नीली पत्थर के बारे में जानकारी – Nili Pathar Ke Baare Me Jankari

नीली पत्थर के बारे में जानकारी – Nili Pathar Ke Baare Me Jankari

 

नीली पत्थर के बारे में जानकारी

नीली पत्थर के बारे में जानकारी- शनि ग्रह जिन्हें संसार का दंडाधिकारी एवं न्यायधीश होने का गौरव प्राप्त है, स्वयं भगवान शिव शंभू के द्वारा इन्हें यह वरदान प्राप्त हैl इनके न्याय से शायद ही कोई व्यक्ति बच पाए जन्म जन्मांतर तक प्रत्येक जीव को उसके बुरे कर्मों का फल के साथ-साथ अच्छे कर्मों का फल इनके द्वारा प्रदान किया जाता है, किंतु ज्योतिष शास्त्र में इन्हें सबसे क्रूर, सख्त एवं प्रभावशाली ग्रह की उपाधि से अलंकृत किया गया हैl नीलम रत्न शनि ग्रह को निरूपित करने वाला एक रत्न होता है, तथा नीलम रत्न का सबसे उपयुक्त उपरत्न नीली होता है, जिसका प्रयोग नीलम रत्न के स्थान पर किया जाता हैl इसे इसके नीले रंग होने की वजह से इसे नीलीया या लीलीया के नाम से जाना जाता है।

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असली नीली उपरत्न को जब देखा जाता है, तब इसमें नीली बैंगनी रोशनी दिखाई देती हैl इसके साथ-साथ जब इसे उलट पलट कर देखते हैं, तब इसकी छवि काली भी नजर आती हैl अनेक रेशे भी इसके अंदर दिखाई पड़ते हैं, जो कि इसके सत्यता का प्रमाण होता है, कि यह प्राकृतिक रूप से निर्मित है। इसकी कीमत भी बहुत अधिक होती है, किंतु नीलम रत्न से कम कीमत होने की वजह से लोगों के द्वारा इसे धारण किया जाता है, या इसे धारण करने के लोगों के और भी कोई व्यक्तिगत कारण हो सकता है।

शनि ग्रह के बारे में बहुत सी भ्रामक बातें भले ही व्यापक जनसंख्या में शैली हो किंतु शनि ग्रह का वास्तविक आचरण होता है- निरंतर प्रयास करना! अर्थात अथक प्रयास ही आपको आपके भाग्य को बदलने की क्षमता रखते हैंl यदि आप रास्ते में आने वाले विघ्न को देख कर बैठ जाएंगे तो कभी भी आप अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाएंगे lइसके साथ- साथ शनि ग्रह के द्वारा यह भी जांचा परखा जाता है, कि किसी व्यक्ति को यदि कोई विशिष्ट उपाधि प्रदान की गई तो वह उसके लायक है, या नहीं है, इसलिए उनके द्वारा अनेक परीक्षाएं अनेक बाधाएं दी जाती है, और यदि उसमें कोई व्यक्ति पूरी तरह से सफल हुआ lउसके धैर्य की परीक्षा शनिदेव बहुत ही सख्त तरीके से लेते हैं, और यदि उसमें वह सफल हुआ तो उसे लाभ भी अप्रतिम रूप से प्रदान करते हैं lइन्हें रहस्यमई विद्याओं का ज्ञाता माना जाता है।

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मोक्ष का कारक भी शनि ग्रह से संबंधित होता है, तथा गंभीरता का कारक भी शनिदेव से ही संबंधित होता हैl यदि इनकी कुदृष्टि किसी जातक के ऊपर पड़ जाए तो उसे जो जेल यात्रा करनी पड़ेगी। उसका कारक भी शनिदेव रही है, भयंकर बीमारी से मृत्यु या काल के मुंह में समा जाना भी शनिदेव की कुदृष्टि के कारण ही होता हैl यदि किसी को अत्यधिक अपमान प्राप्त होता हैl उसका कारक भी शनिदेव से ही संबंधित होता हैl जन्म जन्मांतर तक इनके न्याय के डंडे से कोई नहीं बच पाता है, सूक्ष्म से सूक्ष्म गलत कर्म हो या सूक्ष्म से सूक्ष्म अच्छे कर्म सभी का फल इनके द्वारा अनेक जन्मों तक दिया जाता है।

यह एक कर्म प्रधान देवता है, तथा इनकी खासियत होती है, कि जो हमारे भाग्य में नहीं लिखा हुआ होता है, फिर भी यदि हम अपनी कठिन प्रयास कठिन मेहनत के द्वारा प्राप्त कर सकते हैं, क्योंकि जो लोग कठिन प्रयास करते हैं, जो लोग मेहनती होते हैंl उन पर सदा ही शनिदेव की कृपा दृष्टि रहती है, तथा जो चीज उनके भाग्य में नहीं रहता वह भी उन्हें इनके कृपा से प्राप्त होता है lशायद यही कारण है, कि हमारे हस्तरेखा में भी रेखाओं से पहले उंगलियां है, क्योंकि कर्म किसी का भाग्य बदलने की क्षमता रखता हैl जीविकोपार्जन का कारक भी शनिदेव से संबंधित होता है lयही कारण है, कि इनकी स्थिति किसी भी जातक के जीवन में उसकी काम धंधे की स्थिरता काम धंधे की गति को निरूपित करती है।

