स्फटिक श्री यंत्र क्या है – Sphatik Shree Yantra Kya Hai

स्फटिक श्री यंत्र क्या है – Sphatik Shree Yantra Kya Hai

स्फटिक श्री यंत्र क्या है, sphatik shree

 yantra kya hai

स्फटिक श्री यंत्र क्या है???
स्फटिक श्री यंत्र एक प्रकार का
ज्यामितीय आकृति है, जो मंत्रों के एक खास आवृत्ति के आधार पर भौतिक स्वरूप लेता है ।इसमें विशिष्ट प्रकार की आकृतियां रेखाएं बिंदु आदि जैसी चीजें प्रकृष्ट स्वरूप में उत्सर्जित किया जाता है ।जिसके परिणाम स्वरूप एक अत्यंत शक्तिशाली एवं अत्यंत प्रभावशाली संरचना का निर्माण होता है।

स्फटिक श्री यंत्र क्या है तथा इसके विभिन्न प्रभाव कैसे जनकल्याण के लिए प्रभावी माने जाते हैं ???

स्फटिक श्री यंत्र यह एक प्रकार का ऐसा यंत्र है।जिसका प्रयोग हमारे प्रखर ज्ञान को रखने वाले पूर्वजों के द्वारा बनाया गया है। जिसकी एक -एक कण के निर्माण में उनके प्रबुद्ध बुद्धि क्षमता का वर्णन देखने को मिलता है। स्फटिक श्री यंत्र (shree yantra)एक प्रकार का मंत्र उच्चारण के द्वारा निर्माण किया गया ऊर्जा का ऐसो श्रोत माना जाता है, जिसका ऊर्जा का चक्र कभी भी समाप्त नहीं होता है ।यह इस प्रकार से निर्मित होता है, कि अष्ट दिशाओं से सभी सकारात्मक शक्तियों को अवशोषित करने की क्षमता रखता है, इसलिए शास्त्रों में इसका प्रयोग करना बहुत ही शुभ फलदायक माना जाता है।माता लक्ष्मी का सीधा संबंध स्फटिक श्री यंत्र (sphatik shree yantra ke fayde)से माना जाता है ।यह श्री यंत्र दो चीजों से मिलकर बना हुआ होता है।

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स्फटिक जो हिमालय की कंदराओ से विशिष्ट अवस्था में प्राप्त होता है। यह बर्फ के बड़े-बड़े टुकड़ों के नीचे दबा हुआ प्राप्त होता है, जो बिल्कुल देखने में हीरे के समान चमकदार दिखाई पड़ता है, जब सूर्य के प्रकाश रेखा उसके ऊपर पड़ती है, तब सप्त तरंग निकलते हुए प्रतीत होते हैं ।दूसरा हिस्सा होता है -यंत्र, जिसका निर्माण हमारे विद्वानों के द्वारा हमारे कई ऋषि- मुनियों के द्वारा हमारे कई तपस्वीयों के द्वारा किया गया, जो एक खास प्रणाली पर कार्य करती है, जब इतने चीजों उत्कृष्ट रुचिर वस्तुओं को एक साथ समावेशित किया गया तब जाकर स्फटिक श्री यंत्र ( sphatik shree yantra ke labh)का निर्माण संभव हो पाया है।

इसकी अखंडता इसकी भव्यता परम सुखदायक रचना का प्रतीक मानी जाती है। ऐसा माना जाता है, कि देव गुरु बृहस्पति के सानिध्य में कई श्रेष्ठ एवं विद्वान गुरु के द्वारा इनका निर्माण किया गया था ।मां लक्ष्मी जब रुष्ट होकर प्रसन्न होकर पृथ्वी से चली गई थी, तो ऐसे में उन्हें वापस पृथ्वी पर सिर से विदित होने के लिए तथा उनके द्वारा प्रदान किए जाने वाले असंख्य सुखों को फिर से प्राप्त करने के लिए तथा माता लक्ष्मी के आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए उन सभी ऋषि मुनियों के द्वारा माता लक्ष्मी का आवाहन इस अद्भुत स्फटिक श्री यंत्र की रचना के माध्यम से किया गया।

