नीलम रत्न को किस धातु में पहनना चाहिए – Neelam Ratna Kis Dhatu Me Pahanna Chahiye

नीलम रत्न को किस धातु में पहनना चाहिए – Neelam Ratna Kis Dhatu Me Pahanna Chahiye

 

नीलम रत्न को किस धातु में पहनना चाहिए –

 Neelam Ratna Kis Dhatu Me Pahanna

 Chahiye

नीलम रत्न को किस धातु में पहनना चाहिए -आज का हमारा विषय हैl

सृष्टि पर जितने भी प्राणी है, उन सभी पर विभिन्न ग्रहों तथा उपग्रहों के द्वारा समय-समय पर उनका प्रभाव देखने को मिलता है, चाहे यह प्रभाव सुक्ष्म हो या किसी बड़े स्तर पर हो, किंतु पूरे विश्व का कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है, जो इन ग्रहों के प्रभाव से अछूता हो, वैसे तो लोगों के मन में ग्रहों और रत्नों को लेकर विभिन्न प्रकार की भ्रांतियां बैठी हुई है, किंतु पाश्चात्य ज्योतिष विज्ञान हो गया भारतीय ज्योतिष विज्ञान हमें इन सभी चीजों के बारे में विस्तृत एवं सटीक जानकारी देते हैंl उनका मानना है, कि हमारा जीवन इन ग्रहों की चाल के अनुसार ही चलता है, तथा जिस ग्रह का जिस समय गोचर होता है।

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हमारी प्रवृत्ति भी वैसी हो जाती है, इसलिए ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमें विभिन्न प्रकार के महान रत्नों, रत्नों एवं उप रत्नों को धारण करने की सलाह दी जाती है, जिनको हम विभिन्न प्रकार के आभूषण, अंगूठी आदि में परिवर्तित कर अपने आप को अलंकृत करते हैंl प्रत्येक प्रकार के रत्न का अपना एक धातु होता है, जिसके साथ मिलकर उसमें अलौकिक गुणों का समावेशन होता है, जिससे हमारे जीवन में विभिन्न आयामों पर अद्वितीय प्रभाव देखने को मिलता हैl इन रत्नों में विभिन्न प्रकार की ऊर्जाओ को अवशोषित करने की गजब की क्षमता होती हैl प्रकृति द्वारा प्रदत्त विभिन्न धातुओं का भी अपना एक अलौकिक गुण है, जो उन्हें अपने आप में अद्भुत संसाधन बनाता है। (neelam ratna kis dhatu me dharan kare)

पौराणिक काल से ही हमारे पूर्वजों के द्वारा विभिन्न प्रकार के धातुओं का उपयोग किया जाता रहा है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इन धातुओं का उपयोग ना केवल विभिन्न प्रकार के आभूषणों ,अंगूठियां, औजारों, साज-सज्जा आदि के लिए इस्तेमाल किया जाता था, बल्कि विभिन्न प्रकार के धातुओं से बने पात्रों का इस्तेमाल भोजन बनाने एवं भोजन करने के लिए तथा जल आदि ग्रहण करने के लिए उपयोग किया जाता था lउनकी सभ्यता कितनी उन्नत थी। इस बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं, कि उस जमाने में हर चीज चाहे वह खाना- पीना, पहनना आदि वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित थी। आज भी बहुत से ऐसे साक्ष्य मौजूद है, जो सनातन संस्कृति को विज्ञान का दूसरा स्वरूप माना जाता है।

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हमारे पूर्वजों की बौद्धिक क्षमता इतनी उन्नत थी कि हमें कब किस मौसम में क्या खाना चाहिए एवं किस खास दिन कौन सी चीज खाना चाहिए?? जिससे हमें उस चीज की पूर्ति पूरे साल भर तक होती रहे, जैसे- दिवाली के दिन ओल की सब्जी या चोखा खाने का प्रचलन है, ऐसा माना जाता है, कि इस दिन यदि ओल खाया जाए तो फिर कभी भी किसी के शरीर में फास्फोरस तत्व की कमी नहीं होती हैl हमारे पूर्वजों द्वारा प्रदान किया गया ज्योतिष विद्या किसी वरदान से कम नहीं है, यह विद्या एक उन्नत विद्या है, जिसमें जटिल से जटिल समस्याओं का समाधान प्राप्त होता है l ग्रहों की चाल तथा उनका प्रभाव से संबंधित बातें भी हमें स्पष्ट रूप से पता चलती है।

