नीलम रत्न के प्रकार – Neelam Ratna Ke Prakar

नीलम रत्न के प्रकार – Neelam Ratna Ke Prakar

 

नीलम रत्न के प्रकार – Neelam Ratna Ke

 Prakar

नीलम रत्न के प्रकार -आज का हमारा विषय है, आज हम नीलम रत्न के विभिन्न प्रकारों के बारे में चर्चा करेंगे।

नीलम रत्न (neelam ratna ke kitne prakar hote hai) जो कि देखने में ही नीला वर्ण का होता है, बिल्कुल मोर के पंख के समान नीला, इसका रंग अपराजिता पुष्प के समान भी हो सकता हैl यह एक बहुमूल्य रत्न है, जोकि शनि ग्रह से पीड़ित वर्ग व्यक्तियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैl सृष्टि का यही नियम है, कि जिस चीज का उदय होता है, उसका अस्त भी होना तय है, जिसका जन्म हुआ है, उसका मृत्यु भी उसी क्षण तय हो जाता है, कि कब वह इस धरती की गोद में सोएगा, हर चीज प्रकृति के नियम के अनुसार ही चल रही है, तथा प्रकृति के द्वारा बनाए गए नियमों का कोई तोड़ किसी के पास भी नहीं है, वह जैसे चाहेगी हमें वैसे नचा सकती है। प्रकृति की हमें विभिन्न प्रकार की समस्याएं देती है, तथा वही हमें समाधान भी प्रदान करती है।

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प्रकृति ने सारे जीव जंतु पेड़ पौधे पृथ्वी उपग्रह ग्रह तारे सौर मंडल आदि का निर्माण किया है, तथा हमें विभिन्न प्रकार के संसाधनों को प्रदान किया है, जिसकी वजह से हम अपने जीवन को सुगम एवं सुंदर बना सके किंतु यदि हमारे जीवन में केवल सुख सुविधाएं ही आती रहेंगी एवं केवल हंसी खुशी का ही माहौल रहेगा तो ऐसे में हम गम क्या होता है, इस पहलू से बिल्कुल भी अनजान रह जाएंगे इसलिए प्रकृति ने हमारे जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए सुख और दुख दोनों का निर्माण किया जैसे दिन और रात ठीक उसी प्रकार यह भी एक ही सिक्के का दो पहलू हैl परिवर्तन ही संसार का नियम है, और इस नियम से कोई भी जीव अछूता नहीं है, इसलिए प्रकृति के द्वारा रचे गए नौ ग्रह तथा दो उपग्रहों का हमारे जीवन में समय-समय पर गोचर होता रहता है, तथा इनका प्रभाव हमारे जीवन पर सकारात्मक तथा नकारात्मक दोनों देखने को मिलता रहता है, किंतु सबसे जटिल एवं विस्मय ग्रह है, शनि ग्रहl जो नवग्रह में से दूसरा सबसे बड़ा ग्रह होता है।

इस ग्रह की प्रवृत्ति समझना थोड़ा कठिन है, क्योंकि यह ग्रह ना किसी से मित्रता रखता है, ना ही शत्रुता रखता है। इसलिए लोगों के बीच इस ग्रह को लेकर बहुत सी अवधारणाएं फैली हुई है, किंतु सबसे अधिक अवधारणा लोगों में यह है, कि शनि ग्रह एक पापी, क्रूर मारक ,दुख, पीड़ा ,कष्ट बीमारी आदि को देने वाला ग्रह है, ऐसा लोगों का मानना है, कि इस ग्रह की छाया भी यदि किसी पर पड़ जाए तो तत्क्षण उसका विनाश संभव है, लेकिन यह सब केवल भ्रांतियां है, शनि ग्रह असल में सृष्टि के द्वारा रचा गया ऐसा ग्रह है, जिसे पृथ्वी पर संतुलन बनाए रखने के लिए रचा गया है, इसलिए इसका स्वभाव थोड़ा कड़क होता है, यह कैसा फल देगा इस बात का संदर्भ हमारे कर्मों से है, हमारे कर्म ही निर्धारित करेंगे कि शनि ग्रह की हम पर कृपा दृष्टि बरसेगी या यह ग्रह हमें बहुत सी परेशानियां देने वाला है।