अपनी बुद्धि- विवेक साधना तथा शुद्ध चित्र के माध्यम से उन्होंने माता को विवश कर दिया कि माता अपने प्रेम की वर्षा फिर से पृथ्वी पर करें स्फटिक श्री यंत्र के माध्यम से उनके द्वारा की गई साधना तथा विधि विधान से किया गया पूजन एवं षोडशोपचार से की गई मंत्र साधना से माता लक्ष्मी मंत्रमुग्ध होकर पृथ्वी के आधार पर प्रकट हुई एवं जन कल्याण के लिए उन्होंने बताया कि स्फटिक श्री यंत्र माता के अंश का रूप रहेगा तथा जगत कल्याण के लिए इसके माध्यम से जब भी कोई उनका आवाहन करेगा, तब -तब मां उक्त व्यक्ति विशेष को दर्शन देकर तथा सांसारिक सुखों को प्रदान कर उस व्यक्ति विशेष को कृतार्थ करेंगी ।स्फटिक श्री यंत्र(sphatik shree yantra) एक ऐसा यंत्र है, जो समस्त ब्रह्मांड के सुखों को प्रदान करने वाला माना जाता है। इसमें श्री का अर्थ ही स्वयं माता लक्ष्मी माता सरस्वती तथा माता काली का एकांकी स्वरूप माना जाता है। धनसंपदा ,विभूति, ऐश्वर्य ,वैभव, विद्या सुख आदि का परिचालक का रूप स्फटिक श्री यंत्र को माना जाता है।

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स्फटिक यंत्र क्या है, तथा इससे मिलने वाले विभिन्न प्रकार के लाभ क्या क्या हो सकते हैं???

1)•स्फटिक श्री यंत्र की पूजा करना व्यक्ति के लिए बहुत ही सार्थक माना जाता है ।यह प्रत्येक जनमानस के लिए विद्या ,सुख संपदा प्राप्त करने वाला माना जाता है। स्फटिक श्री यंत्र शुक्र ग्रह से संबंधित माना जाता है।अतः जिन लोगों की यह आत्मिक इच्छा होती है, कि उनके ऊपर भी शुक्र ग्रह जो सौंदर्य की देवी मानी जाती है, जिनका व्यापक प्रभाव प्रत्येक जीव जंतु पर बहुत ही गहरे रूप से पड़ता है ।ऐसे शुक्र देवी की कृपा भी उक्त व्यक्ति विशेष को प्राप्त हो ।तो ऐसे में उसे इस दिव्य यंत्र को सिद्ध कर पूजा अर्चना की जानी चाहिए।

2)• जिन लोगों के घर में दुख दरिद्रता आवाज बहुत अधिक रहता है। ग्रहों की चाल कहे या लोगों के द्वारा उत्पन्न किए जाने वाले बाधाएं कहे।जिसके कारण उनका जीवन बहुत ही सांसारिक वस्तुओं के अभाव में गुजरता है।ऐसे लोगों को स्फटिक से निर्मित श्री यंत्र की पूजा अर्चना प्रतिदिन विधिवत रूप से की जानी चाहिए या स्फटिक श्री यंत्र के समक्ष बैठकर माता लक्ष्मी का बीज मंत्र-
llॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमःll का जाप प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में किया जाना चाहिए ।इससे धन से संबंधित सभी समस्याएं स्वत ही समाप्त होने लगती है lकिसी का व्यापार बढ़ने लगता है, तो किसी को धन से जुड़े कई प्रकार के प्रासंगिक आय के स्रोत प्राप्त होने लगते हैं, किसी के कार्य क्षेत्र में आकस्मिक धन लाभ की शुभदा युक्त योग बनने लगते हैं, तो किसी के वृत्ति संबंधित चीजों में बहुत ही अच्छे लाभ प्राप्त होने लगते हैं।कोई नया व्यवसाई अपना व्यवसाय शुरू करता है।

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तो उसके व्यवसाय की गाड़ी बहुत जल्द उन्नति के मार्ग पर चलने लगती है ।बहुत जल्द वह प्रगति के पथ पर तीव्र गति से आगे बढ़ने लगता है ।वित्त विषयक संबंधित चीजों में उसे सदा ही अच्छे परिणाम प्राप्त होने लगते हैं, जिसके कारण आर्थिक संरचना में सुधार देखने को मिलता है ।यह एक ऐसा यंत्र है, जो किसी भी जातक के लिए बहुत ही अच्छे परिणामों को प्रदान करने वाला माना जाता हैl इसकी पूजा अर्चना करने से व्यक्ति को भौतिक सुखों की अद्भुत अनुभूतियां प्राप्त होती है।

3)• अखंड लक्ष्मी का वरदान प्राप्त करने के लिए भी स्फटिक से निर्मित श्री यंत्र का प्रयोग किया जाता है। ऐसा माना जाता है, कि जहां स्फटिक श्री यंत्र की पूजा अर्चना की जाती है ।वहां ना केवल माता लक्ष्मी का निवास होता है।बल्कि भगवान शिव शंभू का अभिन्न अंग भी स्फटिक (sphatik shree yantra)को माना जाता है ।ऐसे में उस स्थल पर निवास करने वाले सभी लोगों पर स्वयं बाबा काल भैरव की कृपा बनी रहती है, जिससे कभी भी उनके जीवन में आकस्मिक दुर्घटनाएं नहीं घटती हैं ।यह उन्हें जीवन के प्रत्येक चरण में आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ विविध प्रकार की चीजों से भी सुरक्षा प्रदान करता है।

 

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