सफेद पुखराज कब पहनना चाहिए – Safed Pukhraj Kab Pahanna Chahiye

सफेद पुखराज कब पहनना चाहिए – Safed Pukhraj Kab Pahanna Chahiye

 

सफेद पुखराज कब पहनना चाहिए –

सफेद पुखराज कब पहनना चाहिए- सफेद पुखराज हो या हीरा यह दोनों ही रत्न शुक्र ग्रह के शक्तियों को निरूपित करने वाले रत्न होते हैंl शुक्र ग्रह जिन्हें सौंदर्य एवं ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता हैl जल तत्व प्रधान, श्वेत वर्ण ,सोना ,चांदी चर प्रकृति ,राज गुनी ,विलासी, तेजस्वी स्वरूप, वाणी से मधुर स्वभाव से चतुर, ऋतु ,वस्त्र ,आभूषण, सुगंधित पदार्थ ,कलात्मक कलाएं, मां लक्ष्मी की उपासना मां काली की उपासना ,बसंत ऋतु ,विवाह, संगीत ,नृत्य ,काव्य -रचना ,गीत , मनोरंजन आग्नेय दिशा आदि का कारक माना जाता हैl स्त्री वर्ग में जनन अंगों के कारक शुक्र ग्रह को ही माना जाता हैl शरीर के अंगों में शुक्र ग्रह जननांगों के कारक होते हैंl मां काली तथा मां लक्ष्मी तथा गुरु शुक्राचार्य का संबंध भी शुक्र ग्रह से माना जाता हैl शुक्र ग्रह के इष्ट देवता भगवान इंद्र को माना जाता है, तथा इनका सवारी अश्व होता हैl शुक्र ग्रह को सुंदरता की देवी फिर भी अलंकृत किया जाता है।

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ज्योतिष विद्वानों के अनुसार जब कभी किसी की कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति अच्छी नहीं होती है। शुक्र ग्रह की स्थिति पूरी तरह से निष्क्रिय होती है, या शुक्र ग्रह पूरी तरह से सुप्त अवस्था में होता है, जिससे जातक विभिन्न प्रकार के शुक्र ग्रह से संबंधित लाभों से वंचित हो जाता है lकभी-कभी इसके इतने अधिक दुष्प्रभाव जातक को झेलने पर जाते हैं, जिससे उसकी स्थिति में बहुत अधिक नकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलता है, ऐसी स्थिति में जातकों को इस अद्भुत दिव्य रत्न को धारण करने की सलाह दी जाती है।

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ज्योतिष विद्वानों का मन होता है, कि यह रत्न शुक्र ग्रह से संबंधित होता है, इसलिए वृषभ तथा तुला लग्न के जातकों के द्वारा यदि धारण किया जाए तो उन्हें बहुत अधिक लाभ प्राप्त हो सकता है, जब शुक्र एवं बृहस्पति की युक्ति होती है, या फिर दोनों एक दूसरे के ऊपर अच्छी दृष्टि रखते हैं, तब भी इस रत्न को धारण करना सबसे उपयुक्त माना जाता है।

वृषभ राशि के जातकों के राशि का स्वामी स्वयं शुक्र होते हैं, ऐसी स्थिति में यह रत्न धारण करना जातकों के लिए अत्यंत शुभ फलदाई होता हैl मिथुन राशि वाले जातकों के लिए भी यह रत्न धारण किया जा सकता है, क्योंकि शुक्र एवं बुध ग्रह के साथ मित्रता का भाव रखते हैं l शुक्र ग्रह कलात्मकता के स्वामी होते हैं, तथा बुध ग्रह विद्या के स्वामी होते हैं, बुध हमारी वाली को भी नियंत्रित करते हैं, हमारे संचार तंत्र को भी नियंत्रित करते हैं, अतः बुध की वाणी तथा शुक्र की कलात्मकता जातक को वाणी में कलात्मकता के गुण प्रदान करेगा इसके साथ साथ विद्या अध्ययन संबंधित चीजों को भी जातक आराम से या बड़ी आसानी से जटिल विषयों पर अपनी पकड़ बना पाता हैl दोनों एक दूसरे के साथ मिलकर लक्ष्मी नारायण योग का भी निर्माण करते हैंl जिससे जातक के जीवन में मां लक्ष्मी की कृपा से कभी भी वंचित नहीं रहता है।

