पुखराज रत्न को सिद्ध कैसे करें – Pukhraj Ko Sidh Kaise Kare

पुखराज रत्न को सिद्ध कैसे करें – Pukhraj Ko Sidh Kaise Kare

 

 पुखराज रत्न को सिद्ध कैसे करें – 

पुखराज रत्न सिद्ध कैसे करें यह प्रश्न लोगों के मन में बहुत बार उठता है, क्योंकि आज का मानव नवीनतम युग का मानव है, तथा हम अपनी प्राचीन सभ्यताओं तथा प्राचीन मान्यताओं से काफी दूर जा रहे हैं lहमें अपने बुजुर्गों द्वारा या अपने पूर्वजों द्वारा दिया गया ज्ञान काफी पुराना लगता है, तथा हमें वह सारे कर्मकांड निरर्थक लगते हैं, किंतु जब हम जिंदगी के कुछ आगे पराव में बढ़ते हैं, तब हमें हमारे बुजुर्गों द्वारा बनाई गई विभिन्न पद्धतियों की याद आती है।

विभिन्न मान्यताओं की याद आने लगती है क्योंकि भले ही हम अपने जड़ों से दूर भागे किंतु आपने देखा होगा कि जो डाल पेड़ से कट कर नीचे गिर जाती है, या किसी भी प्रकार से अलग हो जाती है, वह कभी भी जीवित नहीं रह पाती है lवह आगे का जीवन जीने में सक्षम नहीं हो पाती है, क्योंकि जो चीज है, उसे जड़ से प्राप्त हो रही थी वह चीजें अब उसे नहीं मिल रही है।

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इसी प्रकार हमारे पूर्वजों द्वारा प्राप्त कोई भी विद्या हो ज्ञान हो या परंपरा हो वह सारी चीजें हमारे अंदर एक जीवंत प्राण ऊर्जा को संचारित करने के लिए प्रदान की गई है, किंतु मूर्खता बस आज हम लोग इन सभी से दूर हो गए हैं, किंतु जब हमें किसी का वैज्ञानिक प्रमाण प्राप्त होता है, या किसी और देश के लोगों के द्वारा हमारी ही पूर्वजों के द्वारा बनाई गई मान्यताओं तथा परंपराओं को माने जाने लगता है, तब हमें लगता है, कि हम कहां आ गए हैं, हम कितना पीछे रह गए हैं, इसलिए हमारे जो पूर्वज कहा करते थे।

वह सही कहा करते थे उन्हीं की दी हुई सबसे उन्नत विद्या ज्योतिष विद्या में रत्न शास्त्र हमें हमारे दिन प्रतिदिन के जो समस्याएं आती रहती है lउनका समाधान इसके माध्यम से बताया गया है, तथा विभिन्न प्रकार का रत्नों का उपयोग कैसे करना है, यह भी उन्हीं के द्वारा बताया गया है, और आज भी इस पद्धति को लोग अपना कर अपना जीवन सफल एवं सुगम बना रहे हैं।

अक्सर यह देखने में आता है, कि लोग सुनी सुनाई बातों में आकर विभिन्न प्रकार के रत्न का उपरत्न को धारण कर लेते हैं, किंतु उन्हें सही विधि किसी चीज की भी नहीं रहती है lउन्हें सही विधि का ज्ञान नहीं होने की वजह से उसके लाभ से वंचित रह जाते हैं, जो लाभ उन्हें प्राप्त होना चाहिए था क्योंकि हर चीज की अपनी एक पद्धति होती है, आपको उस पद्धति को अपनाकर ही आपको मनवांछित परिणाम देखने को मिलते हैं, जैसे -आप दूध और चावल और गुड़ को पकाए बिना ही खीर प्राप्त नहीं कर सकते हैं, उसके लिए आपको ऊष्मा की आवश्यकता होगी, बिना उष्मा ऊर्जा के आप केवल एक बर्तन में दूध चावल और गुड़ आदि ले लेंगे तो उससे वह खीर नहीं बन जाएगा।

उसे धीमी आंच पर धीरे-धीरे पकाना पड़ता है, तब जाकर उसमें उबाल आता है, तथा और भी कुछ क्रियाएं करनी पड़ती हैl उसके पश्चात ही वह एक स्वादिष्ट खीर के रूप में बदलता है, और आपको खाने के लिए एक स्वादिष्ट खीर की प्राप्ति होती है।