विभिन्न ग्रहों में से दूसरे सबसे बड़ा ग्रह है- शनि ग्रह, जिसके बारे में समाज में लोगों के बीच में बहुत सी भ्रांतियां फैली हुई है lलोगों का ऐसा मानना है, कि शनि ग्रह एक कष्ट ,पीड़ा ,दुख, बीमारी मारक आदि का ग्रह है, किंतु शनि ग्रह वास्तव में सृष्टि में संतुलन स्थापित करने वाला ग्रह हैl यह कर्म फल दाता ग्रह के नाम से जाना जाता है, तथा शनि ग्रह का रत्न है। नीलम रत्न जिसका वर्ण नीला होता है, देखने में बहुत ही आकर्षित होता है, नीलम रत्न (neelam ratna kis dhatu me pahne jata hai) जब इसे हम सूर्य के प्रकाश अथवा चांद की शीतल किरणों में रखते हैं तब इसके चारों ओर क्षितिज में मनमोहक नीले रंग की रोशनी तैरती हुई दिखाई देती हैl यह रत्न अपने अंदर शनि ग्रह के ऊर्जा को अवशोषित कर हमें आश्चर्यजनक रूप से लाभ प्रदान करता है।

नीलम रत्न (neelam ratna kis dhatu me pahne) की प्रवृत्ति काफी गर्म होती है, इसलिए जब हम इसे मुट्ठी में बंद करके रखते हैं, तब हमें ऊष्मा उत्सर्जित होते महसूस होता हैl नीलम रत्न बहुत ही बहुमूल्य रत्न है, तथा त्वरित गति से यह आपने परिणाम हमारे जीवन पर देने लगता हैl इसके साक्ष्य तुरंत ही हमें नजर आने लगते हैंl नीलम रत्न किसी को भी अद्भुत संरचना के रूप में परिवर्तित कर सकता है, किंतु यदि नीलम रत्न किसी को नहीं धार रहा है, तो उसकी बर्बादी के दिन शुरू हो जाते हैं, उसे बहुत सी मानसिक यातनाएं मिलने लगती हैl शारीरिक तौर पर भी वह काफी कमजोर हो जाता है, तथा विविध प्रकार की बीमारियों का भी शिकार हो जाता है, उसकी जिंदगी क्षत विक्षत हो जाती है।

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जीवन की हर पहलू पर उसे बहुत ही कष्टों का सामना करना पड़ता है, जिंदगी बिल्कुल विरान सी हो जाती है, इसलिए नीलम रत्न (neelam ratna kis dhatu me dharan karna chahiye) को धारन करने से पहले किसी विद्वान ज्योतिष की परामर्श अवश्य लें lउन्हें अपनी कुंडली अवश्य दिखाएं एवं विस्तृत जानकारी ले ले तभी नीलम रत्न को उचित धातु के साथ पहने अन्यथा परिणाम भयानक हो सकते हैंl नीलम रत्न बहुत महंगा होता है, ऐसे में आमजन के बहुत से थोड़ा दूर है, इसलिए इसके उप रत्नों का प्रयोग भी लोगों के द्वारा किया जाता है, उप रत्नों में भी विभिन्न प्रकार के गुणों का समावेशन होता है, तथा यह भी अच्छे परिणाम देते हैं।

रत्न और उपरत्न में बस यही अंतर है, कि रत्न काफी सालों तक हमें अच्छे परिणाम देते हैं, जबकि उपरत्न कुछ विशिष्ट समय तक ही हमें परिणाम देते हैं, क्योंकि इनके ऊर्जा का क्षरण रत्नों के मुकाबले जल्दी होता है, इसलिए इन्हें समय-समय पर बदलते रहना चाहिए, जिससे इनका प्रभाव हमारे जीवन पर हमेशा सकारात्मक रहेl नीलम रत्न (neelam ratna kis dhatu me dharan karte hai) के बहुत से उपरत्न है, जैसे- नीली, नीला टोपाज ,लाजवर्त, सोडालाइट आदि किंतु सबसे अच्छा नीलम का उपरत्न तंजनाईट को समझा जाता है, तथा इसे चांदी में धारण किया जाता है। नीलम रत्न को ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार चांदी या पंच धातु में धारण किया जा सकता है, इसे प्लैटिनम या बहुत लोगों का मन है, कि सोने में भी धारण किया जा सकता है।

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