नीलम रत्न धारण करने का मुहूर्त – Neelam Ratna Dharan Karne Ka Muhurt

नीलम रत्न धारण करने का मुहूर्त – Neelam Ratna Dharan Karne Ka Muhurt

 

नीलम रत्न धारण करने का मुहूर्त

नीलम रत्न धारण करने का मुहूर्त सबसे उपयुक्त कब होता है, तथा किस अवस्था में होता है, इस रत्न को कैसे धारण करें जिससे हमें अप्रतिम लाभ प्राप्त हो आइए विस्तार से जानते हैं-

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नीलम रत्न को शनि ग्रह से पीड़ित अवस्था अथवा यदि शनि ग्रह किसी शुभ भाव में स्थित हो तो ऐसी परिस्थिति में इसे धारण करने की सलाह दी जाती है। इस अद्वितीय रत्न में शनि ग्रह से संबंधित पारलौकिक ऊर्जाओं का निवास होता है, इसलिए शनि ग्रह के विभिन्न प्रकोप से यह रत्न भांति- भांति तरीके से हमें इनके वक्र दृष्टि से बचा कर रखता हैl यह रत्न ऐसा है, जिसमें विध्वंस की भी क्षमता रखता है, तथा चमत्कार दिखाने की भी अद्भुत कला रखता है lयदि यह रत्न किसी को धार जाए तो रंक से राजा बना देता है, और यदि ना धारे तो उसे हाथी पर भी बैठे हुए को कुत्ता से कटवा दे ऐसा है। यह महारत्न, इसके अनेक चमत्कारी तथा गुणकारी लाभ हमें प्रदान किया जाता है।

यह रत्न जिस भी जातक के द्वारा धारण किया जाता है lउसके जीवन की समस्याओं का निदान धीरे-धीरे होने लगता है। यह ऐसा भाग्य में वृद्धि करने वाला रत्न है, जो त्वरित गति से कार्य करता है, जिस व्यक्ति के द्वारा धारण किया जाता है उसके व्यक्तित्व में अलौकिक रूपांतरण देखने को मिलने लगता है। उसकी आभामंडल बहुत मजबूत हो जाती है तथा उसके व्यक्तित्व के सामने अच्छे-अच्छे लोग झुकते हैं। विषम से विषम परिस्थिति में भी अपने को वह विचलित होने नहीं देता है, और यही उसकी सूज बुझ उसे हर चीज से बाहर निकालती है, तथा सफलता दिलाती हैl लोग उसके वाकपटुता के कायल होते रहते हैं, lऐसा व्यक्ति जहां भी जाता है, उसे खूब मान सम्मान की प्राप्ति होती है, तथा लोगों की सराहना एवं सहयोग की भी प्राप्ति उसे अप्रतिम रूप से होती हैl उसका भविष्य बहुत स्वर्णिम होता है, क्योंकि उसमें मजबूत इच्छाशक्ति तथा वह कर्मठ होता है, मेहनत करने से कभी भी कतराता नहीं है।

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अपनी समस्याओं को किसी के सामने भी वह प्रकट नहीं करता है, बल्कि उसका खुद पर खुद निदान तलाश करता है, एवं उसमें सफल भी होता हैl ऐसे लोगों का जीवन बहुत आनंदमय होता है, इनका जीवन साथी भी इनके पग -पग पर काफी साथ निभाता है lइन्हें अच्छे से मालूम होता है, कि कैसे कार्यस्थल तथा घर परिवार के बीच सामंजस्य स्थापित करना है, जिससे इन्हें घर परिवार के लोगों का भी साथ प्राप्त होता है, और भावनात्मक रूप से यह लोग बहुत मजबूत होते हैं, जिसकी परिकल्पना भी आप और हम नहीं कर सकते हैं। इन्हें बड़े से बड़ा परेशानी भी हरा नहीं सकता है। अपने पद पर अडिग रहते हैं, असंभव से दिखने वाले चीजों को भी संभव बनाने में अपना मत रखते हैं, वैसे तो इनकी कामयाबी देखकर इनके गुप्त तथा प्रत्यक्ष शत्रु बहुत होते हैं, किंतु इनका व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली होता है, कि इनका शत्रु चाह कर भी इनका कुछ बिगाड़ नहीं पाता है।

