सफेद पुखराज क्या है – Safed Pukhraj Kya Hai

सफेद पुखराज क्या है – Safed Pukhraj Kya Hai

 

सफेद पुखराज क्या है

सफेद पुखराज क्या हैसफेद पुखराज प्रकृति के द्वारा प्रदान किया गया एक अद्भुत दिव्य रत्न है, जो देखने में बिल्कुल पारदर्शी होता है, तथा बहुत ही आकर्षक होता हैl इसके किनारे का आकार बहुत अधिक व्यवस्थित होता हैं, जिसकी वजह से यह देखने में और भी चमकदार एवं सुंदर लगता है, तथा जब भी इसके ऊपर प्रकाश की किरण गिरती है, तब यह उन्हें परावर्तित कर देता है। सफेद पुखराज का संयोजक एलुमिनियम फ्लोरिन तथा शीलीकेट जैसे तत्व होते हैं lयह रत्न कोरंडम परिवार से संबंधित होता है। पुखराज के भिन्न-भिन्न रंगो वाले रत्न भिन्न-भिन्न ग्रहों से संबंधित होते हैं, जैसे- पीला पुखराज सबसे उत्तम माना जाता हैl गुरु ग्रह की कृपा प्राप्त करने के लिए वैसे ही सफेद पुखराज शुक्र ग्रह की शक्तियों को अपने अंदर समाहित रखता है।

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यह रत्न हीरा के जगह पर उपयोग में लाया जाता है, जिससे शुक्र ग्रह की स्थिति को मजबूत बनाया जा सके एवं शुक्र ग्रह की कृपा को प्राप्त किया जा सके, लेकिन सफेद पुखराज कि जगह पर लोगों के द्वारा हीरे का उपयोग अधिक किया जाता हैl यही कारण है, कि हीरा अधिक लोकप्रिय है, सफेद पुखराज की तुलना में क्योंकि हीरा एक खास वर्ग को निरूपित करता है, ऐसा लोगों को लगता है, कि हीरे धारण करने से उनकी अभिव्यक्ति काफी दमदार होगी तथा लोगों के बीच उनके पैसे रुपए प्रदर्शन भी इसके माध्यम से लोगों के द्वारा प्रदर्शन भी हो जाएगा, जिससे उनकी छवि समाज में और अधिक उत्कृष्ट होगी।

हीरा देखने में इतना खूबसूरत होता है, कि लोग उसकी चमक में खो से जाते हैंl यह भी एक कारण हो सकता है, सफेद पुखराज की जगह हीरा धारण करने का, हीरा की तुलना में सफेद पुखराज का मूल्य बहुत कम होता हैl यह भी एक कारण हो सकता है, जिसकी वजह से लोग हीरा रत्न को धारण करना अधिक पसंद करते हैं, अपने शुक्र ग्रह की स्थिति को मजबूत करने के लिए, हालांकि सफेद पुखराज की आभा भी बहुत अधिक आकर्षण युक्त होती है, जिससे इसकी मनमोहक छवि आंखों को बहुत ठंडक पहुंचाती है।

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शुक्र ग्रह जिन्हें हीरा, चांदी, भौतिक एवं सांसारिक वस्तुएं, ज्योतिष विद्या ,विभिन्न प्रकार की कलाएं, प्रारब्ध, अग्नेय दिशा, सुगंध, सजावट, विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण ,स्वयं स्त्री वर्ग का कारक माना जाता हैl यही कारण है, कि जो लोग स्त्री वर्ग का मान सम्मान करते हैं lउनके जीवन में धन संबंधित कभी भी किसी भी तरह की परेशानी देखने को नहीं मिलती है।
शुक्र ग्रह जिनका संबंध स्वयं मां लक्ष्मी से हैं lऐसा माना जाता है, कि यदि शुक्र ग्रह की कृपा प्राप्त व्यक्ति को कभी भी जीवन में धन ,संपदा, ऐश्वर्य की कमी नहीं रहती है। कलात्मक गुणों का स्वामी शुक्र ग्रह होता हैl शुक्र का संबंधित विभिन्न प्रकार की विलासिता की चीजों से होता है। वैदिक धर्म के अनुसार मां लक्ष्मी मां काली एवं गुरु शुक्राचार्य को शुक्र ग्रह से संबंधित माना जाता है।

