पांच मुखी रुद्राक्ष कैस धारण करें – Panch Mukhi Rudraksha Kaisen Dharn Karen

पांच मुखी रुद्राक्ष कैस धारण करें – Panch Mukhi Rudraksha Kaisen Dharn Karen

 

पांच मुखी रुद्राक्ष कैसे धारण करें- Panch

 Mukhi Rudraksha Kaisen Dharn Kare

1.पांच मुखी रुद्राक्ष (panch mukhi rudraksha kaise dharan karna chahiye) को सोना चांदी पंच धातु में धारण किया जा सकता हैl इसके अलावा आप चाहे तो रेशमिया सूती के लाल या पीले धागे में भी धारण कर सकते हैं।

2.देवों के गुरुदेव गुरु बृहस्पति की शक्तियां पंचमुखी रुद्राक्ष (panch mukhi rudraksha ko kaise pahna jata hai) में समाहित होती है, इसलिए पांच मुखी रुद्राक्ष को शुक्ल पक्ष के बृहस्पतिवार को भी धारण किया जा सकता है, या सोमवार के दिन भी इसे धारण करने का उत्तम दिन माना जाता हैl इसके अलावा पूर्णिमा या किसी विशिष्ट अतिथि को भी इसे विधिवत तरीके से धारण किया जा सकता हैl इसे धारण करने का सबसे सर्वोत्तम दिन महाशिवरात्रि के दिन माना जाता है।

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3. सर्वप्रथम स्नानादि से निवृत्त होकर 5 मुखी रुद्राक्ष (panch mukhi rudraksha ko kaise pahne) को पंचामृत तथा गंगाजल से शुद्ध करने के पश्चात उसे अपने पूजा गृह के अंदर किसी सफेद कपड़े के ऊपर या किसी रंग बिरंगे कपड़े के ऊपर जो पूरी तरह से स्वस्थ हो उस पर रख दें।

4. उस पर हल्दी या चंदन का लेप लगाएं तथा 51 या 108 बेलपत्र अर्पित करें पुष्प चढ़ाएं तथा गूगल लॉन्ग ब्रास से आरती उतारे lइसके साथ ही गाय का शुद्ध दीपक जलाएंl

5. उसके बाद भगवान भोलेनाथ से संबंधित कोई भी एक मंत्र जिन का उच्चारण आप शुद्ध तरीके से कर पा रहे हैंl वह अपने गुरु से ले या आप चाहे तो गुरु ग्रह से संबंधित मंत्र का भी जप कर सकते हैंl मंत्र का जाप हमेशा उपांशु होना चाहिए lइससे यह बहुत ही प्रभावित रूप से जागृत होता है मंत्रों की संख्या भी उचित होनी चाहिए lजितनी अधिक संख्या में मंत्र का जाप किया जाता हैl उसकी तरंगे उतनी अधिक मजबूत होती है इसलिए मंत्र को जाप करने समय आप अपनी वर्तनी एवं उसकी संख्या के ऊपर ध्यान अवश्य देंl अधिक से अधिक संख्या में उक्त मंत्र का जाप करें यदि आप किसी भी प्रकार से स्वयं मंत्र जप नहीं कर सकते हैं, तो ऐसी परिस्थिति में आप किसी विद्वान पंडित जी की भी सहायता ले सकते हैं तथा उनके द्वारा भी मंत्र जाप करवा सकते हैं, या आप अपने गुरु से भी मंत्र का जाप करवा सकते हैं एवं माला को अभिमंत्रित करवा सकते हैं।

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6. जप संख्या पूर्ण करने के बाद आप अभिमंत्रित की हुई माला को ले जाकर शिवलिंग से स्पर्श करवाकर तथा पंडित जी से आशीर्वाद लेकर उसे वही मंदिर में धारण कर सकते हैंl

7. माला धारण करने के पश्चात किसी को भोजन का दान अवश्य करें या किसी भी प्रकार से किसी लाचार व्यक्ति की सहायता अवश्य करेंl

8. पांच मुखी रुद्राक्ष गुरु की शक्तियों को निरूपित करता हैl अतः अपने घर के बड़े बुजुर्ग लोगों के लिए यदि संभव हो तो कुछ ना कुछ उपहार लेकर जाइए पीली मिठाइयां उन्हें अवश्य खिलाएं तथा उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें एवं अपने प्रगति के लिए उनका आशीर्वाद मांगे तथा अपनी गलतियों के लिए भी उनसे क्षमा याचना करेंl इससे आपके गुरु ग्रह की स्थिति दिनोंदिन मजबूत होगी तथा पांच मुखी रुद्राक्ष (panch mukhi rudraksha kaise pahanna chahiye) की माला भी बहुत ही उत्तम रूप से आपको प्रभाव प्रदान करेंगे समय के साथ इसकी शक्तियां दिनों दिन बढ़ती चली जाएंगी एवं आपको आने वाले समय में अनेक प्रकार के सकारात्मक लाभों की प्राप्ति होगी।

9. पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करके कभी भी किसी को कटु वचन वचन ना बोले अपने मन में किसी के प्रति किसी भी प्रकार का नकारात्मक विचार उत्पन्न होने ना दें या गलत प्रवृत्ति आने ना दें।

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10. पांच मुखी रुद्राक्ष (panch mukhi rudraksha ke labh) को धारण करके कभी भी श्मशान घाट जैसी भूमि पर नहीं जाना चाहिए क्योंकि रुद्राक्ष को धारण कर किसी भी तरह के वर्जित कार्य में सम्मिलित होने की मनाही हैl

11. पांच मुखी रुद्राक्ष को कभी भी काले धागे में धारण नहीं करना चाहिएl

12. पांच मुखी रुद्राक्ष (panch mukhi rudraksha ke fayde) करने के पश्चात कभी भी मांस मदिरा आदि का भक्षण नहीं करना चाहिएl इससे इसकी पवित्रता क्षय हो जाती हैl

13. कभी भी अपना धारण किया हुआ रुद्राक्ष किसी भी दूसरे व्यक्ति को धारण करने के लिए नहीं देना चाहिए या दूसरे के द्वारा धारण किया गया रुद्राक्ष को स्वयं धारण नहीं करना चाहिए क्योंकि रुद्राक्ष की यह खासियत होती है कि यह नकारात्मक चीजों को अवशोषित कर लेता है तथा नकारात्मक प्रवृत्ति को जल्द ही नष्ट करने लगता हैl ऐसे में दो प्रकार के तरंगों का मेल होने का खतरा रहता है lजिसके कारण व्यक्ति को यह तरंगे काफी व्यापक रूप से प्रभावित कर सकती है lजिसका परिणाम काफी विध्वंसक हो सकता है इसलिए ऐसी परिस्थिति से बचने के लिए कभी भी किसी के उपयोग में लाए हुए रुद्राक्ष का प्रयोग नहीं करना चाहिएl

14. सोने से पहले रुद्राक्ष को उतार देना चाहिए lऐसा माना जाता है कि सोते वक्त शरीर शुद्ध हो जाता हैl कई प्रकार की विचार जो हमारे नींद में आते हैं lउसके कारण हमारे शरीर में अशुद्धियां व्याप्त होने लगती है lऐसे में रुद्राक्ष यदि धारण करके हम सोते हैं तो उसकी पवित्रता पर बहुत असर आता है इसलिए इसे पहनकर सोने के बजाय आप चाहें तो अपने तकिए के नीचे रख कर सो सकते हैं एवं दूसरे दिन प्रातः काल उसे गंगाजल
से शुद्ध कर स्नानादि से निवृत्त होकर फिर से धारण कर सकते हैं।

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15. पांच मुखी रुद्राक्ष (panch mukhi rudraksha ki jankari) धारण करके कभी भी किसी के शव यात्रा में सम्मिलित नहीं होना चाहिएl यदि आप ऐसा करते हैं तो या फिर से उपयोग में करने लायक नहीं रह जाता हैl अतः रुद्राक्ष धारण करने के पश्चात कुछ चीजों पर ध्यान देना बहुत आवश्यक होता हैl ताकि इस की गरिमा को इसके उत्कृष्ट तत्व की प्रधानता बनी रहे एवं इसका लाभ आजीवन बिना किसी अवरोध के इस दिव्य मनका का लाभ प्राप्त होता रहेl

16. जिस घर में बच्चे का जन्म हुआ है, तथा उसके जब से संबंधित विभिन्न प्रकार के संस्कारों की संपन्नता नहीं हुई है, तो ऐसी स्थिति में उस घर में रुद्राक्ष पहन कर प्रवेश नहीं करना चाहिए या उस कमरे में जहां प्रसुति तथा नवजात बच्चा रह रहे, हो तथा जन्म से संबंधित संस्कार पूजन आदि यदि संपन्न नहीं हुए हैं तो वहां नहीं जाना चाहिए lअन्यथा इसकी अखंडता पर प्रभाव पड़ता हैl

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