एक मुखी रुद्राक्ष कैसा होता है – Yek Mukhi Rudraksha Kaisa Hota Hai

एक मुखी रुद्राक्ष कैसा होता है – Yek Mukhi Rudraksha Kaisa Hota Hai

 

एक मुखी रुद्राक्ष कैसा होता है?

एक मुखी रुद्राक्ष कैसा होता है??? एक मुखी रुद्राक्ष स्वयं भगवान शिव शंभू का अंग माना जाता है, तथा जितने भी तरह के रुद्राक्ष पाए जाते हैंl उन सभी में से सबसे अधिक विरल रुद्राक्ष एक मुखी रुद्राक्ष होता है, जिसे हिमालय के दुर्गम इलाकों से प्राप्त किया जाता है, जहां पहुंच पाना हर किसी व्यक्ति विशेष के लिए संभव नहीं है, लोग अपनी जान तक की बाजी लगाकर इस विशिष्ट रुद्राक्ष को प्राप्त करते हैंl यही कारण है, कि यह रुद्राक्ष बहुत कम मात्रा में उपलब्ध होता हैl एक मुखी रुद्राक्ष देखने में अर्ध चंद्र के समान दिखाई पड़ता है। इसका आकार काजू के समान भी हो सकता है। भारत के कुछ क्षेत्रों से एक मुखी रुद्राक्ष प्राप्त होता हैl इसके साथ ही भारत के पड़ोसी देश नेपाल ,इंडोनेशिया ,म्यानमार जैसे देशों से भी एक मुखी रुद्राक्ष की प्राप्ति होती है।

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आध्यात्मिक दृष्टिकोण से एक मुखी रुद्राक्ष का बहुत अधिक महत्व माना जाता है, ऐसा माना जाता है, कि इसे धारण करने वाले व्यक्ति पूरी तरह से केंद्रित हो जाते हैं, तथा अपना जुड़ाव सकारात्मक ऊर्जा के साथ बहुत गहरा बातें हैं। यह सबसे उत्तम मार्ग माना जाता है lईश्वर के साथ जुड़ने के लिए इस में व्याप्त ऊर्जा जातक को अध्यात्म रूप से बहुत अधिक प्रखर बनाने का कार्य करता है। इसके साथ ही मोक्ष प्राप्ति के सारे द्वार खोल देता है। अध्यात्म के दृष्टिकोण से एक मुखी रुद्राक्ष अनेक पारलौकिक शक्तियों का स्वामी होता है, यही कारण है, कि जितने भी साधु संत होते हैं। अपने ऊर्जा शक्ति को स्थिर रखने के लिए एक मुखी रुद्राक्ष का प्रयोग करते हैं। यह न केवल उनके विभिन्न पहलुओं पर व्यापक रूप से प्रभावित करता है, बल्कि अनेक प्रकार की नकारात्मक चीजों से उनकी ध्यान साधना में जो रुकावटें होती है, या जो भी बाधा उत्पन्न होती है, यह उन सभी का निराकरण करने में सक्षम होता है।

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ऐसे लोग जो आवश्यकता से अधिक संवेदनशील होते हैं, तथा किसी भी प्रकार की ऊर्जा उनके ऊपर बहुत जल्दी अपना प्रभाव उनके ऊपर दिखाने लगती है, जिसकी वजह से उनके आचरण एवं व्यवहार में अनेक प्रकार के बदलाव देखने को मिलने लगते हैं, अपने मानसिक ऊर्जा हो या शारीरिक ऊर्जा को किसी को भी संतुलन में नहीं रख पाते हैं, तथा बहुत जल्द ही किसी भी प्रकार के चीजों के प्रभाव में आ जाते हैं, ऐसे लोगों के द्वारा एक मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण किया जाना चाहिए इससे उनके आभामंडल में जो भी दूषित प्रभाव जिस भी कारण से उत्पन्न हुआ है, या नकारात्मक लोगों के संपर्क में आने से उनके नकारात्मक विचारों का जो प्रभाव आपके मन मस्तिष्क एवं में कंपन उत्पन्न कर देता है, आपके विचारों में भिन्नता उत्पन्न कर देता है, आपके कर्मों में विमुख से उत्पन्न कर देता है, ऐसी सभी प्रकार की त्रुटियों से एक मुखी रुद्राक्ष जातक को संरक्षित करने में सफल रहता है।

