तीन मुखी रुद्राक्ष का महत्व – Tin Mukhi Rudraksha Ka Mahatva

तीन मुखी रुद्राक्ष का महत्व – Tin Mukhi Rudraksha Ka Mahatva

 

तीन मुखी रुद्राक्ष का महत्व-

रुद्राक्ष जिसकी उत्पत्ति भगवान भोलेनाथ के द्वारा जन कल्याण के लिए किया गया हैl इसमें अनेक ऐसी शक्तियां होती है, जो मानव जीवन के समस्त संकटों को पूरी तरह से दूर करने में सक्षम होती है, एवं नकारात्मक शक्तियों से किसी को भी सुरक्षा प्रदान करती हैl रुद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से बनी हुई धारियां इनके मुख का निर्धारण करती हैंl ऐसे ही किसी रुद्राक्ष में यदि तीनधारिया रहती है, तो उसे तीन मुखी रुद्राक्ष कहा जाता है, जो तीनों देवियां माता सरस्वती माता लक्ष्मी तथा माता काली को निरूपित करती है, ऐसा माना जाता है, कि इसमें तीनो लोको के अद्वितीय गुणो से यह परिपूर्ण होता है, इसमें त्रिदेव की शक्तियां भी समाहित होती है, इसलिए भी इसकी उपयोगिता बहुत अधिक बढ़ जाती है।

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तीन मुखी रुद्राक्ष का महत्व-

1. तीन मुखी रुद्राक्ष जिस भी व्यक्ति विशेष के द्वारा धारण किया जाता है lउसके आत्मविश्वास में गजब की वृद्धि होती हैl उसके व्यवहार में बहुत ही सकारात्मक रूप से परिवर्तन देखने को मिलता हैl ऐसे लोग जो दब्बू किस्म के होते हैं, तथा अपने विचारों को अच्छे से किसी के समक्ष रख नहीं पाते हैं, एवं कई बार अच्छी अवसर उनके हाथों से उनके आत्मविश्वास की कमी के कारण निकल जाता है, तो उन्हें तीन मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए, इससे उन्हें काफी लाभ होता है, यह उन्हें विविध क्षेत्रों में चमत्कारिक रूप से लाभ प्रदान करता है।

2. विभिन्न पांच तत्वों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण तत्व अग्नि तत्व की प्रधानता होती है, यही कारण है, कि हमारे द्वारा जब भी किसी भी प्रकार का धार्मिक कर्मकांड किया जाता है, या किसी भी प्रकार की पूजा अर्चना की जाती है, या ध्यान आदि लगाया जाता है, तो उसमें अग्नि की महत्ता बहुत अधिक बढ़ जाती है, बिना अग्नि के किसी भी प्रकार से वातावरण की शुद्धि नहीं कर सकते हैं, तथा ऐसा माना जाता है, कि यज्ञ की अग्नि कुंड में जो भी चीजें हमारे द्वारा आहुति दी जाती है, वह अग्नि के माध्यम से उठने वाले लपटों के द्वारा उस विशिष्ट देवी देवता को प्राप्त होता है।

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हमारे द्वारा भेजा गया कोई भी संदेश या कोई भी पावन पूजन उक्त उन देवी देवता को अग्नि के माध्यम से ही प्राप्त होता है, क्योंकि अग्नि किसी भी प्रकार के नकारात्मकता को नष्ट करने की क्षमता रखता हैl यह हमारे नकारात्मक प्रारब्धो को पूरी तरह से नष्ट करने की क्षमता रखता हैl अतः ऐसे लोग जो नकारात्मकता के प्रभाव में है, या नकारात्मक चीजों से ग्रसित हैl उन्हें तीन मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए lयह उनके शरीर में अग्नि तत्व की प्रधानता को विशेष रूप से बढ़ा देता है, जिससे किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक विकार जो नकारात्मक चीजों के द्वारा उत्पन्न किया जा रहा हैl उन सभी को यह पूरी तरह से नष्ट कर देता हैl