शुक्र ग्रह की स्थिति यदि किसी जातक के जन्मपत्रिका में अच्छी नहीं होती है, तो ऐसी स्थिति में जातक के जीवन में धन संबंधित बहुत सी परेशानियां देखने को मिलती है, उसके जीवन में दरिद्रता बहुत अधिक रहती है। भौतिक सुखों का अभाव भी देखने को मिलता है, कमजोर सुख होने की वजह से आकर्षण शक्ति पूरी तरह से छिन्न होती है, ना उसकी कोई रूपरेखा होती है, और ना ही कोई रहने सहने का ढंगl व्यक्ति शुद्धता के साथ नहीं रहता है, हर वक्त अशुद्ध स्थिति में रहता है, तथा स्त्री सुख में भी कमी आने लगती है।

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सफेद पुखराज को विधिवत तरीके से धारण करने से चमत्कारिक रूप से अपने लाभ प्रदान करता है। हालांकि विशिष्ट स्थितियों में इसके विध्वंसक परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं, इसलिए इसे धारण करने से पूर्व अपने जन्मपत्रिका का सटीक विश्लेषण करवाने के पश्चात ही इस रत्न को विधिवत तरीके से धारण करेंl इस रत्न को धारण करने से जातक को निम्नलिखित लाभ प्राप्त हो सकते हैं:-
1. शुक्र ग्रह की कृपा से जिन जातकों का विवाह संपन्न होने में किसी भी प्रकार के विघ्न बाधा आ रही हैं lउन सभी को यह रखना दूर करता है, तथा उपयुक्त जीवन साथी के साथ जातक प्रणय सूत्र में बंधता है। पति पत्नी के बीच अच्छा सामंजस्य बैठाने में भी इस रत्न की बहुत बड़ी भूमिका होती है, जिससे दांपत्य जीवन सुख संपदा से भर उठता है।

2. इस रत्न को धारण करने से सौंदर्य में वृद्धि होती है, क्योंकि शुक्र ग्रह को सुंदरता की देवी भी कहा जाता हैl यही कारण है, कि इससे संबंधित रत्न को धारण किया जाता है, तब जातक के मुख मंडल एवं व्यक्तित्व में बहुत बड़ा परिवर्तन देखने को मिलता है।

3. इस रत्न को धारण करने से जातक को विभिन्न प्रकार के कलात्मक कौशलों में गूढ़ ज्ञान की प्राप्ति होती है, जैसे- गीत- संगीत, नृत्य , रंगमंच, चित्रकारी, पहनावा जगत, सिनेमा जगत, नर्तक ,अभिनय, कोमलता ,काव्य रचना आदि।

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4. इस रत्न को धारण करने से सांसारिक एवं भौतिक सुख सुविधाओं में वृद्धि होती है, तथा विलासिता की वस्तुओं की भी प्राप्ति होती है।

5. यह रत्न जातक को प्रेम संबंधों में भी सफलता दिलाता है, तथा प्रेमी युगल के विवाह में भी अहम भूमिका निभाता है। मजबूत शुक्र ग्रह ही प्रेमी प्रेमिका के विवाह के पीछे का कारक होता है। यही कारण है, कि सफल दांपत्य जीवन एवं सुखी दांपत्य जीवन के लिए भी इस रत्न का उपयोग किया जाता है।

6. इस रत्न को धारण करने से व्यक्ति धन-धान्य से संपन्न रहता है, तथा वैभव ऐश्वर्य की भी प्राप्ति उसे होती है।

7. इस रत्न के उपयोगकर्ता का रचनात्मक शैली में भी यह रत्न अप्रतिम रूप से वृद्धि करता है, जिससे जातक अपने कार्यक्षेत्र में बहुत अधिक नाम कमाता है, उसे खूब कीर्ति की प्राप्ति होती है। उसकी कार्य की प्रसिद्धि होती है।

 

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