14 मुखी रुद्राक्ष की पहचान – 14 Mukhi Rudraksha Ki Pahchan

14 मुखी रुद्राक्ष की पहचान – 14 Mukhi Rudraksha Ki Pahchan

 

 14 मुखी रुद्राक्ष की पहचान – 14 Mukhi

 Rudraksha Ki Pahchan

14 मुखी रुद्राक्ष की पहचान – 14 मुखी रुद्राक्ष की पहचान कैसी होनी चाहिए उसका रूप गुण कैसी होनी चाहिएl यह अवधारणा अवश्य हर किसी के मन में उठती ही है, क्योंकि यह मनका बहुत ही दुर्लभ होता है तथा किसी भी मुख्य रुद्राक्ष को प्राप्त करना इतना आसान नहीं होता है lअनेक जटिल परिस्थितियों से गुजरने के बाद ही यह दिव्य स्वरूप संसाधन किसी भी व्यक्ति को प्राप्त होता है, किंतु आधुनिकता की युग में यह फर्क करना बहुत ही मुश्किल हो गया है, कि कौन सा रुद्राक्ष असली है तथा कौन सा रुद्राक्ष (14 mukhi rudraksha ki pehchan in hindi) नकली हैl आज आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की देन से भले ही मानव अनेक ग्रहों के बारे में कई गुप्त बातों को जगजाहिर कर रहा है।

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आकाशगंगा के बारे में विभिन्न प्रकार की जानकारियां प्रदान कर रहा है, किंतु कभी-कभी किसी किसी चीज का दुरुपयोग भी होने लगता है, क्योंकि मानव की प्रवृत्ति है, कि उसका लालच उसके विवेक को जल्द ही छीन्न कर देता है, ऐसे में वह कैसे यह अद्वितीय संसाधन को छोड़ सकता है lअतः कुशल मशीनें कारीगरी के द्वारा विभिन्न प्रकार के लकड़ियों का उपयोग नकली रुद्राक्ष (14 mukhi rudraksha ki pehchan kya hai) बनाने में उपयोग में लाया जाने लगा, जिसके कारण मन में यह संशय उठना स्वभाविक है, कि कैसे यह विश्वास किया जाए कि कोई भी मनका जो रुद्राक्ष की तरह प्रतिरूप रखता है lउसके समतुल्य दिखाई पड़ रहा हैl वह असल में एक प्राकृतिक रूप से निर्मित रुद्राक्ष हैl निम्नलिखित पहलुओं की जांच के आधार पर यह जाना जा सकता है, कि उक्त रुद्राक्ष कृतिम है या असली है-

1. 14 मुखी रुद्राक्ष (14 mukhi rudraksha ki pehchan kaise karen) पर व्याप्त प्राकृतिक रूप से जो भी रेखाएं होती है, वह कभी भी विकृत नहीं होती हैl एक शिखर से दूसरे शिखर तक बिना किसी अवरोध के यह रेखाएं मिलती है lइनमें किसी भी तरह की दूसरी रेखाएं नहीं देखने को मिलती हैl प्रत्येक मुख के लिए पर्याप्त स्थल होता है, तथा रेखाओं को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता हैl यदि किसी और रुद्राक्ष को 14 मुखी रुद्राक्ष बनाने का प्रयास किया जा रहा है, तो ऐसी अवस्था में आपको उसके ऊपर मशीन द्वारा की गई किसी भी तरह की यांत्रिकी कटाई आदि के निशान अवश्य दिखाई पड़ेंगेl भले ही कोई कितना भी कुशल पूर्वक क्यों न कटाई करें किंतु मशीन की यह खासियत होती है, कि अपने यंत्रों का निशान वह अवश्य छोड़ देता हैl अतः इसके माध्यम से आप जान सकते हैं, कि आपके द्वारा धारण किया जाने वाला रुद्राक्ष सही है, या नकली है।

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2. असली रुद्राक्ष (14 mukhi rudraksha ko kaise pehchane) की स्पंदन शक्ति बहुत ही अधिक होती हैl इसमें ऐसे गुण मौजूद होते हैं, जो सात्विक एवं नकारात्मक आयुक्त चीजों को इसके माध्यम से आसानी से परखा जा सकता हैl इसके लिए सबसे पहले दो पात्रों में जलने एक में पूरी तरह से स्वच्छ जल बड़े तथा दूसरे पात्र में गंदा पानी या किसी तरह का हानिकारक पदार्थ मिलाकर दूसरे पदार्थ में रख दें, उसके बाद रुद्राक्ष को किसी धागे की सहायता से बारी-बारी से पहले पात्र तथा उसके बाद दूसरे पात्र के ऊपर बिना जल को छुए हुए रुद्राक्ष को लटका कर देखेंl आपको ऐसे आश्चर्यजनक परिणाम दिखेगा, जिससे आप अपने नेत्रों पर विश्वास नहीं कर पाएंगे जिस पात्र में आपने स्वच्छ जल रखा है lउसके ऊपर रुद्राक्ष की कोई भी प्रतिक्रिया नहीं होगीl यदि उसमें किसी तरह की प्रतिक्रिया होती भी है, तो वह इस प्रकार से देखने को मिलेगी।