3.तीन मुखी रुद्राक्ष किसी भी व्यक्ति विशेष के आभामंडल एवं कांति को बहुत ही प्रभावी रूप से परिवर्तन करती है, जिससे व्यक्ति का आभामंडल काफी चमकदार एवं तेज युक्त होता है lचेहरे की कांति बहुत ही सुंदर एवं चमत्कारिक होती है।

4. इसे धारण करने से व्यक्ति बहुत ही साहसी एवं शारीरिक तथा मानसिक रूप से बलिष्ट बनता हैl यह शरीर के विभिन्न विकारों को दूर करने की क्षमता रखता है।

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5. ऐसे लोग जो विद्या प्राप्ति के लिए कई प्रकार से प्रयास कर रहे हैं lवह लोग विभिन्न चीजों को ठीक ढंग से समझने में अपनी पूरी मानसिक क्षमता का उपयोग कर रहे हैं, फिर भी पठन-पाठन संबंधित चीजों में उन्हें उतनी सफलता की प्राप्ति नहीं हो पा रही है, जितना होना चाहिए या ऐसे लोग जिनमें आलस्य एवं सुस्ती बहुत अधिक प्रभावी होती है, जिसके कारण उनके कई कार्य भविष्य की चाल पर निर्भर होती है lवर्तमान के परिपेक्ष्य में उनके द्वारा ना के बराबर कर्म किया जाता है, जिससे उनका भविष्य अंधकार में होता हैl सपने तो बहुत बड़े-बड़े देखते हैं, किंतु उनके क्रियान्वयन के समय मानसिक तथा शारीरिक रूप से खुद को अस्वस्थ समझने लगते हैंl उनकी ऊर्जा शक्ति की संरचना बहुत ही विकृत होती है।

जिसकी वजह से अपने लक्ष्यों से वे भटकाव जैसी स्थिति में फंस जाते हैंl चाह कर भी गतिमान रूप से अपने सुनहरे भविष्य की परिकल्पना को सवारने के लिए वर्तमान में उनके द्वारा पर्याप्त कर्म नहीं किया जाता है, जिससे उनकी असफलता के संभावनाएं बहुत अधिक बढ़ जाती है, ऐसे में तीन मुखी रुद्राक्ष उनके कई नकारात्मक पहलुओं को पूरी तरह से ठीक करने की क्षमता रखता है lइस में विद्यमान कई जागृत शक्तियां उनके मन मस्तिष्क को उनके लक्ष्यों के प्रति केंद्रित करती है, जिससे उनके द्वारा अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उपयुक्त उद्दीपन किया जाता हैl पठन-पाठन संबंधित चीजों में रूचि उत्पन्न होती हैl विविध चीजों के प्रति उनका दृष्टिकोण बदलता है, और यह दृष्टिकोण पूरी तरह से उनके अनुकूल होता है, जो उन्हें वर्तमान एवं भविष्य में भिन्न-भिन्न प्रकार से लाभ प्रदान करता है।

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6. तीन मुखी रुद्राक्ष में विद्युत चुंबकीय तत्व की काफी अधिक प्रधानता रहती है, तथा इसमें औद्योगिक गुणों की भरमार होती है, जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों में काफी लाभप्रद होती हैl रक्त से संबंधित विकार हो या रक्तचाप से संबंधित विकार या हृदय से संबंधित कोई रोग हो या हैजा या कोई स्त्री को मासिक धर्म से संबंधित रोग हो गुर्दा बवासीर चेचक आदि विभिन्न बीमारियों में यह बहुत ही लाभप्रद होता है, इससे किसी भी व्यक्ति विशेष को चमत्कारिक रूप से लाभ प्राप्त होता हैl जटिल से जटिल स्वास्थ्य समस्याओं में भी यह कारगर होता है, यह एक औषधि के रूप में प्राचीन काल से ही प्रयोग में लाया जाता है।

7. तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करने से दुख दरिद्रता का नाश होता है, तथा किसी भी व्यक्ति विशेष के जीवन में कभी भी कर्ज से संबंधित परेशानियां उसके जीवन में दस्तक नहीं देती हैं lकभी भी ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती है, जब उसे किसी भी तरीके से कर्ज लेने की आवश्यकता पड़े, इस रत्न के प्रभाव से उसकी आर्थिक संरचना बहुत ही उत्तम रहती है।

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