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शनि ग्रह जिन्हें अनुशासन बहुत प्रिय है, तथा आलस्य एवं सुस्ती से ग्रसित व्यक्तियों से शनिदेव बहुत अधिक क्रोधित होते हैं। नीली उपरत्न कि यह खासियत होती है, कि जिस भी उपयोगकर्ता के द्वारा इसे धारण किया जाता है। उसके जीवन से आलस्य एवं सुस्ती कोसों दूर भागता है, तथा जीवन में जो अनुशासनहीनता अब तक चली आ रही परेशानियों का सबसे बड़ा कारणों में से एक होता हैl उसे यह पूरी तरह से दूर करता है, तथा उपयोगकर्ता का जीवन एक अनुशासन युक्त शैली में परिवर्तित होता है। इस उपरत्न की खासियत होती है, कि हर तरह की नकारात्मक ऊर्जा को यह नष्ट करने की क्षमता होती है -चाहे यह नकारात्मक ऊर्जा आपके मानसिक चिंतन का अभिन्न अंग क्यों ना हो, फिर भी इसे यह पूरी तरह से नष्ट करने की क्षमता रखता है।

सूक्ष्म से सूक्ष्म सकारात्मक तौर पर ऊर्जा का संचार बढ़ाता है, जिससे जातक के चारों ओर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है lइस रत्न का प्रभाव इतना अधिक होता है, कि लोगों के द्वेष, घृणा, ईर्ष्या या नकारात्मक विचार भी जातक का कुछ भी बिगाड़ नहीं पाते हैंl जातक के प्रत्यक्ष शत्रु हो या अप्रत्यक्ष शत्रु सभी अपने ही परेशानियों में उलझ कर रह जाते हैंl यह रत्न जातक को दूरदर्शी बनाता है, जिससे जातक सही निर्णय लेने में सक्षम होता है lछोटे बच्चों के द्वारा इस रत्न को इसलिए धारण कराया जाता है, ताकि ऊपरी बाधा संबंधित चीजें उस पर अपना असर ना दिखा सके एवं यह रत्न एक संरक्षक की तरह बच्चे को सुरक्षा प्रदान करें।

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यह रत्न उपयोगकर्ता के जीवन शैली में बहुत व्यापक तौर पर परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है, जिस भी जातक के ऊपर शनिदेव की कृपा बरस जाती हैl उसका भाग्य के सारे दरवाजे खुल जाते हैंl यह रत्न जातक के भाग्य को प्रबल बनाता हैl उसे भाग्यवान बनाता हैl इसे धारण करने के पश्चात जातक को केवल कर्म प्रधान चीजों में ही नहीं बल्कि भाग्य प्रदान चीजों में भी बहुत सफलता प्राप्त होती है। उपयोगकर्ता की भाग्य की कुंजी शनि महाराज के स्वयं हाथों में होती है, जिसे शनि महाराज उत्कृष्टता पूर्वक उपयोग करते हैंl यह उपरत्न जातक के अंदर डर भय या किसी भी तरह की हिचकिचाहट को दूर करता है, तथा जातक के आत्मविश्वास में वृद्धि करता है। यह जातक के आत्म बल में वृद्धि करता है, जातक के जीवन में सांसारिक सुखों की कमी नहीं रहती है।

सुख- समृद्धि का वास उसके घर में होता है, इसके साथ साथ दरिद्रता पैसे की तंगी जैसी चीजें कोसों दूर जातक के जीवन से चली जाती हैl यदि कभी इन सभी से संबंधित जातकों को परेशानियां भी आती है, तब भी यह विघ्न दीर्घ नहीं होते हैं, बहुत ही लघु अवधि के लिए अपना प्रभाव दिखाते हैं, जिससे जातक की स्थिति में परिवर्तन नहीं आता है, तथा इन सभी परेशानियों से उबरने की क्षमता यह रत्न जातक को प्रदान करता है lइसके साथ-साथ जातक को अनेक शुभ अवसर प्राप्त होते हैं, जिनसे जातक को अनेक विभिन्न प्रकार के लाभ प्राप्त हो सके, मानसिक स्थिरता का सबसे बड़ा कारक शनि ग्रह को माना जाता है, इसके साथ-साथ किसी के जीवन में स्थायित्व का बोध का कारक भी शनि ग्रह से संबंधित होता है। नीली उपरत्न को धारण करने से जातक को मानसिक स्थिरता का आभास होता हैl उसका चित पूरी तरह से शांत होता है, तथा उसके जीवन में स्थिरता आती है, जिसकी कामना लिए वह यह रत्न धारण करता है lआध्यात्मिक गुणों से युक्त यह रत्न और भी बहुत चमत्कारिक लाभ जातकों को प्रदान करता है।

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