़ित व्यक्ति स्वभाव से बहुत अधिक क्रूर एवं उग्र हो जाता है, तथा बात बात पर तुनक मिजाजी जैसे गुण देखने को मिलते हैं, वह हर वक्त क्रोध जैसी स्थिति में रहता है, एवं क्रोधित होकर खुद का तथा अपने ही रिश्तेदारों का अपने ही परिवार के लोगों का बहुत अहित करने लगता है।

झगड़े झंझट वाद-विवाद बहुत अधिक बढ़ने लगते हैं, वैचारिक मतभेद घर परिवार के लोग हो या कार्यस्थल के लोग या और उसी पर उसे हर किसी के साथ उसका रवैया बहुत ही बुरा होता है, सामंजस्य जैसी चीज उसके जीवन में नदारद रहती है, हर वक्त वह किसी न किसी गहरी सोच में डूबा रहता है, जिसकी वजह से उसकी मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं रहती है, क्रोध में वह पूरी तरह से पागलों की तरह बर्ताव करने लगता है, खराब व्यवहार उसे बाकी के बाहर के लोगों से तो दूर करता ही है, उसके साथ-साथ घर परिवार के लोगों से भी वह बिल्कुल अलग होने लगता है, चाहे वह सामाजिक तौर पर हो या फिर भावनात्मक स्तर पर हो हर ओर से खुद को वह अकेला ही पाता है।

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स्थितियां इतनी विकराल हो जाती है, कि उसकी विवाहित जीवन में भी बहुत सारी अड़चनें आने लगती है, तथा साथी के साथ सही सामंजस्य नहीं बैठने के कारण घर में झगड़ा, क्लेश, कलह बहुत अधिक होता है lकभी-कभी झगड़ा इतना बढ़ जाता है, कि तलाक जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है lपारिवारिक सुख- शांति पूरी तरीके से छिन्न हो जाती हैl अपने ही लोग उसके दुश्मन बन जाते हैंl मानसिक अशांति उसे क्षत-विक्षत करके रख देती है, जिसकी वजह से उसकी आर्थिक स्थिति भी खराब होने लगती हैl शारीरिक स्वास्थ्य भी लगातार गिरता रहता है, तथा उसे अनेक की पीरा से गुजरना पड़ता है।

मंगल के शुभ प्रभाव जब जातक के जीवन पर पड़ते हैं lतब उसके मेहनत का फल उसे स्वर्णिम अवसर की ऊंचाइयों तक लेकर जाता है lउसका समाज में नाम ख्याति खूब बढ़ता हैl उसे खूब प्रसिद्धि हासिल होती है lचाहे वह प्रसिद्धि उसके साहस पराक्रम बल या उसकी ऊर्जा की हो या कोई अविश्वसनीय कार्य जो उसके द्वारा किया गया होl मंगल जब अपनी कृपा दृष्टि दिखाता है, तब जातक के जीवन में विभिन्न प्रकार के मांगलिक कार्य संपन्न होते हैं, तथा उसकी शायद ही कोई इच्छा है, जो पूर्ण ना हो, भाई बंधु सभी से उसके संबंध प्रगाढ़ होते हैं, तथा उसके घर परिवार में भी एक अच्छा सामंजस्य देखने को मिलता है, वैवाहिक जीवन भी बहुत ही खुशियों से परिपूर्ण रहता है।

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मूंगा रत्न को धारण करने का सबसे उपयुक्त धातु सोना एवं तांबा को माना गया हैl कारण यह है, कि सोना एवं तांबा दोनों ही सूर्य ग्रह से संबंधित धातु होते हैं, तथा इन दोनों में सूर्य की कृपा प्राप्त करने की शक्तियां विद्यमान होती है, जिसकी वजह से प्राचीन काल से ही इन दोनों धातुओं का उपयोग विभिन्न प्रकार के आभूषण बर्तन आदि चीजों में उपयोग में लाया जाता रहा है, क्योंकि सोने से बने हुए एवं तांबे से बने हुए बर्तन जातक की शरीर को बहुत अधिक मजबूत बनाते हैं, तथा उनकी कांति का तेज बढ़ाते हैं, और एक कारण यह भी है, कि सूर्य एवं मंगल की युक्ति हमेशा सुखद अनुभव जातक को प्रदान करती हैl मंगल सदैव आदर के भाव से सूर्य को देखते हैं lयही कारण है कि सूर्य से संबंधित धातु में इनके रत्न मूंगा को धारण किया जाता हैl धारण करने का सबसे शुभ दिन मंगलवार के दिन होता है, तथा अनामिका उंगली जो कि सूर्य की उंगली भी होती हैl उसी में मंगल से संबंधित रत्न हो या उपरत्न उसी में धारण किया जाता है l

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