नीलम रत्न वैसे तो नीला रंग का होता है, किंतु यह और भी रंगों में निरूपित होता हैl जैसे काला नीलम, भूरा नीलम ,पीला नीलम, गुलाबी नीलम ,नारंगी नीलम, सतरंगी नीलम, रंग बदलने वाला नीलम ,तारांकित नीलमl पृथ्वी के विभिन्न भागों पर यह रत्न पाया जाता है तथा इसके संयोजक बदलने से विभिन्न रंगों वाले दुर्लभ नीलम रत्न भी पाए जाते हैं, किंतु सबसे सर्वोत्तम नीलम जम्मू कश्मीर के खदानों से प्राप्त होता हैl लद्दाख तथा कश्मीर के बीच स्थित पाडर की पहाड़ियों में इस रत्न की खदानें हैं, जो 9 महीनों तक बर्फ के नीचे दबी रहती है तथा यहां से नीलम प्राप्त करना इतना आसान नहीं है, बहुत ही दुर्गम रास्ते से होकर यहां पहुंचा जाता है। उसमें भी बर्फ के थपेड़े मनुष्यों की क्षमता की कड़ी परीक्षा लेते हैंl बर्फबारी से बहुत से लोगों की मृत्यु भी हो जाती है, किंतु यह रत्न उन्हें प्राप्त नहीं होता। 3 दिन की दुर्गम यात्रा के बाद इस खदान तक पहुंचा जाता है।

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पूरे विश्व में यहां के रत्न का महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि सबसे सर्वोत्तम उत्कृष्ट रंगो एवं गुणवत्ता वाला नीलम यहीं से प्राप्त होता हैl इसका वर्ण सबसे अधिक नीला होता है, जो कि इसके अधिक मूल्यवान होने का कारण है, इसलिए पाडर की पहाड़ियों का नीलम का बहुत अधिक महत्व है और आम लोगों के बहुत से कोसों दूर हैl भारत में इसकी मांग अधिक है, किंतु मात्रा में बहुत कम उपलब्ध है lअतः इसकी पूर्ति भारत के पड़ोसी देशों से की जाती है l मुख्यत श्रीलंका से इसे आयात किया जाता है, क्योंकि विश्व में श्रीलंका के नीलम भी काफी प्रसिद्ध हैं, तथा गुणवत्ता में भी बहुत उत्तम होते हैं, वैसे और भी देश जैसे अफगानिस्तान पाकिस्तान म्यानमार मेडागास्कर उत्तरी अमेरिका तंजानिया आदि जैसे में भी नीलम रत्न की खदानें है।

नीलम रत्न धारण करने के पूर्व बहुत सी चीजों को ध्यान में रखना चाहिए, जैसे- हमारे द्वारा खरीदा जा रहा नीलम प्राकृतिक है, या कृतिम है, क्योंकि कृतिम नीलम हमें उतना प्रभाव नहीं दिखाता जितना हमें प्राकृतिक रूप से उपलब्ध नीलम दिखाता है, लेकिन नीलम असली है या नकली उसके कुछ पहलू है, जिनको जांचने परखने के बाद हम जान सकते हैं, कि हमारे द्वारा खरीदा जा रहा रत्न नीलम है या नहीं या फिर असली है, या नकली है।

1.नीलम रत्न में प्राकृतिक तौर पर ही उसके अंदर बहुत से जाले, आकृतियां ,रेखाएं बिंदु आदि मौजूद रहती है, कभी भी वह पूरी तरीके से पारदर्शी नहीं होता है।
2. इस रत्न की प्रवृत्ति काफी गर्म होती है। अतः आप को मुट्ठी में बंद करने के पश्चात इससे उस्मा उत्सर्जित होते हुए महसूस होता है।
3. इसको दूध में डालने के उपरांत दूध का रंग नीला हो जाता है।

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4. सूर्य के प्रकार अथवा चांद की शीतल किरणों में इस पर जब पड़ती है, तो एक समान ही किरणे उत्सर्जित होती है।
इस रत्न को 5, 7, 9 या12 रति से कम नहीं धारण करना चाहिए, इस रत्न को धारण करने का सबसे शुभ मुहूर्त होता है, शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार को सूर्य उदय से पूर्व या फिर मध्य रात्रि को इस रत्न को धारण किया जाता है, क्योंकि इस वक्त इसकी शक्तियां अपने चरमोत्कर्ष पर रहती है। इसे धारण करने से पूर्व गंगाजल तथा पंचतत्व से ऊर्जावान बनाया जाता हैl तत्पश्चात शनि ग्रह से संबंधित विभिन्न मंत्रों को उच्चारित कर इसे अभिमंत्रित किया जाता है, उसके पश्चात किसी मंदिर में भगवान के चरणों में इसे रखकर आशीर्वाद करने के पश्चात इसे धारण करें उचित दान दक्षिणा दे, तथा पंडित जी का आशीर्वाद प्राप्त करें, भूखे को भोजन अवश्य करवाएं, इस दिन मांसाहार वर्जित रहता है।

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