ओरिजिनल डायमंड को कैसे पहचाने- Original Daymand Ko Kaise Pahchane

ओरिजिनल डायमंड को कैसे पहचाने- Original Daymand Ko Kaise Pahchane

 

ओरिजिनल डायमंड को कैसे पहचाने

ओरिजिनल डायमंड को कैसे पहचाने- वैदिक ज्योतिष शास्त्र में व्यवहारिक जीवन में आने वाली समस्याओं के निदान के लिए अनेक प्रकार के उपाय प्रदान किए गए हैंl उन्हें विभिन्न प्रकार के उपायों में से एक सबसे प्रभावी एवं चमत्कारिक उपाय होता है, रत्न धारण करनाl रत्नों में ऐसे अविश्वसनीय शक्तियां विद्यमान होती है, जो जातक के जीवन के किसी भी परिपेक्ष्य के उपलक्ष में इसे धारण किया जा सकता हैl कई रत्न ऐसे भी होते हैं, जिनकी ऊर्जा पहले से ही बहुत अधिक जागृत होती है, ऐसे में कोई व्यक्ति यदि उस रत्न को धारण करता है तो उसके जीवन पर वह रत्न तीव्र गति से अपना या तो सकारात्मक प्रभाव दिखाता है, या तो नकारात्मक प्रभाव दिखाता है, किंतु केवल किसी भी रत्न को ऐसे ही किसी भी मात्रा में धारण कर लेना कहीं से भी उचित नहीं है, जिस प्रकार हमारे द्वारा एक पर्याप्त मात्रा में भोजन लिया जाता है, जिससे हमारे शरीर को इंधन प्राप्त हो सके।

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हम दैनिक कार्यों को अच्छे से पूर्ण कर सकेंl उसी प्रकार इन रत्नों को भी उचित वजन में धारण करना बहुत आवश्यक होता है lहर किसी की आवश्यकता अनुसार रत्नों का वजन जन्म पत्रिका के आधार पर भिन्न-भिन्न हो सकता है। अनेक रत्न अनेक जगहों से प्राप्त होते हैं, तथा दुर्गम इलाकों से इनका खनन होता हैl कई रत्न पानी से, तो कई रत्न पेड़ से तो , कई रत्न पृथ्वी मां के गोद से प्राप्त होते है, इसलिए रत्नों का मूल्य बहुत अधिक होता है, जिसकी वजह से पैसे की कमी के वजह से कई लोग रत्नों को धारण करने में सक्षम होते हैं, ऐसी स्थिति में प्रकृति द्वारा रत्नों की उपरत्न भी प्रदान किए गए हैं। भिन्न-भिन्न रत्नों के भिन्न-भिन्न उपरत्न भी होते हैं।

रत्नों एवं उप रत्नों में केवल एक ही फर्क होता है lरत्नों की शक्तियां उपरत्न ओं की तुलना में काफी अधिक होती हैl यही कारण है, कि रत्नों का उपयोग कई वर्षों तक लगातार किया जा सकता है, जबकि उपरत्न ऊर्जा शक्ति सीमित होती है, जिसकी वजह से केवल विशिष्ट समय तक यह अपना प्रभाव दिखाते हैंl उसके बाद उपरत्न की तरह से निष्क्रिय हो जाते हैं, जिस प्रकार व्यक्तियों के गुण चेहरे व्यक्तित्व अलग-अलग होते हैंl उसी प्रकार रत्नों के भी गुण अलग-अलग होते हैं, तथा हर किसी को सारे रत्न नहीं धाड़ता है, इसलिए रत्नों का चयन किसी विद्वान ज्योतिषी की सलाह पर ही करना चाहिए।