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नीलम रत्न ऐसा रत्न है, जो जातक को शनि ग्रह के नकारात्मक प्रभाव से बचाता है, तथा उसकी स्थिति को अनुकूल भी बना सकता है। नीलम रत्न (neelam ratna ke kitne prakar hai) एक ऐसा रत्न है, जो हर किसी को नहीं पड़ता है, किसी विद्वान पंडित के द्वारा अपनी कुंडली की अच्छी तरह जांच परख करवाने के बाद ही हमें नीलम रत्न धारण करना चाहिए अन्यथा इसके परिणाम भयंकर भी हो सकते हैंl भारत में सबसे उत्कृष्ट नीलम रत्न ऐसा माना जाता है, कि जम्मू कश्मीर के खदानों से प्राप्त होता है, किंतु इसके प्राप्त होने की संभावना बहुत ही कम है, और यदि मिल भी जाए तो यह आम लोगों के बहुत से बहुत दूर होता है, क्योंकि इस खदान से प्राप्त उत्कृष्ट नीलम का मूल्य बहुत अधिक होता है, जिसे खरीद पाना हर किसी के बस की बात नहीं है, इसलिए बहुत से देशों से नीलम रत्न आयात किए जाते हैं, जैसे बर्मा श्रीलंका रूस अमेरिका आदि किंतु सबसे विख्यात नीलम रत्न जम्मू कश्मीर और श्रीलंका के नीलम रत्न है।

 नीलम रत्न (neelam ratna ke prakar kya hai) के शुद्धता तथा श्रेष्ठता को जांचने के लिए विभिन्न पैमाने है, जैसे – नीलम रत्न का घनत्व बहुत अधिक होता है।इसी वजह से देखने में छोटा किंतु वजन में नकली नीलम रत्न से कहीं अधिक होता है, इसके अंदर टाइटेनियम क्रोमियम तांबा तथा मैग्निशियम जैसे तत्व की प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है, वैसे तो नीला नीलम बहुत ही ज्यादा विश्वव्यापी प्रसिद्ध है, किंतु नीलम के विभिन्न प्रकार और भी है, जैसे गुलाबी नीलम, पद्परदशा नीलम, तारा नीलम, सप्तरंगी नीलम।

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1. गुलाबी नीलम- इस नीलम का प्रयोग मुख्यत विभिन्न प्रकार के आभूषणों को बनाने में किया जाता है, तथा इसका रंग जितना गाढ़ा होगा वह उतना अधिक मूल्यवान होगा, इसका रंग गुलाबी क्रोमियम की मात्रा के वजह से होता है।

2. तारा नीलम- इस नीलम (neelam ratna ke prakar bataiye) की संरचना ऐसी संगठित होती है, की जब आप इसे ध्यान से देखेंगे तो विभिन्न प्रकार की रेखाएं मिलकर एक तारे का स्वरूप बनाती है, तथा इससे ऐसे ही प्रकाश निकलता है, जिसकी वजह से इस इसे तारा नीलम के नाम से जाना जाता हैl मुख्यता इसका संयोजन टाइटेनियम ऑक्साइड से बना हुआ होता है, और इसका मूल्य इसके वजन तथा तारे का स्पष्ट स्वरूप पर निर्भर करता है।

3. सप्तरंगी नीलम- यह एक अत्यंत ही दुर्लभ किस्म की नीलम है, जो प्रायः थाईलैंड ,तंजानिया सहित विभिन्न स्थानों पर पाया जाता है, इसके रंग बदलने का मुख्य कारण है, इसका संयोजन है, जोकि क्रोमियम और वैनेडियम की वजह से होता है।

4. पद्परदशा नीलम– (neelam ratna ki jankari) यह एक अति दुर्लभ नीलम है, जिसका रंग मुख्यत गुलाबी या नारंगी हो सकता है, तथा इसकी कीमत प्रायः नीली नीलम से अधिक होती है, वैसे तो बहुत सी जगहों पर इसके खान उपलब्ध है, किंतु श्रीलंका ,वियतनाम ,पूर्वी अफ्रीका के नीलम काफी प्रसिद्ध है।

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कृत्रिम रूप से बनाए जाने वाले नीलम (neelam ratna ke prakar in hindi) के आपको विभिन्न प्रकार के रंगो वाले नीलम प्राप्त हो सकते हैं, इनका रंग लाल, पीला, हरा ,बैंगनी कुछ भी हो सकता है, किंतु इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि कृतिम नीलम केवल साज-सज्जा या विभिन्न प्रकार के आभूषणों को आकृष्ट बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है, किंतु ज्योतिष शास्त्रों में इस प्रकार के रत्नों का उपयोग वर्जित है, क्योंकि इनमें कुदरती तौर पर वह सारी शक्तियां विद्यमान नहीं होती है, जो कि प्राकृतिक रूप से एक असली रत्न में होती है, इसलिए इसे शनि ग्रह से संबंधित समस्याओं के लिए उपयोग में नहीं लाया जा सकता है।

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