इसी प्रकार केवल रत्न तब तक नहीं बनता है, जब आप उसकी शक्तियों को जागृत नहीं कर लेते हैं, उसके ऊर्जा को जागृत नहीं कर लेते हैं, तब तक वह एक केवल पत्थर का टुकड़ा है, जब तक आप उसे विभिन्न चरणों से गुजार कर उसमें प्राणशक्ति नहीं डाल लेते हैं, तब तक वह एक पत्थर का ही रूप रहेगा, अतः कुछ पद्धतियों को अपनाकर हम इसके ऊर्जाओ को जागृत कर सकते हैं, तथा उसका सर्वोत्तम लाभ अपने जीवन में पा सकते हैं, तथा अपनी कामयाबी की एक स्वर्णिम गाथा लिखने में सक्षम हो सकते हैं, तो आइए जानते हैं, कैसे हम पुखराज पत्थर को पुखराज रत्न में परिवर्तित कर अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं।

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सर्वप्रथम पहले आप निम्नलिखित में से कोई भी एक मंत्र को कंठस्थ करें lआप इसकी शुरुआत सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर ब्रह्म मुहूर्त में कर सकते हैं, इससे आपको त्वरित गति से लाभ मिलेगा मंत्र इस प्रकार से है-

  • ओम ग्राम ग्रीन ग्रोम स: गुरुवे: नमःll
  • ओम ब्रिम बृहस्पतए नमःll

जब आपको इन दोनों मंत्रों में से कोई भी कंठस्थ हो जाए तो उसके पश्चात किसी भी शुक्ल पक्ष के गुरूवार को सूर्य उदित होने के समय आप स्नान आदि से निवृत्त होकर इस रत्न को गंगाजल से धूल ने उसके पश्चात पंचामृत स्नान आदि इस पत्थर को करवाएं धूपबत्ती आदि कपूर गूगल से इसकी आरती उतारे उसके पश्चात मंदिर में इसे रखकर गुरु ग्रह के मंत्रों का जितना अधिक हो सके।

उतना अधिक जप करें या यदि संभव हो तो किसी विद्वान पंडित के माध्यम से भी आप इसे मंत्र उच्चारण करवा कर अभिमंत्रित कर सकते हैं, तब जाकर यह रत्न अपनी सारी शक्तियों के भेदन अवस्थाओं से गुजर कर अपनी सर्वोत्तम स्तर तक पहुंचेगा, उसके पश्चात आप इसे किसी मंदिर में ले जाएं यदि विष्णु मंदिर हो तो सबसे उत्तम होगा।

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वहां जाकर कुछ देर के लिए भगवान के चरणों में इसे रख दें उसके पश्चात भगवान जी का आशीर्वाद ले तथा पंडित जी का आशीर्वाद लें, एवं उन्हें उचित दान दक्षिणा आदि प्रदान करें, उसके पश्चात रत्न लेकर मन में अपनी इच्छा या मनवांछित कार्य संपन्न होने के लिए उस से प्रार्थना करें और तब उस प्रतिष्ठित की हुई अभिमंत्रित की हुई रत्न को आप धारण करें, इससे आप को बहुत अधिक लाभ प्राप्त होगा, किसी भी तरह से वर्जित चीजों का उपयोग करने से बचें मांस मदिरा जैसे चीजों से इस दिन दूर रहे,घर आकर अपने बड़े बुजुर्गों का सम्मान करें यदि हो सके तो उनके लिए कोई पीले रंग की मिठाई या कोई वस्तु उपहार स्वरूप अवश्य भेंट दें, राह में यदि कोई भूखा दिखे तो उसे भोजन अवश्य कराएं इससे यह रत्न के प्रभाव और अधिक आपको अनुकूल रूप से देखने को प्राप्त होगा और आपके जीवन की प्रगति की दौर शुरू हो जाएगी।

गुरु की कृपा सदैव आपके ऊपर बनी रहेगी, आजीवन उनका आशीर्वाद आप के ऊपर बना रहेगा, जिससे आप सफलताओं की सीढ़ियां चढ़ते जाएंगे।

अगर आप भी अभिमंत्रित किया हुआ पुखराज रत्न प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारे नवदुर्गा ज्योतिष केंद्र से पंडित जी द्वारा अभिमंत्रित किया हुआ पुखराज रत्न मात्र – 300₹ और 600₹ रत्ती मिल जायेगा जिसका आपको लैब सर्टिफिकेट और गारंटी के साथ में दिया जायेगा (Delevery Charges free) Call and WhatsApp on- 7568233021

 

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