यदि पात्र का जल स्वच्छ होगा। सात्विक होगा तो रुद्राक्ष की दिशा घड़ी की सीधी दिशा की ओर घूमता हुआ प्रतीत होगा lजबकि यदि जल में किसी भी तरह की अशुद्धि व्याप्त होगी या जल किसी तरह के जहरीले पदार्थ से मिश्रित होगा तो ऐसी स्थिति में रुद्राक्ष की दिशा घड़ी की दिशा के उलटी दिशा में घूमना शुरू हो जाता हैl यह एक बहुत ही उत्तम एवं उत्कृष्ट माध्यम है, जिसके द्वारा हम यह स्पष्ट रूप से जान सकते हैं, कि हमारे द्वारा उपयोग में लाने जाने वाला रुद्राक्ष असली है, या नकली है, क्योंकि रुद्राक्ष (14 mukhi rudraksha ke fayde) किसी भी मुख क्यों ना हो उस में यह गुण जरूर देखने को मिलता हैl इसी पद्धति का प्रयोग सदियों से हमारे पूजनीय हमारे आदरणीय तपस्वी हो अध्यात्म क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों साधु-संतों के द्वारा किया जाता रहा है, क्योंकि वह लोग किसी खास पद पर ही गमन करते हैं, तथा जन कल्याण के लिए एवं प्रभु भक्ति में वे लोग एक स्थान से दूसरे स्थान तक गमन करते ही रहते हैं।

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ऐसी स्थिति में उन्हें कई ऐसे स्थान पर भी रुकना पड़ता है lजहां आम मानव की जनसंख्या नहीं रहती है जंगलों से गुजरना पड़ता हैl ऐसे में उन्हें पीने के पानी की कमी यदि महसूस होती है, तो उक्त स्थान पर पर्याप्त जलाशय काजल ही पीने के लिए प्रयोग में लाते हैंl अतः यदि उनके पास रुद्राक्ष (14 mukhi rudraksha ka prabhav) का शुद्ध रूप मौजूद रहता है, तो उस के माध्यम से वे लोग आसानी से जान सकते हैं, कि पानी पीने योग्य है, या नहीं है।

 

 

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3. यदि रुद्राक्ष (14 mukhi rudraksha ke labh) असली होता है, तब वह विभिन्न प्रकार के भूमि में भी विद्यमान किसी भी तरह की त्रुटि को आसानी से उन पहचान सकता हैl इसके लिए दो तरह की भूमि का चयन करें ।1 जहां का आसपास का वातावरण सकारात्मक शक्तियों से पूर्ण हो तथा दूसरी भूमि का चयन करें जहां नकारात्मकता के कई संसाधन मौजूद हैंl उसके बाद अब जिस भी रुद्राक्ष को धारण करना चाहते हैंl उसे किसी लाल धागे के माध्यम से पहले पहली भूमि पर लटका कर देखें किंतु इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि आप जब रुद्राक्ष को लटका कर रखेंगे तब वह भूल कर भी उस जमीन से स्पर्श नहीं करना चाहिएl उसके बाद आप देखेंगे कि सकारात्मकता से परिपूर्ण स्थान पर उसमें कोई खास प्रभाव नहीं दिख रहा है।

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यदि प्रभाव दिखता भी है, तो वह आपको आश्चर्य में डाल सकता हैl वह बिल्कुल घड़ी की सही दिशा में घूमने लगेगाl जब की जब आप इसे नकारात्मकता से युक्त स्थल पर इसी प्रकार से रखेंगे lतो आप पाएंगे कि रुद्राक्ष स्वता ही अपनी दिशा में परिवर्तन करने लगता हैl वह बिल्कुल घड़ी की उलटी दिशा में घूमने लगता है, जिसका तात्पर्य यह है, कि वहां की शक्तियां वाह का संसाधन किसी भी तरह से जन कल्याण के लिए उपयुक्त नहीं है, और आप जिस रुद्राक्ष को धारण करने जा रहे हैं, या जिस की कृपा प्राप्त करने जा रहे हैंl वह रुद्राक्ष (14 mukhi rudraksha dharan karne ke fayde) पूरी तरह से शुद्ध है, पूरी तरह से सात्विक है, पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से निर्मित हैl

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