दो मुखी रुद्राक्ष का मंत्र – Do Mukhi Rudraksha Ka Mantra

दो मुखी रुद्राक्ष का मंत्र – Do Mukhi Rudraksha Ka Mantra

 

 दो मुखी रुद्राक्ष का मंत्र – Do Mukhi

 Rudraksha Ka Mantra

दो मुखी रुद्राक्ष का मंत्र – (2 mukhi rudraksha benefits in hindi) दो मुखी रुद्राक्ष का मंत्र जाप करके कई प्रकार की सिद्धियां एवं सांसारिक सुख प्राप्त किया जा सकता है lमंत्र भले ही देखने में दो अक्षर या तीन अक्षर या उससे अधिक वर्तनी का दिखाई पड़े किंतु मंत्रों में जो शक्तियां होती हैं, जो स्पंदन होता हैl वह हमारे कई ऋषि-मुनियों के द्वारा घोर तप के बाद प्राप्त हुआ है, इसलिए मंत्रों की एक विशिष्ट संख्या तक जाप किया जाता है, तो वह जागृत हो जाता है, ऐसे तो भगवान को यदि कोई एक बार भी दिल से पुकारे या श्रद्धा से पुकारे तो भगवान किसी न किसी रूप में किसी न किसी भेश में उस उक्त व्यक्ति को दर्शन अवश्य देते हैंl उसके इर्द-गिर्द अवश्य अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैंl यह हमारा केवल विश्वास हमारी आंतरिक इच्छा शक्ति, हमारे आत्मबोध, हमारी उन निरंकार प्रभु पर निष्ठा ,ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा तय करती है, कि ईश्वर की कृपा की प्राप्ति के योग कब बनेंगे।

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ईश्वर तो कण कण में वास करते हैं lहमारे शरीर में भी उनका अस्तित्व है lजगत के जितने भी प्राणी है, सभी में उनका अस्तित्व है, किंतु जब तक ज्ञान चक्षु के द्वार नहीं खुलते हैं, तब तक मनुष्य या कोई और जीव इस सांसारिक भटकांव में भटकता रहता हैl समय के चक्र में उलझता रहता है, जब उसे ईश्वरीय शक्तियों का बोध होता है, तब उसके मोक्ष प्राप्ति के योग बनने लगते हैंl हमारे ऋषि-मुनियों के द्वारा इस बात को अच्छी तरह से समझा गया था lअच्छी तरह से जाना गया थाl तभी तो उनके द्वारा इतने अद्भुत मंत्रों की रचना की गई है, जिससे हमारे मन की अनभिज्ञता दूर हो सकेl विभिन्न चीजों के प्रति हमारी सोच, हमारे विचार बदल सके तथा ब्रह्मांड में विचरण करने वाली कई अलौकिक शक्तियों का आशीर्वाद हमें प्राप्त हो सके।

मंत्रों को जब प्राण शक्ति के साथ जोड़ दिया जाता है, तथा उपयुक्त मनके के साथ जब जाप किया जाता है, तब उसकी शक्तियां और अधिक फलित होने लगती हैंl उनकी शक्तियां और अधिक व्यापक रूप से बढ़ने लगती है, इसलिए प्रकृति के द्वारा प्रदान किए गएl विभिन्न प्रकार के संसाधनों में मनका का महत्व अध्यात्म दृष्टिकोण से बहुत अधिक माना जाता है lउन सभी मनको में से सबसे विशिष्ट मनका रुद्राक्ष को माना जाता है, जो स्वयं सृष्टि के आदि अंत करने वाले भोलेनाथ रुद्र के अवतार के द्वारा उनके अश्रु धारा से उत्सर्जित किया गया हैl विभिन्न प्रकार के रुद्राक्ष हमें रुद्राक्ष वृक्ष के द्वारा प्राप्त होता है।

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उनमें व्याप्त रेखाएं उनके एक मुखी, दो मुखिया ,तीन मुखी या चार दुखी होने का प्रमाण होता है lउन सभी प्रकार के मनको में से दो मुखी रुद्राक्ष (2 mukhi rudraksha mantra kya hai) स्वयं माता पार्वती तथा भोलेनाथ का अर्धनारीश्वर स्वरूप का प्रतिमान माना जाता है lस्वयं भगवान नारायण एवं उनकी नारायणी माता लक्ष्मी का संयुक्त रूप माना जाता हैl दो मुखी रुद्राक्ष में माता लक्ष्मी तथा माता सरस्वती की संयुक्त ऊर्जा शक्ति का स्वरूप विद्यमान हैl स्वयं महाकाल एवं महाकाली का रूप माना जाता है, जिसे धारण करना या उसके द्वारा कोई भी मंत्र का जप करना बहुत ही कल्याणकारी सिद्ध होता हैl