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इसके साथ- साथ उसके वाणी में अद्भुत कौशल होता है, तथा उसकी ज्योतिष विद्या पर भी पकड़ बहुत अच्छी होती हैl गणित में बहुत अधिक माहिर होता है lपत्रकारिता हो या कविता लेखन इन सभी में उत्तम लेखनी प्रस्तुत करने की क्षमता रखता हैl कन्या राशि के जातकों के स्वामी ग्रह बुध होते हैं, तथा बुध एवं शुक्र की मित्रता रहती है lयही कारण है, कि कन्या राशि के लोग भी बिना किसी परेशानी के यह रत्न धारण कर सकते हैं, जिससे उनका भाग्य तो प्रबल होगा ही एवं जीवन के विभिन्न आयामों पर अप्रत्याशित लाभ भी देखने को मिल सकते हैंl यह रत्न आपकी तरक्की के सारे मार्ग को खोल देगाl तुला राशि का स्वयं राशि स्वामी शुक्र ग्रह होते हैंl ऐसी स्थिति में इन लोगों के द्वारा सफेद पुखराज धारण करना अत्यंत लाभदायक सिद्ध हो सकता है तथा यह उन्हें सफलता के नए आयाम तक ले जा सकता है।

शनि की स्थिति को मजबूत करने के लिए भी कई बार सफेद पुखराज रत्न धारण किया जाता है, एवं मकर राशि का स्वयं स्वामी शनि होते हैंl अतः ऐसी स्थिति में भी इसे धारण किया जा सकता है, जिससे शनि ग्रह जो कि भाग्य विधाता है lउनकी कृपा तो प्राप्त होगी ही इसके साथ साथ कलात्मक गुणों के स्वामी शुक्र ग्रह की भी कृपा प्राप्त होगीl जिससे जातक का एक और कर्म एवं भाग्य की प्रधानता मजबूत होगी तथा दूसरी ओर नवीनतम एवं अद्भुत कौशलों से भी वह परिपूर्ण होगाl ऐसी ही स्थिति कुंभ राशि वाले लोगों के लिए भी बनती है, क्योंकि कुंभ राशि का भी स्वामी शनि होते हैं, तथा शनि ग्रह की स्थिति शुक्र ग्रह के साथ अच्छी रहती हैl दोनों एक दूसरे के प्रति उचित एवं आदर्श दृष्टि रखते हैं lयही कारण है, कि यदि कुंभ राशि वाले जातक सफेद पुखराज धारण करते हैं, तो दोनों ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है, एवं उन्हें विभिन्न प्रकार से लाभ प्राप्त होता है।

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1.शुक्र ग्रह जब दूषित होता है, तब जातक अनेक परेशानियां देखने को मिलती है, सबसे पहले प्रभाव उसके बाहरी शरीर पर पड़ना शुरू हो जाता है, वह किसी न किसी प्रकार से त्वचा संबंधित रोगों से ग्रसित होने लगता हैl जिससे उसकी खूबसूरती कम जाती हैl उसकी सुंदरता पूरी तरह से नष्ट होने लगती है, ऐसे में शुक्र की मजबूती के लिए यह रत्न धारण करना उपयुक्त माना जाता है।

2. अशुभ शुक्र कार जब दुष्प्रभाव पड़ता हैl तब जातक के जीवन में धन संबंधित परेशानियां आने लगती है lधन का अभाव उनके जीवन में दिनों दिन बढ़ता चला जाता है, स्थिति इतनी अधिक दयनीय हो जाती है, कि जातक कर्ज में डूबने लगता हैl जातक की जमा पूंजी भी पूरी तरह से खत्म होने लगती है lजातक कंगाली की कगार पर पहुंच जाता है lउसके घर में दरिद्रता का वास होने लगता हैl दरिद्रता इस कदर हावी होता है, कि धन टिकता ही नहीं है।

मां लक्ष्मी की कृपा होती ही नहीं हैl उसके जीवन में विभिन्न प्रकार के सांसारिक एवं भौतिक सुखों का अभाव होना शुरू हो जाता है lपैसे से संबंधित किसी न किसी प्रकार की परेशानी हर वक्त लगी रहती हैl ऐसी स्थिति में शुक्र ग्रह को बल प्रदान करने के लिए तथा उसकी अशुभता को दूर करने के लिए सफेद पुखराज रत्न धारण करना बहुत उत्तम माना जाता है lइससे जातक की आर्थिक स्थिति में सुधार होना शुरू होता है, तथा दरिद्रता का नाश होता है, एवं जातक धीरे-धीरे कर्ज से बाहर निकलने लगता है lकर्ज मुक्त होने में यह रत्न जातक की बहुत मदद करता है lइसके साथ साथ आए के नवीनतम स्रोत उसकी आर्थिक स्थिति को दिनोंदिन दुरुस्त बनाने लगते हैं।

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