काली गुंजा किसे कहते है – Kali Gunja Kise Kahte Hai

काली गुंजा किसे कहते है – Kali Gunja Kise Kahte Hai

 

काली गुंजा किसे कहते हैं?

काली गुंजा एक तरह का बीज है, जो एक प्रकार के बेल से हमें प्राप्त होता है, जो मुख्यतः दुनिया के उष्णकटिबंधीय और गर्म क्षेत्रों में बहुतायत रूप से किसकी खेती की जाती है, इसका प्रयोग तांत्रिक क्रिया में प्रचंड रूप से किया जाता है, इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे धुंधची, रति आदिl काली गुंजा बहुत ही दुर्लभ गुंजा मानी जाती है lइसके औषधीय गुणों के कारण इसे सजीवन बूटी से अलंकृत किया जाता है, इसमें मौजूद कई ऐसे तत्व होते हैं, जो कई जटिल बीमारियों को भी जड़ से खत्म करने की क्षमता रखते हैंl यह अपने तांत्रिक प्रयोगों के साथ-साथ उपचारात्मक गुणों के लिए भी बहुत अधिक प्रयोग में प्राचीन काल से ही लाया जाता रहा है।

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कई वर्षों पूर्व से प्राचीन काल से ही हमारे पूर्वजों के द्वारा इसके पत्तियों को इसके जड़ों को इसके फलों को इसके बीजों को औषधि के रूप में प्रयोग में लाया जाता रहा है, तथा स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के लिए इसका एक-एक कण बहुत ही लाभप्रद माना जाता है। टिटनेस जैसी ख़राब बीमारी जिसका इलाज लगभग असंभव बताया जाता हैl जिसमें लोगों के अंग अकड़ जाते हैं, एवं निष्क्रिय हो जाते हैं, ऐसी बीमारी में भी इसका प्रभाव अच्छे देखने को मिलते हैंl सांपों के द्वारा काटे जाने पर स्थित विश को भी अर्थ सून्य करने में प्रवीणता पूर्वक अपने प्रभाव दर्शाता है lत्वचा संबंधित विभिन्न प्रकार के रोगों में भी इस की फलियों को घिसकर औषधि बनाई जाती है, जिससे लंबी एवं जटिल त्वचा रोग भी ठीक होने लगते हैं, हालांकि रति को जहरीला माना जाता है।

प्राचीन ग्रंथों में वर्णित है, कि इसे शुद्ध किए बिना प्रयोग में लाना अपने मौत को दावत देने के समान माना जाता है। अतः बिना शुद्ध किए इसका प्रयोग करना वर्जित माना जाता है। रति के पौधे को मानदंड आधार पर भारतीय बदले की श्रेणी में रखा जाता है, और यह भारत भूमि के विभिन्न भागों में खासकर हिमालय के क्षेत्र आदि जगहों में पाया जाता है, कई ऐसे दुनिया के और अधिक देश है, जहां रति के पौधे व्यापक रूप से हमें प्राप्त होते हैं, जैसे- चीन, दक्षिण अफ्रीका ,ब्राजील वेस्टइंडीज आदि जैसे कुछ देश हैं, जहां पर भी किस पौधे की खेती की जाती है, इसे उगाया जाता है, किंतु मूल रूप से यह एक भारतीय पौधा है।

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जिस प्रकार विभिन्न प्राकृतिक चीजें जैसे- सेंधा नमक, फिटकरी, राई, काली मिर्च, लाल मिर्च आदि जैसे कुछ पदार्थों का प्रयोग कर वास्तविक जीवन में चल रहे परेशानियों का समाधान किया जाता है, जिस प्रकार अनेक प्राकृतिक रूप से प्राप्त होने वाले पेड़ पौधों के फल ,बीज, पत्री ,तने आदि का प्रयोग कर विशिष्ट कार्यों के सार्थक रूप से पूर्ण होने की संभावना को बढ़ाया जाता है, उसी प्रकार काली गुंजा का प्रयोग तांत्रिक क्रियाओं में बहुत ही व्यापक रूप से प्रयोग में लाया जाता है। इसका प्रयोग विभिन्न प्रकार की क्रियाओं में किया जाता है, जिसके माध्यम से सांसारिक- सुखों को प्राप्त किया जा सकता है, आइए जानते हैं, काली गुंजा के कुछ लाभ-