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किसी भी परिस्थिति में केवल सुनी सुनाई बातों में आकर रत्नों का उपयोग करने से जितना हो सके। उतना अधिक परहेज करें क्योंकि इन रत्नों में विध्वंसक शक्तियां भी विद्वान होती है, जो आपके जीवन को विक्षिप्त बनाने की क्षमता रखती है, इसलिए अपने जन्मपत्रिका में अवस्थित ग्रहों की स्थिति को देखते हुए ही उचित रत्न धारण करेंl रत्नों को धारण करने से पूर्व उनकी जांच परख करना बहुत आवश्यक है, क्योंकि किसी भी रत्न की कृपा प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है, कि उसके अंदर कम से कम न्यूनतम दक्षता हो, जिससे हमारी समस्याओं का निदान हो सके या जिस भी इच्छा को पूर्ण करने के लिए हम रत्न धारण करना चाहते हैं, उसका परिणाम हमें पूर्ण रूप से प्राप्त हो सकेl रत्नों की खूबियां होती है, कि वह जिस ग्रह से संबंधित होते हैंl उस ग्रह की ऊर्जा शक्ति को अवशोषित करते हैं, तथा उनसे हमारी त्वचा शक्तियों को अवशोषित करती है, एवं इस ऊर्जा को धारक के शरीर में प्रवाहित करती हैं, जिससे उसके व्यक्तित्व उसके आचरण उसके विभिन्न आयामों में बदलाव देखने को मिलता है।

हीरा भी एक प्रकार का रत्न है, जिसे कार्बन का सबसे शुद्ध रूप माना जाता हैl रतन शास्त्र में हीरा को रत्नों का राजा कहा जाता हैl यह रत्न भारत के भी कुछ हिस्सों से प्राप्त होता है, किंतु इसका खनन करना इतना आसान कार्य नहीं है, इसलिए विश्व के कुछ विशिष्ट स्थानों से ही इस रत्न की प्राप्ति होती है, जैसे- दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील तथा रूस जैसे देशों में यह रत्न पाया जाता हैl दक्षिण अफ्रीका को हीरा का सबसे बड़ा उत्पादक देश माना जाता हैl जटिल प्रक्रियाओं से गुजर कर हीरे का निर्माण होता है। अत्यधिक ताप एवं अत्यधिक दाब के कारण पृथ्वी के भूगर्भ के कुछ किलोमीटर के अंदर मौजूद कार्बन परिवर्तित होकर हीरा रत्न का स्वरूप ले लेता है।

हीरे की परख करने के लिए निम्नलिखित मापदंड अपनाए जा सकते हैं-

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1. असली हीरा की यह खासियत होती है, कि वह नीले वर्ण वाली रोशनी को उत्सर्जित करता है। चमकते वक्त इसकी आभा नीले वर्ण की प्रतीत होती है lयदि इसके अलावा कोई और वर्ण दिखाई पड़ता है, तो इसका तात्पर्य है, कि वह एक नकली हीरा है।

2. असली हीरा को जब जल में डाला जाता है, तब वह पूरी तरह से पानी में डूब जाता है, क्योंकि असली हीरे का निर्माण जटिल परिस्थितियों में होता है, जिसकी वजह से उसका घनत्व भी बहुत अधिक होता हैl यही कारण है, कि जब असली हीरा को किसी भी जल तत्व में डाला जाता है, तो वह डूब जाता है, जबकि कृत्रिम रूप से निर्मित रत्न में यह गुण नहीं रहता है।

3. मुंह से निकलने वाले भाप को जब इसकी सतह पर फूख मारा जाता है, तब यह भाप जमता नहीं है, बल्कि सूक्ष्म जल की बूंदें दिखाई पड़ती हैl इसका अर्थ है, कि यह एक असली हीरा है, यह एक असली हीरे की पहचान होती है, यदि यह सतह पर जम जाए तो इसका अर्थ है, कि वह एक नकली हीरा है।

4. हीरा प्रकाश का सबसे अच्छा परावर्तक माना जाता है, इसलिए जब इससे हम किसी भी अक्षर को देखकर पढ़ने का प्रयास करते हैं, तब वह हमें कुछ भी दिखाई नहीं पड़ता है, जबकि यदि किसी भी प्रकार की लकीर दिखाई पड़े तो इसका अर्थ है, कि वह एक नकली हीरा है।

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