जहां किसी भी प्रकार की सुरक्षात्मक शैली कार्य नहीं करती है, वहां एक मुखी रुद्राक्ष दृष्टांत रूप में कार्य करता है। प्राचीन काल में योगिक क्रियाओं में लीन रहने वाले साधु संतों के द्वारा एक मुखी रुद्राक्ष का प्रयोग जल की पवित्रता को जांचने में भी किया जाता था तथा यह कई प्रकार के भूमि में व्याप्त नकारात्मक व सकारात्मक ऊर्जा के संचरण को भी पहचानने में काफी सिद्ध होता है, इसलिए ऐसे ऋषि मुनि जो सदा एक यात्रा पर रहते हैं, जो सदा एक स्थान से दूसरे स्थान पर विचरण करते रहते हैं, ऐसे में उनके द्वारा अपनी ऊर्जा शक्ति को सही स्तर पर रखने के लिए एक मुखी रुद्राक्ष का उपयोग किया जाता था, जिससे उनके मन मस्तिष्क एवं शरीर में सही सामंजस्य बना रहे तथा उनके ऊपर किसी भी तरह के पराग्रही ऊर्जा का प्रभाव बिल्कुल भी ना करें और प्रभु वंदन में किसी भी प्रकार का बाधा उत्पन्न ना हो सके तथा उनके अध्यात्म के विभिन्न आयामों में किसी भी प्रकार की व्याधि उनके मार्ग को विचलित ना कर सके।

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एक मुखी रुद्राक्ष का उपयोग करने से किसी भी व्यक्ति विशेष के ऊपर इसका बहुत अधिक व्यापक प्रभाव देखने को मिलता है। यह न केवल विद्युत चुंबकीय तत्व से परिपूर्ण होता है, बल्कि इसमें कई और ऐसे औषधीय गुण मौजूद होते हैं, जो किसी भी व्यक्ति विशेष को आंतरिक एवं बाहरी संरचना को रूपांतरित करने में बहुत अधिक मदद करता है lइसे धारण करने वाले जातकों को हृदय संबंधित विकास हो या रक्तचाप से संबंधित कोई बीमारी या किसी भी प्रकार के अंतः स्रावी ग्रंथियों से संबंधित कोई बीमारी इन सभी को यह पूरी तरह से नियंत्रण में रखता हैl इसे धारण करने से शरीर के विभिन्न अंगों में पारस्परिक सहयोग देखने को मिलता है, जिससे जातक को एक स्वस्थ एवं सुखी काया की प्राप्ति होती है, इसके साथ ही इसे धारण करने वाले जातक का मन बहुत ही शांत रहता है, इसे धारण करने वाले जातक का चित उत्तम रूप से शांत रहता है।

एक मुखी रुद्राक्ष का महत्व ज्योतिष शास्त्र में भी बहुत अधिक माना जाता है। एक मुखी रुद्राक्ष का संबंध सूर्य ग्रह से माना जाता है। सूर्य जो विभिन्न नौ ग्रहों में प्रधान ग्रह के रूप में जाना जाता है, जिन्हें नवग्रहों का राजा होने का गौरव प्राप्त है, जिनके बिना सृष्टि में जीवन का आधार संभव नहीं हैl सूर्य जीवात्मा के अधिष्ठाता है, जिन्हें पूरे ब्रह्मांड का पिता जिन्हें जगत पिता के रूप में भी जाना जाता है, तथा अग्नि तत्व को निरूपित करने वाले माने जाते हैं, इसलिए ऐसे जातक जिनकी जन्म पत्रिका में सूर्य की स्थिति अच्छी नहीं होती है, या दृष्ट अवस्था में रहते हैं, या किसी भी प्रकार से जातक के जीवन में सूर्य से संबंधित विभिन्न प्रकार के कार्य नहीं बन पाते हैं, तो ऐसी परिस्थिति में उसकी द्वारा एक मुखी रुद्राक्ष धारण करना काफी लाभदायक सिद्ध हो सकता है।

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इसे धारण करने से जातक के मान -सम्मान, प्रसिद्धि, ख्याति आदि में वृद्धि होती है, जिस प्रकार सूर्य राजा होकर अपनी नेतृत्व क्षमता से पूरे ब्रह्मांड को संचालित करते हैं, उसी प्रकार जातक में भी नेतृत्व क्षमता विद्यमान होती हैl उसकी कांति बहुत अधिक आकर्षण युक्त होती है, उसके व्यवहार में उसका साहस एवं पराक्रम झलकता है, सूर्य ग्रह को बल प्रदान करने के लिए लोगों के द्वारा एक मुखी रुद्राक्ष ज्योतिषीय उपाय के तौर पर धारण किया जा सकता है।

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