दो मुखी रुद्राक्ष (2 mukhi rudraksha mantra kya hota) धारण करना हर किसी आयु वर्ग के लोगों के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होता हैl ऐसे लोग जो चंद्र के द्वारा पीड़ित है lउसके दृष्ट होने के कारण अनेक प्रकार के समस्याओं से ग्रसित है, तो ऐसे में यह मनका चंद्र की स्थिति को मजबूत बनाता है, जिससे उसके द्वारा उत्पन्न किए गए किसी भी प्रकार के नकारात्मक प्रभाव पूरी तरह से नष्ट होने लगते हैंl

दो मुखी रुद्राक्ष (2 mukhi rudraksha kaisa hota hai) पापी ग्रह राहु के द्वारा दिए जा रहे भ्रामक परिस्थितियों को पूर्ण रूप से हटाने में सक्षम होता है, किसी भी प्रकार के भ्रम की स्थिति या मिथ्या में यह उस व्यक्ति विशेष को फंसने नहीं देता है, जिसके द्वारा यह अद्वितीय मनका धारण किया गया है lराहु ग्रह जो केवल भ्रम में डालने वाला ग्रह माना जाता है lउस की परिकल्पनाए केवल सपने तक ही सीमित होती होती हैl उसकी परिकल्पना केवल विचारों तक ही सीमित रहती हैl उसे कभी भी एक आधार प्राप्त नहीं हो पाता है lवह वास्तविकता से व्यक्ति विशेष को कोसों दूर ले जाता है, एवं आकस्मिक प्रहार से उसे क्षत-विक्षत कर देता है, ऐसी परिस्थिति से बचने के लिए यह मन का अवश्य धारण करना चाहिएl इससे व्यक्ति की सूझबूझ बढ़ती है तथा किसी भी प्रकार के अप्रासंगिक तथ्य में अपना जीवन, अपना समय, अपना विचार ,अपना भाव किसी भी तरह का वह त्याग नहीं करता है।

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दो मुखी रुद्राक्ष (2 mukhi rudraksha ke fayde) धारण करने से ऐसे लोगों को काफी लाभ पहुंचता है, जो स्वभाव से बहुत अधिक निष्क्रिय रहते हैं lआलस एवं सुस्ती के कारण उनके कार्य कभी भी सही समय पर उपयुक्त समय पर पूर्ण नहीं होते हैं lऐसे लोगों को दो मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिएl इससे उनकी ऊर्जा चक्र की शुद्धि होती है, एवं उनका शक्ति बल में वृद्धि होता है।

 

 

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इसे धारण करने से माता सरस्वती की कृपा बनी रहती है lज्ञान की अधिष्ठात्री देवी का आशीर्वाद जिस व्यक्ति को प्राप्त होता हैl उसके ज्ञान चक्षु खुल जाते हैं, तथा ज्ञान प्राप्ति के सारे मार्ग प्रशस्त हो जाते हैंl विभिन्न प्रकार की कौशलों कलाओं पर अपना महारत हासिल करता है lविद्यार्थी वर्ग के लिए यह बहुत ही उत्तम माना जाता है, इससे उनके मानसिक चेतना में वृद्धि होती है, इसके साथ ही उनकी स्मृति मजबूत होती है, एकाग्रता में प्रखरता आती है।

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दो मुखी रुद्राक्ष (2 mukhi rudraksha dharan karne ke fayde) भगवान भोलेनाथ तथा माता पार्वती का संयुक्त रूप माना जाता है, तथा माता लक्ष्मी एवं भगवान नारायण का दिव्य स्वरूप भी दो मुखी रुद्राक्ष को माना जाता हैl दो मुखी रुद्राक्ष का प्रतिनिधित्व चंद्रमा के द्वारा किया जाता है, जिसको धारण करने से ना केवल चंद्र ग्रह की पीड़ा समाप्त होती है, बल्कि राहु के द्वारा उत्पन्न की जा रही किसी भी प्रकार की दुविधा को भी यह दूर करने में सक्षम होता हैl दो मुखी रुद्राक्ष मानसिक शांति एवं आत्म उन्नति के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है lनिम्नलिखित मंत्र का जप दो मुखी रुद्राक्ष से किया जाता है-

ll ॐ ह्रीं नम: ll

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