1. यदि कोई कन्या चाहती है, कि उसे उत्तम वर की प्राप्ति हो या जिस किसी से भी उसका विवाह हो वह उसे पग पग पर अपना सहयोग दें, अपना प्रगाढ़ प्रेम से उसका जीवन सवार दे या ऐसी कन्या जो चाहती है, कि उसका प्रेम विवाह हो अपने प्रेमी के ह्रदय ऊपर अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहती है, या ऐसी महिलाएं जो किसी भी तरह के वैवाहिक जीवन में कलह, क्लेश को देख रही है या उन पर मानसिक वेदना है, बहुत अधिक नकारात्मक रूप से प्रभावी हैl पति के प्रेम के अभाव के कारण वैवाहिक जीवन या दंपति जीवन कई प्रकार से दुखों से युक्त है, ऐसी स्थिति में उन्हें काली गुंजा का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।

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इससे आप जिस भी पुरुष को आकर्षित करना चाहती है, आप कर सकती है, अपने जीवनसाथी को सही रास्ते पर लाना चाहती है, तो वह भी आप इसके माध्यम से कर सकती है lउसके लिए आपको काली गुंजा से बने हुए माला को लेकर उक्त व्यक्ति के नाम को लेकर ll ॐ ह्रीं श्रीं श्रीं मम अमुक वश्यम कुरु कुरु स्वाहाll आपको रात्रि में 10:00 बजे से लेकर के 12:00 के बीच में जाप करना है, आप चाहे तो इस मंत्र का जाप ब्रह्म मुहूर्त में भी कर सकते हैंl( आमुख की जगह आप अपने प्रेमी का नाम ले सकते हैं, या अपने पति का नाम ले सकते हैं।

यह प्रयोग पुरुषों के द्वारा भी किया जाए तब भी यह सार्थक परिणाम देता है, ऐसे में पुरुष वर्ग के लिए अमुक के स्थान पर अपनी प्रेमिका का नाम लेना आवश्यक होता है, तथा जो पति अपनी पत्नी को प्रगाढ़ प्रेम की जाल में सदैव के लिए अपना बनाना चाहते हैं, उनके लिए अमुक के स्थान पर अपनी पत्नी के नाम का प्रयोग करना चाहिएl किंतु किसी भी अवस्था में इस बात को ध्यान रखें कि इस क्रिया का दुरुपयोग आपके लिए विध्वंसक सिद्ध हो सकता है। प्रकृति के नियमों के विरुद्ध जाना आपके लिए अहितकर हो सकता है, इसलिए सोच समझकर ही इसका प्रयोग करें किसी भी रूप में किसी भी तरह के कुकृत्य मनोरथ कार्य के कारण आप को और अधिक क्षत-विक्षत कर सकती हैl)

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2.काली गुंजा को लेकर महालक्ष्मी के मंत्रों का जाप कर उसे यदि धन की तिजोरी में रखा जाए या अपने भंडार गृह में रखा जाए, तो व्यक्ति के जीवन में कभी भी ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती है, जब वह ऋण जैसी परिस्थिति में नहीं पता है, उसके जीवन में कभी भी धन को लेकर किसी भी तरह का अभाव देखने को नहीं मिलता हैl आय के सदा स्रोत बने रहते हैं, जिसके कारण आर्थिक संपदा कई प्रकार के सुख संसाधनों से उसका जीवन पूर्ण रहता है।

3.काली गुंजा का प्रयोग बुरी शक्तियों से बचने के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है, ऐसे लोग जो बहुत अधिक जल्दी किसी भी नकारात्मक चीज से प्रभावित हो जाते हैं, उन्हें काली गुंजा को बजरंगबली के मंत्रों से अभिमंत्रित कर चांदी के ताबीज में धारण करना चाहिए, इससे उनकी सुरक्षा भी होती है, तथा उनके कई कार्य भी सार्थक रूप से संपन्न होते हैं।

4.काली गुंजा का प्रयोग कार्य क्षेत्र में कई उपलब्धियों को प्राप्त करने में आपके लिए अप्रतिम रूप से सहायक सिद्ध हो सकता है, इसके लिए आपको कार्यस्थल पर अभिमंत्रित की हुई माला को धारण करके जाना चाहिए, इसके प्रभाव से आपके शहर में हो या आप के वरिष्ठ अधिकारी हो या आपके समतुल्य व्यक्ति या आपकी विपरीत कार्य करने वाले लोग सभी आपके प्रति अच्छे भाव को दर्शाते हैं, कोई भी आपके लिए प्रतिकूल परिस्थिति बनाने में सफल नहीं हो पाता हैl यदि कोई इस प्रकार की क्रिया करता भी है, तो उसे विफलता के अलावा कोई भी चीज हाथ नहीं लगती है, उल्टा उसके बुरे दिन शुरू हो जाते हैं, जब कभी आप पर किसी तरह की मुसीबत आने वाली होती है, तब इसके रंग में भी बदलाव देखने को मिलते हैं, जिससे आप आने वाली परिस्थिति के लिए पूर्ण रूप से तैयार हो जाए, अपने आप में यह दिव्य मोती कई सद्गुणों से युक्त होती है।

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